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वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा- सीबीआई, सीवीसी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को लोन दें, सरकार 100% गारंटी दे रही


  • सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थानों के सीईओ और एमडी के साथ हुई बैठक में निर्मला सीतारमण ने दिए निर्देश
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सीबीआई, सीवीसी और सीएजी के डर को कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 10:49 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बताया कि बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे तीन सी यानी सीबीआई, सीवीसी और सीएजी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को स्वचालित रूप से कर्ज दें।

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सीईओ और एमडी के साथ हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकार लोन पर 100 फीसदी गारंटी दे रही है, इसलिए लोने देने में डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भाजपा नेता नलिन कोहली के साथ बातचीत में कहा। पार्टी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। 

वित्त मंत्री ने 100 फीसदी गांरटी की बात कही

सीतारमण ने कहा कि कल मैंने फिर से कहा कि अगर लोन देने का फैसला गलत साबित हुआ और इससे नुकसान हुआ, तो सरकार ने 100 फीसदी गारंटी दी है। किसी भी बैंक अधिकारी या बैंक को दोषी नहीं ठहराया जाएगा। इसलिए बिना डर के वे खुद फैसला लें। जो भी अतिरिक्त टर्म लोन या अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल लोन के योग्य हों, उन्हें लोन दिया जाए।
वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा- सीबीआई, सीवीसी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को लोन दें, सरकार 100% गारंटी दे रही है। 

सरकार ने एमएसएमई को 3 लाख करोड़ का पैकेज दिया

20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की घोषणा की थी। एमएसएमई सेक्टर पर कोरोनावायरस संकट का बेहद नकारात्मक असर पड़ा है।

यह माना जाता है कि बैंक अधिकारी वाजिब और सही फैसले इसलिए नहीं ले पाते हैं, क्योंकि उन्हें तीन सी- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) द्वारा प्रताड़ित किए जाने का डर सताता रहता है।

सरकार ने जांच एजेंसियों के डर को कम करने के लिए कदम उठाए 

वित्त मंत्री ने कहा कि सीबीआई, सीवीसी और सीएजी के डर को कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं। इसके तहत कई ऐसी अधिसूचनाओं को वापस लिया गया है, जिसके कारण बैंक अधिकारियों में डर बैठ गया था। ये डर बिल्कुल वाजिब थे। पिछले 7-8 महीने में मैंने बैंक अधिकारियों को कम से कम तीन बार बैठक लेकर कहा है कि उन्हें थ्री सी से नहीं डरना चाहिए।

वित्त मंत्री ने पैकेज के लिए समग्र नजरिया अपनाया

वित्त मंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के दिए ब्योरे की यह कहकर आलोचना की जा रही है कि उन्होंने आतिथ्य, वाहन और नागरिक उड्‌डयन सेक्टरों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कोई राहत नहीं दी। इस आलोचना का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने सेक्टर आधारित नहीं, बल्कि समग्र नजरिया अपनाया है। कृषि और बिजली क्षेत्र को छोड़कर सरकार ने सुधार कार्यों के लिए किसी अन्य सेक्टर का जिक्र नहीं किया है।

एमएसएमई को दिए पैकेज का फायदा दूसरे सेक्टरों को भी मिलेगा

सीतारमण ने कहा कि जिसे हम एमएसएमई पैकेज कह रहे हैं, उसमें एमएसएमई तो शामिल है ही, उस पैकेज का लाभ अन्य सेक्टरों को भी मिल सकता है। इसलिए आप जिस सेक्टर का नाम ले रहे हैं, वे भी इस पैकेज से लाभ हासिल कर सकते हैं।

पैकेज में यह नजरिया अपनाया गया है कि यदि किसी कंपनी ने बैंक से एक निश्चित सीमा तक लोन लिया है, या उसमें एक निश्चित सीमा तक निवेश हुआ है, या उसका एक निश्चित टर्नओवर है, तो यदि वे कारोबार को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल लेना चाहते हैं, तो वे ले सकते हैं।

डिजिटल तरीके से लोन देने पर जोर 

वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि पहली जून से बिना किसी कोलैटरल के बैंकों से नकदी का प्रवाह शुरू हो जाएगा। सीतारमण के मुताबिक बैंक अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोन सरल तरीके से मंजूर किए जाने चाहिए। यदि संभव हो तो डिजिटल तरीके से लोन दिए जाने चाहिए, ताकि कम से कम लोगों के बीच सम्पर्क हो।  

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आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार लाएगी नई पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज नीति, एक सेक्टर में केवल 1-4 सरकारी कंपनी होंगी


  • पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए रणनीतिक सेक्टर्स की एक लिस्ट बनाई जाएगी
  • सभी सेक्टर्स में सरकारी कंपनी के साथ निजी कंपनियां भी कारोबार कर सकेंगी

दैनिक भास्कर

May 17, 2020, 01:43 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना आपदा से निपटने के लिए घोषित किए गए 20 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की अंतिम और पांचवीं किस्त की रविवार को घोषणा की गई। इस दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पूरी दुनिया अब रिफॉर्म पर जोर दे रही है। इसी दिशा में हमने भी अब पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (पीएसई) में बदलाव का फैसला किया है। इसके लिए जल्द नई पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज नीति लाई जाएगी।

वित्त मंत्री की घोषणा

  • आत्मनिर्भर भारत के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए नई नीति लाई जाएगी।
  • सार्वजनिक हित के लिए पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज के लिए रणनीतिक सेक्टर की एक नई लिस्ट जारी की जाएगी।
  • एक सेक्टर में पब्लिक सेक्टर की कम से कम एक और अधिकतम चार कंपनियां शामिल होंगी। इसके अतिरिक्त प्रत्येक सेक्टर में प्राइवेट कंपनियां भी शामिल हो सकेंगी।
  • रणनीतिक लिस्ट से अलग सेक्टर की कंपनियों का निजीकरण या विलय किया जाएगा।

क्या फायदा होगा

  • एक सेक्टर में सरकारी कंपनियों की संख्या कम होने से प्रतियोगिता खत्म होगी। इससे कंपनी को व्यापार करने में आसानी होगी।
  • कंपनियों का सेक्टर के हिसाब से वर्गीकरण करने से सरकार को प्रशासनिक और आर्थिक दोनों तौर पर फायदा होगा।
  • सरकारी कंपनियों पर किए जाने वाले खर्च पर अंकुश लगेगा।

सरकार को मिलेगा फंड

रणनीतिक सेक्टर के हिसाब से कंपनियों का निर्धारण करने के बाद अन्य कंपनियों का निजीकरण या दूसरी कंपनियों के साथ विलय किया जाएगा। इससे सरकार को अतिरिक्त फंड मिलेगा।

निजी सेक्टर को भी होगा फायदा

सरकार की इस नीति से निजी सेक्टर की कंपनियों को भी फायदा होगा। वे भी सरकार की ओर से तय किए जाने वाले रणनीतिक सेक्टर में सरकारी कंपनियों के साथ कारोबार कर सकेंगी। अभी कई सेक्टर्स में प्राइवेट कंपनियों को कारोबार की इजाजत नहीं है।

कंपनी मैनेजमेंट में भी लाभ मिलेगा

एक सेक्टर में निर्धारित पीएसई रहने से सरकार को कंपनी मैनेजमेंट में फायदा होगा। इसके लिए सरकार को ज्यादा अधिकारी नियुक्त नहीं करने होंगे। इससे प्रशासनिक खर्च कम होगा।

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केंद्र शासित राज्यों में बिजली कंपनियों का निजीकरण होगा, लगाए जाएंगे स्मार्ट प्री-पेड मीटर


  • डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को पावर जनरेशन कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनियों को 94 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं
  • प्रधानमंत्री के बताए 20 लाख करोड़ के पैकेज के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस की

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 11:40 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के संकट से उबरने के लिए प्रधानमंत्री के बताए 20 लाख करोड़ के पैकेज के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली कंपनियों का निजीकरण होगा। इससे विद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुश्किल हालातों से गुजर रहीं राज्यों की पावर जनरेटिंग कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए 90,000 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था।
क्या घोषित किया- केंद्रशासित प्रदेशों में बिजली वितरण का निजीकरण किया जाएगा। इससे बेहतर सेवा मिलेगी और पावर वितरण में मॉडल के रूप में विकसित करेंगे। बाकी राज्य भी इनसे प्रेरित होंगे। इससे बिजली क्षेत्र में स्थिरता आएगी। बिजली उत्पादन कंपनियों को समय पर भुगतान हो सकेगा। साथ ही सब्सिडी डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। 

किसके लिए- सरकार के इस कदम से बिजली कंपनियों के साथ ग्राहकों को भी फायदा हो सकता है। डिस्कॉम कंपनियों की अक्षमता का असर ग्राहकों के ऊपर न पड़ने देने के फैसले से उन्हें सुविधा होगी।

क्या फायदा हाेगा- बिजली कंपनियों को समय पर मिलेगा पैसा। उपभोक्ताओं को उनके अधिकार मिलेंगे। डिस्कॉम को पर्याप्त बिजली उपलब्ध करवानी होगी। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को सुविधाओं के आधार पर चुना जाएगा। बिजली कंपनियों को समय पर पैसा मिले, इसका ध्यान रखा जाएगा। स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। केंद्र शासित राज्यों में डिस्कॉम के निजीकरण के कदम उठाए जा रहे हैं, इससे सर्विस में सुधार होगा। सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए 8100 करोड़ दिए जाएंगे। 30% वायवैलिटी गैप फंडिंग के आधार पर यह रकम दी जाएगी। 

सामाजिक बुनियादी ढांचा- अस्पताल और स्कूल जैसे सामाजिक बुनियादी ढ़ाचे में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग में बदलाव किया गया है। सरकार ने इसे 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है। इससे निजी निवेश आएगा। इसके लिए 8100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को कर्ज से मिलेगी राहत

डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को पावर जनरेशन कंपनियों और ट्रांसमिशन कंपनियों को 94 हजार करोड़ रुपए चुकाने हैं, लेकिन उनके पास पैसे की कमी है। इस एक बार के लिक्विडिटी इन्फ्यूजन से सेंट्रल पब्लिक सेक्टर की पॉवर जेनरेशन कंपनियों, ट्रांसमिशन कंपनियों, निजी कंपनियां और रिन्यूवल एनर्जी जेनरेटर्स को पेमेंट किया जा सकेगा। राज्य सरकारों द्वारा संचालित पीएफसी और आरईसी के पास छह लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है। ये पॉवर सेक्टर की सबसे बड़ी कर्ज देने वाली कंपनियां हैं।

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन डिस्कॉम को फायदा होगा

पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन डिस्कॉम कंपनियों को यह मदद मिलेगी। दरअसल, पिछले दोनों लॉकडाउन, कोरोनावायरस आदि के चलते बिजली वितरण कंपनियों की आय में भारी कमी आई है। इसके चलते बिजली उत्पादन और वितरण करने वाली कंपनियों के लिए यह प्रावधान किया गया है।

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कोल सेक्टर में सरकार का एकाधिकार खत्म होगा; कमर्शियल माइनिंग शुरू होगी, इंफ्रास्ट्र्क्चर विकास पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार


  • कोल इंडिया के खदानों से कोल बेड मीथेन निकालने के अधिकार की नीलामी होगी
  • ब्लॉक की नीलामी के लिए कोई योग्यता शर्त नहीं होगी। सिर्फ अग्रिम भुगतान मांगा जाएगा

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 11:19 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी से अर्थव्यवस्था को बचाने की मुहिम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए आत्मनिर्भर भारत पैकेज के विवरण की चौथी खेप जारी करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कोयला और खनिज सेक्टर में साहसिक सुधारों की घोषणा की। उन्होंने कोयला सेक्टर को कमर्शियल माइनिंग के लिए खोल दिया। इसके साथ ही सरकार ने कोयला सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करने का ऐलान किया।

वित्तमंत्री की इस घोषणा से कोयला सेक्टर में सरकार की मोनोपॉली खत्म होगी। इसका मतलब यह है कि अब कोयले का उपयोग सिर्फ सरकार ही तय नहीं करेगी, बल्कि कोयला उत्पादन करने वाली कंपनियां अब अपने लाभ के लिए भी कोयले का उत्पादन कर सकेंगी। कोयला उत्पादन कंपनियों को सरकार के साथ राजस्व साझा करना होगा। यहां हम जानेंगे कि कोयला और खनिज सेक्टर में क्या-क्या सुधार किए गए, इसके क्या लाभ मिलेंगे और इस पर सरकार कितना खर्च करेगी।

कोयला सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास कोयले का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। इसके बावजूद भारत कोयले का आयात करता है। वित्त मंत्री ने कहा कि कोयला सेक्टर में भारत आत्मनिर्भर बनेगा और उतने ही कोयले का आयात किया जाएगा, जितने का देश में उत्पादन नहीं हो सकेगा।

क्या करेगी सरकार : प्रतियोगिता, पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निजी सेक्टर की भागीदारी सुनिश्चित करेगी सरकार।

कितना होगा खर्च : 50,000 करोड़ रुपए। इसके तहत कोयले को खदान से रेलवे साइडिंग तक लाने के इंफ्रास्ट्र्रक्चर को बेहतर बनाने पर 18,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

क्या हुए सुधार : कमर्शियल माइनिंग। सरकार की मोनोपॉली खत्म। सेक्टर में प्रवेश करने के लिए शर्तें होंगी आसान। कंपनियां सरकार के साथ राजस्व करेंगी साझा। पर्यावरण की रक्षा के लिए कोल गैसीफिकेशन और लिक्विफिकेशन को प्रोत्साहित किया जाएगा। कोयला उत्पादन में हर साल 40 फीसदी बढ़ोतरी करने की अनुमति मिलेगी।

क्या हुए बदलाव : पहले कैप्टिव उपभोक्ता या अंतिम उपयोग वाले उपभोक्ता ही कोयला ब्लॉक के लिए बोली लगा सकते थे। अब कोई भी पार्टी कोयला ब्लॉक के लिए बोली लगा सकता है और कोयले को खुले बाजार में बेच सकता है।

क्या-क्या किया जाएगा : कोल इंडिया के खदानों से कोल बेड मीथेन निकालने के अधिकार की नीलामी होगी।

कोयला कारोबार में प्रवेश की शर्तें हुईं आसान : 50 ब्लॉक तुरंत ऑफर किए जाएंगे। ब्लॉक की नीलामी करने के लिए कोई योग्यता शर्त नहीं होगी। सिर्फ अग्रिम भुगतान मांगा जाएगा। उसकी भी एक सीमा होगी।

पार्शियली एक्सप्लोर्ड ब्लॉक के लिए एक्सप्लोरेशन कम प्रोडक्शन प्रणाली : पहले पूरी तरह से एक्सप्लोर्ड ब्लॉक की ही नीलामी होती थी। अब आंशिक रूप से एक्सप्लोर्ड ब्लॉक की भी नीलामी हो सकेगी। एक्सप्लोरेशन में निजी क्षेत्र को भी भाग लेने की अनुमति मिलेगी।

तेज उत्पादन के लिए प्रोत्साहन : नियत समय से पहले उत्पादन करने वालों को मिलेगा प्रोत्साहन। इसके लिए रिवेन्यू शेयर में मिलेगी छूट।

कब तक होगा : वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया कि ये सुधार कब तक किए जाएंगे।

खनिज क्षेत्र में सीमलेस कंपोजिट एक्सप्लोरेशन कम माइनिंग कम प्रोडक्शन का आएगा युग

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार खनिज क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देगी। सेक्टर का विकास करने और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। खास तौर से एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में नई तकनीक आजमाई जाएगी।

क्या किया जाएगा : सीमलेस कंपोजिट एक्सप्लोरेशन कम माइनिंग कम प्रोडक्शन की व्यवस्था। इसका मतलब है कि मिनरल उत्पादन के लिए जरूरी अन्य सेक्टरों (बिजली बनाने के लिए कैप्टिव कोयला खदान) की भी साथ-साथ नीलामी होगी। उदारहण के तौर पर बॉक्साइट और कोयला ब्लॉक की साथ-साथ नीलामी होगी। इससे अल्यूमीनियम उद्योग कम दर पर बिजली हासिल कर पाएगा और प्रतिस्पर्धी बनेगा।

500 नए ब्लॉक ऑफर किए जाएंगे : इन ब्लॉक की खुली और पारदर्शी तरीके से नीलामी होगी।

कैप्टिव और गैर कैप्टिव खदान का अंतर होगा खत्म : इससे माइनिंग लीज को ट्र्रांसफर हो सकेगा और बचे हुए सरप्लस मिनरल को बेचा जा सकेगा।

अलग-अलग खनिजों का बनेगा इंडेक्स : खनन मंत्रालय अलग-अलग खनिजों के लिए इंडेक्स बना रहा है।

स्टांप ड्यूटी को किया जाएगा तर्कसंगत : माइनिंग लीज आवंटित किए जाते समय भुगतान किए जाने वाले स्टांप ड्यटी को तर्क संगत बनाया जाएगा।

कब तक होंगे : मंत्री ने कोई समय सीमा नहीं दी।