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पायलट ने तीन बार चेतावनी को नजरअंदाज किया था; जांच टीम पर भी सवाल उठे, इसमें सभी सदस्य एयरफोर्स के अफसर


  • एटीसी ने बताया कि पायलट को प्लेन की ऊंचाई मेंटेन करने के लिए तीन बार चेतावनी दी गई थी
  • जांच टीम में किसी कमर्शियल पायलट को शामिल न करने पर पायलट संघ ने उठाए सवाल

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 09:32 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के कराची में 22 मई को हुए प्लेन क्रैश में पायलट की तीन गलतियां सामने आ रही हैं।  पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक, पायलट को एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) ने तीन वॉर्निंग दीं। उसने तीनों बार इन्हें अनसुना कर दिया। दूसरे शब्दों में कहें तो पायलट ने एटीसी के आदेशों का पालन नहीं किया। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के पायलट्स एसोसिएशन ने हादसे की जांच के लिए बनाई गई समिति पर सवालिया निशान लगाए। संगठन के मुताबिक, जांच टीम में एक भी कमर्शियल पायलट नहीं रखा गया। जबकि, क्रैश होने वाला एयरक्राफ्ट कमर्शियल या पैसेंजर प्लेन था। 

22 मई को पीआईए का प्लेन ए-320 कराची जा रहा था। यह प्लेन कराची में जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ही जिन्ना गार्डन एरिया में क्रैश हो गया। इस हादसे में 97 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2 लोग बचाए गए थे। 

1. पहली चेतावनी
जियो न्यूज ने एटीसी के हवाले से बताया- लाहौर से कराची आ रहा पीआईए का प्लेन ए-320 जब जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 नॉटिकल मील (27.78 किलोमीटर) दूर था, तब वह 10 हजार फीट ऊंचाई पर था। एटीसी ने पायलट से कहा- एयरक्राफ्ट की ऊंचाई सात हजार फीट रखें। पायलट का जवाब था कि वो इस ऊंचाई से संतुष्ट है।

2. दूसरी चेतावनी
जब प्लेन 10 नॉटिकल मील (18.52 किमी) दूर था तब इसकी ऊंचाई सात हजार फीट थी। इसे तीन हजार फीट होना चाहिए था। इसीलिए, एटीसी ने दूसरी चेतावनी दी। पायलट ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया। उसने जवाब दिया कि वो ऊंचाई से संतुष्ट है और हालात संभाल लेेगा। 

3. तीसरी चेतावनी
प्लेन जब पहली कोशिश में लैंड नहीं हो पाया तो पायलट ने खुद ही गो-अराउंड (गोल चक्कर) का फैसला लिया। इस दौरान प्लेन 1800 फीट की ऊंचाई पर था। एटीसी ने तीसरी वाॅर्निंग दी। प्लेन को तीन हजार फीट की ऊंचाई पर ले जाने को कहा। इस पर पायलट ने जवाब दिया कि वो इसके लिए कोशिश कर रहा है। चंद मिनट बाद एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया।

फ्यूल की कमी नहीं थी

यह साबित हो चुका है कि प्लेन में ईंधन यानी फ्यूल की कमी नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया कि प्लेन में इतना ईंधन था कि वह 2.34 घंटे तक उड़ सकता था। लाहौर से कराची आने में सिर्फ 1.33 घंटे लगते हैं। अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गलती का जिम्मेदार पायलट था या कोई टेक्निकल फॉल्ट भी क्रैश की वजह बना। 

सीएए भी जारी कर चुका है रिपोर्ट
पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी (सीएए) की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट ने जिन्ना नेशनल एयरपोर्ट पर उतरने की पहली कोशिश में तीन बार रनवे छुआ था। रनवे पर रगड़ के साथ चिंगारी भी भड़की थी। तीसरी बार रनवे छूने के बाद पायलट ने प्लेन को फिर से हवा में उठा लिया था। माना जा रहा है कि इसी दौरान ऑयल और फ्यूल पंप खराब हुए। इनमें लीकेज हुई होगी। इसके चलते प्लेन ज्यादा ऊंचाई पर नहीं जा पाया और क्रैश हो गया। अजीब बात यह है कि इस दौरान कॉकपिट में मौजूद क्रू ने एटीसी को कोई जानकारी नहीं दी थी। 

जांच टीम पर सवाल
पाकिस्तान में पायलटों के संघ और विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जांच टीम पर सवाल उठाए हैं। प्लेन क्रैश की जांच एयर फोर्स कर रही है। पाकिस्तान एयरलाइंस पायलट एसोसिएशन (पाल्पा) के सेक्रेटरी कैप्टन इमरान नैरेजो ने ‘द डॉन’  अखबार से कहा, ‘‘जांच टीम सही नहीं है। इसमें कॉमर्शियल पायलट को शामिल नहीं किया गया है। कॉमर्शियल प्लेन से जुड़े हादसे को एक कॉमर्शियल पायलट ही बेहतर तरीके से समझ सकता है।’’ पाकिस्तान ने प्लेन क्रैश की जांच के लिए चार सदस्यीय एक जांच टीम बनाई है। इसमें तीन सदस्य ‘एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इंवेस्टिगेशन बोर्ड’ के हैं, जबकि एक एयरफोर्स के सेफ्टी बोर्ड से है। ये तीन महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।

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लोगों ने कहा- हमें तो हादसे की आवाज भी नहीं सुनाई दी, छत पर गए तो बस धुआं दिखाई दे रहा था


  • पीआईए का यात्री विमान कराची एयरपोर्ट में लैंडिंग से चंद मिनट पहले मॉडल कॉलोनी में क्रैश हो गया
  • हादसे के दौरान लोगों को लगा कि यह आवाज विमानों के लैंड या टेकऑफ की है, जो यहां के लिए आम बात है

जोया अनवर

May 22, 2020, 11:07 PM IST

कराची. पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) का यात्री विमान एक घनी आबादी वाले इलाके मॉडल कॉलोनी में क्रैश हो गया। पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला हफीज के मुताबिक, पीआईए की फ्लाइट पीके 803 लाहौर से कराची जा रही थी और इसमें 8 क्रू मेंबर्स समेत 98 लोग सवार थे। हादसे वाली जगह से अब तक 37 शव निकाले जा चुके हैं। इनमें एक 5 साल का बच्चा भी है।

जब प्लेन मॉडल कॉलोनी में क्रैश हुआ, उस वक्त लोगों को लगा कि ये सामान्य पीएमटी धमाका है, जो एयरपोर्ट के नजदीक बसी इस कॉलोनी के लिए आम बात है। यहां रहने वाली सीमा ने कहा कि उन्हें तो इस क्रैश की आवाज भी नहीं सुनाई दी। इसकी वजह यह हो सकती है कि इंजन से आवाज नहीं आ रही थी। उन्हें इस हादसे की खबर फोन पर बहन के जरिए मिली।

सीमा ने बताया कि जब वे बाहर देखने के लिए निकलीं तो हर जगह धुआं था। जल्द ही एम्बुलेंस आ गई। ऐसा लग रहा था, जैसे प्लेन दो इमारतों के बीच फंस गया था। थोड़ी ही देर बाद पावर कट हो गया। इसके बाद रेंजर्स ने रेस्क्यू वाले इलाके में लोगों और मीडिया के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी।

क्रैश साइट के करीब मेमन गोथ इलाके में रहने वाली फैजा ने कहा- हादसे की जगह हमारे घर से 7 किलोमीटर दूर है। हम लोग खुशकिस्मत हैं कि उस जगह से दूर थे। लेकिन, जब हम छत पर चढ़े तो हम वहां से धुआं उठता देख रहे थे। यहीं रहने वाली सलमा ने बताया कि मेरे बेटे के साथ पढ़ने वाला एक बच्चा मॉडल कॉलोनी में रहता है। शुक्र है कि वो और उसका परिवार हादसे के वक्त घर पर नहीं था। हम लोग इस हादसे से हिल गए हैं।

बिजली भी बंद
घटना स्थल से दो गली छोड़कर रहने वाली फारिया कहती हैं, “यह दिन भी किसी आमदिन की तरह था। बाहर तेज तपिश है। लिहाजा, हम घर में ही थे। मैं वॉटर पम्प का ऑयल चेंज कर रही थी। अचानक तेज धमाका हुआ। मुझे लगा कि कोई बम धमाका हुआ। बिजली भी बंद हो गई। ऊपर जाकर देखा तो प्लेन क्रैश हुआ था। कुछ ही देर में इलाका आग से घिर गया।”
 
लोगों ने मदद की
फारिया आगे कहती हैं, “लोग मदद कर रहे थे। आग लगी थी इसलिए, बहुत आगे जाना खतरनाक था। रमजान की वजह से लोग अफ्तारी भी बांट रहे थे। अब तक बिजली नहीं आई है। सैनिक लाशें निकाल रहे हैं। मैं अब भी सदमे में हूं कि कैसे अचानक कई लोगों के लिए यह दिन मनहूस बन गया। वो भी ईद से ठीक पहले।”  

नेटवर्क भी बंद
मुनीर भी इसी इलाके में रहते हैं। वो कहते हैं, “जहां हादसा हुआ। उसके करीब ही मेरे दोस्त का घर है। मैंने उसे फोन करने की कोशिश की लेकिन, नेटवर्क की दिक्कत आ गई है। मैंने उसके घर जाने की कोशिश की। लेकिन, इलाका आग और धुएं में घिरा था। एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड मौजूद हैं। लोग वीडियो बना रहे हैं। यहां अब भी क्रेन है। जो मलबा और लाशें हटा रही है।” 

हादसे में बाल-बाल बचे बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसीडेंट

बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसीडेंट जफर मसूद पीआईए के उसी विमान में सवार थे, जो क्रैश हुआ। खुशकिस्मती से वह इस हादसे से बच गए। उनके चाचा मुमताज आलम ने कहा कि मसूद को मॉडल कॉलोनी के लोगों ने मलबे से निकाला। इसके बाद बचाव कर्मियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। आलम कहते हैं- यह करिश्मा ही है कि मसूद बच गए। अब उनका परिवार अस्पताल में साथ है। मसूद ने अपनी मां को बताया कि वो सुरक्षित हैं। उनका फोन भी ठीक से काम कर रहा है।

सोशल मीडिया पर पैसेंजर लिस्ट सर्कुलेट होने पर नाराजगी
हादसे के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में विमान में सवार यात्रियों की लिस्ट जारी की गई। आमतौर पर सिविल एविएशन अथॉरिटी यह लिस्ट जारी करती है। डिजिटल राइट्स फाउंडेशन नाम का एनजीओ चलाने वाली निगात दाद कहती हैं कि यह निंदनीय काम है, क्योंकि इससे पैसेंजर्स की प्राइवेसी खत्म होती है। जरा उस परिवार के बारे में सोचिए जिसे इन जरियों से विमान में बैठे अपने करीबियों के बारे में पता चला होगा। जरा सोचिए कि वॉट्सऐप पर फॉरवर्ड हुई ऐसी किसी लिस्ट में कोई शख्स लगातार किसी अपने का नाम खोज रहा होगा।निगत ने कहा- केवल क्लिक्स और रेटिंग के लिए कई मीडिया हाउस उसूलों को ताक पर रख देते हैं। मुझे लगता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों को प्रमाणिकता का भी ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि जब वे ट्विटर पर कोई सूचना शेयर करते हैं तो उनका यह कदम लोगों की भलाई की भलाई के काम नहीं आ रहा होता है। इसके उलट ये कदम कई लोगों को मुश्किल में डाल देता है। ऐसे कानून होने चाहिए कि इस तरह के हालात में लोगों की निजता का सम्मान किया जाए, ना कि चंद पलों की शोहरत के लिए ऐसी हरकत की जाए।

इस तरह यात्रियों की लिस्ट का सर्कुलेट होना चिंताजनक- एक्टिविस्ट

एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार आफिया सलाम ने कहा- इस तरह से लिस्ट का सर्कुलेट होना चिंताजनक है। जब मुख्यधारा का मीडिया इस तरह से जानकारियां शेयर करता है, तो उसे इतनी आसानी ने नहीं बख्शा जाना चाहिए। उन्हें तो इसे रोकने वालों की भूमिका में होना चाहिए था। चैनलों पर इस तरह से यात्रियों का नाम लिया जाना बेहद असंवेदनशील है। मुझे लगता है कि इसमें नियामक संस्थाओं को दखल देना चाहिए। पाकिस्तान ने अतीत में भी ऐसी त्रासदियों को देखा है। हर बार मीडिया इसी तरह के अपमानजनक काम करता है। इन्हें उसूलों, लोगों की निजता का ख्याल रखना चाहिए, लेकिन लगता है कि अतीत की घटनाओं से इन्होंने कोई सबक नहीं लिया है।

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आखिरी बातचीत: पायलट ने एटीसी से कहा- वी हैव लॉस्ट द इंजन; फिर प्लेन मोबाइल टॉवर से टकराया और घरों पर क्रैश हो गया


  • पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट से कुछ किमी पहले प्लेन क्रैश हुआ
  • क्रैश होने के पहले ही प्लेन के इंजन में आग लग चुकी थी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 12:09 AM IST

कराची. कराची में शुक्रवार दोपहर पाकिस्तान एयरलाइंस कंपनी (पीआईए) का प्लेन क्रैश हो गया। इसमें 98 यात्री और क्रू मेंबर थे। प्लेन एयरपोर्ट से कुछ किलोमीटर पहले रिहायशी इलाके पर गिरा। क्रैश होने से पहले पायलट सज्जाद गुल और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर के बीच बातचीत हुई थी। इसका ऑडियो टेप भी सामने आया। पायलट ने एटीसी से कहा था कि एयरक्राफ्ट का इंजन खराब हो चुका है। एटीसी ने उससे कहा कि एयरपोर्ट पर दो रनवे खाली हैं, लेकिन पायलट विमान की लैंडिंग नहीं करा सका।

लाहौर से भरी थी उड़ान
लाहौर से यह प्लेन दोपहर 1 बजे उड़ा। 2.33 बजे यह 275 फीट की ऊंचाई पर था। इसके कुछ मिनटों बाद क्रैश हो गया। पाकिस्तान की वेबसाइट द डॉन के मुताबिक, चश्मदीद शकील अहमद ने कहा, “प्लेन सबसे पहले एक मोबाइल टॉवर से टकराया। इसके बाद घरों पर क्रैश हुआ। यहां से एयरपोर्ट चंद किलोमीटर दूर है।”

पायलट और एटीसी की बातचीत
क्रैश के ठीक पहले पायलट सज्जाद गुल की एटीसी से बातचीत हुई। इसका ऑडियो सामने आया है। 
पायलट : सर हम सीधा आने की कोशिश कर रहे हैं। इंजन फेल हो चुका है। (वी हैव लॉस्ट द इंजन)
एटीसी : आप नीचे उतरने की कोशिश कीजिए। रनवे तैयार हैं। 
पायलट : मे डे (mayday) पाकिस्तान 8303।

यही पायलट के आखिरी शब्द थे। इसके बाद प्लेन क्रैश हो गया।  

क्या होता है मे डे (mayday) कॉल?

किसी प्लेन का पायलट या शिप का कैप्टन यह शब्द कभी नहीं बोलना चाहता। दरअसल, जब किसी प्लेन के पायलट या शिप के कैप्टन को यह लगने लगता है कि अब वो जहाज या शिप को नहीं बचा पाएगा, इन हालात में वो संबंधित एटीसी या कंट्रोल बॉडी से रेडियो कम्युनिकेशन पर बात करता है। आखिरी सफर की आशंका के वक्त किए गए इस कॉल को ही मे डे (mayday) कॉल कहते हैं।  

एयरलाइंस ने कहा- रनवे खाली थी, लेकिन प्लेन लैंड नहीं हो सका 
पीआईए पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस कंपनी है। इसके चीफ एग्जीक्यूटिव एयर मार्शल अरशद मलिक ने कहा, “पायलट ने आखिरी बातचीत में बताया था कि एयरक्राफ्ट में टेक्निकल फॉल्ट है। एटीसी ने उसको बताया कि दो रनवे खाली हैं। वो किसी पर भी लैंड कर सकता है। लेकिन, उसने एक चक्कर लगाने का फैसला किया। उसने ऐसा क्यों किया? टेक्नीकल फॉल्ट क्या था? इसकी हम जांच करेंगे।”

कितनी ऊंचाई पर था प्लेन?
प्लेन 275 फीट की ऊंचाई पर था, लेकिन फौरन बाद ये फिर ऊपर चला गया। जब ये 525 फीट की ऊंचाई पर था, तब पायलट और एटीसी के बीच आखिरी बातचीत हुई। एविएशन एक्सपर्ट जफर इकबाल कहते हैं, “मुझे शक है कि प्लेन की बॉडी को नुकसान हुआ होगा। हो सकता है कोई पक्षी या कोई दूसरी चीज टकराई हो।” रेस्क्यू में लगी टीम का कहना है कि ऑपरेशन खत्म करने में दो दिन भी लग सकते हैं। कुल 15 घरों को नुकसान पहुंचा है।