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कोरोना मरीजों के अलावा फ्रंटलाइन वर्कर्स भी हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा ले सकेंगे


  • मलेरिया की दवा है हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, अभी तक केवल कोरोना मरीजों को दी जाती थी
  • आईसीएमआर ने कहा- संक्रमण से बचने के लिए कोरोना वॉरियर्स कर ले सकते हैं इसके डोज

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 10:25 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मलेरिया की दवा हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन अब उन हेल्थ वर्कर्स को भी दी जाएगी, जिनमें इसके लक्षण नहीं आए। इस संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने संशोधित एडवायजरी जारी की है। इसके अलावा कंटनेमेंट जोन में ड्य़ूटी दे रहे पुलिसकर्मियों और दूसरे फ्रंटलाइन वर्कर्स को भी इस दवा का डोज दिया जा सकेगा।

नेशनल टास्क फोर्स ने दवा पर स्टडी की

काउंसिल ने यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर दवा के असर को लेकर स्टडी करने वाली नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के बाद किया। हालांकि, काउंसिल ने यह भी साफ किया है कि ये दवा केवल ऐहतियात के तौर पर लेनी चाहिए। इसे लेने का मतलब ये नहीं है कि किसी को कोरोना नहीं हो सकता है। 

संक्रमण की दर में कमी पाई गई

नेशनल टास्क फोर्स के विशेषज्ञों ने कोरोना प्रभावित और गैर प्रभावित इलाकों में काम करने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों पर इसका अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने पाया कि इससे संक्रमण की दर कम होती है। इसमें कहा गया है कि यह दवा उन लोगों को नहीं दी जानी चाहिए, जो रेटिना संबंधी बीमारी से ग्रसित हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि इस दवा को 15 साल से कम उम्र के बच्चों तथा गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी न दिया जाए। दवा औपचारिक सहमति के बाद डॉक्टर की निगरानी में ही दी जाए।

कई देशों को भेजी गई दवा 
कोरोना संक्रमण से पूरी दुनिया प्रभावित है। दुनिया के बड़े-बड़े देश इसकी वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। कई विशेषज्ञों ने शुरूआत में ही पाया कि हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना के इलाज में काफी प्रभावी है। इसके बाद अमेरिका, इजरायल, ब्राजील समेत कई देशों को भारत ने ये दवा सप्लाई की। भारत इस दवा का बड़ा सप्लायर है। 

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सैनिटाइजर का इंजेक्शन लगाने की सलाह देने वाले ट्रम्प हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ले रहे, एक्सपर्ट बोले- ये खतरनाक है


  • डॉक्टरों ने कहा- ट्रम्प का बयान गैरजिम्मेदाराना, इससे हृदय, किडनी और लीवर को खतरा
  • एक महीने पहले अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने चेतावनी दी थी कि कोरोना रोकथाम में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल नहीं किया जाए

एनी कर्नी और केटी थाॅमस

May 20, 2020, 06:00 AM IST

कोरोनावायरस से बचाव के लिए कभी मजाक में सैनिटाइजर का इंजेक्शन लगाने की सलाह देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे बीते 10 दिनों से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन दवा ले रहे हैं।रेस्टोरेंट प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में ट्रम्प ने कहा कि मैं व्हाइट हाउस के डॉक्टरों की सलाह पर काेराेना से बचने के लिए पिछले डेढ़ हफ्ते से ये दवा ले रहा हूं और देखिए मैं आपके सामने बिल्कुल स्वस्थ हूं।

ट्रम्प से जब पूछा गया कि क्या व्हाइट हाउस के फिजीशियन की सलाह पर उन्होंने दवा लेना शुरू किया है, तो उन्होंने कहा कि मैंने खुद डॉ सीन कॉनले (राष्ट्रपति के निजी फिजीशियन) से अनुरोध किया था। दूसरी ओर, कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने ट्रम्प के बयान की आलोचना करते हुए कहा है कि ऐसा करना न केवल राष्ट्रपति के लिए खतरनाक होगा, बल्कि दूसरों के लिए भी यह उदाहरण उनके स्वास्थ्य पर संकट पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को खतरनाक बताया

मिलर फैमिली हार्ट इंस्टीट्यूट के चीफ एकेडमिक अफसर डॉ. स्टीवन ई निसेन ने कहा कि इससे गंभीर परेशानियां हाे सकती हैं। वहीं, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर डॉ. स्कॉट सोलोमन ने भी इसे घातक बताया है। वहीं कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दवा से हृदय, किडनी और लीवर पर असर पड़ता है।

एफडीए भी चेतावनी दे चुका है

बता दें कि एक महीने पहले ही अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने चेतावनी दी थी कि कोरोना रोकथाम में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल नहीं किया जाए। ये दवा कोरोना मरीजों के इलाज में कितनी कारगर है, अब तक इसके ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। ट्रम्प से पहले ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो ने भी इस दवा का समर्थन किया था।  
डब्ल्यूएचओ को धमकी- स्थायी रूप से फंडिंग रोक देंगे

ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को चिट्टी लिखकर चेतावनी देते हुए कहा है कि 30 दिन में संगठन में सुधार करें। वरना आपको दी जा रही फंडिंग स्थाई रूप से फ्रीज कर देंगे। हमें सदस्य बने रहने पर भी दोबारा विचार करना होगा। ट्रम्प ने कहा, हम उन्हें सालाना 45 करोड़ डॉलर (करीब 3500 करोड़ रु.) देते हैं, जिसे कम करने की योजना बनाई जा रही है।

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ट्रम्प की डब्ल्यूएचओ को चिट्‌ठी, 30 दिन में सुधार न होने पर फंडिंग स्थाई तौर पर फ्रीज करने की चेतावनी दी


  • राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा- हमारे साथ सही बर्ताव नहीं हुआ, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग कम करने की योजना बना रहे
  • ट्रम्प ने कहा- मैं डेढ़ हफ्ते से हर दिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की एक गोली जिंक के साथ ले रहा हूं

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 10:08 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को चिट्ट्‌ठी लिखकर चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा है कि 30 दिन में संगठन में सुधार करें। ऐसा न करने पर आपको दी जा रही फंडिंग स्थाई रूप से फ्रीज कर दी जाएगी और अमेरिका संगठन का सदस्य बने रहने पर भी दोबारा विचार करेगा।

ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में भी डब्ल्यूएचओ की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘वे (डब्ल्यूएचओ) चीन की कठपुतली है। यह कहना बेहतर होगा कि वे चीन केंद्रित हैं। अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सालाना 450 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रु.) देता है। इसे कम करने की योजना बनाई जा रही है क्योंकि हमारे साथ सही बर्ताव नहीं हुआ।’’

हर दिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की दवा लेता हूं: ट्रम्प
ट्रम्प ने दावा किया कि वे कोरोना से बचने के लिए हर दिन मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जिंक के साथ लेते हैं। उन्होंने कहा मैं पिछले डेढ़ हफ्ते से हर दिन ऐसा कर रहा हूं। जब उनसे पूछा गया कि वे यह दवा क्यों ले रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि मैं सोचता हूं यह अच्छा है, मैंने इसके बारे में कई अच्छी कहानियां सुनी हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे कि कई लोग खास तौर पर फ्रंटलाइन पर काम करने वाले कर्मचारी यह दवा लेते हैं।’’

‘व्हाइट हाउस के फिजीशियन ने इसके इस्तेमाल की सलाह दी’
ट्रम्प ने कहा, ‘‘व्हाइट हाउस के एक डॉक्टर ने भी कहा कि मैं यह दवा ले सकता हूं। हालांकि, पहल मैंने की थी। मैंने उनसे पूछा था कि आप इस दवा के बारे में क्या सोचते हैं? उन्होंने कहा कि अगर आप चाहें तो ले सकते हैं। अगर इससे कोई असर नहीं हुआ तब भी आप बीमार नहीं पड़ेंगे या आपकी मौत नहीं होगी। मैं हर दिन एक गोली लेता हूं। समय आने पर बंद कर दूंगा।’’

एफडीए ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न लेने की चेतावनी दी थी
अमेरिकी सरकार के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने चेतावनी दी थी कि कोरोना के इलाज या इसे रोकने के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल नहीं किया जाए। एफडीए ने इसके साइड इफेक्टस को ध्यान में रखते हुए यह बात कही थी। इससे दिल से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। मौजूदा नियमों के मुताबिक इसका इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में किया जा सकता है।

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बुजुर्गों को बचाने की तैयारी: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी संक्रमितों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का ट्रायल करेगी


  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का लक्ष्य- कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मामलों को अधिक गंभीर होने से रोकना है

  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल का पहला चरण 7 दिन का होगा जिसमें हाई रिस्क वाले बुजुर्ग शामिल होंगे

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 04:54 PM IST

सितम्बर तक कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने का दावा करने वाली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक नई रिसर्च शुरू की है। रिसर्च का लक्ष्य हल्के लक्षण वाले मामलों को ज्यादा गंभीर होने से रोकना है। इसके अलावा 65 साल से अधिक उम्र के ऐसे संक्रमितों को बचाना भी है, जो पहले डायबिटीज और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं और हाई रिस्क जोन में हैं। कोरोना से पीड़ित बुजुर्गों पर होने वाली यह अपनी तरह की पहली ऐसी रिसर्च है।

उम्रदराज मरीजों पर जल्द शुरू होगा ट्रायल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कोरोना से पीड़ित ऐसे मरीजों को दी जाएंगी जिनकी उम्र या तो 65 साल से अधिक हो या 50-64 के बीच हो और वह किसी बीमारी से पहले ही जूझ रहे हों। रिसर्च के लिए ब्रिटेन के 500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है।

ऐसा होगा पहला ट्रायल
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, यह ट्रायल कोरोना पीड़ितों का प्राइमरी केयर ट्रीटमेंट की तरह है। ट्रायल के पहले चरण में 7 दिन तक हाई रिस्क वाले समूह को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी जाएगी, ताकि लक्षणों को अधिक गंभीर होने से रोका जा सके। इसी दौरान एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का ट्रायल भी होगा। ऐसे मरीज जिनमें लगातार खांसी और शरीर का अधिक तापमान दिखेगा, उन्हें यह दवा दी जाएगी। 

ड्रग के नतीजों के आधार पर सब तय होगा
शोधकर्ता क्रिस बटलर के मुताबिक, ट्रायल में शामिल ड्रग का मरीजों पर क्या असर दिख रहा है, उसी नतीजों के आधार पर दवाओं को क्लीनिकल प्रैक्टिस का आधार बनाया जाएगा। उम्मीद है जल्द ही यह इलाज का हिस्सा बनेंगी। 

100 से अधिक वैक्सीन और टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किए
शोधकर्ताओं ने दुनियाभर में 100 से अधिक टेस्टिंग और वैक्सीन प्रोग्राम शुरू किए हैं। इस बीच गिलीड साइंसेज की रेमडेसिवीर ड्रग का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर पीड़ितों पर किया रहा है। इस दवा को पहले इबोला का इलाज करने के लिए विकसित किया गया था लेकिन कोरोना के मरीजों पर बेहतर परिणाम दिखने पर संक्रमितों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को गेम चेंजर बताया था, इसके बाद देशभर में इस दवा का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया गया। ऐसे मरीज जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही और ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है उन्हें यह दवा इमरजेंसी ड्रग के रूप में दी जा रही है।