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1200 किमी का सफर 500 रुपए की साइकिल से तय किया था, पिता के साथ हुए हादसे के बाद पढ़ाई छोड़ी थी, अब फिर शुरू करेंगी


  • ज्योति पिता के साथ हुए हादसे के बाद दरभंगा से दिल्ली पहुंची थीं
  • ज्योति फिलहाल होम क्वारैंटाइन में हैं, वो एक महीने बाद साइक्लिंग फेडरेशन का ट्रायल देने दिल्ली जाएंगी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:25 PM IST

दरभंगा. (अलिंद्र मिश्र) लॉकडाउन ने लाखों प्रवासियों को ताउम्र न भूलने वाला दर्द दिया। इस दौरान कई कहानियां या कहें आपबीती सामने आईं। कोई सैकड़ों किलोमीटर भूखे-प्यासे पैदल चलकर अपने घर लौटा। किसी ने रास्ते में ही जान गंवा दी। इस बीच इंसान के हौसले और चट्टान जैसे मजबूत इरादों की कहानी भी सामने आई। एक मिसाल ज्योति कुमारी की है। वो बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहूल्ली गांव में रहती हैं। 13 साल की ज्योति बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 10 मई को दिल्ली से चलीं।16 मई को दरभंगा पहुंचीं। उन्होंने सात दिन में 1200 किलोमीटर दूरी तय की।

ज्योति की ‘ज्योति’ सात समंदर पार अमेरिका भी पहुंची। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ने उन्हें ट्विटर पर सराहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी ने ज्योति की तारीफ की है।

ज्योति नेे कहा- शुक्रिया इवांका दीदी

तारीफ और हौसलाअफजाई के लिए ज्योति ने इवांका को धन्यवाद कहा। ज्योति ने कहा, “मैं पहले इवांका दीदी को नहीं जानती थी। अब जान गई हूं। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। वो बहुत बड़ी शख्सियत हैं। उन्होंने मेरे जैसी छोटी बच्ची की तारीफ की। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं बहुत खुश हूं।”

ज्योति को सम्मानित करते एसएसबी के अधिकारी।

पिता के साथ हुए हादसे के बाद छूट गई थी पढ़ाई

ज्योति के परिवार में छह लोग हैं। दो भाई, दो बहन और माता-पिता। पिता मोहन पासवान अकेले दिल्ली में रहकर रिक्शा चलाते थे। मां गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए खाना बनाती हैं। उन्हें हर महीने दो हजार रुपए मिलते हैं। ज्योति बताती हैं, “माता-पिता की कमाई से किसी तरह घर चल रहा था। मैं गांव के स्कूल में पढ़ने जाती थी। एक ट्रक ने मेरे पिता के रिक्शा को टक्कर मार दी। उनका घुटना टूट गया। मैं पढ़ाई छोड़कर दिल्ली आ गई। ताकि पापा का ख्याल रख सकूं। उनके इलाज में बचाकर रखा पूरा पैसा खर्च हो गया। मां ने कई लोगों से कर्ज भी लिया।

मां और भाई-बहन के साथ ज्योति कुमारी।

500 रुपए में खरीदी साइकिल
ज्योति ने कहा. “मैंने साइकिल चलाना सीख रखा था। दिल्ली में मेरे पास साइकिल नहीं थी। लॉकडाउन के चलते जब भूखे मरने की नौबत आई तब जन-धन खाते से 500 रुपए निकाले। इस पैसे से एक पुरानी साइकिल खरीदी। उसी पर पापा को बैठाकर ले आई। मैंने बेटी होने का फर्ज निभाया। जब भी ऐसा मौका मिलेगा। माता-पिता की सेवा करती रहूंगी।”

इस साइकिल पर पिता को बैठाकर दिल्ली से दरभंगा आई थीं ज्योति। पैडल्स के सहारे उनके पैरों ने 1200 किलोमीटर सफर तय किया। पिता पीछे बैठे थे। क्योंकि घुटने में फ्रेक्चर था।

अब एक सपना

ज्योति कहती हैं, “मैं पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हूं, ताकि समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकूं। अभी तो लॉकडाउन है। ये खत्म होता है तो फिर स्कूल में नाम लिखवाउंगी। मैं दिल्ली नहीं जाऊंगी। यहीं आगे पढ़ना है। साइकिलिंग फेडरेशन ने ट्रायल के लिए बुलाया है। इसके लिए एक महीने बाद ट्रायल देने दिल्ली जाऊंगी। अभी होम क्वारैंटाइन में हूं।”

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अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी इवांका ट्रम्प ने बिहार की ज्योति के हौसले की तारीफ की, कहा- इससे भारत के लोगों की भावनाएं पता चलती हैं


  • 15 साल की ज्योति ने अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर गुड़गांव से दरभंगा पहुंचाया
  • साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ज्योति को अगले महीने ट्रायल के लिए बुलाया है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 03:03 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रम्प ने बिहार की 15 साल की बच्ची ज्योति के हौसले की तारीफ की है। ज्योति ने अपने जख्मी पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर की दूरी तय की थी। वो 7 दिन साइकिल चलाकर अपने घर पहुंची थी। इवांका ने कहा है कि ज्योति ने जो किया, वह सहनशीलता और अपनों के लिए प्यार का एक खूबसूरत उदाहरण है। इससे भारत के लोगों की भावनाएं पता चलती हैं।

ज्योति के हौसले को देख साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें ट्रायल के लिए बुलाया है। ट्रायल सफल रहती है तो ज्योति को दिल्ली में नेशनल साइक्लिंग एकेडमी में फेडरेशन के खर्च पर ट्रेनिंग दी जाएगी। ज्योति का कहना है कि इस ऑफर से बहुत खुश हूं, अगले महीने ट्रायल देने जाऊंगी।

लॉकडाउन से पहले ज्योति पिता के पास गई थी
ज्योति के पिता मोहन पासवान गुड़गांव में रिक्शा चलाते थे। ज्योति मार्च में पिता के पास गई थी। इसके बाद देशभर में लॉकडाउन हो गया। इसी बीच उसके पिता एक्सीडेंट में घायल हो गए। मोहन का काम-धंधा बंद हो गया, पैसे थे नहीं, ऊपर से मकान मालिक घर से निकालने की धमकी देने लगा। बाप-बेटी खाने तक के लिए मोहताज हो गए थे। इसलिए, ज्योति ने पिता को साथ लेकर अपने घर जाने की ठान ली। ज्योति का घर दरभंगा के सिरहुल्ली गांव में है।

पिता ने ज्योति को रोकना चाहा, लेकिन नहीं मानी
लॉकडाउन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद है, इसलिए ज्योति ने पैसे उधार लेकर साइकिल खरीदी और घर लौटने को तैयार हो गई। जख्म होने की वजह से मोहन खुद साइकिल नहीं चला सकते थे, इसलिए उन्होंने बेटी को ये कहकर रोकना चाहा कि मेरा वजन खींचना आसान नहीं होगा। लेकिन, ज्योति ठान चुकी थी और उसने कर दिखाया।