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कोरोना के कहर के बीच अम्फान तूफान आया, भारत-चीन विवाद बढ़ा; अमेरिका में अश्वेत की मौत पर हिंसक प्रदर्शन


  • दुनिया में कोरोना के कुल 63 लाख मामले सामने आ चुके हैं, इनमें से 29 लाख अकेले मई महीने में आए; 1.40 लाख जानें भी गईं
  • अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से रिश्ता तोड़ा, इससे विकासशील और गरीब देशों में बीमारियों की रोकथाम पर असर पड़ेगा

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 09:19 AM IST

नई दिल्ली. नई दिल्ली. इस साल मई का महीना कई तरह की आपदाएं लेकर आया। कोरोना से एक लाख 40 हजार से मौतें हुईं। यानी इस महीने में हर दिन औसतन साढ़े चार हजार लोग सिर्फ कोरोनावायरस के कारण मारे गए। यह तब हुआ जब कोरोना से बचाव के लिए ही आधी से ज्यादा दुनिया थम चुकी थी। फिर इस महीने में कोरोना ही अकेला परेशानी का सबब नहीं था, कुछ और भी घटनाएं रहीं, जो दुनिया के लिए सकारात्मक तो बिल्कुल नहीं थी। अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हो रहे हिंसक प्रदर्शन, भारत-चीन के बीच सीमा विवाद ने माहौल और खराब किया। कुछ तस्वीरों के साथ बीते महीने पर एक नजर…. 

कोरोना और खतरनाक हुआ
दुनिया में कोरोना के कुल मामले 63 लाख पार हो चुके हैं। अकेल मई में 29 लाख से ज्यादा मामले आए। यानी मई के हर दिन औसतन 95 हजार नए संक्रमित मिले। यूरोपीय और अमेरिका जैसे देशों में मामलों की ग्रोथ तो रूक गई, लेकिन ब्राजील और भारत नए इपिसेंटर के रूप में उभरे। मई के आखिरी में ब्राजील में हर दिन 25 हजार से ज्यादा तो भारत में हर दिन 8 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए।

तस्वीर ब्राजील की है। यहां कई जगहों पर शवों को दफनाने के लिए मास ग्रेव खोदी गई। ब्राजील में 30 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इनमें से 23 हजार से ज्यादा मौतें सिर्फ मई में हुई।

भारत-चीन की सीमा पर तनाव  
मई के पहले हफ्ते में ही पूर्वी लद्दाख की पेंगॉन्ग झील के उत्तरी किनारे और सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारत-चीन के सैनिकों के बीच टकराव हुआ। इसके बाद किसी देश का नाम लिए बिना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना को तैयार रहने के निर्देश दिए थे। अब दोनों देश की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में विवादित क्षेत्रों के पास स्थित अपने सैन्य अड्डों पर हथियार और जरूरी साजो-सामान तैनात कर रही हैं। इसमें तोपें और लड़ाकू वाहन शामिल हैं। कोरोना के इस दौर में जहां देशों को एक-दूसरे के साथ आने की दरकरार थी, वहां ऐसी तनातनी पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

एलएसी की स्थिति साफ न होने के कारण भारत-चीन के सैनिक कई बार एक-दूसरे की सीमा में चले जाते हैं। यहां 2013 की एक पुरानी तस्वीर है, जिसमें चीनी सैनिक भारतीय सैनिकों को उनकी सीमा से लौट जाने का निवेदन कर रहे हैं।

पाकिस्तान में विमान हादसा
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स का एक पैसेंजर प्लेन 22 मई को कराची एयरपोर्ट के पास क्रैश हो गया। इस हादसे में 97 लोगों की मौत हो गई थी। कोरोना के इस दौर में यह पहला यात्री विमान हादसा था। इससे पहले जनवरी में ईरान में एक यात्री विमान को वहीं की सेना ने गलती से निशाना बना लिया था। इसमें 176 लोगों की मौत हो गई थी।

पाकिस्तान में कराची एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान प्लैन क्रैश हुआ था। प्लेन मॉडल कॉलोनी के जिन्ना गार्डन इलाके 15 घरों को नुकसान पहुंचाते हुए क्रैश हुआ था।

भारत और बांग्लादेश में अम्फान तूफान
कोरोनावायरस के कहर के बीच 20 मई को भारत पर एक नई आफत आई। बंगाली की खाड़ी से उठे अम्फान तूफान ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी तबाही मचाई। ओडिशा में तो इससे कोई मौत नहीं हुई लेकिन पश्चिम बंगाल में 86 लोगों की जान चली गई। बांग्लादेश में भी बड़ा नुकसान हुआ।

अम्फान तूफान के ओडिशा के तट से टकराने से पहले ही यहां के इलाकों से लोगों को शेल्टर होम पहुंचा दिया गया था। कोरोना से बचाव के साथ-साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करवाना आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौतीभरा रहा।

मिशिगन में बांध टूटने से अचानक आई बाढ़
जिस समय भारत में अम्फान की आहट हो रही थी, उसी दौरान अमेरिका के मिशिगन राज्य में भारी बारिश के कारण यहां के मिडलैंड शहर के दो बांध टूट गए थे। यहां से 11 हजार लोगों को फौरन रेस्क्यू किया गया था। ऐसी तबाही शहर ने पहले कभी नहीं देखी थी।

20 मई को मिशिगन के मिडलैंड शहर की तस्वीर कुछ ऐसी थी। शहर में 35 फीट तक पानी भर गया था।

अमेरिका का विश्व स्वास्थ्य संगठन से नाता तोड़ना
29 मई का दिन शायद एक बुरे भविष्य की ओर इशारा करता दिखाई दिया। इस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से देश के सभी संबंध पूरी तरह से खत्म कर दिए। ट्रंप ने यह फैसला डब्ल्यूएचओ द्वारा कोरोना महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार न मानने के चलते लिया। हालांकि इससे पहले भी वे डब्ल्यूएचओ को इस महामारी को समझने में नाकाम बताकर फंड देने से इंकार कर चुके थे। डब्ल्यूएचओ को करीब 15% फंड अमेरिका से मिलता है। अमेरिका के इस संगठन से अलग होने पर विकासशील और गरीब देशों में चलाए जा रहे डब्ल्यूएचओ के कई मिशन प्रभावित होने की आशंका है।

ट्रंप ने डब्ल्यूएचओ से संबंध तोड़ने का ऐलान करते वक्त कहा था कि चीन का डब्ल्यूएचओ पर पूरी तरह से नियंत्रण है।

जॉर्ज फ्लायड की मौत और फिर अमेरिका की सड़कों पर लोगों का गुस्सा
मई के आखिरी में अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के मिनेपॉलिस शहर में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कारण था 46 साल के एक अफ्रीकन-अमेरिकन शख्स जॉर्ज फ्लायड की गिरफ्तारी के दौरान मौत। 25 मई को हुई इस घटना के बाद पूरे शहर में अश्वेत नागरिक सड़कों पर उतर आए और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए। शहर की कई दुकानों को लूट लिया गया। धीरे-धीरे अमेरिका के बाकी हिस्सों में भी फ्लायड के समर्थन में पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन हुए।

तस्वीर अटलांटा शहर में सीएनएन ऑफिस के बाहर की है। 29 मई को यहां सैकड़ों प्रदर्शनकारी जुटे और पुलिस की कार को आग लगा दी।

भारत में प्रवासियों का पलायन मई में भी जारी रहा
भारत में 25 मार्च से लॉकडाउन हो गया था। इसके अगले दिन से ही प्रवासी भारतीय बड़े-बड़े शहरों से अपने गांव-घर लौटने लगे थे। न ट्रेनें थीं, न बसें चल रही थीं। इन प्रवासियों को जो वाहन दिखाई दे रहा था, ये उसमें सवाह होकर घर लौटने की कोशिश कर रहे थे। जिसे कुछ नहीं मिला वो पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरियां नाप रहा था। एक अनुमान के मुताबिक, भारत में करीब 10 करोड़ दिहाड़ी मजदूर हैं, लॉकडाउन के बाद पलायन करने वालों में यही सबसे ज्यादा थे।

मई के पूरे महीने में भारत के अलग-अलग हिस्सों से मजदूरों के पलायन की तस्वीरें आती रहीं।
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चीन ने पिछले हफ्ते एक भारतीय जवान को बंदी बनाया, बाद में रिहा किया: रिपोर्ट


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में कई दिनों से तनाव चल रहा है
  • हाल के दिनों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई झड़पें भी हुईं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 11:07 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख क्षेत्र में तनाव जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पिछले हफ्ते भारत के एक जवान को बंदी बना लिया था। बाद में उसे रिहा कर दिया गया। सरकार की तरफ से ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई है।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं।

वास्तविकता यह है कि यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है। इसी महीने 5 और 9 मई को भारत और चीन के सैनकों के बीच पूर्वी लद्दाख में झड़प की घटनाएं सामने आईं थीं। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भी दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे।

विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के कमांडरों की मीटिंग
भारत और चीन में हाल ही में लद्दाख के गालवन नदी क्षेत्र में विवाद बढ़ गया था। अब इसको सुलझाने के लिए दोनों देशों के फील्ड कमांडरों ने बैठक की है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुई। इसमें भारत की 81 ब्रिगेड के अधिकारी और उनके चीनी समकक्ष शामिल हुए। निर्माण कार्यों को लेकर गालवन नदी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच पिछले दो सप्ताह से तनाव चल रहा है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।