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3 अप्रैल तक 22.6% ग्रोथ रेट से बढ़ रहा था संक्रमण, अब घटकर 5.5% पर पहुंचा, 4 दिनों से रोज एक लाख लोगों की जांच हो रही


  • संक्रमण के कुल मामलों में 80% केवल 5 राज्यों से, इनमें भी 60% मामले 5 शहरों तक सिमटे
  • लॉकडाउन के चलते देश में 14 से 29 लाख लोगों को संक्रमण का शिकार होने और 74 हजार मौतें रोकी जा सकीं
  • 19 मई को देश में 3.13% की दर से मौतें हो रही थीं, अब यह घटकर 3.0% हो गई

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 11:55 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 3 अप्रैल तक नए केस की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा था। ग्रोथ रेट 22.6% था, लेकिन इसके बाद इसमें कमी आना शुरू हुई। आज ग्रोथ रेट घटकर 5.5% हो गया है। यह राहत की बात है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि अभी ग्रोथ रेट में काफी कमी आई है। अगर उसी ग्रोथ रेट से मामले बढ़ते तो हालत गंभीर होती।  
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बताया कि देश में अब ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग पर फोकस किया जा रहा है। पिछले चार दिनों से रोज एक लाख से ज्यादा टेस्टिंग हो रही हैं। आज 1 लाख 57 हजार 16 लोगों का टेस्ट हुआ। अभी तक 27 लाख 19 हजार 434 लोगों की जांच की जा चुकी है। देश में मौतों की रफ्तार भी कम हुई है। आंकड़े देखें तो 19 मई को देश में 3.13% की दर से मौतें हो रही थीं, अब यह घटकर 3.0% हो गई है। 

लॉकडाउन की वजह से काफी मौतें और संक्रमण रोका जा सका

एम्पॉवर्ड ग्रुप के चेयरमैन वीके पॉल ने बताया कि जब देश में लॉकडाउन शुरू हुआ था तो संक्रमण का डबलिंग रेट 3.4 दिन था। मतलब हर 3.4 दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही थी लेकिन आज यह 13.3 दिन हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने में लॉकडाउन ने काफी मदद की। इसके चलते हमने 14 से 29 लाख संक्रमण के मामले और 38 हजार से 78 हजार मौतें रोकने में सफलता पाई है। पॉल ने बताया कि इतना बड़ा देश होने के बावजूद संक्रमण कुछ स्थानों तक सिमटकर रह गया। संक्रमण के कुल मामलों में 80% केवल 5 राज्यों से हैं। इनमें भी 60% मामले 5 शहरों तक सिमटे हुए हैं। इसी तरह अगर हम 90% मामलों का आंकलन करते हैं तो ये देश के 10 राज्यों से आए हैं। इनमें भी 70% मामले केवल 10 शहरों से हैं। 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया- एक लाख 85 हजार बेड तैयार कर लिए

  • संक्रमण के चलते अभी तक एक लाख 85 हजार कोविड बेड का प्रयोग हुआ है। 3 लाख बेड तैयार हैं जिनका अभी तक प्रयोग नहीं हुआ है। ये आगे की परिस्थिति के लिए है।
  • लॉकडाउन के दौरान 2 लाख से ज्यादा कोविड डेडिकेटेड सुविधाएं अस्पतालों में जुटाई गई हैं।  
  • 56 लाख से ज्यादा वॉलिंटियर्स को ट्रेनिंग दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वेबिनार में 24 लाख लोग शामिल हुए हैं।
  • आने वाले 6-8 हफ्ते में हर रोज 5 लाख पीपीई किट देश में तैयार होने लगेगा।
  • 5 कंपनियों के 4-6 वैज्ञानिक वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए हैं। कई के ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं। 

इम्युनिटी सही रखने की कोशिश करें

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। अब भी हम इसके बारे में बहुत सारी बातें नहीं जानते, इसलिए हमें चौकन्ना रहने की जरूरत है। हर किसी को अपनी इम्युनिटी को सही रखने के लिए आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। अगर किसी को भी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छिपाने से यह बीमारी दूर नहीं होगी। आगे का सफर आसान नहीं होगा, यह हफ्ते या महीनों की बात नहीं उससे आगे की बात होगी।

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दूसरे देशों में हर एक लाख लोगों में 62, जबकि भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले; हमारे यहां रिकवरी रेट 7.1% से बढ़कर 39.6% हुआ


  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दी जानकारी, आईसीएमआर ने कहा- 25 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई
  • लॉकडाउन का जब पहला फेज (25 मार्च) शुरू हुआ था तब रिकवरी रेट 7.1 था, आज 40% के करीब पहुंचा

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 05:24 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए भारत में समय पर फैसले लिए गए। यही कारण है कि दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित 15 देशों की तुलना में हमारे यहां 83% कम मौतें हुई हैं। पूरी दुनिया में एक लाख में 62 लोग कोरोना से प्रभावित हुए हैं तो भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले हैं।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, दुनिया के 15 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की कुल आबादी 142 करोड़ है, जबकि भारत की अकेले 137 करोड़ आबादी है। इतनी अधिक आबादी होने के बावजूद भारत की तुलना में उन 15 देशों में हमसे 34 गुना ज्यादा मामले और 83 गुना ज्यादा मौतें हुईं। भारत में प्रति एक लाख आबादी पर 0.2 लोगों की मौत हुई। अब तक देश में 25 लाख 36 हजार 156 टेस्ट हो चुके हैं। पिछले दो दिन में हमने 1 लाख से ज्यादा टेस्ट किए हैं। अभी 555 लैब एक्टिव हैं। 164 लैब प्राइवेट सेक्टर से हैं। 

लॉकडाउन के चलते रिकवरी रेट में मिली बढ़त
मंत्रालय ने बताया कि लॉकडाउन के चलते संक्रमितों के ठीक होने की रफ्तार में तेजी आई है। जब देश में लॉकडाउन का ऐलान हुआ था उस दौरान 7.1% रिकवरी रेट थी। लॉकडाउन के दूसरे फेज में यह 11.2 प्रतिशत हो गई। तीसरे फेज में यह 24.3 प्रतिशत हुई और अब 40% के करीब यानी 39.6% हो गई है।

2.94% मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर

अग्रवाल ने बताया कि अभी देश में जो कोरोना के मरीज हैं उनमें 2.94% लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। 3% आईसीयू और 0.45% लोग वेंटिलेटर पर हैं। आज अस्पतालों में 1.5 लाख बेड कोरोना मरीजों के लिए मौजूद है। अगर देश में आने वाले दिनों में केस बढ़ते हैं तो उसके लिए भी सरकार पूरी तरह से तैयार हैं। 

मंत्रालय ने ये भी कहा 

  • जब तक देश और दुनिया कोरोना के लिए दवा या वैक्सीन तैयार नहीं कर लेता, हम बचाव पर फोकस करेंगे। 
  • कंटेनमेंट जोन से ही हमें पता चलता है कि हम किस स्थिति में है। हमने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन बनाएं जहां पर सारी सुविधाएं मौजूद हों। 
  • हमने देखा है कि एसिम्प्टोमैटिक, माइल्ड सिम्प्टम्स वाले या सिम्प्टोमैटिक लोगों को अगर 10 दिन तक बुखार नहीं आया तो वे संक्रमण नहीं फैलाते। इसे देखते हुए हमने नई पॉलिसी बनाई है।
  • हमने समय से पहले संक्रमितों की पहचान करने की कोशिश की है। इसके अच्छे नतीजे आए हैं। काफी संख्या में लोग ठीक हुए हैं और कई लोग ठीक हो रहे हैं।