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ट्रेन रद्द होने पर गुस्साए बिहार के श्रमिकों की पुलिस से झड़प, पथराव के बाद करना पड़ा लाठीचार्ज


  • मंडी गोविंदगढ़ में बिहार के लिए स्पेशल ट्रेन की घोषणा होने के बाद दो दिन से जमा थे श्रमिक
  • सोमवार सुबह स्टेशन जाने के लिए बस नहीं आई तो प्रदर्शन पर उतरे, पुलिस पर किया पथराव
  • लाठीचार्ज की जवाबी कार्रवाई में कई मजदूर घायल, भारी पुलिस बल के साथ तहसीलदार मौके पर

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 02:03 PM IST

मंडी गोबिंदगढ़. मंडी गोविंदगढ़ में सोमवार सुबह पुलिस और अपने-अपने राज्यों में जाने के लिए पहुंचे श्रमिकों के बीच टकराव हो गया। ट्रेन रद्द होने की सूचना पर भड़के श्रमिकों ने नेशनल हाईवे के साथ लिंक रोड पर जाम लगा दिया और पुलिस पर पथराव किया। इस दौरान पुलिस के कई वाहनों के शीशे टूट गए। श्रमिकों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसमें कई श्रमिक घायल हुए।   

इसके पहले बस भी नहीं आई थी

मिली जानकारी के अनुसार बिहार के लिए स्पेशल ट्रेन चलने की घोषणा के बाद दो दिन से कस्बे में काफी संख्या में श्रमिक परिवारों के साथ जमा थे। सोमवार सुबह वो रेलवे स्टेशन जाने के लिए बसों का इंतजार कर रहे थे। दो घंटे के इंतजार के बाद भी जब बस नहीं आई तो श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। इसी दौरान किसी की भीड़ में से आवाज आई कि ट्रेन रद्द हो गई है। इस पर श्रमिक और ज्यादा भड़क गए। 

माहौल तनावभरा
पुलिस उन्हें समझाने के लिए पहुंची, लेकिन रेलवे स्टेशन नहीं पहुंचने से निराश श्रमिकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कई वाहनों की शीशे टूट गए। श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन देखकर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। मौके पर भारी पुलिस तैनात है, वहीं तहसीलदार खुद पहुंचे हुए हैं।

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अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बिल पेश, इसमें यूएस में पढ़े विदेशी कामगारों को तरजीह देने का प्रस्ताव


  • एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ही ज्यादा होते हैं
  • बिल में कहा गया है कि एच-1बी धारक को नियुक्ति देने पर अमेरिकी वर्कर्स पर इसका उल्टा प्रभाव नहीं पड़ेगा
  • सीनेटर चक ग्रेसली ने कहा- इसका मकसद अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और बेहतर सैलरी सुनिश्चित करना

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 02:51 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एच-1बी वीजा कानूनों में बदलाव को लेकर बिल पेश किया गया है। इसमें अमेरिका में पढ़े विदेशी टेक प्रोफेशनल्स को तरजीह देने की बात कही गई है। बिल का मकसद अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और बेहतर सैलरी सुनिश्चित करना है। एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ही ज्यादा होते हैं।

अगर बिल, कानून का रूप लेता है तो यह पहली बार होगा कि अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस एच-1बी वीजा प्राथमिकता का आधार पर देगी। प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका में एजुकेटेड योग्य छात्रों को एच-1बी वीजा के लिए चुनना है। साथ ही इसके तहत उन छात्रों को भी मौका मिलेगा जिनके पास एडवांस्ड डिग्री है और जो ज्यादा सैलरी पा रहे हैं।

किन सांसदों ने बिल पेश किया
सीनेट में: चक ग्रेसली, डिक डर्बन।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में: बिल पास्क्रेल, पॉल गोसर, रो खन्ना, फ्रेंक पालोन और लांस गूडन। 

क्या है बिल का मकसद?
इसके तहत एच-1बी या एल-1 वीजाधारकों को अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने से रोकना है। बिल में साफतौर पर कहा गया है कि एच-1बी धारक को नियुक्ति देने पर अमेरिकी वर्कर्स पर इसका उल्टा प्रभाव नहीं पड़ेगा। विशेष रूप से बिल 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाली ऐसी कंपनियों को प्रतिबंधित करेगा, जिनमें से कम से कम आधे एच-1बी या एल-1 वीजाधारक हैं। साथ ही वे कंपनियां जो अतिरिक्त एच -1 बी कर्मचारियों को काम पर रखती हैं।

‘हमारी नीतियां हमारा ही नुकसान कर रहीं’
सीनेटर ग्रेसली ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ कंपनियां हमारी बनाई नीतियों के आधार पर कम तनख्वाह पर कर्मचारियों को भर्ती करती हैं, जिससे अमेरिकियों को नुकसान होता है। हमें ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जिसमें अमेरिकन वर्कर्स को तरजीह मिले। हमारा बिल यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है कि कार्यक्रम अमेरिकियों और कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए समान रूप से काम करते हैं।’’

क्या है एच-1बी वीजा?

एच-1 बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के जरिए करती हैं। नियम के अनुसार, अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। यूएससीआईएस के मुताबिक, एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।

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लॉकडाउन के बाद स्क्रीनटाइम बढ़ने से आंख के मरीज बढ़े; घर से काम रहे कर्मी एसी में काम करने से बचें, हर 20 मिनट में पलक जरूर झपकाएं


  • गर्मियों में आम होती है ड्रायनेस की समस्या, ज्यादा देर तक स्क्रीन पर काम करने से भी हो सकती है परेशानी
  • अगर चश्मा लगा है तो उसका उपयोग हर हाल में करें, पैरेंट्स बच्चों को मोबाइल पर ज्यादा वक्त न बिताने दें

निसर्ग दीक्षित

May 18, 2020, 06:04 AM IST

भारत में सरकार ने भले ही लॉकडाउन की शुरुआत 24 मार्च से की हो, लेकिन निजी और सरकारी कंपनियों ने एहतियात बरतते हुए कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह पहले ही दे दी थी। इसके बाद करीब दो महीनों से घर से दफ्तरों के काम निपटा रहे लोग आंखों से संबंधित परेशानी का शिकार हो रहे हैं।

ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट डॉक्टर विनिता रमनानी बताती हैं कि इस दौरान फोन पर सलाह लेने वालों में इजाफा हुआ है। आंखों की परेशानी से जूझ रहे लोग बड़ी संख्या में वॉट्सऐप  मैसेज, फोटो और कॉल कर परामर्श ले रहे हैं। डॉक्टर रमनानी के मुताबिक, मरीज के बीच चिंता है कि वे बिना बाहर जाए भी आंखों में रेडनेस का शिकार हो रहे हैं। 

रामकृष्ण परमार्थ फाउंडेशन मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और डॉक्टर वसुधा डामले कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण मामले कम रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन आंखों की परेशानी से जूझ रहे लोगों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टर डामले के अनुसार गर्मियों में ड्रायनेस के मामले ज्यादा सामने आते हैं और ज्यादा स्क्रीनटाइम भी इसका मुख्य कारण है। डॉक्टर गैरजरूरी स्क्रीनटाइम में कटौती करने की सलाह भी देती हैं। क्योंकि जितना ज्यादा स्क्रीनटाइम उतनी ज्यादा दिक्कत।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये हैं मुख्य लक्षण

  • इरिटेशन: लगातार कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर काम या मूवी-गेम्स के कारण इरिटेशन की समस्या भी होती है। इस दौरान व्यक्ति को आंखों की मदद से कोई भी काम करने में असुविधा होती है। इसका कारण और भी कई बीमारियां हो सकती हैं। 
  • ड्रायनेस: डॉक्टर्स बताते हैं कि गर्मियों में ड्रायनेस आम परेशानी है। ड्रायनेस का मुख्य कारण है आंख में तरल या लुब्रिकेंट की कमी होना। ड्रायनेस ज्यादा बढ़ने पर मेडिकल एक्सपर्ट की सलाह लें। डॉक्टर रमनानी के अनुसार, इसका इलाज बेहद ही सामान्य है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर आपको ड्रॉप्स दे देंगे, जिसकी वजह से आंखें सूखेंगी नहीं।
  • रेडनेस: इस दौरान आपकी आंखों में रेडनेस और खुजली भी हो सकती है। हालांकि एलर्जी और इंफेक्शन जैसे कई कारणों के कारण आंखों में रेडनेस की परेशानी हो सकती है।
  • आंखों से पानी आना: आंखों में से पानी आने के कारण भी एलर्जी, इंफेक्शन, चोट हो सकते हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने के कारण आंखों से पानी आने की परेशानी हो सकती है। 

काम के दौरान ऐसे रखें आंखों का ख्याल

  • बार-बार आंखें झपकाना: लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर रमनानी के मुताबिक, आमतौर पर हमारी आंखें एक मिनट में 18-20 बार झपकती हैं, लेकिन स्क्रीन पर काम करते वक्त यह संख्या कम हो जाती है। इससे बचने के लिए कुछ देर में काम रोककर आंखों को बार-बार तेज झपकाएं।
  • 20-20-20 रूल: डॉक्टर साधारण से 20-20-20 नियम को फॉलो करने की सलाह देते हैं। इसमें आपको काम के दौरान हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फुट दूर की किसी चीज को देखना है। इससे आपकी आंखों की मसल्स रिलेक्स होती हैं।
  • एसी में काम करने से बचें: डॉक्टर डामले बताती हैं कि, एयर कंडीशनर में काम करने से ड्रायनेस की परेशानी बढ़ सकती है। एसी में काम करने से बचें। अगर एसी के बीच काम कर रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लें।
  • अंधेरे में काम न करें: कमरे की लाइटों को बंद कर काम न करें। डॉक्टर्स के मुताबिक, हमेशा कमरे में रोशनी के बीच या लाइट के बीच ही काम करें।
  • ब्रेक लें: लगातार काम करने से आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए कभी भी काम बिना ब्रेक के न करें। काम के दौरान कुछ देर में ब्रेक लेते रहें और नॉर्मल माहौल में घूमें। इसके अलावा अपने नॉर्मल भोजन के साथ मल्टीविटामिन और एंटीऑक्सीडेंट फूड का भी उपयोग करें।
  • चेयर हाइट को एडजस्ट करें: डॉक्टर्स के मुताबिक आंखों की सेहत के लिए काम करते वक्त पॉश्चर और मॉनीटर के बीच बैलेंस करना बहुत जरूरी है। कोशिश करें की मॉनिटर की हाइट नीचे हो, क्योंकि नीचे देखने से आंखें थोड़ी ही खुलती हैं और ज्यादा लुब्रिकेंट इवेपोरेट(भाप बनकर उड़ना) नहीं होता।
  • एंटीग्लेयर का इस्तेमाल: कंप्यूटर स्क्रीन में एंटीग्लेयर या ब्लू फिल्टर इस्तेमाल करने की सलाह भी डॉक्टर देते हैं। एंटी ग्लेयर स्क्रीन की मदद से मॉनिटर स्क्रीन से निकलने वाली खतरनाक किरणों का असर आंखों पर कम होगा।
  • अगर चश्मा लगा है तो उपयोग करें: डॉक्टर के मुताबिक, जिन लोगों को चश्मा लगा है, वे इसका जरूर उपयोग करें। भले ही आपको बगैर चश्मे के भी साफ नजर आए, इसके बाद भी चश्मा जरूर लगाएं। 

इन हालातों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें
लॉकडाउन होने के कारण कर्मचारी घर से ही काम कर रहे हैं, तो वहीं खाली बैठे बच्चे मोबाइल पर अपना ज्यादातर वक्त बिता रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर्स माता-पिता को बच्चों को कंट्रोल करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा अगर आप इन परेशानियों से जूझ रहे हैं तो मामला गंभीर हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • आंखों से जुड़ा काम करने पर ज्यादा तकलीफ होने लगे
  • आंख नहीं खोल पाएं
  • आंख में दर्द होने लगे
  • शाम होते-होते सिर में दर्द
  • आंख में चुभन महसूस होने लगे
  • पढ़ते वक्त क्लैरिटी न मिल पाए

सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त गुजार रहे यूजर

  • मार्च 28 को हुए हैमरकॉफ कंज्यूमर सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के पहले हफ्ते में भारतीय ने 280 मिनट प्रतिदिन सोशल मीडिया पर बिताए हैं। इससे पहले यह आंकड़ा 150 मिनट प्रतिदिन था। इस लिहाज से सोशल मीडिया यूसेज में करीब 87 फीसदी का इजाफा हुआ है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक 75 प्रतिशत लोगों ने ज्यादा टाइम व्हाट्सएप, ट्विटर और फेसबुक जैसी ऐप्स पर खर्च किया है। नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में लगभग 1300 लोगों पर हुए सर्वे में पाया गया कि ओटीटी एंगेजमेंट में भी करीब 71 फीसदी का उछाल आया है। 
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वेतन नहीं मिलने से गुस्साए सैकड़ों मजदूर मार्च निकाल धागा फैक्ट्री पहुंचे, पुलिस ने गेट पर रोका तो धरने पर बैठे


  • डीएसपी सतपाल शर्मा बोले- मजदूर प्रतिनिधयों और मिल प्रबंधकों के बीच बैठक के बाद धरना खत्म
  • 11 मई की रात मालेरकोटला के अरिहंत स्पिनिंग मिल में हंगामे के दौरान एसडीएम, डीएसपी और एएसआई हुए थे घायल

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 10:09 PM IST

संगरूर. संगरूर जिले के कस्बा भवानीगढ़ में शनिवार सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही नारेबाजी का दौर शुरू हो गया। यहां आईएएल धागा फैक्ट्री के सैकड़ों मजदूर सड़कों पर उतर आए। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने उन्हें अप्रैल का वेतन नहीं दिया है। इसी के चलते सुबह करीब साढ़े 6 बजे जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के बैनर तले ये लोग बलियाल के नजदीक स्थित फैक्ट्री की कॉलोनी से बाहर निकल आए। रोष मार्च करते हुए फैक्ट्री के गेट पहुंचे तो वहां पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद वहीं पर धरना शुरू कर दिया।

राेष प्रदर्शन में शामिल मजदूर राजेश कुमार, गौरव, लवकुश, एमडी सफीक, आसीफ, रामेश कुमार का कहना है कि मार्च में तीन घंटे सुबह और पांच घंटे शाम ओवरटाइम करते थे। लॉकडाउन के बावजूद अप्रैल में भी पूरा काम चला है, लेकिन बावजूद प्रबंधन ने न तो मार्च माह का ओवरटाइम का पैसा दिया है और न ही अप्रैल का वेतन। इस बारे में रोष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के जिला सचिव गुरमुख सिंह का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधकों की नीतियों के कारण ही प्रवासी मजदूर पंजाब छोड़ने पर मजबूर हैं।
उधर, मौके पर पहुंचे डीएसपी सतपाल शर्मा का कहना है कि मजदूर प्रतिनिधयों और मिल प्रबंधकों के बीच बैठक करवाई है। इसमें मिल की ओर से ओवरटाइम का पैसा मजदूरों के खाते डालना शुरू कर दिए जाने की बात कही गई। साथ ही कहा कि जो भी कामगार काम छोड़ना चाहता है, वह शनिवार तक अपना इस्तीफा एचआर विभाग को सौंप दे, उसका बुधवार तक सभी खातों में पैसे डाल दिए जाएंगे। बाकी अप्रैल के वेतन संबंधी मामला कोर्ट में लंबित है। इसके बाद मजदूरों से प्रदर्शन खत्म कर दिया।

सिविल अस्पताल में हाथ का उपचार करवाने पहुंचे घायल अधिकारी।

पांच दिन पहले मालेरकोटला में ऐसे बिगड़े थे हालात

इससे पहले जिले के मालेरकोटला शहर में भी 11 मई को देर रात करीब साढ़े 10 बजे उस वक्त माहौल खराब हो गया था, जब अरिहंत स्पिनिंग मिल के प्रबंधन से नाराज मजदूर बेकाबू हो गए। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इस दौरान मजदूरों ने पथराव शुरू कर दिया तो एसडीएम विक्रमजीत सिंह पांथे, डीएसपी सुमीत सूद और एएसआई जसविंदर सिंह घायल हो गए। जसविंदर सिंह की हाथ टूट गया। बाद में पुलिस ने लाठीचार्ज करके प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा था। साथ ही इस संबंध में 400 अज्ञात व्यक्तियों पर कर्फ्यू के उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया गया है।

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मजदूरों का हंगामा, पथराव में एसडीएम और डीएसपी घायल, एएसआई का हाथ टूटा


  • संगरूर जिले के मालेरकोटला शहर में अरिहंत स्पिनिंग मिल में प्रबंधन के खिलाफ रोष प्रदर्शन
  • काबू पाने की कोशिश में और बिगड़े हालात, 400 अज्ञात व्यक्तियों पर कर्फ्यू तोड़ने का केस दर्ज

दैनिक भास्कर

May 12, 2020, 09:46 PM IST

मालेरकोटला. पंजाब के मालेरकोटला में अरिहंत स्पिनिंग मिल के प्रबंधन से नाराज मजदूर बेकाबू हो गए। घटना सोमवार देर रात करीब 10 बजे की है, जब प्रबंधन के खिलाफ गुस्साए मजदूरों को काबू करने के लिए प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा तो अचानक मजदूर पथराव पर उतर आए। इस दौरान एसडीएम विक्रमजीत सिंह पांथे, डीएसपी सुमीत सूद और एएसआई जसविंदर सिंह घायल हो गए। जसविंदर सिंह की हाथ टूट गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मजदूरों पर लाठीचार्ज तक करना पड़ा। साथ ही 400 अज्ञात व्यक्तियों पर कर्फ्यू के उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया गया है।

मालेरकोटला सिविल अस्पताल में इलाज करवाते एसडीएम विक्रमजीत सिंह पांथे। 

यह है खींचतान की वजह, नहीं निकला हल
दरअसल, मिल मजदूरों का आरोप है कि उन्हें काम का पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। मिल के अंदर राशन की दुकान से महंगा राशन दिया जा रहा है। किसी के बीमार होने पर उनका सही उपचार तक नहीं करवाया जाता है। उनसे जबरन काम करवाया जा रहा है। मिल से बाहर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में मजदूरों की ओर से मांग की गई कि मजदूरों के वेतन में बढ़ोतरी की जाए। उन्हें सस्ता राशन मुहैया करवाया जाए। मजदूरों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले मिल अधिकारियों का तबादला किया जाए।

वहीं, एसडीएम विक्रमजीत सिंह पांथे ने बताया कि मजदूरों में काफी रोष है। देर रात तक मजदूर किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे। मंगलवार सुबह भी मजदूरों को बातचीत करने के लिए अपील की गई परंतु मजदूर किसी को अंदर नहीं आने दे रहे थे। ऐसे में प्रशासन की ओर से कंपनी डायरेक्टर नीरज जैन को बुलाया गया। इसके बाद मजदूरों ने बिना पुलिस के उन्हें अंदर आने की आज्ञा दी। उन्होंने मजदूरों को काफी शांत करने का प्रयास किया है। मजदूरों को सस्ता राशन दिलाने का आश्वासन भी दिया गया है, लेकिन मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग पर अडे़ हैं। कंपनी के उच्चाधिकारी नियमों अनुसार ही वेतन दिए जाने की बात कर रहे हैं। हालात को देखते एडीसी राजेश त्रिपाठी भी मौके पर पहुंचे। मंगलवार देर शाम तक प्रशासन मजदूरों से बात करता रहा, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

मिल के अंदर रहने वाले 1350 मजदूरों को ही काम पर बुलाया गया था
मिल के जीएम कुलदीप जैन का कहना है कि मजदूरों से नियमों के अनुसार ही काम करवाया जा रहा है। लॉकडाउन के बाद नियमों के अनुसार मिल के अंदर रहने वाले 1350 मजदूरों को ही काम पर बुलाया गया था जिसमें से 64 प्रतिशत कर्मचारी काम पर आ गए थे। कुछ मजदूर 15 दिनों तक काम पर नहीं लौटे। ऐसे में मिल की ओर से काम के अनुसार सभी को वेतन दिया गया है। बावजूद इसके कुछ मजदूर पूरे वेतन की मांग कर हंगामा कर रहे हैं। मिल की ओर से मिल के बाहरी मजदूरों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। कठिन परिस्थितियों में भी मजदूरों को वेतन की अदायगी की गई है बावजूद किसी भी व्यक्ति को वेतन को लेकर कोई शिकायत है तो प्रबंधन से बात कर सकता है।