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दिल्ली के किसान ने 10 प्रवासी श्रमिकों को बिहार भेजने के लिए खरीदे फ्लाइट के टिकट, मजदूर बोले- खुशी बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं


  • मजदूरों की फ्लाइट गुरुवार सुबह 6 बजे बिहार की राजधानी पटना के लिए उड़ान भरेगी
  • लखिंदर राम ने कहा- मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं प्लेन में सफर करूंगा

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 07:34 PM IST

नई दिल्ली. देशभर में करीब दो महीनों से लॉकडाउन लागू है। दूसरी तरफ प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए तमाम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इस बीच, दिल्ली के एक किसान का प्रयास सभी के लिए मिसाल बनकर सामने आया है। दरअसल, किसान ने उसके यहां काम करने वाले 10 बिहारी मजदूरों को घर भेजने के लिए फ्लाइट के 10 टिकट खरीदे हैं। आखिरकार प्रवासी मजदूरों का अपने घर लौटने का सपना, किसान की इस कोशिश से पूरा होने जा रहा है।

मजदूरों की फ्लाइट गुरुवार सुबह 6 बजे बिहार की राजधानी पटना के लिए उड़ान भरेगी। इन मजदूरों ने अप्रैल में घर जाने की योजना बनाई थी मगर अब तक सफलता नहीं मिल पाई थी, उन्हें यह भरोसा नहीं हो पा रहा है कि वह अपने घर साइकिल से नहीं, हजारों किमी पैदल चलकर नहीं बल्कि सीधे प्लेन से जा रहे हैं। सभी मजदूर समस्तीपुर में एक गांव के रहने वाले हैं। 

खुशी बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं- राम

लखिंदर राम अपने बेटे के साथ घर लौट रहे हैं। उन्होंने पीटीआई से कहा, ”मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं प्लेन में सफर करूंगा। मेरे पास इस खुशी को बताने के लिए शब्द ही नहीं हैं। हालांकि, मैं थोड़ा नर्वस भी हूं कि कल एयरपोर्ट पहुंचेंगे तो मैं क्या करूंगा।”

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राहुल गांधी आज प्रवासी मजदूरों पर एक डॉक्युमेंट्री जारी करेंगे, इसमें उनके जज्बे, संकल्प और जीने की कहानी होगी


  • राहुल ने ट्वीट कर बताया- मेरे यूट्यूब चैनल पर मजदूरों के धैर्य, दृढ़ संकल्प और अस्तित्व की अविश्वसनीय कहानी देखिए
  • कांग्रेस मजदूरों की वापसी पर केंद्र को लगातार घेर रही है, सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा- सरकार हर मोर्चे पर फेल हो गई

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:13 AM IST

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 16 मई को दिल्ली में प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की थी। वे शनिवार सुबह 9 बजे अपने यूट्यूब चैनल पर इन मजदूरों से जुड़ी एक डॉक्युमेंट्री लाइव करेंगे। इसमें मजदूरों के जज्बे, संकल्प और जीने की कहानियां शामिल होंगी।

राहुल ने इसकी जानकारी ट्वीट कर दी। उन्होंने लिखा, ‘शनिवार सुबह 9 बजे इन मजदूरों की धैर्य, दृढ़ संकल्प और अस्तित्व की अविश्वसनीय कहानी देखिए।’

राहुल ने मास्क बांटे और मजदूरों को घर तक पहुंचाया था

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने पिछले शनिवार को दिल्ली में सुखदेव विहार फ्लाईओवर के पास प्रवासी मजदूरों से 30 मिनट मुलाकात की थी। उनके साथ फुटपाथ पर बैठकर बातचीत की थी। मास्क, खाना और पानी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बोलकर गाड़ियां मंगवाईं और कुछ मजदूरों को घर तक पहुंचाया था।

वित्त मंत्री ने राहुल का बिना नाम लिए कहा था- वो ड्रामेबाज नहीं हैं क्या?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा, “प्रवासी जब पैदल जा रहे हैं तो उनके साथ बैठकर बात करने की बजाय बेहतर होगा कि उनके बच्चों या उनके सूटकेस को उठाकर पैदल चलें। दुख के साथ कह रहूं इस बात को, जबकि आराम से भी कह सकती हूं। कांग्रेस अपनी सरकारों वाले राज्यों को क्यों नहीं बोलती कि और ट्रेन मंगवाओ। मैं कांग्रेस के ही शब्दों में कह रही हूं कि कांग्रेस हर दिन ड्रामेबाजी कर रही है। कल प्रवासियों के साथ रास्ते पर बैठकर बात करने की जो घटना हुई, क्या ये ऐसा करने का समय है? वो ड्रामेबाज नहीं हैं क्या?”



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मजदूर बोले- महाराष्ट्र में लाठियां मिलीं, मध्य प्रदेश में आए तो लगा हम पुलिस के मेहमान हैं; यूपी सरकार बसों से घर पहुंचा रही


  • यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले सुरेश आटो से ही निकले हैं, कहते हैं- मेरे जैसे 20 हजार आटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं
  • मध्य प्रदेश और यूपी में पैदल पलायन लगभग बंद; बाइक, ऑटो, टैक्सी, कार, ट्रक और सरकारी बसों में ही प्रवासी मजदूर जा रहे
  • मजदूर कहते हैं- बंबई में अपना बसेरा है, जिंदगीभर के लिए तो उसे छोड़ नहीं सकते, सबकुछ ठीक रहा तो फिर से लौटेंगे

गौरव पांडेय

May 20, 2020, 10:06 AM IST

रात के सवा 12 बजे रहे हैं। विदिशा से सागर जाने वाले हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर चार काली-पीली टैक्सी और दो आटो रिक्शा वाले खड़े हैं। यहां वे पेट्रोल-डीजल डलवाने के बाद सुस्ता रहे हैं। उनके साथ में छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। कुछ यहीं पर चादर बिछाकर सोने की तैयारी भी कर रहे हैं। 
शरद चंद्र पांडेय यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं। कहते हैं कि हमें तीन दिन हो गए हैं, मुंबई से निकलेI हम वहां टैक्सी चलाते थे, लॉकडाउन से पहले अम्मा का आंख का ऑपरेशन कराने के लिए बंबई ले गए थे। लेकिन आंख ऑपरेशन छोड़िए बाकी धन्धा-पानी भी चौपट हो गया। खाने की लाले पड़ गए हैं, बस अब घर जा रहे हैं, कम से कम खाने-पीने को तो मिलेगा। कुछ नहीं तो खेती बारी है, वही कर लेंगे।

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। तीन दिन पहले मुंबई से पति के साथ आटो में निकली हैं। 

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। पति मुंबई में आटो चलाते हैं। कहती हैं कि शादी के बाद पति के साथ बंबई चली गई थी, तब से वहीं की होकर रह गई। आज ऐसे हालात हो गए हैं कि ऑटो से ही घर जाना पड़ रहा है। अब करें भी तो क्या करें। दो महीने से उनका (पति) का ऑटो खड़ा है। बंबई में कोरोना बढ़ ही रहा है। दो महीने हो गए, सरकार की तरफ से कोई मदद मिली नहीं। उलटा घर में बंदी बना दिया। अब जाएंगे गांव में ही कुछ करेंगे।
अवधेश शुक्ला बंबई की एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे, वे शनिवार को पांच बजे बाइक से प्रयागराज के लिए निकले हैं। कहते हैं कि कसोराघाट पर अभी बाइक खराब हो गई थी, पांच किलो मीटर खींच कर लाना पड़ा है। अब अंधेरा हो गया है, सुबह होने पर बनऊंगा, तब यहीं सो रहा हूं। 
मुंबई वापस जाने के सवाल पर अवधेश कहते हैं कि बंबई में भी अपना बसेरा है, जिंदगी भर के लिए तो उसे छोड़ सकते नहीं, गांव में भी तो बैठकर कुछ नहीं कर पाएंगे। अब चल रहे है, दो-चार दिन में पहुंच ही जाएंगे। वहां मरने से बेहतर है, घर चलें। दो महीने से कंपनी से सैलरी नहीं मिली। अब सेविंग के पैसे भी खत्म हो चुके हैं। मकान मालिक को किराये देने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। 

मुंबई में आटो और काली-पीली टैक्सी चलाने वाले तीन-चार लोगों को ग्रुप बनाकर चल रहे हैं।

प्रतापगढ़ के पट्‌टी के रहने वाले सुरेश पांडेय बंबई में आटो चलते हैं। वे पूरे परिवार को लेकर गांव निकले हैं। कहते हैं कि मेरे जैसे 20 हजार से ज्यादा ऑटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं। सब कुछ ठीक रहा तो तीन-चार महीने में लौटूंगा, नहीं तो घर पर ही कुछ करूंगा। 

पट्‌टी के रहने वाले शरद अपने माता को आंख का ऑपरेशन कराने मुंबई लेकर गए थे, लेकिन अब बिना ऑपरेशन कराए लौट रहे हैं।

भानू मुंबई ड्राइविंग करते हैं। कहते हैं कि महाराष्ट्र वाले वैसे ही यूपी-बिहार वालों से जलते थे। अब तो उन्हें मौंका भी मिल गया है। वे मराठी लोगाें के लिए बस चला रहे हैं। बाहर वालों से कहते हैं कि बस का इंतजार करो एक दो हफ्ते का। दलाल बस के टिकट के लिए दो से तीन रुपए मांगते हैं। वहां रोक तो रहे हैं, लेकिन अब करेंगे क्या? अब भूखे थोड़े मरेंगे।

भानू बताते हैं कि रास्ते में महाराष्ट्र के पुलिस वालों ने भी खूब परेशान किया, कईयों को तो डंडे भी पड़ रहे। लेकिन मध्य प्रदेश सीमा में पहुंचते ही सब बदल गया। रास्ते में जगह-जगह ऐसी व्यवस्था मिली कि बता नहीं सकते हैं, इसी धरती पर स्वर्ग नजर आ रहा है, टू स्टार थ्री स्टार इंस्पेक्टर खुद अपने हाथ से चाय, छांछ, ब्रेड, नाश्ता दे रहे हैं। यहां कोई दिक्कत नहीं है। भगवान चाहेंगे तो दो-तीन दिन में घर पहुंच जाएंगे, फिर खेती शुरू करेंगे। 

  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर में दो हजार लोग बस के इंतजार में

सुबह के सात बज रहे हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले की सीमा पर करीब दो हजार से ज्यादा लोगों का जमावड़ा है। मध्य प्रदेश की बसें महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को यहीं पर छोड़ रहे हैं। इनमें ज्यादातर इंदौर की सिटी बसें हैं। लेकिन अभी यहां यूपी की दो बस ही खड़ी हैं। ऐसे मे लोग इधर-उधर बैठे हैं, पुलिस प्रशासन ने लोगों के लिए चाय-नाश्ते का बंदोबस्त कर रखा है।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले में बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।

यहां से ललितपुर शहर पहुंचते हैं तो प्रयागराज कुंभ के लिए चलाई गई कुछ स्पेशल बसें बार्डर की ओर जाते हुए दिखाई देती हैं। ललितपुर-झांसी हाईवे पर एक पति-पत्नी अपने दो छोटे बच्चों को  रेहड़ी वाले ठेले पर बिठाकर ले जा रहे हैं। हाइवे पर और पैदल चलने वाले लोग तो बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। हां, ट्रकों और मिनी ट्रकों के अंदर लोग जरूर बैठकर जा रहे हैं।  

  • तपती दोपहरी और 42 डिग्री तापमान में लोग ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे 

झांसी, दिन के 11 बज रहे हैं, तेज धूप के बीच प्रवासी मजदूर ट्रकों और विकप के अंदर बैठकर जा रहे हैं। तापमान 42 डिग्री से ज्यादा है। कुछ मजदूर ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे। वहीं, कुछ प्रवासी मजदूर सड़क किनारे पेड़ों के छांव में आराम कर रहे हैं। 

यूपी सीमा में ज्यादातर मजदूर ट्रकों और विकप में बैठकर जाते दिखाई दिए।

जालौन, छोटे बाजारों में प्रवासी मजूदरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई। स्थानीय युवक पूरी-सब्जी, केला, पानी दे रहे हैं। इन्हीं में से एक रफीक जो लोगों को पानी पिला रहे हैं। कहते हैं कि यह समय लोगों की मदद करने का है। इसलिए हम कर रहे हैं। भूखे-प्यासे लोग हमें दुआ देंगे। सद्दाम कहते हैं कि हमें जबसे पता चला कि लोग इस तरह अपने घरों को आ रहे हैं, तब से हम रोज इस तपती दोपहरी में भी लोगों को नाश्ता करा रहे हैं, यह हमारा फर्ज है।  

  • विकप में 23 मजदूर ऊपर-नीचे बैठे हैं, कहते हैं- दो रोटी कम खाएंगे, पर खुली हवा में सांस तो लेंगे

कानपुर देहात, यूपी के सिद्धार्थनगर के रहने वाले करीब 23 मजदूर एक विकप में ऊपर नीचे-बैठे हुए हैं। ये सभी मुंबई की प्लास्टिक फैक्टरी में काम करते थे। अब फैक्टरी में कामकाज बंद है। इन्हीं में से एक रामपाल कहते हैं कि अब वहां कुछ बचा ही नहीं था, जो रुकते। न काम है, न रोटी है। इसलिए अपने-अपने गांव जा रहे हैं। दो रोटी कम मिलेगी, मगर खुली हवा में सांस तो ले पाएंगे न। हम सभी 23 लोग आसपास के गांवों के ही हैं, अब जरूरत पड़ी तो अपने लोग ही काम आते हैं।

  • लखनऊ-कानपुर हाइवे पर आम दिनों जैसा ही ट्रैफिक, भाजपा नेता स्टाल लगाकर मजदूरों को खिला रहे

कानपुर, दिन के तकरीबन 3 बज रहे हैं, कानपुर में जगह-जगह स्थानीय भाजपा नेताओं ने खाने-पीने का स्टाल लगा रखा है। कुछ स्टालों पर विधायक की फोटो भी लगाई गई है। कुछ जगहों पर पुलिस वाल कुर्सी लगाकर बैठे हुए हैं,सामने फूल माला रखा है, पीछे विधायक की फोटो लगी है। यहां लोग आने वाली हर गाड़ी को रोककर खाने-पीने का सामान दे रहे हैं, जो नहीं भी लेना चाह रहे, उनकी गाड़ी में भी लोग जबरदस्ती केला, पूड़ी सब्जी, खिचड़ी, पानी आदि रख दे रहे हैं।

यहां से आगे बढ़ते हैं, तो कानपुर-लखनऊ हाईवे पर काफी ट्रैफिक है, दुकानें भी बड़ी संख्या में खुली नजर आ रही हैं। हालांकि पुलिस ने कुछ जगहों पर बैरिकेडिंग वगैरह कर रखा, बावजूद लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकल रहे हैं।चार बाग बस अड्‌डे पर बड़ी संख्या में बसें खड़ी हैं। गेट पर पुलिस मुस्तैद है। रेलवे स्टेशन के बाहर भी भीड़भाड़ है। कुछ निजी वाहन लोगों को बैठा रहे हैं। सफाई कर्मी झाड़ू मार रहे हैं। हजरतगंज में आम दिनों के मुकाबले भीड़ थोड़ी कम है।

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नंगे पैर, पैदल, साइकिल से, ट्रकों पर और गाड़ियों में भरकर अपने घर को चल पड़े लोगों की कहानियां कहतीं चुनिंदा तस्वीरें


  • वे लोग जो कई सौ किमी पैदल चले, कहीं खाना नसीब हुआ तो कहीं वो भी नहीं, तपती दुपहरी में बोतल से बूंद-बूंद पानी बचाया ताकि घर पहुंच सकें
  • गाड़ियों में कीड़े-मकौड़ों की तरह भरे मजदूर, सोशल डिस्टेंसिंग का दूर-दूर तक नामो निशान नहीं, बस यही उम्मीद कि शायद ये सवारी उन्हें मंजिल तक पहुंचाए

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 11:14 PM IST

झांसी. देश में जब लॉकडाउन हुआ, उसके अगले दिन से ही देशभर में प्रवासी अपने-अपने गांवों को रवाना होने लगे थे। इनमें मजदूरों की संख्या सबसे ज्यादा थी। 53 दिनों बाद भी यह सिलसिला जारी है। पिछले 3 हफ्तों से तो महाराष्ट्र से एमपी, यूपी, बिहार समेत बाकी राज्यों में लौटने वाले प्रवासियों की बाढ़ सी उमड़ पड़ी। महाराष्ट्र से जिस रास्ते यह मजदूर अपने घरों के लिए निकले हैं, ऐसे ही एक रास्ते पर दैनिक भास्कर के दो रिपोर्टर विनोद यादव और मनीषा भल्ला भी चल रहे हैं। प्रवासियों के साथ इनका यह सफर सिर्फ इसलिए है ताकि 40 डिग्री तापमान में ट्रकों, टैम्पो में ठूसठूस कर भरे गए और पैदल चल रहे लोगों की अनसुनी कहानियां आप तक भी पहुंच सके। रविवार दोपहर मुंबई से शुरू हुए सफर के दौरान उन्होंने जो कुछ अपने कैमरे में कैद किया, वो आपसे साझा कर रहे हैं….

नासिक हाईवे पर ठाणे का पहला नाका है, खारेगांव टोल। यहां दोपहर करीब 2 बजे 1500-2000 प्रवासी मजदूरों की भीड़ थी। इस जगह से महाराष्ट्र सरकार इन्हें महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश बॉर्डर तक छोड़ रही है। यहां सुबह 4 बजे से लोग लाइन में लगे थे। दोपहर 2 बजे जब तापमान 40 डिग्री पहुंच गया तो इन लोगों ने अपने-अपने बैगों को लाइन में लगाकर टीन शेड में थोड़ा आराम किया।

नासिक हाईवे पर कसारा गांव में 29 लोगों की यह टोली मिली। ये महाराष्ट्र के रायगढ़ से 15 मई को निकले हैं और असम जा रहे हैं। जाने के लिए जब कोई साधन नहीं मिला तो इन लोगों ने 5-5 हजार रुपये घर से बुलवाए और नई साइकिलें खरीदी। अब आगे 2800 किमी तक ये लोग इन्हीं साइकिलों के सहारे अपने घरों तक चलने वाले हैं।

नासिक हाईवे पर दोपहर साढ़े तीन बजे एक टेंपो खड़ा था। इसमें सवार सभी 50 लोग रोड के बगल में खड़े थे। इन लोगों का कहना था कि मुंबई से 200 किमी दूर आकर ड्राइवर और ज्यादा पैसे मांगने लगा जब हमने मना किया तो गाड़ी किनारे खड़ी कर सो गया, दोपहर से हम उसके उठने का इंतजार कर रहे हैं।

कोमल यादव  छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव से पैदल निकले हैं। 4 दिनों से लगातार चल रहे हैं। बेटी भूमिका 4 साल की है। पैदल चलते-चलते वह थक गई है। इसलिए पिता ने उन्हें कांधे पर बिठा लिया है। इनके साथ परिवार के 5 लोग और भी हैं। सभी पैदल चले आ रहे हैं।

नासिक नाके पर जिन भी ट्रकों में मजदूर बैठे दिखाई देते हैं। उन्हें आरटीओ और पुलिसवाले नीचे उतार लेते हैं। इन लोगों का यहां नाम-पता लिखकर बस के द्वारा महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर छोड़ा जाता है।

यह तस्वीर महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर स्थित बड़ी बिजासन माता मंदिर की है। महाराष्ट्र से मजदूरों को यहीं छोड़ा जा रहा है। यहां मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों की सरकारों ने अपने-अपने नागरिकों को ले जाने के लिए बोर्ड तो टांगे हैं लेकिन बस आते हुए नजर नहीं आती। नतीजतन लोग यहां से भी अपना-अपना बंदोबस्त कर आगे बढ़ रहे हैं। यहां रात 11 बजे 4 से 6 हजार लोगों की भीड़ थी।

बिजासन माता मंदिर पर मीरा यादव बस का इंतजार कर रही हैं। हाथ में 15 दिन का बच्चा है। सिजेरियन के जरिए बच्चा हुआ है। वे अपने बच्चे के साथ अकेली हैं। ट्रक वाले को 2 लोगों का किराया देने के पैसे नहीं थे इसलिए पति मुंबई में ही रूके हैं। मीरा को यूपी के सिद्धार्थनगर जाना है। टांके दिखाते हुए वे कहती हैं, किसी का हाथ लग जाता है तो दर्द के मारे जान निकल जाती है।

देवास टोल नाके के पास एक 16 लोगों का परिवार खड़ा दिखाई दिया। मुंबई के वाशी से यह परिवार एक छोटे फूड ट्रक में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के लिए निकला है। परिवार में पांच महिलाएं है, जिनमें दो महिलाएं गर्भवती हैं। अमृता को पांचवा महीना लगा है और ममता को आठवां। तीन दिन से ये दोनों गर्भवती महिलाएं ट्रक में सिकुड़ कर बैठी हैं। कहती हैं अभी तो तीन दिन और बैठकर जाना है।

इंदौर-देवास बायपास पर महाराष्ट्र से आ रहीं ऐसी कई छोटी-बड़ी गाड़ियां हैं, जिनमें लोग ठसाठस भरे हुए हैं। इनके लिए प्रशासन की कोई बस सुविधा नहीं है।

झांसी से ठीक 40 किमी पहले एक के बाद एक कई ऑटो मिले। ये ऑटो उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहे हैं। एक ऑटो चालक ने बातचीत में बताया कि मुंबई से 60% से ज्यादा ऑटोवाले अपने परिवारों के साथ यूपी, बिहार के अपने गांवों की ओर निकल गए हैं।

तस्वरी शिवपुरी-झांसी बॉर्डर की है। यहां यूपी के गांवों में जाने के लिए प्रवासी इकट्ठा हुए हैं। पुलिस ने इन्हें लाइनों में लगा दिया है। जैसे-जैसे यूपी के अलग-अलग जिलों से बसें आती हैं, वैसे-वैसे पुलिस 10-10 लोगों के झूंड में लोगों को बसों में बैठाती है।

शिवपुरी में खत्म हो रही मध्यप्रदेश बॉर्डर पर हाल यह है कि लोग यूपी की बसों में चढ़ने के लिए बसों की खिड़कियों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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इंदाैर बाइपास पर मजदूर की सेवा में सब कुछ माैजूद… दवा, पानी, भोजन, चप्पल, कपड़े, चाय, दूध, कोल्डड्रिंक्स नाश्ता का भी स्टॉल लगा


  • मुंबई- इंदौर हाईवे पर 24 घंटे मजदूरों की सेवा के लिए शहरवासियों ने बाइपास काे ही ठिकाना बनाया
  • मजदूों के लिए आरएसएस की सेवा भारती ने भोजन, नमकीन, गमछा, ककड़ी, प्याज, कपड़े और सेंव-परमल रखे

दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 12:01 PM IST

इंदौर. टाटपट्‌टी बाखल में डॉक्टरों पर पत्थर फेंकने की घटना ने दिल जरूर दुखाया है, लेकिन वह इंदौर की पहचान नहीं है। दिलदार इंदौर, इंसानियत का इंदौर, मदद का इंदौर देखना है तो जरा कुछ देर के लिए बस हाईवे (बाइपास) पर चले जाइए। जैसे ही पता चला कि महाराष्ट्र से लाखों लोग पलायन कर रहे हैं तो राह में पलक पावड़े बिछाने के लिए शहरवासी बाइपास पहुंच गए। नाश्ते में खिचड़ी, चाय, टोस, बिस्किट, पोहा और जलेबी, भोजन में दाल-चावल, सब्जी-पूरी, रोटी-सब्जी से लेकर फल और लू से बचने के भी कई पदार्थ बांटे जा रहे हैं। शुक्रवार सुबह से ही बाइपास पर फल नाश्ते और खिचड़ी के स्टॉल लग गए हैं। यहां से गुजरने वालों को ठंडा पानी भी पिलाया जा रहा है। 

इंदौरी कहीं भी रहें स्वच्छता का पूरा ध्यान रखने हैं… बाइपास पर भी तरबूज बांटने के दौरान पहले डस्टबिन की व्यवस्था की गई। लोगों को कचरा डस्टस्बिन में डालने की समझाइश भी देते रहे।

रोजाना खाने के साथ ही बच्चों के लिए बिस्किट का भी इंतजाम

बाइपास पास पर आमजन के साथ जनप्रतिधि भी लाेगों की सेवा में लगे हैं। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पलायन कर रहे लोगों के लिए टोल नाके के पास सभी प्रकार की व्यवस्था की है। यहां स्टाॅल लगाकर रोजाना श्रमिकों को खाना दिया जा रहा है। इसके अलावा ठंडे पानी की बाेतल, नंगे पैर चल रहे मजदूरों के लिए चप्पल-जूते, बच्चों और बुजुर्गों के लिए फल और बिस्किट का भी इंतजाम किया गया है। 

टोल नाके से गुजरने वालों के लिए चप्पल, खाना सभी की व्यवस्था की गई है।

जूते और चप्पल भी, ताकि पैदल चलने पर पैरों में छाले न पड़ें

कांग्रेस नेता रामेश्वर पटेल ने लोगों को शिप्रा तक छोड़ने के लिए ट्रैक्टर रखे, सुबह पोहा-जलेबी, दोपहर में खिचड़ी भोजन, मीठे चावल बना रहे हैं। आगे रानी बाग का अतुल अग्रवाल ग्रुप लोगों के लिए भोजन, बिस्किट, फल और चाय बांट रहा। कार सवार संस्था साथिया पानी की बॉटल बांट रही है। भिचौली मर्दाना के मुकुल बाहेती ने भोजन, केले का स्टॉल लगाया है। आगे रामेश्वर गुड्डा पटेल, भिचौली हफ्सी में चंद्रशेखर मालवीय-विनोद बिलोरिया का भोजन स्टॉल लगा है। इसमें जूते-चप्पल भी रखे। सिमरन रेसीडेंसी में छाछ और नींबू पानी।

नंगे पैर को चूते-चप्पल का सहारा… श्रमिकों के लिए बाइपास पर जूते-चप्पल की भी व्यवस्था की गई है। साथ ही कपड़े भी बांटे जा रहे हैं।

पोहा-जलेबी, ओआरएस, दर्दनाशक मरहम और कपड़े भी

सोनवाय टोल पर लोगों के लिए सुबह-शाम भोजन। पिगडंबर में तिल्लोर के युवकों ने खिचड़ी, तरबूज, ठंडे पानी, पोहा-जलेबी की व्यवस्था की है। राऊ गोल चौराहे पर संजय तंवर, अंकुश अठावले, लोकेश पांचाल सहित कई युवकों ने पोहा, चप्पल-जूते, ओआरएस, ग्लूकोज, पीला मरहम (दर्द नाशक) और ठंडा पानी रखा है। आगे आरएसएस की सेवा भारती ने भोजन, नमकीन, गमछा, ककड़ी, प्याज, कपड़े और सेंव-परमल रखे हैं। आगे कार सवार रानीपुरा के व्यापारी मित्र मुर्तजा, मुस्तफा और मुस्ताली लोगों को पानी और बिस्किट दे रहे हैं।

श्रमिकों के लिए स्टॉल में पूड़ी, सब्जी और सेव की व्यवस्था की गई। 

यहां 24 घंटे भंडारा चालू, भोजन के साथ फल लेना भी जरूरी
न्यूयॉर्क सिटी के मालिक अरुण जैन ने 24 घंटे भंडारा खोला है। भोजन के साथ फल लेना अनिवार्य है। कई ट्रक खरबूजे और तरबूज बंट गए। साथ में छाछ, केले, बच्चों के लिए दूध और बिस्किट भी। तेजाजी नगर में माहेश्वरी समाज खिचड़ी, फल और बच्चों के लिए चने व राजगिरे के लड्डू दे रहा है। एनर्जी के लिए ओआरएस, जलजीरा और इलेक्ट्रॉल। रालामंडल में सांई सेवा समिति की तरफ से चाय-पोहा, खिचड़ी और छाछ। सिल्वर स्प्रिंग में सेवा भारती ने भोजन के साथ रूह अफजाह, सभी नमकीन और बिस्किट व शरबत रखे हैं।

बाइपास पर श्रमिकों के लिए खिचड़ी भी है।

चाय और ब्रेड के साथ हर दिन 500 लोगों को दे रहे हैं दवाई
ओमेक्स सिटी के आगे कुछ दोस्तों ने मिलकर ब्रेड, चाय और दवाइयों का इंतजाम किया है। एक निजी अस्पताल के डॉ. एमएस खान सुबह-शाम लोगों को दवाई दे रहे हैं। खान का कहना है कि रोजाना 500 से ज्यादा मजदूर पानी की कमी, उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत लेकर आ रहे हैं। कनाड़िया में पाकिजा के टोस औ चाय के स्टॉल भी लगे हैं। आगे क्रेडाई।