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रेल मंत्री गोयल बोले- मजदूरों को भेजने के लिए महाराष्ट्र को 145 ट्रेनें दीं, 74 चलने को तैयार थीं- राज्य सरकार 24 के लिए ही यात्री दे पाई


  • उद्धव ठाकरे ने रविवार को आरोप लगाया कि रेलवे पर्याप्त ट्रेनें उपलब्ध नहीं करवा रहा
  • इसके जवाब में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक 9 ट्वीट किए

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 07:20 PM IST

नई दिल्ली/मुंबई. महाराष्ट्र से प्रवासी मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने को लेकर 2 दिन से रेल मंत्री पीयूष गोयल और शिवसेना सांसद संजय राउत के बीच ट्विटर वार जारी है। गोयल ने मंगलवार को उद्धव सरकार पर बदइंतजामी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “रेलवे के कर्मचारियों ने पूरी रात मेहनत की। हमने महाराष्ट्र को 145 ट्रेनें दीं। हर ट्रेन के बारे में सरकार को जानकारी दी। शाम 5 बजे तक 74 ट्रेनें रवाना होनी थीं। लेकिन, दोपहर 12.30 तक कोई यात्री ही नहीं बैठा। इन 74 में से सिर्फ 24 ट्रेनों के लिए सरकार यात्री उपलब्ध करा पाई। 50 ट्रेनें अब भी महाराष्ट्र में खड़ी हैं।”

रेल मंत्री के मुताबिक, इनमें से भी सिर्फ 13 ट्रेनें ही मजदूरों को लेकर उनके राज्यों तक गई है। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा- “मैं महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि यह सुनिश्चित करने में पूरी तरह से सहयोग करें कि संकटग्रस्त प्रवासी अपने घरों तक पहुंचे। यात्रियों को समय पर स्टेशन पर लाया जाए, इससे पूरे नेटवर्क और योजना प्रभावित होगी।”

रेल मंत्री का नया ट्वीट

क्या है ट्रेन-ट्विटर विवाद

इससे पहले श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल में बहस हो गई। उद्धव ने रविवार को आरोप लगाया कि रेलवे पर्याप्त ट्रेनें उपलब्ध नहीं करवा रहा। इसके जवाब में रेल मंत्री ने रविवार शाम 7 बजे से रात 12 बजे तक 9 बार ट्वीट कर महाराष्ट्र सरकार से जानकारी मांगी, लेकिन डिटेल नहीं मिल पाई। रात 2 बजकर 11 मिनट पर गोयल ने 10वां ट्वीट किया और बताया कि 125 ट्रेनों की लिस्ट मांगी थी, लेकिन 46 की ही मिली।

गोयल ने पहली बार शाम 7.14 बजे एक साथ 3 ट्वीट किए। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष भी किया। गोयल ने कहा- उम्मीद है कि पहले की तरह ट्रेनें स्टेशन पर आने के बाद, खाली नहीं लौटेंगी। 

49 मिनट बाद चौथा ट्वीट

53 मिनट बाद फिर 2 ट्वीट

1 घंटे 2 मिनट बाद 7वां ट्वीट

16 मिनट बाद फिर 2 ट्वीट

2 घंटे बाद रात 2.11 बजे 10वां ट्वीट



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अभिनेता किरण कुमार भी कोरोना संक्रमित हुए, पिछले 10 दिनों से खुद को घर में क्वारैंटाइन करके रखा है


दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:56 PM IST

मुंबई. कोविड महामारी में बॉलीवुड अभिनेता किरण कुमार भी कोरोनावायरस से संक्रमित हो गए हैं। जिसके बाद उन्होंने खुद को अपने घर में क्वारैंटाइन करके रखा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 दिन पहले उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। अब उनका अगला कोविड-19 परीक्षण 25 या 26 मई को होगा।

इस बारे में एक बयान जारी करते हुए किरण कुमार ने कहा, ‘इस बारे में मुझे उस वक्त पता चला जब मैं एक छोटी सी जांच के लिए अस्पताल गया था। टेस्ट प्रक्रिया पूरी होने से पहले मुझे कुछ प्रारंभिक परीक्षणों से गुजरना पड़ा। मुझे लगता है अपनी ओर से सावधानी बरतते हुए उन्होंने शुरुआती टेस्ट्स में ही कोविड-19 टेस्ट भी कर लिया, जिससे मेरे पॉजिटिव होने का पता चल सका।’

फिल्म जर्नलिस्ट विकी ललवानी ने सबसे पहले इस खबर को ब्रेक किया।

मेरे अंदर कोई लक्षण नहीं थे:  किरण ने बताया, ‘हालांकि मेरे अंदर किसी तरह के कोई लक्षण भी नहीं थे। ना खांसी, ना बुखार, ना सांस की कोई समस्या, कुछ भी नहीं। मैं पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा था। जैसा कि मैंने बताया, मुझमें पहले से कोई लक्षण नहीं थे। इसलिए मैंने जांच कराने की कोई कोशिश नहीं की।’ 

‘शुक्र है मेरे घर में दो मंजिले हैं’:  उन्होंने कहा, ‘ खैर मैंने अपने आप को घर पर क्वारैंटाइन कर लिया है। मेरे घर में दो मंजिलें हैं, इसलिए शुक्र है कि जगह की कोई समस्या नहीं है। मेरी पत्नी और बच्चे पहली मंजिल पर रहते हैं और मैंने खुद को टॉप फ्लोर पर आइसोलेट किया हुआ है। मैं 25 या 26 मई को एकबार फिर टेस्ट करवाऊंगा।’

कई सेलेब्स हो चुके संक्रमित: इससे पहले बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर, फिल्म निर्माता करीम मोरानी और उनकी दोनों बेटियां, एक्टर पूरब कोहली, एक्टर फ्रेडी दारूवाला के पिता, एक्टर सत्यजीत दुबे की मां समेत बोनी कपूर और फराह अली खान के घर काम करने वाले वर्कर भी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं।



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मजदूर बोले- महाराष्ट्र में लाठियां मिलीं, मध्य प्रदेश में आए तो लगा हम पुलिस के मेहमान हैं; यूपी सरकार बसों से घर पहुंचा रही


  • यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले सुरेश आटो से ही निकले हैं, कहते हैं- मेरे जैसे 20 हजार आटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं
  • मध्य प्रदेश और यूपी में पैदल पलायन लगभग बंद; बाइक, ऑटो, टैक्सी, कार, ट्रक और सरकारी बसों में ही प्रवासी मजदूर जा रहे
  • मजदूर कहते हैं- बंबई में अपना बसेरा है, जिंदगीभर के लिए तो उसे छोड़ नहीं सकते, सबकुछ ठीक रहा तो फिर से लौटेंगे

गौरव पांडेय

May 20, 2020, 10:06 AM IST

रात के सवा 12 बजे रहे हैं। विदिशा से सागर जाने वाले हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर चार काली-पीली टैक्सी और दो आटो रिक्शा वाले खड़े हैं। यहां वे पेट्रोल-डीजल डलवाने के बाद सुस्ता रहे हैं। उनके साथ में छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। कुछ यहीं पर चादर बिछाकर सोने की तैयारी भी कर रहे हैं। 
शरद चंद्र पांडेय यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं। कहते हैं कि हमें तीन दिन हो गए हैं, मुंबई से निकलेI हम वहां टैक्सी चलाते थे, लॉकडाउन से पहले अम्मा का आंख का ऑपरेशन कराने के लिए बंबई ले गए थे। लेकिन आंख ऑपरेशन छोड़िए बाकी धन्धा-पानी भी चौपट हो गया। खाने की लाले पड़ गए हैं, बस अब घर जा रहे हैं, कम से कम खाने-पीने को तो मिलेगा। कुछ नहीं तो खेती बारी है, वही कर लेंगे।

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। तीन दिन पहले मुंबई से पति के साथ आटो में निकली हैं। 

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। पति मुंबई में आटो चलाते हैं। कहती हैं कि शादी के बाद पति के साथ बंबई चली गई थी, तब से वहीं की होकर रह गई। आज ऐसे हालात हो गए हैं कि ऑटो से ही घर जाना पड़ रहा है। अब करें भी तो क्या करें। दो महीने से उनका (पति) का ऑटो खड़ा है। बंबई में कोरोना बढ़ ही रहा है। दो महीने हो गए, सरकार की तरफ से कोई मदद मिली नहीं। उलटा घर में बंदी बना दिया। अब जाएंगे गांव में ही कुछ करेंगे।
अवधेश शुक्ला बंबई की एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे, वे शनिवार को पांच बजे बाइक से प्रयागराज के लिए निकले हैं। कहते हैं कि कसोराघाट पर अभी बाइक खराब हो गई थी, पांच किलो मीटर खींच कर लाना पड़ा है। अब अंधेरा हो गया है, सुबह होने पर बनऊंगा, तब यहीं सो रहा हूं। 
मुंबई वापस जाने के सवाल पर अवधेश कहते हैं कि बंबई में भी अपना बसेरा है, जिंदगी भर के लिए तो उसे छोड़ सकते नहीं, गांव में भी तो बैठकर कुछ नहीं कर पाएंगे। अब चल रहे है, दो-चार दिन में पहुंच ही जाएंगे। वहां मरने से बेहतर है, घर चलें। दो महीने से कंपनी से सैलरी नहीं मिली। अब सेविंग के पैसे भी खत्म हो चुके हैं। मकान मालिक को किराये देने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। 

मुंबई में आटो और काली-पीली टैक्सी चलाने वाले तीन-चार लोगों को ग्रुप बनाकर चल रहे हैं।

प्रतापगढ़ के पट्‌टी के रहने वाले सुरेश पांडेय बंबई में आटो चलते हैं। वे पूरे परिवार को लेकर गांव निकले हैं। कहते हैं कि मेरे जैसे 20 हजार से ज्यादा ऑटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं। सब कुछ ठीक रहा तो तीन-चार महीने में लौटूंगा, नहीं तो घर पर ही कुछ करूंगा। 

पट्‌टी के रहने वाले शरद अपने माता को आंख का ऑपरेशन कराने मुंबई लेकर गए थे, लेकिन अब बिना ऑपरेशन कराए लौट रहे हैं।

भानू मुंबई ड्राइविंग करते हैं। कहते हैं कि महाराष्ट्र वाले वैसे ही यूपी-बिहार वालों से जलते थे। अब तो उन्हें मौंका भी मिल गया है। वे मराठी लोगाें के लिए बस चला रहे हैं। बाहर वालों से कहते हैं कि बस का इंतजार करो एक दो हफ्ते का। दलाल बस के टिकट के लिए दो से तीन रुपए मांगते हैं। वहां रोक तो रहे हैं, लेकिन अब करेंगे क्या? अब भूखे थोड़े मरेंगे।

भानू बताते हैं कि रास्ते में महाराष्ट्र के पुलिस वालों ने भी खूब परेशान किया, कईयों को तो डंडे भी पड़ रहे। लेकिन मध्य प्रदेश सीमा में पहुंचते ही सब बदल गया। रास्ते में जगह-जगह ऐसी व्यवस्था मिली कि बता नहीं सकते हैं, इसी धरती पर स्वर्ग नजर आ रहा है, टू स्टार थ्री स्टार इंस्पेक्टर खुद अपने हाथ से चाय, छांछ, ब्रेड, नाश्ता दे रहे हैं। यहां कोई दिक्कत नहीं है। भगवान चाहेंगे तो दो-तीन दिन में घर पहुंच जाएंगे, फिर खेती शुरू करेंगे। 

  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर में दो हजार लोग बस के इंतजार में

सुबह के सात बज रहे हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले की सीमा पर करीब दो हजार से ज्यादा लोगों का जमावड़ा है। मध्य प्रदेश की बसें महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को यहीं पर छोड़ रहे हैं। इनमें ज्यादातर इंदौर की सिटी बसें हैं। लेकिन अभी यहां यूपी की दो बस ही खड़ी हैं। ऐसे मे लोग इधर-उधर बैठे हैं, पुलिस प्रशासन ने लोगों के लिए चाय-नाश्ते का बंदोबस्त कर रखा है।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले में बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।

यहां से ललितपुर शहर पहुंचते हैं तो प्रयागराज कुंभ के लिए चलाई गई कुछ स्पेशल बसें बार्डर की ओर जाते हुए दिखाई देती हैं। ललितपुर-झांसी हाईवे पर एक पति-पत्नी अपने दो छोटे बच्चों को  रेहड़ी वाले ठेले पर बिठाकर ले जा रहे हैं। हाइवे पर और पैदल चलने वाले लोग तो बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। हां, ट्रकों और मिनी ट्रकों के अंदर लोग जरूर बैठकर जा रहे हैं।  

  • तपती दोपहरी और 42 डिग्री तापमान में लोग ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे 

झांसी, दिन के 11 बज रहे हैं, तेज धूप के बीच प्रवासी मजदूर ट्रकों और विकप के अंदर बैठकर जा रहे हैं। तापमान 42 डिग्री से ज्यादा है। कुछ मजदूर ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे। वहीं, कुछ प्रवासी मजदूर सड़क किनारे पेड़ों के छांव में आराम कर रहे हैं। 

यूपी सीमा में ज्यादातर मजदूर ट्रकों और विकप में बैठकर जाते दिखाई दिए।

जालौन, छोटे बाजारों में प्रवासी मजूदरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई। स्थानीय युवक पूरी-सब्जी, केला, पानी दे रहे हैं। इन्हीं में से एक रफीक जो लोगों को पानी पिला रहे हैं। कहते हैं कि यह समय लोगों की मदद करने का है। इसलिए हम कर रहे हैं। भूखे-प्यासे लोग हमें दुआ देंगे। सद्दाम कहते हैं कि हमें जबसे पता चला कि लोग इस तरह अपने घरों को आ रहे हैं, तब से हम रोज इस तपती दोपहरी में भी लोगों को नाश्ता करा रहे हैं, यह हमारा फर्ज है।  

  • विकप में 23 मजदूर ऊपर-नीचे बैठे हैं, कहते हैं- दो रोटी कम खाएंगे, पर खुली हवा में सांस तो लेंगे

कानपुर देहात, यूपी के सिद्धार्थनगर के रहने वाले करीब 23 मजदूर एक विकप में ऊपर नीचे-बैठे हुए हैं। ये सभी मुंबई की प्लास्टिक फैक्टरी में काम करते थे। अब फैक्टरी में कामकाज बंद है। इन्हीं में से एक रामपाल कहते हैं कि अब वहां कुछ बचा ही नहीं था, जो रुकते। न काम है, न रोटी है। इसलिए अपने-अपने गांव जा रहे हैं। दो रोटी कम मिलेगी, मगर खुली हवा में सांस तो ले पाएंगे न। हम सभी 23 लोग आसपास के गांवों के ही हैं, अब जरूरत पड़ी तो अपने लोग ही काम आते हैं।

  • लखनऊ-कानपुर हाइवे पर आम दिनों जैसा ही ट्रैफिक, भाजपा नेता स्टाल लगाकर मजदूरों को खिला रहे

कानपुर, दिन के तकरीबन 3 बज रहे हैं, कानपुर में जगह-जगह स्थानीय भाजपा नेताओं ने खाने-पीने का स्टाल लगा रखा है। कुछ स्टालों पर विधायक की फोटो भी लगाई गई है। कुछ जगहों पर पुलिस वाल कुर्सी लगाकर बैठे हुए हैं,सामने फूल माला रखा है, पीछे विधायक की फोटो लगी है। यहां लोग आने वाली हर गाड़ी को रोककर खाने-पीने का सामान दे रहे हैं, जो नहीं भी लेना चाह रहे, उनकी गाड़ी में भी लोग जबरदस्ती केला, पूड़ी सब्जी, खिचड़ी, पानी आदि रख दे रहे हैं।

यहां से आगे बढ़ते हैं, तो कानपुर-लखनऊ हाईवे पर काफी ट्रैफिक है, दुकानें भी बड़ी संख्या में खुली नजर आ रही हैं। हालांकि पुलिस ने कुछ जगहों पर बैरिकेडिंग वगैरह कर रखा, बावजूद लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकल रहे हैं।चार बाग बस अड्‌डे पर बड़ी संख्या में बसें खड़ी हैं। गेट पर पुलिस मुस्तैद है। रेलवे स्टेशन के बाहर भी भीड़भाड़ है। कुछ निजी वाहन लोगों को बैठा रहे हैं। सफाई कर्मी झाड़ू मार रहे हैं। हजरतगंज में आम दिनों के मुकाबले भीड़ थोड़ी कम है।

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लॉकडाउन के बाद स्क्रीनटाइम बढ़ने से आंख के मरीज बढ़े; घर से काम रहे कर्मी एसी में काम करने से बचें, हर 20 मिनट में पलक जरूर झपकाएं


  • गर्मियों में आम होती है ड्रायनेस की समस्या, ज्यादा देर तक स्क्रीन पर काम करने से भी हो सकती है परेशानी
  • अगर चश्मा लगा है तो उसका उपयोग हर हाल में करें, पैरेंट्स बच्चों को मोबाइल पर ज्यादा वक्त न बिताने दें

निसर्ग दीक्षित

May 18, 2020, 06:04 AM IST

भारत में सरकार ने भले ही लॉकडाउन की शुरुआत 24 मार्च से की हो, लेकिन निजी और सरकारी कंपनियों ने एहतियात बरतते हुए कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह पहले ही दे दी थी। इसके बाद करीब दो महीनों से घर से दफ्तरों के काम निपटा रहे लोग आंखों से संबंधित परेशानी का शिकार हो रहे हैं।

ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट डॉक्टर विनिता रमनानी बताती हैं कि इस दौरान फोन पर सलाह लेने वालों में इजाफा हुआ है। आंखों की परेशानी से जूझ रहे लोग बड़ी संख्या में वॉट्सऐप  मैसेज, फोटो और कॉल कर परामर्श ले रहे हैं। डॉक्टर रमनानी के मुताबिक, मरीज के बीच चिंता है कि वे बिना बाहर जाए भी आंखों में रेडनेस का शिकार हो रहे हैं। 

रामकृष्ण परमार्थ फाउंडेशन मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर और डॉक्टर वसुधा डामले कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण मामले कम रिपोर्ट हुए हैं, लेकिन आंखों की परेशानी से जूझ रहे लोगों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टर डामले के अनुसार गर्मियों में ड्रायनेस के मामले ज्यादा सामने आते हैं और ज्यादा स्क्रीनटाइम भी इसका मुख्य कारण है। डॉक्टर गैरजरूरी स्क्रीनटाइम में कटौती करने की सलाह भी देती हैं। क्योंकि जितना ज्यादा स्क्रीनटाइम उतनी ज्यादा दिक्कत।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये हैं मुख्य लक्षण

  • इरिटेशन: लगातार कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन पर काम या मूवी-गेम्स के कारण इरिटेशन की समस्या भी होती है। इस दौरान व्यक्ति को आंखों की मदद से कोई भी काम करने में असुविधा होती है। इसका कारण और भी कई बीमारियां हो सकती हैं। 
  • ड्रायनेस: डॉक्टर्स बताते हैं कि गर्मियों में ड्रायनेस आम परेशानी है। ड्रायनेस का मुख्य कारण है आंख में तरल या लुब्रिकेंट की कमी होना। ड्रायनेस ज्यादा बढ़ने पर मेडिकल एक्सपर्ट की सलाह लें। डॉक्टर रमनानी के अनुसार, इसका इलाज बेहद ही सामान्य है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर आपको ड्रॉप्स दे देंगे, जिसकी वजह से आंखें सूखेंगी नहीं।
  • रेडनेस: इस दौरान आपकी आंखों में रेडनेस और खुजली भी हो सकती है। हालांकि एलर्जी और इंफेक्शन जैसे कई कारणों के कारण आंखों में रेडनेस की परेशानी हो सकती है।
  • आंखों से पानी आना: आंखों में से पानी आने के कारण भी एलर्जी, इंफेक्शन, चोट हो सकते हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने के कारण आंखों से पानी आने की परेशानी हो सकती है। 

काम के दौरान ऐसे रखें आंखों का ख्याल

  • बार-बार आंखें झपकाना: लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर रमनानी के मुताबिक, आमतौर पर हमारी आंखें एक मिनट में 18-20 बार झपकती हैं, लेकिन स्क्रीन पर काम करते वक्त यह संख्या कम हो जाती है। इससे बचने के लिए कुछ देर में काम रोककर आंखों को बार-बार तेज झपकाएं।
  • 20-20-20 रूल: डॉक्टर साधारण से 20-20-20 नियम को फॉलो करने की सलाह देते हैं। इसमें आपको काम के दौरान हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फुट दूर की किसी चीज को देखना है। इससे आपकी आंखों की मसल्स रिलेक्स होती हैं।
  • एसी में काम करने से बचें: डॉक्टर डामले बताती हैं कि, एयर कंडीशनर में काम करने से ड्रायनेस की परेशानी बढ़ सकती है। एसी में काम करने से बचें। अगर एसी के बीच काम कर रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लें।
  • अंधेरे में काम न करें: कमरे की लाइटों को बंद कर काम न करें। डॉक्टर्स के मुताबिक, हमेशा कमरे में रोशनी के बीच या लाइट के बीच ही काम करें।
  • ब्रेक लें: लगातार काम करने से आपकी आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए कभी भी काम बिना ब्रेक के न करें। काम के दौरान कुछ देर में ब्रेक लेते रहें और नॉर्मल माहौल में घूमें। इसके अलावा अपने नॉर्मल भोजन के साथ मल्टीविटामिन और एंटीऑक्सीडेंट फूड का भी उपयोग करें।
  • चेयर हाइट को एडजस्ट करें: डॉक्टर्स के मुताबिक आंखों की सेहत के लिए काम करते वक्त पॉश्चर और मॉनीटर के बीच बैलेंस करना बहुत जरूरी है। कोशिश करें की मॉनिटर की हाइट नीचे हो, क्योंकि नीचे देखने से आंखें थोड़ी ही खुलती हैं और ज्यादा लुब्रिकेंट इवेपोरेट(भाप बनकर उड़ना) नहीं होता।
  • एंटीग्लेयर का इस्तेमाल: कंप्यूटर स्क्रीन में एंटीग्लेयर या ब्लू फिल्टर इस्तेमाल करने की सलाह भी डॉक्टर देते हैं। एंटी ग्लेयर स्क्रीन की मदद से मॉनिटर स्क्रीन से निकलने वाली खतरनाक किरणों का असर आंखों पर कम होगा।
  • अगर चश्मा लगा है तो उपयोग करें: डॉक्टर के मुताबिक, जिन लोगों को चश्मा लगा है, वे इसका जरूर उपयोग करें। भले ही आपको बगैर चश्मे के भी साफ नजर आए, इसके बाद भी चश्मा जरूर लगाएं। 

इन हालातों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें
लॉकडाउन होने के कारण कर्मचारी घर से ही काम कर रहे हैं, तो वहीं खाली बैठे बच्चे मोबाइल पर अपना ज्यादातर वक्त बिता रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर्स माता-पिता को बच्चों को कंट्रोल करने की सलाह देते हैं। इसके अलावा अगर आप इन परेशानियों से जूझ रहे हैं तो मामला गंभीर हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • आंखों से जुड़ा काम करने पर ज्यादा तकलीफ होने लगे
  • आंख नहीं खोल पाएं
  • आंख में दर्द होने लगे
  • शाम होते-होते सिर में दर्द
  • आंख में चुभन महसूस होने लगे
  • पढ़ते वक्त क्लैरिटी न मिल पाए

सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त गुजार रहे यूजर

  • मार्च 28 को हुए हैमरकॉफ कंज्यूमर सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के पहले हफ्ते में भारतीय ने 280 मिनट प्रतिदिन सोशल मीडिया पर बिताए हैं। इससे पहले यह आंकड़ा 150 मिनट प्रतिदिन था। इस लिहाज से सोशल मीडिया यूसेज में करीब 87 फीसदी का इजाफा हुआ है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक 75 प्रतिशत लोगों ने ज्यादा टाइम व्हाट्सएप, ट्विटर और फेसबुक जैसी ऐप्स पर खर्च किया है। नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में लगभग 1300 लोगों पर हुए सर्वे में पाया गया कि ओटीटी एंगेजमेंट में भी करीब 71 फीसदी का उछाल आया है। 
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बठिंडा में घर जाने की जिद पर अड़े बंगाली मजदूरों ने किया हंगामा, पुलिस को दौड़ाया


  • बठिंडा में शनिवार को प्रदर्शन पर उतरे एम्स अस्पताल में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में लगे 600 के करीब प्रवासी मजदूर
  • आरोप-3 महीने से मजदूरी नहीं मिल रही, ऊपर से पुलिस लाठियां भांज रही है
  • पुलिस बल के साथ झड़प के बाद लेबर ने पत्थर बरसाए, भीड़ को देख गाड़ी भगाई तो किया पीछा

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 10:06 PM IST

बठिंडा. बठिंडा के एम्स अस्पताल में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में लगे 600 के करीब प्रवासी मजदूर शनिवार को प्रदर्शन पर उतर आए। पिछले 3 महीने से मजदूरी नहीं मिलने के चलते इन लोगों ने हंगामा किया। इन लोगों का कहना है कि पहले तो उनको तनख्वाह नहीं मिल रही है और ऊपर से आज पुलिस ने इन पर लाठियां भांजी। इन लोगों में ज्यादातर पश्चिमी बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं और ये अपने घर जाना चाहते हैं। प्रदर्शन की खबर पाकर पुलिस बल मौके पर पहुंचा तो वहां पुलिस और लेबर के बीच झड़प हो गई। लेबर ने पुलिस पर पत्थर भी बरसाए। भीड़ को देखते हुए पुलिस ने अपनी गाड़ी भगाई तो मजदूर पुलिस के पीछे भागते नजर आए। 

मिली जानकारी के अनुसार बिहार व झारखंड के मजदूरों के घर लौटने के बाद एम्स में काम कर रहे पश्चिम बंगाल के मजदूरों ने शनिवार को एम्स परिसर में घर जाने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि 600 के करीब मजदूरों ने एम्स में काम कंट्रोल कर रही फर्म से बंगाल के लिए ट्रेन की मांग रखी थी जिसके लिए कंपनी द्वारा 16 मई का समय दिया गया, लेकिन हालात बिगड़ते देख करीब 8-10 पुलिस कर्मियों ने जब भीड़ में कुछ लोगों को सख्ती से समझाने को हल्का लाठीचार्ज किया तो कई मजदूरों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। इसके चलते बचाव में पुलिस को मौके से भागना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस वाहन को भगाने पर कुछ पुलिसकर्मी उसमें चढ़ने में कामयाब हो गए, लेकिन कुछ पुलिसकर्मी उसमें चढ़ नहीं सके, जिन्हें गुस्साई लेबर ने घेर लिया तथा उनसे हाथापाई भी की। इसमें पुलिस की एक प्राइवेट कार का शीशा भी पत्थरबाजी में टूट गया। इसके बाद सीनियर अधिकारी एम्स पहुंचे तथा मजदूरों को शांत किया। एम्स का निर्माण देख रही कंपनी प्रबंधन क्लांइट के अनुसार ट्रेन के अभाव में मजदूरों को बस से पश्चिम बंगाल भेजने की योजना है जिसके लिए मजदूर तैयार हैं। वहीं मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें मार्च से सैलरी नहीं मिली है। बड़ी संख्या में मजदूरों के घरों को लौटने के बाद करीब 80 फीसदी कंस्ट्रक्शन का काम ठप हो चुका है, जिसमें बाहर से मैटीरियल नहीं पहुंचने के कारण भी काम रुका हुआ है।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार एम्स के काम को जरूरी वर्किंग लिस्ट में शामिल रखने के चलते इसे 20 अप्रैल के आसपास पुन: शुरू करवा दिया गया था। वहीं कंस्ट्रक्शन कंपनी के अधिकारियों के अनुसार मजदूरों का 1 माह का वेतन ही बकाया है तथा घर जाने की जिद के चलते मजदूर गलत जानकारी दे रहे हैं।

सोमवार को बसों से मजदूरों को बंगाल भेजने की तैयारी

हंगामे के बाद एम्स प्रबंधन ने जिला प्रशासन से मदद को संपर्क किया और बसों के जरिए मजदूरों को करीब 1800 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल भेजने की बात कही। हालांकि ट्रेन चलने को लेकर कोई भी जानकारी नहीं होने तथा मजदूरों के घर जाने की जिद पर अड़ने के बाद अब बस कंपनियों से एम्स की कंपनी बात कर रही है। करीब 500 से 600 की संख्या में मजदूरों के बंगाल जाने को लेकर एम्स में कार्यरत कंपनी किराये को लेकर बातचीत में जुटी है।

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साइकिल से घर लौट रहे मजदूर की कार की चपेट में आने से मौत, दिल्ली से बिहार के पूर्वी चंपारण जाने के दौरान हादसा


  • मृतक सगीर अंसारी (26) 5 मई को दिल्ली से अपने 6 साथियों के साथ बिहार के पूर्वी चंपारण के लिए रवाना हुआ था
  • लखनऊ पहुंचने के बाद मजदूर सड़क के डिवाइडर पर बैठकर खाना खा रहे थे, इसी दौरान कार ने डिवाइडर तोड़ते हुए टक्कर मार दी

दैनिक भास्कर

May 11, 2020, 04:34 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना की वजह से पलायन कर रहे मजदूरों की मौतें थम नहीं रही हैं। दिल्ली से बिहार के पूर्वी चंपारण लौट रहे एक मजदूर की सगीर अंसारी (26) की शनिवार को लखनऊ में कार की चपेट में आने से मौत हो गई। वह 5 मई को दिल्ली से अपने 6 साथियों के साथ बिहार रवाना हुआ था। दिल्ली से पूर्वी चंपारण की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है। पुलिस ने इस मामले में अनजान व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

पांच दिन के सफर के बाद ये मजदूर शनिवार को लखनऊ पहुंचा था। यहां वे सड़क के डिवाइडर पर बैठकर खाना खा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने डिवाइडर तोड़ते हुए सगीर को टक्कर मार दी। दूसरे मजदूर तुरंत अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

एंबुलेंस से शव भेजने की व्यवस्था की गई
डिवाइडर पर लगे एक पेड़ से कार के टकराने की वजह से दूसरे मजदूरों की जान बच गई। सगीर के साथ लौट रहे अन्य मजदूर भी पूर्वी चंपारण के थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कार ड्राइवर ने हादसे के बाद उन्हें मुआवजे की पेशकश भी की। हालांकि, बाद में मजदूर इस बात से पलट गए। एक स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सगीर का शव उसके गांव भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की।

कोरोना ड्यूटी में लगे शिक्षक की सड़क हादसे में मौत

उधर, कोरोना के सर्वे में लगे एक स्कूल शिक्षक साजिद अख्तर (30) की मुंबई के विक्रोली में सड़क हादसे में मौत हो गई। वे ठाणे के मुंब्रा के रहने वाले थे। ठाणे नगर निगम के प्रवक्ता ने कहा शिक्षक अपनी ड्यूटी करने के बाद रविवार को कुर्ला स्थित अपने घर लौट रहे थे। रास्ते में वे सड़क हादसे के शिकार हो गए।