Categories
sports

चीन खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करता है, जब भारत यही करता है तो चीन रुकावटें खड़ी करता है, गश्त में बाधा डालता है


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है, दोनों देशों मसले को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया
  • चीन ने यहां सैन्य तैनाती बढ़ाई, जवाब में भारत ने भी यही किया

नेशनल सिक्युरिटी एडवायजरी बोर्ड के सदस्य प्रो. बिमल पटेल

May 29, 2020, 10:18 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष भी हुआ। अमेरिका ने मध्यस्थता की पेशकश की। दोनों ही देशों ने इसे ठुकरा दिया। कहा- मसला बातचीत से हल कर लेंगे। बहरहाल, इस मसले पर भास्कर ने प्रोफेसर (डॉक्टर) बिमल एन. पटेल से उनकी राय जानी। प्रोफेसर पटेल गुजरात की रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल हैं। इसके अलावा वे नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं। यहां भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव और इससे जुड़े मुद्दों पर उनकी राय….

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हो रही घटनाओं को कई तरह से देख सकते हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि गलतफहमियां क्यों बढ़ीं। सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच कोई ऐसी सीमा नहीं है, जिसे भारत और चीन दोनों ही मानते हों। 
चीन यहां अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। लेकिन, जब भी भारत यही काम करता है तो वह विरोध करता है। हमारी गश्त को भी प्रभावित किया जाता है। भारत की तरफ से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया ही जाना चाहिए और इस पर जोर भी दिया गया है। सैन्य टुकड़ियों की तैनाती को लेकर भ्रम की स्थिति है। लेकिन, इस बारे में कयास नहीं लगाए जाने चाहिए।
झड़पें पहले भी होती रही हैं। लिहाजा, हालिया घटनाओं को अपवाद नहीं माना जा सकता। इसको सुलझाने में वक्त लगता है। अफसर और एजेंसियां हर घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हैं। जमीनी हकीकत के बारे में फैसला सेना पर छोड़ना चाहिए। हमारी सेनाओं को पूरा समर्थन है और हमेशा मिलना चाहिए। देश की अखंडता और प्रभुसत्ता को बनाए रखना हर राज्य का कर्तव्य है। भारत भी यही कर रहा है। लेकिन, इसी समय हम तनाव बढ़ाए बिना शांति से मामले को हल करने की कोशिश भी कर रहे हैं।  
भारत ने कभी यथास्थिति को बदलने की कोशिश नहीं की। और हम किसी दूसरी ताकत को भी ऐसा नहीं करने देंगे। इस मामले के कुछ दूसरे पहलू भी हैं। इसे चीन की विस्तृत रणनीति का भी हिस्सा नहीं मानना चाहिए। इस मामले का (लद्दाख में तनाव) भारत के नए एफडीआई नियमों से भी सीधा संबंध नहीं है। क्योंकि, यह नियम देश के आर्थिक हित ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। कई बार ये देखा गया है कि कुछ देश अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों का इस्तेमाल घरेलू राजनीति या उद्देश्य के लिए करते हैं। 
नेपाल के मामले में भी यही बात है। लिपुलेख रोड का उसने विरोध किया। लेकिन, इसमें चीन को लाना या जोड़ना सही नहीं होगा। चीन ने भारत में मौजूद अपने नागरिकों को वापस लाने का फैसला किया। लेकिन, ये छात्र, पर्यटक और शॉर्ट टर्म वीजा होल्डर्स थे। इन हालात में तो कोई भी देश यही करता। फिर चाहे वो भारत हो या चीन।  
फिलहाल, तनाव के जो हालात हैं। उन्हें पहले की तरह शांतिपूर्ण और दोनों देशों की बातचीत से हल करना चाहिए। हमारी लीडरशिप और 2020 का भारत दुनिया के अहम मामलों में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस दौरान हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतिगत हितों का भी ध्यान रखते हैं। 

Categories
sports

लद्दाख में भारत और चीन के जवानों में तनाव बरकरार, चीन विवादित क्षेत्र में बंकर बनाने के लिए मशीनें ला रहा


  • रिपोर्ट में कहा गया था कि एलएसी के पास चीन ने भारतीय जवानों को बंधक बनाया, भारतीय सेना ने इससे इनकार किया
  • पूर्वी लद्दाख में इसी महीने कई बार भारत-चीन के सैनिक आमने-सामने आए; बातचीत से हालात संभालने की कोशिशें जारी

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 01:22 AM IST

नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास विवादित इलाके में भारत और चीन के जवानों के बीच तनाव कम नहीं हो रहा है। हालांकि, दोनों ही ओर से बातचीत के जरिए हालात को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी हैं। पैंगोंग सो और गलवान घाटी के विवादित क्षेत्रों के हालात से वाकिफ सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच अभी भी स्थितियां सामान्य नहीं हुई हैं। दोनों तरफ सैनिक अपनी पोजिशन पर डटे हैं। चीन गलवान में बंकर बनाने के लिए भारी उपकरण ला रहा है।

भारतीय सेना ने रविवार सुबह एक रिपोर्ट को लेकर बयान जारी किया। इसमें कहा गया था कि चीन की सेना ने भारतीय सैनिकों को कुछ दिन बंधक बनाने के बाद छोड़ा। सेना ने कहा- सीमा पर किसी भी भारतीय सैनिक को बंधक नहीं बनाया गया। जब मीडिया इस तरह की अपुष्ट चीजों को पब्लिश करता है तो यह केवल राष्ट्रीय हितों को चोट पहुंचाता है।

गलवान में चीन ने अपनी स्थिति को मजबूत किया
सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि गलवान घाटी में चीन ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है। उसने वहां पर पिछले दो हफ्तों में ही 100 टेंट लगा लिए हैं। चीन की सेना वहां पर बंकर बनाने के लिए भारी उपकरण ला रही है। भारतीय पक्ष ने चीनी सेना के इस कदम पर विरोध दर्ज कराया है।

चीन ने यह कदम तब उठाया जब पिछले हफ्ते दोनों पक्षों के कमांडरों ने हालात सामान्य करने के लिए बैठक की। ऐसा नहीं है कि केवल चीन ही इन इलाकों में अपनी ताकत बढ़ा रहा है। भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपनी ताकत को बढ़ाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय सैनिकों ने डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में निगरानी बढ़ा दी है।

मई में दोनों सेनाओं के बीच तीन बार झड़प हुई

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी करते हुए कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं। वास्तविकता में यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

Categories
sports

चीन ने पिछले हफ्ते एक भारतीय जवान को बंदी बनाया, बाद में रिहा किया: रिपोर्ट


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में कई दिनों से तनाव चल रहा है
  • हाल के दिनों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई झड़पें भी हुईं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 11:07 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख क्षेत्र में तनाव जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पिछले हफ्ते भारत के एक जवान को बंदी बना लिया था। बाद में उसे रिहा कर दिया गया। सरकार की तरफ से ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई है।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं।

वास्तविकता यह है कि यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है। इसी महीने 5 और 9 मई को भारत और चीन के सैनकों के बीच पूर्वी लद्दाख में झड़प की घटनाएं सामने आईं थीं। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भी दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे।

विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के कमांडरों की मीटिंग
भारत और चीन में हाल ही में लद्दाख के गालवन नदी क्षेत्र में विवाद बढ़ गया था। अब इसको सुलझाने के लिए दोनों देशों के फील्ड कमांडरों ने बैठक की है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुई। इसमें भारत की 81 ब्रिगेड के अधिकारी और उनके चीनी समकक्ष शामिल हुए। निर्माण कार्यों को लेकर गालवन नदी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच पिछले दो सप्ताह से तनाव चल रहा है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।