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लद्दाख में चीन के रवैये का अनुमान तभी लग जाना था जब जम्मू-कश्मीर में बदलाव किए गए थे


दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:55 AM IST

आजादी के बाद से अब तक अगर हम चीन के साथ संबंध देखें तो ऐसा क्या है कि जिसके आधार पर हम उसे रहस्यमय मानेंगे? 1962 में उसने दो मोर्चों पर हम पर जो हमला किया वह हमारे नेताओं के लिए चौंकाने वाला रहा होगा, लेकिन ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वे भ्रम के शिकार थे।

 उसके बाद से 1965 में पाकिस्तान के साथ हमारी 22 दिन की जंग में चीन की ‘उनके चुराए गए याक और भेड़ें लौटा दो’ की धमकी से लेकर इस साल लद्दाख सीमा पर उसकी तथाकथित ‘चौंकाने वाली’ हरकतों तक, भारत के मामले में चीन का हर कदम यही बताता है कि वह रहस्यमय तो बिल्कुल नहीं रहा है, बल्कि उसके हर कदम का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। 

नाथु ला (सिक्किम) में 1967 में की गई चोट शायद भारत की प्रतिक्रिया देखने के लिए की गई थी। तब उसे लग रहा था कि 1962 और 1965 की लड़ाई, अकालों, अनाज के लिए विदेशी मदद पर निर्भर रहने, राजनीतिक अस्थिरता और इंदिरा गांधी का कद घटने से भारत अस्थिर हो गया होगा।

लेकिन भारत ने जो जवाब दिया, उससे उसने सबक सीखा और 53 वर्षों तक शांत रहा। क्या इसे चीन के रहस्यमय होने का सबूत मानेंगे? नहीं। उसने हमारी जांच-पड़ताल की और उसे करारा जवाब मिला।

फिर अलग-अलग समय पर विभिन्न तरीकों से गतिविधि करते हुए वह इंतज़ार करता रहा। 1960 के आसपास से अब तक के छह दशकों में चीन भारत के साथ रिश्तों को मर्जी से चलाता रहा है। उसने 1962 तक वो हासिल कर लिया था, जो चाहता था।

सच्चाई यह है कि लद्दाख में सामरिक रूप से जरूरी कुछ छोटे-छोटे टुकड़ों को छोड़कर, उसने लगभग पूरा कब्जा कर लिया था। उसने पूरी तरह से भारत के नियंत्रण में रहे अरुणाचल प्रदेश पर भी मालिकाना हक जताया, लेकिन सैन्य चुनौती नहीं दी। इस क्षेत्र और पूरी दुनिया में सत्ता समीकरण में बदलावों के आधार पर उसके तेवर बदलते रहे।

1986-87 में जब उसने देखा कि राजीव गांधी ने रक्षा बजट को अभूतपूर्व रूप से जीडीपी का 4% कर दिया तो उसने फिर वांगदुंग-सुमदोरोंग चू (अरुणाचल) में हमें आजमाया। उसे फिर करारा जवाब मिला और वह पीछे हट गया। इससे फिर यह सबक मिला कि वह बेवजह गोलियां नहीं चलाएगा, तब तक नहीं जब तक उसे आसानी से जीतने का भरोसा न हो। इससे पता चलता है कि उसकी हरकतों का अनुमान लगा सकते हैं। 
आज के संदर्भ में दो हस्तियों से हुई बातचीत प्रासंगिक लगती है।

डॉ. मनमोहन सिंह जब प्रधानमंत्री थे, उन्होंने कहा था कि चीन भारत को हमेशा अस्थिर रखने के लिए पाकिस्तान को मोहरा बना रहा है। हमारा भविष्य इस पर निर्भर है कि हम इस ‘त्रिभुजन’ का तोड़ निकालें। उनका सुझाव यह था कि हम पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश करें।

लेकिन आज पाकिस्तान से दुश्मनी मोदी-भाजपा राजनीति का केंद्रीय तत्व बन गया है। यह पाकिस्तान से ज्यादा चीन से सुलह को तरजीह देगी। वैसे, लक्ष्य त्रिभुजन से बचना ही है। दूसरी बात वाजपेयी के साथ हुई थी, जिन्होंने चीन की वार्ता शैली का खुलासा किया था, ‘देखिए, आप-हम वार्ता कर रहे हैं। दोनों समाधान चाहते हैं। मैं कहूंगा कि थोड़ी रियायत कीजिए, आप मना कर देंगे। मैं कहूंगा, कुछ कम रियायत कर दीजिए, आप फिर मना कर देंगे। अंततः आप मान जाएंगे और उस थोड़े को गंवा देंगे। लेकिन चीन कभी ऐसा नहीं करेगा।’

ये दोनों नेता यही स्पष्ट करते हैं कि चीन अपनी बात पर कायम रहता है और उसका अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए उसने लद्दाख में जो किया है, उसका अनुमान हमें पिछले साल 5 अगस्त को ही लग जाना चाहिए था, जब हमने जम्मू-कश्मीर में भारी बदलाव किए थे। हमें मालूम था कि वहां के भौगोलिक पेंच में एक तीसरा पक्ष चीन भी है।

गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में यह बयान देकर कोई भी रास्ता नहीं छोड़ा कि ‘हम अपनी जान की बाज़ी लगाकर भी अक्साई चीन को हासिल करके रहेंगे।’ इसके बाद नए नक्शे आए, ‘सीपीईसी’ (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) को भारतीय क्षेत्र से बनाने पर और मौसम की रिपोर्ट पर आपत्तियां आईं। लद्दाख-अक्साई चीन में 1962 के बाद से भौगोलिक दृष्टि से यथास्थिति जैसी बनी हुई थी।

मैं यह नहीं जानता चीनी सेना एलएसी के उस ओर है या इस ओर। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि इसका अनुमान  5 अगस्त 2019 को ही लगा लेना चाहिए था और तैयारी भी तभी कर लेनी चाहिए थी। इन 60 वर्षों में जो कुछ हुआ है, उन्हीं की तरह चीनी कदमों को भी अप्रत्याशित नहीं मान सकते। और जहां तक इन कदमों को उठाने का समय चुनने की बात है, तो उसे बस बर्फ के पिघलने का इंतज़ार था। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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लद्दाख से करीब 35 किमी की दूरी पर उड़ रहे चीनी सेना के लड़ाकू विमान, भारतीय सेना रख रही नजर


  • चीनी सेना ने एलएसी से 100 से 150 किमी दूर अपने 10 से 12 जे-11 और जे-7 लड़ाकू विमानों को तैयार रखा है
  • चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा- भारत और चीन ने आपसी बातचीत से सीमा विवाद सुलझाएंगे

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 05:25 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख सीमा पर भारत और चीन की सेना के बीच तनाव जारी है। भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, चीन की पिपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने एलएसी से करीब 100 से 150 किलोमीटर दूर अपने 10 से 12 जे-11 और जे-7 लड़ाकू विमानों को तैयार रखा है।

फिलहाल यह विमान लद्दाख से 30-35 किलोमीटर की दूरी तक छोटी उड़ानें भर रहे हैं। सीमा से 10 किमी. से ज्यादा दूर उड़ान भरने की वजह से यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक है, लेकिन भारतीय सेना इन पर नजर रख रही है।

भारत ने एलएसी के पास इस साल मई में पहली बार सुखोई-30 एमकेआई विमान तैनात किया था। सीमा पर भारतीय और चीनी चॉपर हवा में आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद ऐहतियात बरतते हुए भारत ने यह कदम उठाया था। 

चीन के होटन बेस पर है सेना की नजर
भारतीय सेना चीन के होटन बेस पर खासतौर से नजर रख रही है। इसकी वजह यह है कि यहां पिछले कुछ समय से पाकिस्तान वायु सेना और चीनी सेना का युद्ध अभ्यास चल रहा है। पिछले साल भी सेना की नजर 6 पाकिस्तानी जेएफ-17 विमानों पर थी।

ये लद्दाख के पश्चिम में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्कार्डु एयरफिल्ड से चीन के होटन बेस के लिए उड़ान भर रहे थे। ये पाकिस्तानी लड़ाकू विमान वहां दोनों देशों के संयुक्त अभ्यास ‘शाहीन’ में हिस्सा लेने गए थे।

भारत ड्रोन की मदद से नजर रख रहा
भारत फिलहाल सीमा से सटे इलाको में विमान नहीं भेज रहा। इसके बदले भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां ड्रोन का इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें सेना के लद्दाख स्थित सर्विलांस और टार्गेट एक्यूजिशन बैट्रीज की मदद ली जा रही है। इन ड्रोन्स की मदद से एलएसी के दोनों तरफ और गलवान नाला के पास चीनी सेना के पोजिशन की जानकारी जुटाई जा रही है। 

चीन का दावा- भारत से सटी सीमा पर हालात स्थिर

एक ओर चीन एलएसी के पास हथियार जुटा रहा है वहीं दूसरी ओर यह भी कह रहा है कि भारत की सीमा पर हालात स्थिर और काबू में है। सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने सोमवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की शुरुआत हो चुकी। झाओ ने कहा कि चीन अपनी संप्रभुता कायम रखने के साथ देश की सीमा पर हालात सामान्य रखने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

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चीन ने सीमा के करीब तोप और दूसरे हथियार जमा किए, दोनों देशों के बीच बातचीत भी जारी


  • पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ
  • चीन की तैयारियों के मद्देनजर भारतीय सेना ने भी इस इलाके में सतर्क

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 03:53 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। दोनों देश इसे बातचीत के जरिए हल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, इसी दौरान चीन ने अपने इलाके में सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीनी सेना भारी वाहनों से तोप और दूसरे हथियार जमा कर रही है। इन्हें कुछ ही घंटे में भारतीय सीमा पर लाया जा सकता है।  
चीन की यह हरकत इसलिए शक पैदा करती है क्योंकि इसी दौरान बटालियन और ब्रिगेड लेवल पर सैन्य अफसरों की बातचीत भी चल रही है। अब तक चीन के सैनिक विवाद वाली जगहों से लौटे नहीं हैं। भारतीय सैनिक भी यहां मुस्तैदी से मोर्चा संभाले हुए हैं। 

25 किलोमीटर दूर हथियारों का जखीरा
एक सूत्र के मुताबिक, “पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के क्लास ए व्हीकल्स देखे जा सकते हैं। यह इलाका एलएसी के करीब है। भारतीय सीमा से 25 से 30 किलोमीटर दूर चीनी सेना की गाड़ियां हैं। इनमें हथियार हैं। हालात बिगड़ने पर ये चंद घंटों में मोर्चे तक पहुंच सकते हैं। ऐसा लगता है कि चीन बातचीत का बहाना बनाकर सैन्य तैयारियां मजबूत कर रहा है।” 

बातचीत अब तक बेनतीजा
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के कमांडिंग ऑफिसर और ब्रिगेड कमांडर्स के बीच रोज बातचीत हो रही है। लेकिन, अब तक ये बेनतीजा रही है। मुमकिन है कि जल्द ही मेजर जनरल रैंक के अफसर बातचीत करें ताकि तनाव जल्द खत्म किया जा सके।  

चीन की मांग
चीन चाहता है कि भारत अपने हिस्से में इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम बंद करे। विवाद की वजह ये है कि चीनी सैनिक कई बार भारतीय सीमा में घुस आते हैं। हमारे सैनिकों से इनकी हाथापाई होती है। मई के तीसरे हफ्ते में गंभीर झड़पें हुईं और अब ये पूरे लद्दाख में हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि चीन के जवाब में भारत ने भी माकूल इंतजाम कर लिए हैं। इस मामले की शुरुआत में चीन ने चौंकाया। उसने तेजी से करीब पांच हजार सैनिक इस इलाके में तैनात कर दिए। कुछ जगह भारतीय सीमा में घुसपैठ भी हुई।  

भारत की तैयारी
भारतीय सेना की रिजर्व डिवीजन को लद्दाख में तैनात किया जा चुका है। ये वो सैनिक हैं जिन्हें ऊंचाई या पहाड़ी इलाकों में जंग की महारत हासिल है। शुरुआत में महामारी की वजह से कुछ दिक्कतें थीं लेकिन अब एयरक्राफ्ट्स और सड़क के जरिए फौज भेज दी गई है। सूत्रों ने ये भी साफ कर दिया कि भारत शांति तो चाहता है लेकिन अपनी सीमा में किसी की दखलंदाजी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

तनाव खत्म के रास्ते 
भारत और चीन के बीच सीमा से संबंधित मसले सुलझाने के लिए चार जरिए मौजूद हैं। इनमें से दो 1993 और 1996 में बने। 2005 और फिर 2013 में भी इससे संबंधित प्रगति हुई। सीबीएम (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स) भी है। इन्हीं समझौतों के आधार पर दोनों देश बातचीत करके सीमा विवाद सुलझाते आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी बैठकें हो चुकी हैं। इनमें भी सीमा विवाद बातचीत से सुलझाने पर सहमति बनी। 

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चीन खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करता है, जब भारत यही करता है तो चीन रुकावटें खड़ी करता है, गश्त में बाधा डालता है


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है, दोनों देशों मसले को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया
  • चीन ने यहां सैन्य तैनाती बढ़ाई, जवाब में भारत ने भी यही किया

नेशनल सिक्युरिटी एडवायजरी बोर्ड के सदस्य प्रो. बिमल पटेल

May 29, 2020, 10:18 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष भी हुआ। अमेरिका ने मध्यस्थता की पेशकश की। दोनों ही देशों ने इसे ठुकरा दिया। कहा- मसला बातचीत से हल कर लेंगे। बहरहाल, इस मसले पर भास्कर ने प्रोफेसर (डॉक्टर) बिमल एन. पटेल से उनकी राय जानी। प्रोफेसर पटेल गुजरात की रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल हैं। इसके अलावा वे नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं। यहां भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव और इससे जुड़े मुद्दों पर उनकी राय….

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हो रही घटनाओं को कई तरह से देख सकते हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि गलतफहमियां क्यों बढ़ीं। सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच कोई ऐसी सीमा नहीं है, जिसे भारत और चीन दोनों ही मानते हों। 
चीन यहां अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। लेकिन, जब भी भारत यही काम करता है तो वह विरोध करता है। हमारी गश्त को भी प्रभावित किया जाता है। भारत की तरफ से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया ही जाना चाहिए और इस पर जोर भी दिया गया है। सैन्य टुकड़ियों की तैनाती को लेकर भ्रम की स्थिति है। लेकिन, इस बारे में कयास नहीं लगाए जाने चाहिए।
झड़पें पहले भी होती रही हैं। लिहाजा, हालिया घटनाओं को अपवाद नहीं माना जा सकता। इसको सुलझाने में वक्त लगता है। अफसर और एजेंसियां हर घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हैं। जमीनी हकीकत के बारे में फैसला सेना पर छोड़ना चाहिए। हमारी सेनाओं को पूरा समर्थन है और हमेशा मिलना चाहिए। देश की अखंडता और प्रभुसत्ता को बनाए रखना हर राज्य का कर्तव्य है। भारत भी यही कर रहा है। लेकिन, इसी समय हम तनाव बढ़ाए बिना शांति से मामले को हल करने की कोशिश भी कर रहे हैं।  
भारत ने कभी यथास्थिति को बदलने की कोशिश नहीं की। और हम किसी दूसरी ताकत को भी ऐसा नहीं करने देंगे। इस मामले के कुछ दूसरे पहलू भी हैं। इसे चीन की विस्तृत रणनीति का भी हिस्सा नहीं मानना चाहिए। इस मामले का (लद्दाख में तनाव) भारत के नए एफडीआई नियमों से भी सीधा संबंध नहीं है। क्योंकि, यह नियम देश के आर्थिक हित ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। कई बार ये देखा गया है कि कुछ देश अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों का इस्तेमाल घरेलू राजनीति या उद्देश्य के लिए करते हैं। 
नेपाल के मामले में भी यही बात है। लिपुलेख रोड का उसने विरोध किया। लेकिन, इसमें चीन को लाना या जोड़ना सही नहीं होगा। चीन ने भारत में मौजूद अपने नागरिकों को वापस लाने का फैसला किया। लेकिन, ये छात्र, पर्यटक और शॉर्ट टर्म वीजा होल्डर्स थे। इन हालात में तो कोई भी देश यही करता। फिर चाहे वो भारत हो या चीन।  
फिलहाल, तनाव के जो हालात हैं। उन्हें पहले की तरह शांतिपूर्ण और दोनों देशों की बातचीत से हल करना चाहिए। हमारी लीडरशिप और 2020 का भारत दुनिया के अहम मामलों में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस दौरान हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतिगत हितों का भी ध्यान रखते हैं। 

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राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से कहा- सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखकर जंग की तैयारियां तेज करें


  • जिनपिंग ने आर्मी के साथ मीटिंग में ऐसा कहा, हालांकि किसी खतरे का जिक्र नहीं किया
  • दूसरी ओर लद्दाख में भारत-चीन के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 12:55 PM IST

बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग ने सेना से कहा है कि ट्रेनिंग और जंग की तैयारियां तेज कर दें। सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखते हुए खुद को तैयार करें और देश के आधिपत्य (सॉव्रिन्टी) के लिए मजबूती से डटे रहें। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने कहा कि उलझे हुए मसलों को मुस्तैदी और असरदार तरीके से डील करें।

जिनपिंग ने मंगलवार को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के डेलिगेशन की प्लेनरी मीटिंग में ऐसा कहा। उन्होंने किसी खतरे का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका बयान ऐसे समय आया है जब बॉर्डर पर चीन और भारत के जवानों के बीच तनाव बना हुआ है।

चीन ने इस साल रक्षा बजट 6.6% बढ़ाया
जिनपिंग ने डिफेंस में साइंटिफिक इनोवेशन पर जोर दिया। रक्षा खर्च पर उन्होंने कहा कि एक-एक पाई का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा नतीजे मिलें। इससे पहले 22 मई को चीन ने अपना रक्षा बजट 6.6% बढ़ाकर 179 अरब डॉलर कर दिया। ये भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना है।

डिफेंस बजट बढ़ाने पर चीन के रक्षा प्रवक्ता वु क्यान ने कहा था कि इस समय हम नए खतरों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ताइवान का खास तौर से जिक्र किया, जिसने चीन का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है।

चीन ने लद्दाख में सैनिक बढ़ाए हैं
चीन ने पिछले कुछ दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैनिकों की संख्या बढ़ाई है। चीन की फौज ने भारतीय इलाकों में घुसपैठ कर अस्थाई ठिकाने भी बनाए हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस महीने तीन बार सैनिकों की झड़प भी हो चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

लद्दाख में भारत चीन जितने सैनिक तैनात रखेगा: रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों बैठकों में मोदी और राजनाथ को चीन की हरकतों पर भारतीय सेना के जवाब की जानकारी दी गई। मीटिंग में दो अहम फैसले लिए गए। पहला- इस क्षेत्र में सड़क निर्माण जारी रहेगा। दूसरा- भारतीय सैनिकों की तैनाती उतनी ही रहेगी जितनी चीन की है।

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चीन ने पिछले हफ्ते एक भारतीय जवान को बंदी बनाया, बाद में रिहा किया: रिपोर्ट


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में कई दिनों से तनाव चल रहा है
  • हाल के दिनों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई झड़पें भी हुईं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 11:07 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख क्षेत्र में तनाव जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पिछले हफ्ते भारत के एक जवान को बंदी बना लिया था। बाद में उसे रिहा कर दिया गया। सरकार की तरफ से ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई है।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं।

वास्तविकता यह है कि यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है। इसी महीने 5 और 9 मई को भारत और चीन के सैनकों के बीच पूर्वी लद्दाख में झड़प की घटनाएं सामने आईं थीं। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भी दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे।

विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के कमांडरों की मीटिंग
भारत और चीन में हाल ही में लद्दाख के गालवन नदी क्षेत्र में विवाद बढ़ गया था। अब इसको सुलझाने के लिए दोनों देशों के फील्ड कमांडरों ने बैठक की है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुई। इसमें भारत की 81 ब्रिगेड के अधिकारी और उनके चीनी समकक्ष शामिल हुए। निर्माण कार्यों को लेकर गालवन नदी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच पिछले दो सप्ताह से तनाव चल रहा है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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चीन के साथ तनाव के बीच सेना प्रमुख नरवणे ने लद्दाख का दौरा किया, 3 हफ्ते से क्षेत्र में टकराव की स्थिति है


  • लद्दाख में चीन के साथ गालवन नाला, डेमचौक और पैंगोंग त्सो झील में टकराव है
  • 5 मई को दोनों देशों के 200 सैनिक आमने सामने आ गए, 12 जख्मी भी हुए

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:10 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे विवाद के बीच सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने शनिवार को लद्दाख का दौरा किया। यहां उन्होंने टॉप फील्ड कमांडरों के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया।

सूत्रों के मुताबिक, लद्दाख में चीन के साथ तीन जगह- गालवन नाला, डेमचौक और दौलत बेग और पैंगोंग त्सो झील में तनाव है। गालवन नाला में दोनों देशों के 300-300 सैनिक आमने-सामने हैं। इस इलाके पर चीन अपना दावा कर रहा है। भारतीय सेना के फील्ड कमांडर चीन के कमांडरों से बात कर रहे हैं और मामले का हल निकालने की कोशिश की जा रही है।

सीमा पर दोनों देशों ने सैनिक बढ़ाए  
पिछले दिनों लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील और गालवन घाटी में दोनों देशों ने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी। यहां पिछले दो हफ्ते से टकराव बना हुआ है। इसे लेकर ब्रिगेड कमांडरों की फ्लैग मीटिंग भी हुई, लेकिन बेनतीजा रही। चीन की इस हरकत पर भारत के सेना के टॉप अफसर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उधर, अमेरिका ने भी कहा था है कि चीनी सैनिकों का आक्रामक बर्ताव खतरे की तरफ इशारा करता है।

भारत के सड़क बनाने से टकराव शुरू हुआ 

  • दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैंगोंग त्सो झील के पास भारत के सड़क निर्माण से शुरू हुई। दरअसल, लद्दाख के पूर्वी इलाके में आवागमन के लिए सड़क नेटवर्क को मजबूत कर रहा है। इस पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने आपत्ति जताई। इसके बाद चीन ने इस इलाके में अपने जवानों की संख्या बढ़ाना शुरू कर दिया। भारत ने भी इस इलाके में तैनाती बढ़ा दी। 
  • भारत ने साफ किया है कि वह अपने इलाके में सड़क निर्माण कर रहा है। और यह ठीक वैसा ही जैसा चीन ने अपने इलाके में किया है। इसके बाद चीनी सैनिक इस इलाके में बने हुए हैं। चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो झील में अपनी स्पीड बोट्स की मौजूदगी भी बढ़ा दी है। डेमचौक और दौलत बेग ओल्डी जैसे इलाकों में भी दोनों देशों के सैनिकों की संख्या में इजाफा हुआ है। 

हाल में दोनों सैनिकों के बीच कहां-कहां झड़प हुईं 

  • 5 मई, पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील:  शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
  • 9 मई, नाकू ला सेक्टर:  यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर घूंसे चलाए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 
  • 9 मई को ही लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की सेना के हेलिकॉप्टर दिखने के बाद भारतीय वायुसेना सतर्क हो गई। भारतीय वायुसेना ने भी सुखोई समेत दूसरे फाइटर जेट (लड़ाकू विमानों) से पेट्रोलिंग शुरू कर दी। एलएसी के पास चीन के हेलिकॉप्टर उसी दौरान देखे गए, जब उत्तरी सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों में झड़प हुई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, चीन के हेलिकॉप्टरों ने एलएसी को क्रॉस नहीं किया, लेकिन पहले कई बार ऐसा हो चुका है।
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लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा, भारतीय सेना ने भी यहां तैनाती बढ़ाई


  • पिछले दिनों लद्दाख की गालवन घाटी में चीन ने अपने हिस्से में कुछ टेंट लगाए
  • भारतीय सेना की हालात पर पैनी नजर, सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 11:17 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है। दोनों ही सेनाओं ने इन दोनों इलाकों में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हाल के दिनों में यहां दो बार भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़पें हुई हैं। पिछले दिनों ही चीनी आर्मी के हेलिकॉप्टरों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी। जवाब में भारत ने यहां सुखोई जैसे फाइटर जेट तैनात कर दिए। 

60 साल से तनाव का केंद्र 
गालवन नदी या कहें घाटी क्षेत्र दोनों सेनाओं के बीच तनाव का केंद्र रहा है। 1962 में यहां शुरू हुई झड़प जंग में तब्दील हो गई थी। गालवन नदीं और पेन्गोंग लेक के करीब दोनों सेनाओं ने टुकड़ियां बढ़ा दी हैं। चीन ने गालवन घाटी के अपनी तरफ वाले हिस्से में कुछ टेंट लगाए हैं। भारतीय सेना उसकी हरकतों पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारतीय सेना ने भी यहां गश्त बढ़ा दी है। 

5 मई को हुई थी झड़प
5 मई की सुबह भारत और चीन के सैनिकों के बीच पेन्गोंग लेक एरिया में हिंसक झड़प हुई। इस दौरान रॉड, डंडे और पत्थरों का इस्तेमाल दोनों तरफ से हुआ। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला दर्रे में भी 150 भारतीय और चीनी सैनिक भिड़ गए। दोनों के करीब 10 सैनिक घायल हुए। 

दोनों सरकारें चुप
खास बात ये है कि इन हालिया झड़पों के बावजूद आधिकारिक तौर पर दोनों देशों की सेनाओं या विदेश मंत्रालय ने कुछ नहीं कहा। पिछले हफ्ते भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक सवाल पर सिर्फ इतना कहा था कि भारत सीमा पर शांति बनाए रखना चाहता है। चीनी मीडिया ने तनाव के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि ये झड़पें होती आई हैं लेकिन, दूसरा डोकलाम नहीं होगा। 

चीन क्यों परेशान?
भारत ने हाल ही में मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख और धारचूला के बीच 90 किलोमीटर लंबा शानदार रोड बनाया। इसको बनाते समय सैन्य जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। नेपाल ने संभवत: चीन के इशारे पर ऐतराज भी जताया, लेकिन बाद में वो खामोश हो गया। आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने चीन का नाम लिए बगैर यही संकेत दिया था। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि आर्मी चीफ नेपाल जाएंगे या नहीं। आमतौर पर भारतीय सेना प्रमुख चार्ज लेने के बाद नेपाल का दौरा करते आए हैं। 

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बुजुर्गों को बचाने की तैयारी: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी संक्रमितों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का ट्रायल करेगी


  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का लक्ष्य- कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मामलों को अधिक गंभीर होने से रोकना है

  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल का पहला चरण 7 दिन का होगा जिसमें हाई रिस्क वाले बुजुर्ग शामिल होंगे

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 04:54 PM IST

सितम्बर तक कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने का दावा करने वाली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक नई रिसर्च शुरू की है। रिसर्च का लक्ष्य हल्के लक्षण वाले मामलों को ज्यादा गंभीर होने से रोकना है। इसके अलावा 65 साल से अधिक उम्र के ऐसे संक्रमितों को बचाना भी है, जो पहले डायबिटीज और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं और हाई रिस्क जोन में हैं। कोरोना से पीड़ित बुजुर्गों पर होने वाली यह अपनी तरह की पहली ऐसी रिसर्च है।

उम्रदराज मरीजों पर जल्द शुरू होगा ट्रायल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कोरोना से पीड़ित ऐसे मरीजों को दी जाएंगी जिनकी उम्र या तो 65 साल से अधिक हो या 50-64 के बीच हो और वह किसी बीमारी से पहले ही जूझ रहे हों। रिसर्च के लिए ब्रिटेन के 500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है।

ऐसा होगा पहला ट्रायल
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, यह ट्रायल कोरोना पीड़ितों का प्राइमरी केयर ट्रीटमेंट की तरह है। ट्रायल के पहले चरण में 7 दिन तक हाई रिस्क वाले समूह को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी जाएगी, ताकि लक्षणों को अधिक गंभीर होने से रोका जा सके। इसी दौरान एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का ट्रायल भी होगा। ऐसे मरीज जिनमें लगातार खांसी और शरीर का अधिक तापमान दिखेगा, उन्हें यह दवा दी जाएगी। 

ड्रग के नतीजों के आधार पर सब तय होगा
शोधकर्ता क्रिस बटलर के मुताबिक, ट्रायल में शामिल ड्रग का मरीजों पर क्या असर दिख रहा है, उसी नतीजों के आधार पर दवाओं को क्लीनिकल प्रैक्टिस का आधार बनाया जाएगा। उम्मीद है जल्द ही यह इलाज का हिस्सा बनेंगी। 

100 से अधिक वैक्सीन और टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किए
शोधकर्ताओं ने दुनियाभर में 100 से अधिक टेस्टिंग और वैक्सीन प्रोग्राम शुरू किए हैं। इस बीच गिलीड साइंसेज की रेमडेसिवीर ड्रग का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर पीड़ितों पर किया रहा है। इस दवा को पहले इबोला का इलाज करने के लिए विकसित किया गया था लेकिन कोरोना के मरीजों पर बेहतर परिणाम दिखने पर संक्रमितों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को गेम चेंजर बताया था, इसके बाद देशभर में इस दवा का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया गया। ऐसे मरीज जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही और ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है उन्हें यह दवा इमरजेंसी ड्रग के रूप में दी जा रही है।