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वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा- सीबीआई, सीवीसी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को लोन दें, सरकार 100% गारंटी दे रही


  • सरकारी बैंकों व वित्तीय संस्थानों के सीईओ और एमडी के साथ हुई बैठक में निर्मला सीतारमण ने दिए निर्देश
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सीबीआई, सीवीसी और सीएजी के डर को कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 10:49 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बताया कि बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि वे तीन सी यानी सीबीआई, सीवीसी और सीएजी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को स्वचालित रूप से कर्ज दें।

उन्होंने कहा कि शुक्रवार को सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सीईओ और एमडी के साथ हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकार लोन पर 100 फीसदी गारंटी दे रही है, इसलिए लोने देने में डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भाजपा नेता नलिन कोहली के साथ बातचीत में कहा। पार्टी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया है। 

वित्त मंत्री ने 100 फीसदी गांरटी की बात कही

सीतारमण ने कहा कि कल मैंने फिर से कहा कि अगर लोन देने का फैसला गलत साबित हुआ और इससे नुकसान हुआ, तो सरकार ने 100 फीसदी गारंटी दी है। किसी भी बैंक अधिकारी या बैंक को दोषी नहीं ठहराया जाएगा। इसलिए बिना डर के वे खुद फैसला लें। जो भी अतिरिक्त टर्म लोन या अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल लोन के योग्य हों, उन्हें लोन दिया जाए।
वित्त मंत्री ने बैंकों से कहा- सीबीआई, सीवीसी से घबराए बिना योग्य ग्राहकों को लोन दें, सरकार 100% गारंटी दे रही है। 

सरकार ने एमएसएमई को 3 लाख करोड़ का पैकेज दिया

20.97 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत सरकार ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ रुपए की इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) की घोषणा की थी। एमएसएमई सेक्टर पर कोरोनावायरस संकट का बेहद नकारात्मक असर पड़ा है।

यह माना जाता है कि बैंक अधिकारी वाजिब और सही फैसले इसलिए नहीं ले पाते हैं, क्योंकि उन्हें तीन सी- केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) द्वारा प्रताड़ित किए जाने का डर सताता रहता है।

सरकार ने जांच एजेंसियों के डर को कम करने के लिए कदम उठाए 

वित्त मंत्री ने कहा कि सीबीआई, सीवीसी और सीएजी के डर को कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं। इसके तहत कई ऐसी अधिसूचनाओं को वापस लिया गया है, जिसके कारण बैंक अधिकारियों में डर बैठ गया था। ये डर बिल्कुल वाजिब थे। पिछले 7-8 महीने में मैंने बैंक अधिकारियों को कम से कम तीन बार बैठक लेकर कहा है कि उन्हें थ्री सी से नहीं डरना चाहिए।

वित्त मंत्री ने पैकेज के लिए समग्र नजरिया अपनाया

वित्त मंत्री द्वारा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के दिए ब्योरे की यह कहकर आलोचना की जा रही है कि उन्होंने आतिथ्य, वाहन और नागरिक उड्‌डयन सेक्टरों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कोई राहत नहीं दी। इस आलोचना का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने सेक्टर आधारित नहीं, बल्कि समग्र नजरिया अपनाया है। कृषि और बिजली क्षेत्र को छोड़कर सरकार ने सुधार कार्यों के लिए किसी अन्य सेक्टर का जिक्र नहीं किया है।

एमएसएमई को दिए पैकेज का फायदा दूसरे सेक्टरों को भी मिलेगा

सीतारमण ने कहा कि जिसे हम एमएसएमई पैकेज कह रहे हैं, उसमें एमएसएमई तो शामिल है ही, उस पैकेज का लाभ अन्य सेक्टरों को भी मिल सकता है। इसलिए आप जिस सेक्टर का नाम ले रहे हैं, वे भी इस पैकेज से लाभ हासिल कर सकते हैं।

पैकेज में यह नजरिया अपनाया गया है कि यदि किसी कंपनी ने बैंक से एक निश्चित सीमा तक लोन लिया है, या उसमें एक निश्चित सीमा तक निवेश हुआ है, या उसका एक निश्चित टर्नओवर है, तो यदि वे कारोबार को फिर से शुरू करने के लिए अतिरिक्त टर्म लोन या वर्किंग कैपिटल लेना चाहते हैं, तो वे ले सकते हैं।

डिजिटल तरीके से लोन देने पर जोर 

वित्त मंत्री ने उम्मीद जताई कि पहली जून से बिना किसी कोलैटरल के बैंकों से नकदी का प्रवाह शुरू हो जाएगा। सीतारमण के मुताबिक बैंक अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोन सरल तरीके से मंजूर किए जाने चाहिए। यदि संभव हो तो डिजिटल तरीके से लोन दिए जाने चाहिए, ताकि कम से कम लोगों के बीच सम्पर्क हो।  

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स्पेस सेक्टर में नया स्पेस; प्राइवेट फर्म्स भी इसरो की सुविधाओं का कर सकेंगी उपयोग, स्टार्टअप को मौका


  • सरकार स्पेस एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा देने पर ध्यान देगी 
  • सुधार के लिए पॉलिसी लाकर इसे आसान बनाया जाएगा।

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 11:54 PM IST

मुंबई. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने चौथे दिन स्पेस सेक्टर को लेकर घोषणा की। इसके मुताबिक अब प्राइवेट सेक्टर इसमें भाग ले सकेगा। इसका मतलब है कि अब वे इसरो की सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। स्पेस सेक्टर में सुधार के लिए पॉलिसी लाकर इसे आसान बनाया जाएगा।

स्पेस सेक्टर में सुधार

स्पेस सेक्टर में सुधार से प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। इससे निजी कंपनियां इसरो की सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। स्पेस एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। लिबरल जियो नीति पॉलिसी लाई जाएगी। साथ ही देश में स्टार्टअप्स के लिए एक और फील्ड में काम करने का अवसर मुहैया कराया गया है। इससे स्टार्टअप्स को भी शामिल होने का मौका मिलेगा।

पीपीपी मॉडल पर रेडिएशन टेक्नोलॉजी सेंटर बनेगा

इसी तरह एटॉमिक एनर्जी सेक्टर में भी सुधार के कदम उठाए गए हैं। इसके तहत पीपीपी मॉडल पर रेडिएशन टेक्नोलॉजी सेंटर का गठन होगा। इसके लिए रिसर्च रिएक्टर पीपीपी मॉडल पर  बनाए जाएंगें। मेडिकल आइसोटोप का उत्पादन होगा। बता दें कि आइसोटोप का कैंसर इलाज में प्रयोग होता है। पीपीपी से फूड प्रिजर्वेशन के लिए रेडिएशन टेक्नोलॉजी का विकास किया जाएगा।

स्टार्टअप इको सिस्टम को न्यूक्लियर सेक्टर से जोडने की योजना

कृषि सुधारों को बढ़ाने और किसानों की सहायता के लिए खाद्य संरक्षण हेतु irradiation technology का उपयोग करने के लिए पीपीपी मोड में सुविधाएं दी जाएंगी। भारत के मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को न्यूक्लियर सेक्टर से जोड़ने की योजना बनाई गई है। रिसर्च सुविधाओं और टेक आंतरप्रेन्योर के बीच तालमेल को बढ़ावा देने के लिए टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

फैसला क्यों लिया गया

वर्तमान में प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप्स स्पेस के लिए बाहर जाते हैं। अगर इनके लिए योजना बनती है तो देश में पैसे का निवेश होगा और साथ ही रोजगार बढ़ेगा। इसके लिए विदेशी कंपनियों को भी आकर्षित किया जा सकता है। यह सेंसिटिव एरिया है और इसके लिए दिशानिर्देश काफी कड़क होंगे। लेकिन सभी सूचनाएं स्टार्टअप और प्राइवेट कंपनियों को दी जाएंगी। 

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- घोषित किए गए उपायों और सुधारों से कई व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे


  • वित्तमंत्री की आज की घोषणा से आर्थिक परिवर्तन में सहयोग मिलेगा- मोदी
  • मैं आज के फैसलों के लिए पीएम मोदी की प्रशंसा करता हूं- अमित शाह

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 10:26 PM IST

मुंबई. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को आर्थिक पैकेज की चौथी किश्त जारी की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया कि कोयला, खनिज, रक्षा, विमानन, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आज वित्त मंत्री द्वारा घोषणाओं में शामिल किया गया है। घोषित किए गए उपायों और सुधारों से कई व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे और आर्थिक परिवर्तन में सहयोग मिलेगा।

इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस आर्थिक पैकेज की प्रशंसा की। 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की पांचवीं किश्त की घोषणा रविवार सुबह 11 बजे की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कोविड-19 से निपटने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा इस सप्ताह की शुरुआत में की थी।
यह फैसले हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे- अमित शाह

  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी के सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन का मंत्र पिछले छह वर्षों में भारत की वृद्धि में योगदान दे रहा है। मैं पीएम मोदी और वित्त मंत्री सीतारमण को धन्यवाद देता हूं। आज के ऐतिहासिक फैसले निश्चित रूप से हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे।
  • उन्होंने कहा कि कोयला क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 50,000 करोड़ रुपए और वाणिज्यिक खनन की शुरूआत एक स्वागत योग्य नीति सुधार है। यह अधिक प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता लाएगा। 
  • गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि रक्षा निर्माण क्षेत्र में एफडीआई सीमा को बढ़ाकर 74 प्रतिशत करना और हर साल चुनिंदा हथियारों/प्लेटफार्मों के आयात पर प्रतिबंध लगाने से मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा। हमारे आयात के बोझ को कम करेगा। 

राजनाथ सिंह ने कहा- कारखानों की दक्षता में सुधार होगा
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा घोषणाएं की गईं। यह अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में कई तरीकों से एक लंबा रास्ता तय करेगा। कॉर्पोरेटाइजेशन हमारी आयुध आपूर्ति और कारखानों की दक्षता में सुधार करेगा। ऑटोमेटिक तरीके से रक्षा निर्माण क्षेत्र में एफडीआई सीमा अब 49% से बढ़ाकर 74% कर दी गई है।

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देश भर में 6 हवाई अड्‌डों की होगी नीलामी; ज्यादा एयरस्पेस ओपेन किया जाएगा, इससे उड़ान का समय और पैसा बचेगा


  • उड़ानों का समय और ईंधन बचाने में मिलेगी मदद
  • सालाना 800 से 2,300 करोड़ रुपए की बचत होगी

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 09:32 PM IST

मुंबई. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने चौथे दिन की प्रेस कांफ्रेंस में सिविल एविएशन के लिए तीन सुधारों की घोषणा की। इसमें एक पीपीपी मॉडल पर हवाई अ्डडों को डेवलप करना, दूसरा एमआरओ को देश में शुरू करना और तीसरा एयर स्पेस को ज्यादा खोलने की शुरुआत होगी। इससे उड़ानों के समय में बचत होगी। साथ ही ईंधन पर होनेवाले खर्चों में बचत होगी।

क्या घोषित किया- भारत को विमानों की रिपेयरिंग का हब बनाने की योजना

वित्तमंत्री ने बताया कि मेंटीनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग (एमआरओ) के जरिए भारत को विमानों की मरम्मत का हब बनाने की योजना पर काम हो रहा है। एयरक्राफ्ट का मेंटीनेंस अगर भारत में होगा तो इससे सालाना 800 से 2,300 करोड़ रुपए की बचत होगी। अभी तक विदेशों में विमानों के मरम्मत से सालाना इतना खर्च होता था। उन्होंने कहा कि भारत में शुरू होने से यहां के नागरिक विमान और मिलिट्री के विमानों की मरम्मत की जाएगी। इससे भारत में रोजगार बढ़ेगा और बाहर के विमानों की भी भारत में रिपेयरिंग हो सकेगी। एयरलाइंस मैनेजमेंट की लागत भी कम होगी। 

किसे और कितना मिलेगा – 13 हजार करोड़ का निवेश और प्राइवेट प्लेयर आएंगे 

वित्तमंत्री ने कहा कि आनेवाले समय में 6 हवाई अड्‌डों का ऑक्शन यानी नीलामी की जाएगी। यह नीलामी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की ओर से की जाएगी। इस योजना से एएआई को 2,300 करोड़ रुपए का डाउन पेमेंट मिल सकता है। हालांकि इसके अलावा 6 और एयरपोर्ट की पहचान कर उन्हें पीपीपी मॉडल के तहत डेवलप किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर की सुविधा लोगों को मिलेगी। इन 12 हवाई अड्‌डों पर 13,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा।

कब मिलेगा- अगले 6 महीने में एयर स्पेस को ज्यादा खोला जाएगा

उन्होंने कहा कि देश में एयरस्पेस को ज्यादा खोलने की योजना पर काम हो रहा है। एयर स्पेस खोलने से उड़ानों का समय होगा, इससे लोगों का समय बचेगा। साथ ही उड़ानों पर खर्च होनेवाले ईंधन की भी बचत होगी। इसके लिए सरकार मिलिट्री के साथ बात करके इसे सुलझाएगी। बता दें कि देश के कई इलाकों में मिलिट्री एरिया होने से उन इलाकों में विमानों की आवाजाही पर पाबंदी रहती है। इस वजह से विमानों को घूम कर जाना होता है। इससे 1,000 करोड़ रुपए का फायदा हो सकता है। पर्यावरण के बचाव में भी सहयोग मिलेगा।

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कृषि से जुड़े नियमों में सुधार- अनाज, तेल, तिलहन, दालें समेत कई फसलों से नियंत्रण खत्म होगा और स्टॉक करने की सीमा भी हटेगी


दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 07:08 PM IST

मुंबई. केंद्र सरकार ने सबसे बड़ा कदम एग्रीकल्चर में प्रशासकीय सुधारों को लेकर उठाया है।  इसमें आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act (1955) amended) में संशोधन करने का एलान किया गया है। सरकार ने कहा कि इसके तहत कृषि उत्पादों में अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू को डी-रेगुलेट किया जाएगा।

किसे मिला

इस सुधार से फसलों की अधिकता से निपटने में मदद मिलेगी। अनाज, खाद्य तेल, बीज, आलू और प्याज को नियंत्रण मुक्त किया जाएगा। भंडारण के लिए कोई स्टॉक सीमा लागू नहीं होगी। इससे किसानों को फायदा होगा। वे सीजन में सस्ते कीमत पर अनाज खरीदकर या अपना अनाज स्टोर कर उसे बाद में बेच सकते हैं।

क्यों मिला

किसानों को खुले बाजार में फसलों की सही कीमत मिले, स्टॉक की कमी के कारण अनाज नुकसान न हो। इससे किसान अपने हिसाब से तय कर सकेंगे।

क्या मिला

किसानों के लिए उचित मूल्य मिलना संभव होगा। किसानों को आकर्षक कीमतों पर बेचने के लिए विकल्प प्रदान करने के लिए सेंट्रल लॉ बनाया जाएगा। अंतरराज्यीय व्यापार को बाधा मुक्त बनाया जाएगा। उत्पाद के ई-व्यापार को आसान बनाए बनाये जाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

कैसे मिलेगा

किसानों की उम्मीद के मुताबिक मूल्य निर्धारण के लिए स्टैण्डर्ड मैकेनिज्म होगा। इससे किसानों को अपनी कीमत तय करने में मदद करने के लिए लीगल फ्रेमवर्क मिलेगा। बुवाई से पहले किसानों के लिए सुनिश्चित मूल्य और गुणवत्ता भी तय होगी। फार्मिंग टेक्नोलॉजी की उपलब्धता बढ़ाने और बिक्री के अवसरों को बेचने के लिए भी जोर दिया गया है। 

सरकार का उद्देश्य वैल्यू चेन को मजबूत करना है

एक्सिस सिक्योरिटीज के बी. गोपकुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र और मत्स्य पालन से संबंधित आज की घोषणाओं का उद्देश्य वैल्यू चेन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। सरकार की दीर्घकालिक सोच है कि वह आर्थिक बुनियादी चीजों में सुधार लाये जो आगे सप्लाई चेन को बहाल करने में मदद करे कृषि उत्पादों की बर्बादी को कम कर बेहतर मूल्य वसूली कर सके।

उन्होंने कहा कि इससे रोजगार सृजन में मदद मिलेगी और दीर्घकालिक मांग का सृजन होगा। हमें आज घोषित उपायों के किसी बड़े तात्कालिक लाभ की उम्मीद नहीं है लेकिन सरकार की दीर्घकालिक सोच स्पष्ट है। आज की घोषणाओं के इक्विटी बाजारों पर प्रभाव सीमित होने की संभावना है क्योंकि सारे लाभ बैक एंडेड हैं।

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एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर स्थानीय बाजारों को ग्लोबल लेवल पर कंपटीशन के लिए तैयार करने की सरकार की योजना


  • वित्तमंत्री ने किया एग्रीकल्चर इंफ्रा सेक्टर के लिए बड़ा ऐलान, एक लाख करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी
  • प्राइवेट और स्टार्टअप्स को किसानों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए शामिल किया जाएगा

दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 06:54 PM IST

मुंबई. 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज के तीसरे दिन वित्तमंत्री ने एग्रीकल्चर से जुडे़ कई सेक्टर पर फोकस किया। इसके तहत इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को एक लाख करोड़ रुपए देने का ऐलान किया गया। इस पैसे से स्थानीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा। इसको हम समझने की कोशिश करते हैं

क्या मिला?

एक लाख करोड़ रुपए का इंफ्रा का फंड उन लोगों को मिलेगा, जो लोग मूलरूप से कृषि से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जुड़े हैं। यानी कृषि आधारित इंफ्रा के लिए यह राशि दी जाएगी।

किसे मिलेगा?

यह एक लाख करोड़ रुपए की राशि संस्थाओं के जरिए मिलेगी। जैसे किसान उत्पादित संघ, स्टार्टअप, एग्रीगेटर, एग्री के आंतरप्रेन्योर आदि के माध्यम से यह पैसा दिया जाएगा। ताकि ये लोग किसानों के लिए इस तरह की सुविधाओं को तैयार कर सकें।    

क्यों मिलेगा?

कृषि इंफ्रा के जरिए स्थानीय बाजार और किसानों को वैश्विक बाजारों में मुकाबला करने के लिए यह राशि मिलेगी। जब देश में गोदाम, कोल्ड स्टोरेज बेहतर होंगे तो इससे किसानों की आय दोगुनी होगी और मांग पूरी करने के साथ-साथ एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा। हार्वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रा के बाद सस्ते और फाइनेंशियल रूप से एग्रीगेशन प्वाइंट को सक्षम बनाने के लिए फोकस किया गया है।

कब और कैसे मिलेगा?

इस पर दिशा निर्देश आने के बाद मिलेगा। हालांकि इस फंड का निर्माण तुरंत किया जाएगा। यह पैसा कोल्ड स्टोरेज चेन को बनाने के लिए, गोदामों की संख्या बढ़ाने के लिए, भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए संस्थाओं को दिया जाएगा।दरअसल इस राहत पैकेज के पीछे उद्देश्य यह है कि देश में कृषि आधारित लॉजिस्टिक और स्टोरेज को बढ़ावा दिया जाए। इसे प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसाइटी के जरिए इंफ्रा को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। खासकर प्राइवेट और स्टार्टअप को किसान की इंफ्रा को मजबूत करने के लिए शामिल किया जाएगा।

वित्तमंत्री के 8 एलान में कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक के निर्माण से संबंधित थे, जबकि 3 एलान प्रशासनिक सुधारों से जुड़े रहे। कृषि इंफ्रा के क्षेत्र में अहम कदम उठाते हुए वित्त मंत्री ने वित्त मंत्री ने फार्म गेट के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का एलान किया है। वित्त मंत्री ने कहा- भारत दाल, दूध, जूट का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। छोटे और मझोले किसानों के पास 85 फीसदी खेती है।
पैकेज ब्रेकअप पार्ट-3 से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ सकते हैं…
1# मत्स्य उद्योग के लिए वित्त मंत्री ने 20,000 करोड़ रुपए का ऐलान किया
2# खेती से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपए; किसान दूसरे राज्यों में जाकर भी उपज बेच सकेंगे, गंगा किनारे औषधीय पौधों का कॉरिडाेर बनेगा
3# माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज के लिए 10,000 करोड़ रुपए का पैकेज
4# सरकार ने ऑपरेशन ग्रीन का दायरा बढ़ाया, 500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे

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ऑपरेशन ग्रीन को 500 करोड़ मिलेंगे; दायरे को टॉप यानी टोमैटो, ओनियन और पोटैटो से बढ़ाकर टोटल यानी सभी सब्जियों तक किया गया


  • किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत, फसलों की भी बर्बादी रुकेगी
  • उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर जरूरत के सभी प्रोडक्ट मिलेंगे

दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 06:28 PM IST

मुंबई. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण न आर्थिक पैकेज के अंतिम दिन कई तरह की घोषणाएं कीं। इसमें उन्होंने कृषि इंफ्रा को एक लाख करोड़ रुपए देने के अलावा टोमैटो, ओनियन और पोटैटो (टॉप) टू ऑल फ्रूट एंड वेजिटेबल (टोटल) के लिए 500 करोड़ रुपए का ऐलान किया।

किसे मिला और क्या मिला?

अब ऑपरेशन ग्रीन का दायरा टमाटर प्याज और आलू (TOP) से बढ़ाकर सभी प्रकार के फलों और सब्जियों (TOTAL) पर किया जाएगा। इसके लिए वित्तमंत्री ने किसानों को यह पैकेज दिया है। सब्सिडी के रूप में यह पैकेज दिया जाएगा।

कितना मिला?

टॉप से टोटल के तहत किसानों को 500 करोड़ रुपए मिलेंगे। 

कब मिलेगा?

पहले यह 6 महीने के पायलट योजना के लिए होगा फिर इसका विस्तार होगा।

कैसे मिलेगा?

कमतर मार्केट से सरप्लस वाले मार्केट में ट्रांसपोर्ट पर 50 प्रतिशत किराए की सब्सिडी और 50 प्रतिशत कोल्ड स्टोरेज में रखने पर सब्सिडी के रूप में यह राशि दी जाएगी।

इसके जरिए किसानों को अच्छी कीमत मिलेगी, फसलों की बर्बादी रुकेगी और इसका सीधा फायदा यह होगा कि उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर उनके प्रोडक्ट मिलेंगे। दरअसल सप्लाई चेन बाधित हो चुकी है और किसान अपने उत्पादों को बाजार में नहीं बेच पा रहे हैं। जल्दी खराब हो जाने वाले फलों का डिस्ट्रेस सेल हो रहा है। कम कीमतों पर फलों औऱ् सब्जियों को किसानो के खेतों से ही संरक्षण दिए जाने की जरूरत पर फोकस दिया गया है।

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देश में 43% रोजगार कृषि पर निर्भर, इसके बावजूद मेगा राहत पैकेज से किसान को कुछ खास नहीं


  • कृषि से जीडीपी 2019 की चौथी तिमाही में 60 लाख 91 हजार करोड़ रुपए रही
  • देश के अंदर कृषि उत्पादों का निर्यात जनवरी में 21 हजार करोड़ रुपए हो रहा

दैनिक भास्कर

May 14, 2020, 09:28 PM IST

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस एग्रीकल्चर पर भी फोकस रही, लेकिन 20 लाख करोड़ के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ पैकेज से उन्हें कुछ खास नहीं मिला। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ किसानों को पहले ही 4 लाख करोड़ की राहत मिल चुकी है। मार्च में नाबार्ड के जरिए ग्रामीण बैंकों को पैसा मुहैया कराया गया, ताकि ये ऋण दिए जा सकें। वहीं, किसानों को 31 मई तक ब्याज की छूट मिलेगी। बता दें कि देश की 70 फीसदी आबादी और 43% रोजगार कृषि पर निर्भर हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रमुख बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ मौजूद केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा 2014 में मोदी जी ने अपने सबसे पहले भाषण में कहा था कि उनकी सरकार वो, जो गरीबों के लिए सोचे, गरीबों की सुनें, गरीबों के लिए जिए, और इसीलिए नई सरकार देश के गरीबों, युवाओं और महिलाओं को समर्पित है। गांव, गरीब, पीढ़ित, वंचित ये सरकार उनके लिए है। हमें गरीब से गरीब आदमी की मदद करनी है।पीएम

  • किसान सम्मान से हर किसान के खाते में 6 हजार रुपए डाले।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिड कार्ड, हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं दीं।
  • देश के 22 करोड़ से ज्यादा गरीबों का हेल्थ इंश्योरेंस कराया गया।
  • गरीबों के बैंक खाते खुलवाए और उनके खाते में डायरेक्ट पैसे भेजे गए।

किसे मिलेगा?

देश की 70 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है। देश में 43% रोजगार भी कृषि पर निर्भर हैं। सरकार ने आज जो ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ पैकेज को लेकर घोषणाएं की उससे 5.5 करोड़ किसानों को फायदा होगा।

क्या मिलेगा?

  • 3 करोड़ किसानों के लिए 4 लाख 22 हजार करोड़ का कृषि ऋण पहले ही दिए जा चुके हैं।
  • 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड की मंजूरी दी है, जिस पर ऋण की लिमिट 25 हजार करोड़ रुपए होगी।
  • गांव में कॉपरेटिव बैंक रूरल और रीजनल बैंक रूरल को मार्च 2020 में नाबार्ड ने 29 हजार 500 करोड़ रुपए के रिफाइनेंस का प्रावधान किया है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 4,200 करोड़ रुपए का सहयोग रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के माध्यम से राज्यों को मार्च में राशि उपलब्ध कराई गई।

कितना मिलेगा?

  • किसानों को दिए गए ऋण पर इस बात की छूट दी गई है कि 3 महीने तक किसी तरह का ब्याज नहीं देना है।
  • कृषि के क्षेत्र में पिछले मार्च और अप्रैल महीने में 63 लाख ऋण मंजूर किए गए। जिसकी अमाउंट लगभग 86 हजार 600 करोड़ रुपए है।
  • फसल की खरीद के लिए 6,700 करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी भी राज्यों को उपलब्ध कराई गई।

कब मिलेगा?

लॉकडाउन की शुरुआआ से ही किसानों को ये सुविधाएं दी जा रही हैं, जो इसी तरह आगे भी जारी रहेंगी।

एक्सपर्ट व्यू

हेमेंद्र माथुर (आईआईएम अहमदाबाद द्वारा स्थापित भारत इनोवेशन फंड के पार्टनर) ने बताया कि बहुत अच्छा पैकेज है। किसान कठिनाई में हैं। छोटे और मझोले किसानों को केंद्र में रखा है। ब्याज देने में थोड़ी राहत है। यह सकारात्मक कदम है। किसानों को तरलता का चैलेंज सबसे बड़ा है। फसलों की कीमतें कम हो गई थीं। 10 से 40 प्रतिशत कीमतें गिरी हैं। पोल्ट्री सेक्टर काफी बुरे हाल में है। फिशरमैन की भी हाल बहुत बुरी है। सरकार को इस समय का उपयोग रिफॉर्म के रूप में किया जाए।
 
दूसरी तरफ, आरएमएल एग्रोटेक के राजीव तेवतिया (सीआईआई में एग्री मेंबर) ने कहा कि इसका लाभ किसानों को और  छोटे दुकानदारों को भी मिला है। इससे विश्वास बढ़ेगा, लोग अपने बिजनेस शुरू करेंगे। अपने कामों कामों पर इससे जुटना चाहिए। सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। पैकेज सही दिशा में है। भारतीय कृषि को अगले स्टेज पर ले जाने के लिए सरकार को डिजिटल प्रयोग करना चाहिए। कुछ रिफार्म को आगे बढ़ाना चाहिए।

सरकार को क्यों घोषणाएं करनी पड़ी

बिजनेस-फैक्ट्री बंद होने से कृषि पर दवाब बना : कोरोनावायरस के चलते देश में सभी तरह के बिजनेस और फैक्ट्रियां बंद हैं, या फिर उनकी रप्तार भी धीमी हो गई है। ऐसे में कृषि पर ज्यादा दवाब आया है। केंद्र सरकार ने एग्रीकल्चर और इससे जुड़े क्षेत्रों को लॉकडाउन से छूट दी, ताकि खाद्य वस्तुओं की कोई कमी नहीं हो। देश की कुल जीडीपी में कृषि का 3 फीसदी योगदान है, लेकिन 43 फीसदी लोगों को इससे रोजगार मिलता है।

2019-20 में जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में कृषि का योगदान घटकर 16.5% हो गया, जो 2014-15 में 18.2% था। गिरावट का मुख्य कारण 2014-15 में 11.2% से 2017-18 में 10% तक फसलों के GVA की हिस्सेदारी में कमी के कारण हुई।

कृषि से भारत की जीडीपी: भारत में कृषि से जीडीपी 2019 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में बढ़कर रिकॉर्ड 60 लाख 91 हजार करोड़ रुपए हो गई। 2019 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2019) में 36 लाख 64 हजार करोड़ रुपए थी। भारत में कृषि जीडीपी 2011 से 2019 तक औसतत 41 लाख 91 हजार करोड़ रुपए रही है। 2011 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2011) में रिकॉर्ड 26 लाख 90 करोड़ रुपए सबसे कम थी।

कृषि से रोजगार: वर्ल्ड बैंक कलेक्शन ऑफ डेवलपमेंट इंडिकेटर्स के सोर्स के अनुसार भारत में कृषि में रोजगार (कुल रोजगार का %) 2019 में 43.21% था।

कृषि निर्यात: भारत में कृषि उत्पादों का निर्यात जनवरी में घटकर 21 हजार करोड़ रुपए हो गया, जो 2019 के दिसंबर में 23 हजार करोड़ रुपए था। भारत में कृषि उत्पादों के निर्यात में 1991 से 2020 तक औसतन 8 हजार करोड़ रहा है। 2019 के मार्च में ये रिकॉर्ड 28 हजार करोड़ रुपए के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, 1991 के अक्टूबर में करीब 500 करोड़ रुपए सबसे कम था।

कौन होते हैं सीमांत किसान

जिन किसानों के पास 1 हेक्टेयर से कम कृषि योग्य भूमि होती है, ऐसे किसानों को सीमांत किसान कहा जाता है। 2010-11 की कृषि जनगणना के मुताबिक भारत में किसानों की कुल जनसंख्या में सीमांत किसान परिवारों की हिस्सेदारी 67.04 फीसदी है। इसमें भी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी उन किसानों की है जिनके पास आधा हेक्टेयर से कम कृषि योग्य भूमि है। 2000-01 की जनगणना के मुताबिक भारत में किसानों के पास औसत कृषि योग्य भूमि 0.40 हेक्टेयर थी जो 2010-11 में घटकर 0.38 हेक्टेयर पर आ गई है।
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3# 8 करोड़ मजदूरों के लिए 3,500 करोड़ रुपए, राशन कार्ड की पोर्टबिलिटी और शहरों में सस्ते किराए पर मिलेगा आवास
4# वित्त मंत्री ने शहरी गरीबों और प्रवासी मजदूरों को सस्ते मकान और कम किराए वाली आवासीय सुविधा की सौगात दी

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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण चार दिन तक बता सकती हैं 20 लाख करोड़ के पैकेज का ब्रेकअप, आज शाम 4 बजे पहली घोषणा


  • आरबीआई और सरकार ने पहले भी दी है कई राहत
  • डीबीटी के तहत एक बड़ी राशि का हो सकता है आवंटन

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 11:29 AM IST

मुंबई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 20 लाख करोड़ रुपए के कोविड-19 के राहत पैकेज का पूरा ब्रेकअप आज से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण दे सकती हैं। खबर है कि चार दिनों तक इस पर जानकारी दी जाएगी। इसमें जिस चार एल यानी लैंड, लेबर, लॉ और लिक्विडिटी पर फोकस किया गया है, उसे एक-एक दिन में जारी किया जाएगा। आज वित्तमंत्री शाम को 4 बजे पहली घोषणा करेंगी।

12 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का मिलेगा ब्रेकअप

बता दें कि 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का करीबन 8 लाख करोड़ रुपए पहले ही आरबीआई और सरकार ने जारी कर दिया था। अब 12 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ब्रेकअप दिया जाएगा। इसमें से 50,000 करोड़ रुपए टैक्स के लिए घोषित किए जा सकते हैं। जबकि पावर सेक्टर को करीबन एक लाख करोड़ रुपए जारी हो सकता है। इसी तरह देश के गरीबों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए एक बड़ी राशि का अलोकेशन हो सकता है। इसमें एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को करीबन एक लाख करोड़ रुपए का अलोकेशन हो सकता है।

सेक्टरल सुधार पर दिया जाएगा जोर

तीसरे और चौथे दिन सेक्टरल सुधार पर जोर दिया जा सकता है। इस सुधार में प्रमुख रूप से एविएशन, खनन, रक्षा पर फोकस किया जाएगा। सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सुधारों पर फोकस करेगी। इस पैकेज में से एसएमई और एग्रो सेक्टर को सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा। एग्री को जहां 3 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है वहीं एमएसएमई को 2.5 लाख करोड़ रुपए मिल सकते हैं। असंगठित क्षेत्र जैसे ठेला वाले और फेरीवालों के लिए भी इसमें एक बड़ी राशि का आवंटन किया जा सकता है। हाउसिंग सेक्टर को भी एक बड़ा पैकेज मिल सकता है।

एमएसएमई, एविएशन और फाइनेंस को मिलेगा ज्यादा पैसा

वित्तमंत्री इसे कई चरणों में जारी करेंगी, इसलिए संभव है कि आज पहले दिन जमीन या मजदूर के मामले को लेकर फैसला हो सकता है। सरकार के इस पैकेज से एमएसएमई, एविएशन और फाइनेंस सेक्टर ज्यादा मजबूत होंगे। खबर है कि सरकार लिक्विडिटी के जरिए कई सेक्टरों को एक साथ फायदा दे सकती है। लिक्विडिटी का मतलब पैसा बैंकों के जरिए दिया जाएगा जो रियल्टी, कंस्ट्रक्शन, एनबीएफसी आदि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। सरकार टैक्स के ढांचे में बदलाव करेगी और इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाएगी। इससे उसे 20 लाख करोड़ रुपए को पूरा करने के लिए लिए थोड़ी आसानी हो सकती है।