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प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा- कोरोना की वैक्सीन बनाने में देश के 30 ग्रुप काम कर रहे, यह बहुत ही जोखिम भरा काम


  • नीति आयोग ने के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने कहा- कोरोनावायरस से जंग वैक्सीन और दवाओं से ही जीती जा सकेगी
  • उन्होंने कहा कि हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही सक्षम है और हमें इन पर भरोसा है

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस पर गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्, इंडियन मेडिकल काउंसिल फॉर रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने भी हिस्सा लिया। नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने बताया कि कोरोना के खिलाफ हम जंग वैक्सीन और दवाओं से जीतेंगे। हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही मजबूत हैं।

उधर, प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार और प्रोफेसर के. विजय राघवन ने बताया कि हमारे यहां चार तरह से वैक्सीन तैयार हो रही हैं। इनमें एमआरए वैक्सीन: वायरस का जेनेटिक मैटेरियल लेकर इसे तैयार किया जाता है। स्टैंडर्ड वैक्सीन: वायरस का एक कमजोर वर्जन लिया जाता है, यह फैलता है, लेकिन इससे बीमारी नहीं होती। तीसरा: किसी और वैक्सीन में इस वायरस का प्रोटीन डालकर भी वैक्सीन तैयार किया जाता है। इसके साथ ही एक वायरस के स्ट्रीक से भी वैक्सीन तैयार करने की कोशिश हो रही है।

विजय राघवन ने बताया, हमारी वैक्सीन कंपनियां इसके लिए शोध और विकास कार्य में भी लगी हैं। कई स्टार्टअप कंपनियां भी यह काम कर रही हैं। देश में 30 ग्रुप ऐसे हैं, जो वैक्सीन बनाने के लिए आगे आए हैं। यह एक जोखिम भरी प्रक्रिया है। हम इसके लिए वैश्विक स्तर पर हो रहे प्रयास का हिस्सा हैं।

‘पूरी तरह देख रही है कि हम कैसे काम कर रहे हैं’ 
नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने बताया कि कोरोना के खिलाफ हम जंग वैक्सीन और दवाओं से जीतेंगे। हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही मजबूत हैं। भारत की फार्मा इंडस्ट्री को फार्मा ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। हमारे देश में बनी दवाएं और वैक्सीन पूरी दुनिया में जाती हैं। पूरी दुनिया यह देख रही है कि किस तरह हम पुरानी दवाओं का इस्तेमाल कर महामारी से बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही हम दवाओं के लिए शोध में भी जुटे हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले संबोधन में वैज्ञानिकों और युवाओं से कहा था कि वे दवा और वैक्सीन खोजें। यह देश के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए होगा।

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राम गोपाल वर्मा ने रिलीज किया ‘कोरोनावायरस’ का ट्रेलर, दावा- पूरी शूटिंग लॉकडाउन में ही हुई


दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 12:35 AM IST

फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने कोरोनावायरस पर इसी नाम से  बनी अपनी फिल्म का ट्रेलर मंगलवार रात रिलीज किया। वर्मा का दावा है कि यह कोरोना पर बनी दुनिया की पहली फिल्म है। उनके मुताबिक, इसकी पूरी शूटिंग लॉकडाउन पीरियड में ही हुई है। वर्मा ने ट्विटर पर लिखा है, “जब बाकी लोग घर का पोंछा लगाने, खाना बनाने, बर्तन धोने और कपड़े सुखाने जैसे काम कर रहे थे, तब मैंने एक फिल्म बना दी।

वर्मा ने अपने एक अन्य ट्वीट में बताया कि फिल्म कोरोना के कारण हमारे दिलों में बैठे डर के बारे में है। वे लिखते हैं, “कोरोनावायरस हॉरर फिल्म नहीं है। यह उस हॉरर के बारे में है, जो हम सभी के अंदर हैं। यहां तक कि हमारे ग्रेट लीडर्स और ब्यूरोक्रेट्स में भी, जिसे सिर्फ उतना ही जानते हैं, जितना हम जानते है, जो कि कुछ भी नहीं है।”

चार मिनट के ट्रेलर में एक परिवार की कहानी

फिल्म के चार मिनट के ट्रेलर में एक परिवार की कहानी दिखाई दे रही है, जो कि लॉकडाउन के कारण साथ रह रहे हैं। हालात तब संदिग्ध हो जाते हैं, जब एक सदस्य में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। तेलुगु में बनी यह फिल्म अभिनेता श्रीकांत अयंगर पर पिक्चराइज है। अगस्त्य मंजू ने इसका निर्देशन किया है। 



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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मजदूरों के मामले में खामियां रहीं; केंद्र और राज्य सरकारें यात्रा, रुकने के स्थान और भोजन की व्यवस्था करें


  • शीर्ष अदालत के 3 जजों की बेंच ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर 28 मई तक जवाब मांगा

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 08:16 PM IST

नई दिल्ली. लॉकडाउन के कारण देशभर के प्रवासी मजदूरों का अपने घरों की ओर लौटना जारी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश के अलग-अलग राज्यों में मजदूरों को आ रही परेशानियों पर स्वत: संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इस मामले में राज्य और केंद्र सरकार से गलतियां हुईं। अब केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रवासी मजदूरों की यात्रा, उनके ठहरने के स्थान और भोजन की व्यवस्था के लिए कदम उठाएं।
प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत की तीन जजो की बेंच ने विचार किया। इसमें जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह शामिल थे। बेंच ने कहा- इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को फौरन प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। अदालत ने केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर 28 मई तक जवाब मांगा है।

मुफ्त हों सेवाएं
बेंच ने पूरे मामले का अध्ययन किया। इसके बाद आदेश में कहा- केंद्र और संबंधित राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों को यात्रा, ठहरने के उचित स्थान और भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। और यह निशुल्क यानी मुफ्त होनी चाहिए। इस मामले में कार्रवाई करते समय एजेंसियों के बीच तालमेल होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

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वहां भी नौकरियां खोईं, बिजनेस बंद हुआ; लोग फंसे और सामान की किल्लत भी झेलनी पड़ी


  • कोरोना के बाद जो नौकरियां गईं, उसमें श्रुति की जॉब चली गई, जॉब जाने के कुछ वक्त बाद श्रुति को नियम मुताबिक अपने देश लौटना है
  • दो महीने का दाल-चावल, पोहा-उपमा स्टॉक किया, इंफेक्शन के डर से सब्जियां घरों में ही उगा रहे लोग

अक्षय बाजपेयी

May 26, 2020, 01:03 PM IST

नईदिल्ली. अमेरिका में करीब 27 लाख भारतीय रहते हैं। कोरोना का जितना असर भारत में उससे कहीं ज्यादा प्रभावित अमेरिका है। लॉकडाउन भी दोनों ही देशों में लगाया गया। और जो दिक्कतें भारत में हुई लगभग वैसी ही यूएस में भी। वहां रहने वाले भारतीय इस दौरान क्या कर रहे हैं, हमने उनसे बात की, एक रिपोर्ट…

नौकरियां खोईं और बिजनेस बंद हुआ

आदित्य और श्रुति दोनों मुंबई के रहने वाले हैं। दोनों अमेरिका में नौकरी करते थे। कुछ समय पहले ही वे यूएस पहुंचे। कोरोना के बाद जो नौकरियां गईं, उसमें श्रुति की जॉब चली गई। जॉब जाने के कुछ वक्त बाद श्रुति को नियम मुताबिक अपने देश लौटना है। नई नौकरी की उम्मीद कम ही है। हो सकता है देश लौटना पड़े।

सौरव मालवीय यूएसए में रहते हैं और प्रोफेशनल वेडिंग फोटोग्राफर हैं। सौरव ने बताया कि लॉकडाउन के पहले हर महीने 6 से 7 लाख रुपए की अर्निंग थी लेकिन अभी फील्ड वर्क बंद है।

घर से ही एडिटिंग का कम चल रहा है। उन्होंने बताया कि, लॉकडाउन ने क्रिएटिविटी को और ज्यादा बढ़ा दिया है। अब मैं घर से ही प्रोडक्ट फोटोग्राफी कर रहा हूं।

नेचर की फोटोग्राफी कर रहा हूं क्योंकि यहां आने-जाने में कोई रोक नहीं है। एडिटिंग में नए एक्सपेरिमेंट कर रहा हूं और ब्लॉगिंग भी शुरू कर चुका हूं। प्रोडक्ट फोटोग्राफी के ऑर्डर घर बैठे ही मिल रहे हैं। लॉकडाउन ने हमें और ज्यादा सोचने-समझने का मौका दिया है।

लॉकडाउन और फ्लाइट्स बंद होने से फंसे लोग

महाराष्ट्र की रहनेवाली नेहा दिसंबर में 6 महीने के लिए यूएस आईं थी। लेकिन अब वह समय पूरा होने वाला है और इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू होने के कोई आसार नहीं दिख रहे। नेहा का वापस जाने का रिजर्वेशन मई का था। वे आगे की प्रोसेस को लेकर बहुत टेंशन में हैं।

विपुल चावला चंडीगढ़ से हैं। अमेरिका में फेसबुक में नौकरी करते हैं। उनका परिवार भारत में फंसा हुआ है और वह अकेले अमेरिका में हैं। दिवाली पर वह पूरी फैमिली के साथ इंडिया आए थे। अप्रैल में उनके बेटे का पहला बर्थडे था।

इन दिनों विपुल यूएस में अकेले रह गए हैं। उनका परिवार इंडिया में है।

विपुल कहते हैं वह इस लॉकडाउन में परिवार के साथ समय बिता सकते थे लेकिन वह अकेले रह गए। खाली वक्त में कुकिंग और गार्डनिंग करते हैं। पहले कुकिंग नहीं आती थी लेकिन अब पूछ-पूछकर बहुत कुछ पकाना सीख गए हैं।

माइक्रोसॉफ्ट में जॉब करने वाले जयेश उपाध्याय के मां-पापा जनवरी में उनके पास अमेरिका गए थे। वहां से उन दोनों का ऑस्ट्रेलिया जाने का प्लान था। टूरिस्ट वीजा पर वह छह महीने ही यूएस में रह सकते हैं।

जयेश के पैरेंट्स इन दिनों यूएस में ही हैं और अब बच्चों और परिवार के साथ वक्त बिता रहे हैं।

उन्हें यही तनाव है कि बस वीजा लिमिट आगे बढ़ जाए। हालांकि पूरा परिवार साथ है तो ये वक्त उनके लिए वेकेशन बन गया है।

सामान की किल्लत वहां भी हुई, संक्रमण के डर से घर में सब्जियां उगाईं

सौरभ कहते हैं मेरा एक फ्रेंड है जोनाथन। एक दिन उसका मैसेज आया कि मोबाइल पर तुम्हें एक लिस्ट भेजी है उसे तुरंत चेक करो। उसमें टूथब्रश से लेकर ऐसे आइटम लिखे थे, जो लंबे समय तक खराब न हों। जिन्हें स्टोर किया जा सके।

शुरूआत में मैंने उसकी बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन बाद में लगा कि कुछ स्टोर कर ही लेते हैं। फालतू की रिस्क क्यों लें।

फेसबुक में काम करने वाले इंदौर के अनिमेश द्विवेदी ने बताया कि लॉकडाउन में कई सामान की किल्लत हो गई थी। इसलिए हमने पोहा, उपमा, रवा, मैगी जैसी चीजें जो हमें लगती ही हैं यह थोड़ी ज्यादा मात्रा में खरीद कर रख लीं।

कुछ दिनों बाद यहां कॉन्टैक्टलेस होम डिलिवरी शुरू हो गई थी। ऑर्डर करने पर डिलीवरी बॉय आता है और घर के बाहर ही सामान रखकर चले जाता है।

अनिमेश वर्क फ्रॉम होम मोड पर हैं। उनकी पत्नी अदिति एपल में काम करती हैं। वे फेसबुक में हैं।

अनिमेश कहते हैं कि, हम अभी वर्क फ्रॉम होम मोड पर हैं। इसलिए गार्डनिंग के लिए कुछ समय निकल जाता है। मैंने घर पर ही संतरे, नींबू, अमरूद के पेड़ लगाए हैं।

पुदीना, धनिया, मैथी, कद्दू, टमाटर, शिमला मिर्च घर ही उगाए हैं। हर रोज इनमें पानी-खाद देने का काम करता हूं। समर यूएसए में सब्जियों के लिए अच्छा मौसम भी होता है। खूब सब्जियां हो रही हैं।

इन दिनों अनिमेश घर में उगाई सब्जियां ही खा रहे हैं।

इसलिए बाहर से संक्रमण आने का डर नहीं है। फ्रेश सब्जियां खाने को मिल जाती हैं। हालांकि अब धीरे-धीरे चीजें नॉर्मल मोड पर जा रही हैं। किसी सामान की कोई किल्लत नहीं हो रही।

अनिमेश कहते हैं घर पर हमें जैविक सब्जियां मिल रही हैं। संक्रमण का कोई खतरा नहीं।
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3 अप्रैल तक 22.6% ग्रोथ रेट से बढ़ रहा था संक्रमण, अब घटकर 5.5% पर पहुंचा, 4 दिनों से रोज एक लाख लोगों की जांच हो रही


  • संक्रमण के कुल मामलों में 80% केवल 5 राज्यों से, इनमें भी 60% मामले 5 शहरों तक सिमटे
  • लॉकडाउन के चलते देश में 14 से 29 लाख लोगों को संक्रमण का शिकार होने और 74 हजार मौतें रोकी जा सकीं
  • 19 मई को देश में 3.13% की दर से मौतें हो रही थीं, अब यह घटकर 3.0% हो गई

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 11:55 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 3 अप्रैल तक नए केस की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा था। ग्रोथ रेट 22.6% था, लेकिन इसके बाद इसमें कमी आना शुरू हुई। आज ग्रोथ रेट घटकर 5.5% हो गया है। यह राहत की बात है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि अभी ग्रोथ रेट में काफी कमी आई है। अगर उसी ग्रोथ रेट से मामले बढ़ते तो हालत गंभीर होती।  
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने बताया कि देश में अब ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग पर फोकस किया जा रहा है। पिछले चार दिनों से रोज एक लाख से ज्यादा टेस्टिंग हो रही हैं। आज 1 लाख 57 हजार 16 लोगों का टेस्ट हुआ। अभी तक 27 लाख 19 हजार 434 लोगों की जांच की जा चुकी है। देश में मौतों की रफ्तार भी कम हुई है। आंकड़े देखें तो 19 मई को देश में 3.13% की दर से मौतें हो रही थीं, अब यह घटकर 3.0% हो गई है। 

लॉकडाउन की वजह से काफी मौतें और संक्रमण रोका जा सका

एम्पॉवर्ड ग्रुप के चेयरमैन वीके पॉल ने बताया कि जब देश में लॉकडाउन शुरू हुआ था तो संक्रमण का डबलिंग रेट 3.4 दिन था। मतलब हर 3.4 दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही थी लेकिन आज यह 13.3 दिन हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने में लॉकडाउन ने काफी मदद की। इसके चलते हमने 14 से 29 लाख संक्रमण के मामले और 38 हजार से 78 हजार मौतें रोकने में सफलता पाई है। पॉल ने बताया कि इतना बड़ा देश होने के बावजूद संक्रमण कुछ स्थानों तक सिमटकर रह गया। संक्रमण के कुल मामलों में 80% केवल 5 राज्यों से हैं। इनमें भी 60% मामले 5 शहरों तक सिमटे हुए हैं। इसी तरह अगर हम 90% मामलों का आंकलन करते हैं तो ये देश के 10 राज्यों से आए हैं। इनमें भी 70% मामले केवल 10 शहरों से हैं। 

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया- एक लाख 85 हजार बेड तैयार कर लिए

  • संक्रमण के चलते अभी तक एक लाख 85 हजार कोविड बेड का प्रयोग हुआ है। 3 लाख बेड तैयार हैं जिनका अभी तक प्रयोग नहीं हुआ है। ये आगे की परिस्थिति के लिए है।
  • लॉकडाउन के दौरान 2 लाख से ज्यादा कोविड डेडिकेटेड सुविधाएं अस्पतालों में जुटाई गई हैं।  
  • 56 लाख से ज्यादा वॉलिंटियर्स को ट्रेनिंग दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वेबिनार में 24 लाख लोग शामिल हुए हैं।
  • आने वाले 6-8 हफ्ते में हर रोज 5 लाख पीपीई किट देश में तैयार होने लगेगा।
  • 5 कंपनियों के 4-6 वैज्ञानिक वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए हैं। कई के ट्रायल भी शुरू हो चुके हैं। 

इम्युनिटी सही रखने की कोशिश करें

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि ये वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। अब भी हम इसके बारे में बहुत सारी बातें नहीं जानते, इसलिए हमें चौकन्ना रहने की जरूरत है। हर किसी को अपनी इम्युनिटी को सही रखने के लिए आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। अगर किसी को भी समस्या है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। छिपाने से यह बीमारी दूर नहीं होगी। आगे का सफर आसान नहीं होगा, यह हफ्ते या महीनों की बात नहीं उससे आगे की बात होगी।

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देश में 70 लाख सैलून हैं और 2017-18 में ये इंडस्ट्री 3.8 अरब डॉलर की थी; रेवेन्यू लाने में 85% हिस्सेदारी महिलाओं की, कोरोना से सबकुछ ठप


  • फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 तक देश की सैलून इंडस्ट्री में 14.3% की ग्रोथ होने का अनुमान है
  • ऑल इंडिया हेयर एंड ब्यूटी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. संगीता चौहान का कहना है- अब सैलून क्लीनिक की तरह दिखेंगे

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 08:03 AM IST

नई दिल्ली. लॉकडाउन के बीच सचिन तेंदुलकर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में सचिन बेटे अर्जुन का हेयरकट करते दिख रहे थे। उससे पहले तैमूर का हेयरकट करते हुए सैफ अली खान की तस्वीर भी करीना कपूर खान ने शेयर की थी।

विराट कोहली, इरफान पठान, विकी कौशल और न जाने कितने ही सेलेब्रिटी और आम लोग लॉकडाउन में सैलून बंद होने के चलते खुद ही हेयरस्टायलिस्ट बन गए। ये दिखाता है कि सैलून हमारे जीवन का कितना जरूरी हिस्सा है। लेकिन, इन दिनों कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण सैलून बंद पड़े हैं। हालांकि, लॉकडाउन-4 में कुछ जगहों पर सैलून खोलने की इजाजत मिल गई है, लेकिन वहां लोग जाने से डर भी रहे हैं।

तीन साल पहले सैलूून इंडस्ट्री 28 हजार करोड़ से ज्यादा की थी

पिछले साल आई फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी फिक्की की रिपोर्ट की मानें तो देश में 60 से 70 लाख सैलून हैं। इनमें छोटे सैलून भी हैं और बड़े भी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 में भारत की सैलून इंडस्ट्री 3.8 अरब डॉलर की थी। जो आज के हिसाब से 28 हजार 500 करोड़ रुपए होते हैं।

इसी रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि सैलून इंडस्ट्री को सालाना जितना रेवेन्यू मिलता है, उसका 85% हिस्सा अकेले महिलाओं से ही आता है। फिक्की ने पिछली रिपोर्ट में 2017 से 2022 तक देश की सैलून इंडस्ट्री में 14.3% ग्रोथ होने का अनुमान लगाया था।

अपनी खूबसूरती पर सालभर में कितना खर्च करते हैं हम?

इंडियन ब्यूटी एंड हाइजिन (आईबीएचए) की एक रिपोर्ट बताती है कि, 2017 में हर भारतीय अपनी खूबसूरती पर सालाना 450 रुपए खर्च करता था। और ये खर्च हर साल बढ़ ही रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में ब्यूटी और वेलनेस का बाजार 2018 में 901.07 अरब रुपए का था, जिसके 2024 तक बढ़कर 2,463.49 अरब रुपए होने का अनुमान है। फिक्की की रिपोर्ट के मुताबिक,  ब्यूटी और वेलनेस में भी 30% हिस्सा अकेले सैलून इंडस्ट्री का है।

2022 तक सैलून इंडस्ट्री में 1.2 करोड़ लोगों की जरूरत होगी, 2013 में 34 लाख ही थे
केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप के तहत आने वाले नेशनल स्किल डेवलपेंट कॉर्पोरेशन ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया था कि 2013 में भारत में ब्यूटी और सैलून इंडस्ट्री में 34 लाख लोग काम करते थे। लेकिन, ये इंडस्ट्री लगातार बढ़ रही है। इसलिए 2022 तक इस इंडस्ट्री में 1.2 करोड़ कामगारों की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस इंडस्ट्री में काम करने वालों में 50% से ज्यादा महिलाएं हैं।

कोरोना से सब कुछ ठप, सब कुछ बंद

इतने लोगों को रोजगार देने वाली सैलून इंडस्ट्री कोरोना के दौर में ठप पड़ी हुई है। भोपाल में सैलून चलाने वाले इमरान सलमानी बताते हैं, ‘मेरी दुकान में 4 बंदे काम करते हैं। लॉकडाउन से पहले तक चारों दिनभर में 200 से 400 रुपए तक की कमाई कर लेते थे। रविवार के दिन तो 500 रुपए तक की भी कमाई हो जाती थी। लेकिन, लॉकडाउन में सिर्फ हमारी दुकान ही बंद नहीं हुई है, बल्कि कमाई भी बंद हो गई है। जो लोग मेरे यहां काम करते थे, उन सभी के छोटे-छोटे बच्चे थे।

उन्हें लॉकडाउन में कहीं काम भी नहीं मिल रहा। हम ही जानते हैं कि इस मुश्किल वक्त में हम कैसे घर चला रहे हैं।’ थोड़ा मायूस होते हुए इमरान आगे बताते हैं, ‘मैंने दुकान किराए पर ली थी। इसका किराया एक महीने का 15 हजार रुपए है। बताइए अब मैं कहां से इसका किराया दूंगा। वो तो भला हो कि मालिक अभी हमसे किराया नहीं मांग रहा, लेकिन जब दुकान खुलेगी, तब हो सकता है कि वो हमसे इकट्‌ठा किराया मांग ले। वो तो उससे ही बात करनी होगी हमें। सरकार भी हम पर ध्यान नहीं दे रही है।’ इमरान 39 साल के हैं और पिछले 15 साल से इस काम में लगे हैं।

डॉ. संगीता कहती हैं जब तक हमारी वैक्सीन नहीं बनती है, तब तक हमें कोरोना के साथ ऐसे ही पूरे प्रोटोकॉल को निभाते हुए अपनी सर्विसेस देनी होगी।

ऑल इंडिया हेयर एंड ब्यूटी एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. संगीता चौहान कहती हैं कि हमारी सैलून इंडस्ट्री अब फिर से उसी जगह पहुंच गई है, जहां से हमने शुरू किया था। वो कहती हैं ‘कोरोनावायरस का न सिर्फ सैलून इंडस्ट्री बल्कि सभी इंडस्ट्री पर असर पड़ा है। लेकिन, हमारी इंडस्ट्री ऐसी है, जहां सोशल डिस्टेंसिंग रखना मुश्किल है। क्योंकि, हम इसमें क्लाइंट की चमड़ी के पास तक जाते हैं। अब लॉकडाउन धीरे-धीरे खुल रहा है, पर हमारी इंडस्ट्री पर अभी तक लॉकडाउन है। हां, कुछ जगहों पर सैलून जरूर खुले हैं।’

कोरोना के बाद की कैसी होगी सैलून इंडस्ट्री?
लॉकडाउन के बाद जब सैलून दोबारा खुलने लगेंगे, तो सब कुछ बदला-बदला सा दिखेगा। डॉ. संगीता बताती हैं, “पहले जो सैलून, सैलून की तरह दिखते थे, अब वो क्लीनिक की तरह दिखने लगेंगे। क्योंकि, अब वहां काम करने वाले लोगों का एक ड्रेस कोड होगा। वो लोग बकायदा सेफ्टी मेजर का ध्यान रखेंगे। क्लाइंट को भी सैनिटाइज करने के बाद ही सैलून में एंट्री मिलेगी।”

‘हम अपनी सर्विसेस देने का तरीका भी बदलेंगे। पहले हम थ्रेडिंग करते थे, तो उसमें हम मुंह में धागा लेकर करते थे, लेकिन अब हम गैजेट्स यूज करेंगे। नो-टच स्कीन फेशियल करेंगे। हम जो वैक्सिंग करने वाले हैं, वो डबल-डीपिंग मैथड से होगी। तो कहने का मतलब है कि काम करने का तरीका बदलेगा। लोग बदलेंगे। हमारा स्टाफ है। वो अपने-अपने सेफ्टी मेजर को ध्यान में रखते हुए काम करेंगे।’

डॉ. संगीता का कहना है कि अब हर एक को हर एक से प्रिकॉशन लेनी होगी। स्टाफ को क्लाइंट से लेनी है। क्लाइंट को स्टाफ से लेनी है। और जो दुकान का मालिक है, उसको पूरा ही सिस्टम वायरस फ्री रखना है।

ये तस्वीर गुजरात के सूरत शहर की है। यहां लॉकडाउन-4 में कुछ हिस्सों में सैलून खोलने की छूट है। सैलून शॉप में नाई पीपीई किट पहनकर कस्टमर के बाल काट रहे हैं।

कोरोना के बाद क्या सिर्फ बड़ी दुकानें ही बचेंगी?

डॉ. संगीता इस बात से इत्तेफाक रखती हैं। वो कहती हैं, ‘चाहे छोटा सैलून हो या बड़ा। सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पड़ेगा। किसी सैलून में अगर 10 कुर्सियां हैं, तो उसमें से 5 पर ही लोग बैठेंगे और अगर किसी सैलून में 2 कुर्सियां हैं, तो एक कुर्सी पर ही ग्राहक बैठेगा।

”पहले सैलून में ज्यादा स्टाफ रखकर टर्नओवर बढ़ा सकते थे। अब लेकिन, स्टाफ भी कम रखना होगा। इससे हमारी सर्विसेस का टाइम भी लंबा हो जाएगा और हमारी कॉस्ट पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि हम जितने भी सेफ्टी मेजर अपनाएंगे, वो सब डिस्पोजेबल आइटम हैं। चाहे मास्क हो। ग्लव्स हो। किट हो।’हालांकि, डॉ. संगीता ये भी कहती हैं कि जैसे-जैसे रिस्क फैक्टर कम होता चला जाएगा, वैसे-वैसे सैलून अपनी पुरानी स्थिति में आने लगेंगे।”

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दूसरे देशों में हर एक लाख लोगों में 62, जबकि भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले; हमारे यहां रिकवरी रेट 7.1% से बढ़कर 39.6% हुआ


  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने दी जानकारी, आईसीएमआर ने कहा- 25 लाख से ज्यादा लोगों की जांच हुई
  • लॉकडाउन का जब पहला फेज (25 मार्च) शुरू हुआ था तब रिकवरी रेट 7.1 था, आज 40% के करीब पहुंचा

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 05:24 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए भारत में समय पर फैसले लिए गए। यही कारण है कि दुनिया के सबसे ज्यादा प्रभावित 15 देशों की तुलना में हमारे यहां 83% कम मौतें हुई हैं। पूरी दुनिया में एक लाख में 62 लोग कोरोना से प्रभावित हुए हैं तो भारत में 7.9 लोग संक्रमित मिले हैं।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, दुनिया के 15 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की कुल आबादी 142 करोड़ है, जबकि भारत की अकेले 137 करोड़ आबादी है। इतनी अधिक आबादी होने के बावजूद भारत की तुलना में उन 15 देशों में हमसे 34 गुना ज्यादा मामले और 83 गुना ज्यादा मौतें हुईं। भारत में प्रति एक लाख आबादी पर 0.2 लोगों की मौत हुई। अब तक देश में 25 लाख 36 हजार 156 टेस्ट हो चुके हैं। पिछले दो दिन में हमने 1 लाख से ज्यादा टेस्ट किए हैं। अभी 555 लैब एक्टिव हैं। 164 लैब प्राइवेट सेक्टर से हैं। 

लॉकडाउन के चलते रिकवरी रेट में मिली बढ़त
मंत्रालय ने बताया कि लॉकडाउन के चलते संक्रमितों के ठीक होने की रफ्तार में तेजी आई है। जब देश में लॉकडाउन का ऐलान हुआ था उस दौरान 7.1% रिकवरी रेट थी। लॉकडाउन के दूसरे फेज में यह 11.2 प्रतिशत हो गई। तीसरे फेज में यह 24.3 प्रतिशत हुई और अब 40% के करीब यानी 39.6% हो गई है।

2.94% मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर

अग्रवाल ने बताया कि अभी देश में जो कोरोना के मरीज हैं उनमें 2.94% लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। 3% आईसीयू और 0.45% लोग वेंटिलेटर पर हैं। आज अस्पतालों में 1.5 लाख बेड कोरोना मरीजों के लिए मौजूद है। अगर देश में आने वाले दिनों में केस बढ़ते हैं तो उसके लिए भी सरकार पूरी तरह से तैयार हैं। 

मंत्रालय ने ये भी कहा 

  • जब तक देश और दुनिया कोरोना के लिए दवा या वैक्सीन तैयार नहीं कर लेता, हम बचाव पर फोकस करेंगे। 
  • कंटेनमेंट जोन से ही हमें पता चलता है कि हम किस स्थिति में है। हमने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे कंटेनमेंट जोन के बाहर बफर जोन बनाएं जहां पर सारी सुविधाएं मौजूद हों। 
  • हमने देखा है कि एसिम्प्टोमैटिक, माइल्ड सिम्प्टम्स वाले या सिम्प्टोमैटिक लोगों को अगर 10 दिन तक बुखार नहीं आया तो वे संक्रमण नहीं फैलाते। इसे देखते हुए हमने नई पॉलिसी बनाई है।
  • हमने समय से पहले संक्रमितों की पहचान करने की कोशिश की है। इसके अच्छे नतीजे आए हैं। काफी संख्या में लोग ठीक हुए हैं और कई लोग ठीक हो रहे हैं। 
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लॉकडाउन के बाद सैनिटाइजर की मांग 64% बढ़ी, यूपी सबसे ज्यादा रोजाना 2 लाख लीटर प्रोडक्शन कर 23 राज्यों को भेज रहा


  • अकेले यूपी में 7 मई तक 45 लाख लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन हुआ, जिसमें से 19 लाख लीटर अन्य राज्यों को सप्लाई किया
  • देश में 150 से अधिक डिस्टिलरी एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर की सप्लाई कर रहीं, मार्च में 43 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 05:59 AM IST

रिसर्च टीम. कोरोना के चलते पूरी दुनिया में हर कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन सैनिटाइजर का बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से करीब 500 छोटी-बड़ी मैन्यूफैर्क्चस यूनिट इस सेक्टर में उतर चुकी हैं। इसमें 152 ऐसी कंपनियां हैं, जो साबुन, बॉडी, फेश और हैंड वॉश के साथ-साथ सैनिटाइजर का भी उत्पादन कर रही हैं। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार 150 से अधिक डिस्टिलरी भी देश में सैनिटाइजर का उत्पादन कर रही हैं। देश में एल्कोहल बेस्ट सैनिटाइजर की मांग में 64% का इजाफा हुआ है।

सबसे ज्यादा कंपनियां यूपी में बना रहीं सैनिटाइजर

सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 85 चीनी मिलें, 12 डिस्टिलरी, 37 कंपनियां और 9 अन्य संस्थाएं प्रतिदिन 2 लाख लीटर सैनिटाइजर का निर्माण कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सात मई तक प्रदेश में 45 लाख 15 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन हुआ, जिसमें से 19 लाख 31 हजार लीटर 23 राज्यों को सप्लाई किया गया है।

एक साल इस सेक्टर का आकार 30 करोड़ रुपए बढ़ा

निल्सन इंडिया के मुताबिक महामारी के बाद से भारत के सैनिटाइजर बाजार में चार गुना का इजाफा हुआ है। 2019 में मार्च महीने में इस सेक्टर का कुल कारोबार 10 करोड़ रुपए था। मार्च 2020 में 43 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। कोरोना वायरस का टीका न बनने की सूरत में अगले पांच साल में इस सेक्टर में 10-15 फीसदी की ग्रोथ की संभावना है। 

यूपी में अप्रैल में रोजाना 2 लाख लीटर प्रोडक्शन हुआ

उत्तर प्रदेश के गन्ना और चीनी आयुक्त संजय भूसरेड्डी के अनुसार मार्च में करीब 50 उत्पादन इकाइयां रोजाना 60 हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन करती थीं, लेकिन मांग बढ़ने के बाद कुछ और चीनी मिलें, डिस्टिलरी व अन्य संस्थाओं को अनुमति दी गई। जिससे प्रोडक्शन 2 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया। लॉकडाउन के बाद से हरियाणा में सबसे ज्यादा सैनिटाइजर की खपत हुई। वहां पर 4.11 लाख लीटर सैनिटाइजर की सप्लाई की जा चुकी है।

152 नए निर्माताओं के आने से सैनिटाइजर बाजार की हिस्सेदारी का अनुपात 60-40  तक पहुंचा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सैनिटाइजर सेक्टर की शीर्ष तीन कंपनी रेकिट बेंकिसर इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और हिमालया ड्रग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की बाजार हिस्सेदारी जनवरी और फरवरी में 85% से मार्च में गिरकर 39% हो गई। लॉकडाउन के बाद से देश में 152 नए निर्माताओं के आने से बाजार में हिस्सेदारी का अनुपात 60-40 तक पहुंच चुका है। आईटीसी लिमिटेड, डाबर इंडिया लिमिटेड, मैरिको लिमिटेड, इमामी लिमिटेड और ज्योति लेबोरेटरीज लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी तेजी से सैनिटाइजर का प्रोडक्शन शुरू किया है। यहां तक कि शराब बनाने वाली कंपनी डियाजियो इंडिया भी इस रेस में कूद पड़ी है।

  • दुनिया में स्थिति-

इस साल ग्लोबल सैनिटाइजर मार्केट का आकार 14 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान

अमेरिका की मार्केट रिर्सच कंपनी फॉर्च्यून बिजनेस इनसाइट के विश्लेषण के मुताबिक 2020 में ग्लोबल सैनिटाइजर बाजार की वार्षिक वृद्धि दर 5.06% से बढ़कर 45.7% होने का अनुमान है। कोरोनावायरस के आउटब्रेक से पहले 2020 में सैनिटाइजर का बाजार करीब 10 हजार करोड़ रुपए होने का अनुमान था, जो अब बढ़कर करीब 14 हजार करोड़ रुपए होने की उम्मीद है।

  • डब्ल्यूएचओ क्या कहता है?

हर 2 घंटे में हाथ धुलना या सैनिटाइजर के प्रयोग ही कोरोना का सबसे कारगर इलाज

डब्ल्यूएचओ के अनुसार मौजूदा हालत में कोरोना महामारी से बचाव का सबसे सरल और सस्ता उपाय हर दो घंटे में हाथ धुलना या फिर एल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना है। चिकित्सकों के अनुसार ऐसा करने से कोरोना का वायरस नष्ट हो जाता है और संक्रमण की संभावना क्षीण हो जाती है। भारत में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों को डिस्टलरीज और चीनी कंपनियों को लाइसेंस देने का निर्देश दिया था, ताकि मांग को पूरा करने के लिए हैंड सैनिटाइजर का निर्माण किया जा सके।

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55 दिनों में कोरोना के मामले एक लाख के करीब पहुंचे, लॉकडाउन नहीं होता तो देश में संक्रमितों की संख्या 53 लाख से ज्यादा हो सकती थी


  • लॉकडाउन से पहले हर 4 दिनों में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही थी, अब 13 दिन से ज्यादा समय लग रहा
  • आंकड़े बता रहे लॉकडाउन के पहले फेज में सख्ती ने संक्रमण को सीमित रखा, छूट मिलते ही रफ्तार तेज हुई
  • संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 3 हजार हुआ, इसमें 70% लोग दूसरी बीमारियों से भी जूझ रहे थे

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 03:15 PM IST

नई दिल्ली. देश में लॉकडाउन का आज 55वां दिन है। इस बीच, संक्रमितों की संख्या भी एक लाख के करीब पहुंचती दिख रही है। शुक्र है कि देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लगा। अगर ऐसा नहीं होता तो देश में कोरोना की रफ्तार काफी तेज हो जाती। …और ऐसा हम नहीं, आंकड़े कह रहे हैं।

लॉकडाउन से ठीक पहले संक्रमण के मामले हर 4 दिनों में दोगुने हो रहे थे। 21 मार्च को देश में संक्रमितों की संख्या 334 थी। 4 दिनों बाद यानी 25 मार्च को यह दोगुनी होकर 657 पर पहुंच गई। अगर इसी आंकड़े यानी 4 दिनों में मामले दोगुने होने के आधार पर 25 मार्च से 18 मई तक का कैल्कुलेशन करते हैं तो हैरान कर देने वाले आंकड़े सामने आते हैं।

लॉकडाउन नहीं लगता और अगर कोरोना के बढ़ने की रफ्तार पहले जैसी रहती तो 16 मई तक देश में संक्रमितों की संख्या 53 लाख 82 हजार से ज्यादा पहुंच सकती थी। मतलब पूरी दुनिया में कुल मिलाकर जितने मामले हैं, उससे भी 12% ज्यादा मामले भारत में हो सकते थे। अभी दुनिया में कोरोना के 48 लाख मामले हैं।

अब 13 दिनों में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही
लॉकडाउन से पहले के हालात आप देख चुके हैं। अब बाद के भी देख लीजिए। लॉकडाउन के बाद कोरोना की रफ्तार में कमी आई। पहले हफ्ते में संक्रमितों का डबलिंग रेट 4 से बढ़कर 5.5 दिन हो गया। 25 मार्च तक संक्रमितों की संख्या 657 थी, जो 30 मार्च को बढ़कर 1326 हुई। लॉकडाउन के तीसरे हफ्ते डबलिंग रेट 6 दिन का हो गया। इसके बाद इसमें लगातार सुधार हुआ। अभी डबलिंग रेट 13 दिन का है। मतलब अब हर 13 दिनों में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही है।

लॉकडाउन में छूट मिलते ही संक्रमण की रफ्तार बढ़ी
25 मार्च से 14 अप्रैल यानी 21 दिनों के लॉकडाउन में संक्रमण के 10 हजार 914 नए मामले आए। लॉकडाउन के दूसरे फेज में केंद्र सरकार ने लोगों को कई छूट दी। लोगों के घरों से निकलते ही इसकी रफ्तार तेज हो गई। 

इन 18 दिनों के लॉकडाउन में 31,293 नए मामले आए। सरकार ने लॉकडाउन फेज-3 में थोड़ी और रियायतें दी तो मामले भी उसी तरह से बढ़े। लॉकडाउन फेज 3 के 14 दिन में संक्रमण के 55 हजार नए मामले सामने आए।

राहत: अब तक 30 हजार 258 मरीज ठीक भी हुए

  • संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राहत की बात है कि अब तक देश में 30 हजार 258 मरीजों को ठीक भी हो चुके हैं। कोरोना मरीजों के ठीक होने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। 
  • लॉकडाउन से पहले यानी 24 मार्च तक देश में संक्रमितों की कुल संख्या 571 थी। इसमें 40 लोग ही ठीक हुए थे। 
  • लॉकडाउन लगने के बाद 14 अप्रैल तक संक्रमितों की संख्या 11 हजार 485 हो गई। 1365 मरीज ठीक हो गए। 
  • लॉकडाउन के दूसरे फेज यानी 3 मई तक देश में 42 हजार 778 लोग संक्रमित हो चुके थे, जबकि इनमें 11 हजार 763 लोग बेहतर इलाज के बाद ठीक हो गए। 
  • लॉकडाउन के तीसरे फेज यानी 17 मई तक देश में 85 हजार 784 संक्रमित हुए, जबकि इनमें 30 हजार 258 लोग ठीक हो गए और उन्हें अस्पतालों से छुट्‌टी दे दी गई।

लॉकडाउन से पहले ही मौत की रफ्तार तेज होने लगी थी

देश में संक्रमण के चलते अब तक 2 हजार 753 लोग जान गंवा चुके हैं। मौतों की इस संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। लॉकडाउन से पहले ही इसकी शुरुआत हो गई थी। 11 मार्च को देश में पहली मौत कर्नाटक में हुई। इसके बाद 24 मार्च तक 10 लोगों की जान चली गई। इसके बाद 21 दिनों के लॉकडाउन के पहले फेज यानी 14 अप्रैल तक 396 लोगों की मौत हुई।

18 दिनों के लॉकडाउन के दूसरे फेज में 3 मई तक यह आंकड़ा एक हजार पार करके 1463 तक पहुंच गया। अब 14 दिनों के लॉकडाउन के तीसरे फेज में मौतों की संख्या बढ़कर 2,753 हो गई है। राहत की बात यह है कि भारत में मौतों का ग्राफ अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है। यहां 3.3% डेथ रेट है, जबकि अमेरिका, स्पेन, इटली, फ्रांस जैसे देशों में यह आंकड़ा कहीं ज्यादा है।

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लॉकडाउन ने लोगों को अपने ही देश में बना दिया प्रवासी; सभी को घर जाने की जल्दी, जिसको जो साधन मिला उससे चल दिया


  • विशेष ट्रेनों में जिसको जगह मिली, उसने अपने आप को खुश किस्मत माना
  • 17 मई को खत्म हो रहा है लॉकडाउन का तीसरा फेज, 18 से चौथा फेज होगा

दैनिक भास्कर

May 15, 2020, 09:09 PM IST

लखनऊ/ पटना/ जयपुर/ भोपाल/ जालंधर.. लॉकडाउन का तीसरा फेज खत्म होने में अभी दो दिन बाकी है। 17 मई के बाद शुरू होने वाले चौथे फेज का स्वरूप कैसा होगा, यह अभी तय नहीं है। अपने घरों से दूर रहने वाले लोग अब अपने ही देश में प्रवासी कहलाने लगे हैं। प्रवासियों में अपने घर पहुंचने की आतुरता साफ दिख रही है। देश के सभी राज्यों की सड़कों पर ये प्रवासी, पैदल, ट्रक या अन्य साधनों से चलते दिख रहे हैं। जिसे साधन नहीं मिला तो वो पैदल ही चल दिया। जिन्हें विशेष ट्रेनों में आरक्षण मिल गया, वो अपने को खुश किस्मत समझ रहा था।

ये फोटो जबलपुर का है। रेलवे स्टेशन पर पहुंची ट्रेन से झांकते बच्चों के चेहरे पर न लॉकडाउन की चिंता थी, न कोरोनावायरस का डर।

यह तस्वीर हरियाणा में रेवाड़ी की है। यहां प्रवासी मजूदरों का पलायन जारी है। ज्यादातर मजदूर यूपी और बिहार के हैं। यह पैदल ही घर के लिए निकल पड़े हैं। रास्ते में अगर कोई साधन मिल जाता है तो कुछ दूरी के लिए उसका सहारा मिल जाता है। धारूहेड़ा में भेड़ो से भरी गाड़ी को ड्राइवर ने रोका तो मजदूर उसी पर सवार हो गए।

यह तस्वीर हरियाणा के रेवाड़ी की है। यहां यूपी और बिहार के प्रवासी मजदूर हैं, जो पैदल ही घर के लिए निकल पड़े हैं। धारूहेड़ा में भेड़ों से भरा ट्रक रूका तो मजदूर उसी पर सवार हो गए।
यह तस्वीर जालंधर की है। पंजाब से हजारों की संख्या में मजदूर घर के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। तपती धूप से बचने के लिए इस महिला ने कंबल का बैग अपने सिर पर रख लिया और बच्चे को गोद में ले लिया।
यह तस्वीर जालंधर की है। पंजाब से हजारों की संख्या में मजदूर घर के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। तपती धूप से बचने के लिए इस महिला ने बैग अपने सिर पर रख लिया और बच्चे को गोद में ले लिया।
यह तस्वीर जालंधर की है। राज्य में एक महीन से कर्फ्यू है। ज्याातर उद्योग-धंधे बंद पड़े हैं। ऐसे में सिर पर गृहस्थी लादे हुए मजदूरों का रैला घर की तरफ जाता हुआ नजर आता है।
यह तस्वीर जालंधर की है। राज्य में एक महीन से कर्फ्यू है। ज्यादातर उद्योग-धंधे बंद पड़े हैं। ऐसे में सिर पर गृहस्थी लादे हुए मजदूरों का रैला घर की तरफ जाता हुआ नजर आता है।
मुंबई से गोरखपुर के लिए साइकिल से निकले रामजीवन निषाद(27) के एक पैर में पोलियो है। वे साइकिल से ही अपने घर के लिए निकले हैं। इगतपुरी पहुंचे निषाद अपने पैर दिखाते हुए।
यह तस्वीर ठाणे की है। यहां से उत्तर भारतीय राज्यों के लिए जा रहे कुछ प्रवासी मजदूर ट्रकों में कुछ इस तरह से भर कर जा रहे हैं।
यह तस्वीर ठाणे की है। यहां से उत्तर भारतीय राज्यों के लिए जा रहे कुछ प्रवासी मजदूर ट्रकों में कुछ इस तरह से भरकर जा रहे हैं।

यह तस्वीर राजस्थान के अलवर की है। मध्यप्रदेश के छतरपुर की रहने वाली रामकुमारी मजदूरी करने के लिए राजस्थान आई थी, लेकिन लॉकडाउन हो गया। बच्चों को भूख से तड़पता देख अब यह पैदल ही अपने गांव के लिए निकल पड़ी हैं। गृहस्थी के नाम पर जो सामान था, उसे ठेले पर रख लिया।

यह तस्वीर राजस्थान के अलवर की है। मध्यप्रदेश के छतरपुर की रहने वाली रामकुमारी मजदूरी करने के लिए राजस्थान आई थी, लेकिन लॉकडाउन शुरू हो गया। पैदल ही घर की ओर चल पड़ी हैं।
यह तस्वीर उदयपुर की है। यहां एक प्रवासी मजदूर को जब कोई सहारा नहीं मिला तो उसने जुगाड़ की गाड़ी बनाई। गाड़ी पर सारा सामान लादा और घर के लिए निकल पड़ा।
यह तस्वीर उदयपुर की है। यहां एक प्रवासी मजदूर को जब कोई सहारा नहीं मिला तो उसने जुगाड़ करके गाड़ी बनाई। गाड़ी पर सारा सामान लादा और घर के लिए निकल पड़ा।
यह तस्वीर चंडीगढ़ के पास की है। यहां से बहुत सारे प्रवासी मजदूर साइकिल से ही अपने परिवार को लेकर घरों की और निकल पड़े हैं। ज्यादातर मजदूर यूपी के रहने वाले हैं। दिन के वक्त यह सफर करते हैं और रात को किसी शहर में सड़कों पर सो जाते हैं।
यह तस्वीर चंडीगढ़ के पास की है। यहां से प्रवासी मजदूर साइकिल से ही अपने परिवार को लेकर घरों की ओर निकल पड़े हैं। ज्यादातर मजदूर यूपी के रहने वाले हैं।

यह तस्वीर चंडीगढ़ की है। यहां घर जाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का रजिस्ट्रेशन चल रहा है। रजिस्ट्रेशन में काफी भीड़ होती है। ऐसे में एक बच्ची अपनी मां के कंधों पर ही सो गई।

यह तस्वीर चंडीगढ़ की है। यहां घर जाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों का रजिस्ट्रेशन चल रहा है। रजिस्ट्रेशन में काफी भीड़ होती है। ऐसे में एक बच्ची अपनी मां के कंधों पर ही सो गई।
ये फोटो लखनऊ का है। लखनऊ-फैजाबाद रोड पर कामता चौराहे से गोरखपुर जाने के लिए ये मजदूर साइकिल से निकले थे। रास्ते में यह ट्रक मिल गया तो अपनी साइकिलें उस पर चढ़ाकर आगे की यात्रा शुरू की।
ये फोटो लखनऊ का है। लखनऊ-फैजाबाद रोड पर कामता चौराहे से गोरखपुर जाने के लिए ये मजदूर साइकिल से निकले थे। रास्ते में ट्रक मिल गया तो साइकिलें उस पर चढ़ाकर आगे की यात्रा शुरू की।
भागलपुर के अलीगंज के बाइपास की तस्वीर। ये मजदूर मुंबई में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी खत्म हुई तो अपने घर के लिए निकल पड़े। ट्रक में सवार होने के लिए ड्राइवर को मोटी रकम दी। इन्हें कटिहार जाना है।
भागलपुर के अलीगंज के बाइपास की तस्वीर। ये मजदूर मुंबई में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी खत्म हुई तो अपने घर के लिए निकल पड़े। ट्रक में सवार होने के लिए ड्राइवर को मोटी रकम दी। इन्हें कटिहार जाना है।
ये तस्वीर टाटानगर रेलवे स्टेशन के बाहर की है। ओड़िशा से 19 मजदूर शुक्रवार सुबह जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि रुपए और खाने की दिक्कत के चलते वे घर की ओर पैदल ही रवाना हुए। सभी मजदूरों के हाथों पर होम क्वारैंटाइन की मुहर भी लगी थी।
ये तस्वीर टाटानगर रेलवे स्टेशन के बाहर की है। ओडिशा से 19 मजदूर शुक्रवार सुबह जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि रुपए और खाने की दिक्कत के चलते वे घर की ओर पैदल ही रवाना हुए। सभी मजदूरों के हाथों पर होम क्वारैंटाइन की मुहर भी लगी थी।
ये तस्वीर गुमला की है। शुक्रवार को प्रशासन की टीम ने छत्तीसगढ़ के करीब 20 मजदूरों को खाना खिलाकर घर की ओर रवाना किया। ये सभी मजदूर गुमला के सिसई, भंडरा में ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। गुरुवार को ये छत्तीसगढ़ के लिए निकले थे लेकिन प्रशासन की टीम ने इन्हें रोक लिया। सुबह स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को छोड़ दिया गया।
ये तस्वीर गुमला की है। शुक्रवार को प्रशासन की टीम ने छत्तीसगढ़ के करीब 20 मजदूरों को खाना खिलाकर घर की ओर रवाना किया। ये सभी मजदूर गुमला के सिसई, भंडरा में ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। गुरुवार को ये छत्तीसगढ़ के लिए निकले थे, लेकिन प्रशासन की टीम ने इन्हें रोक लिया। सुबह स्वास्थ्य जांच के बाद सभी को छोड़ दिया गया।
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बुजुर्गों को बचाने की तैयारी: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी संक्रमितों पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का ट्रायल करेगी


  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का लक्ष्य- कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मामलों को अधिक गंभीर होने से रोकना है

  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल का पहला चरण 7 दिन का होगा जिसमें हाई रिस्क वाले बुजुर्ग शामिल होंगे

दैनिक भास्कर

May 13, 2020, 04:54 PM IST

सितम्बर तक कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने का दावा करने वाली ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने एक नई रिसर्च शुरू की है। रिसर्च का लक्ष्य हल्के लक्षण वाले मामलों को ज्यादा गंभीर होने से रोकना है। इसके अलावा 65 साल से अधिक उम्र के ऐसे संक्रमितों को बचाना भी है, जो पहले डायबिटीज और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं और हाई रिस्क जोन में हैं। कोरोना से पीड़ित बुजुर्गों पर होने वाली यह अपनी तरह की पहली ऐसी रिसर्च है।

उम्रदराज मरीजों पर जल्द शुरू होगा ट्रायल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कोरोना से पीड़ित ऐसे मरीजों को दी जाएंगी जिनकी उम्र या तो 65 साल से अधिक हो या 50-64 के बीच हो और वह किसी बीमारी से पहले ही जूझ रहे हों। रिसर्च के लिए ब्रिटेन के 500 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है।

ऐसा होगा पहला ट्रायल
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, यह ट्रायल कोरोना पीड़ितों का प्राइमरी केयर ट्रीटमेंट की तरह है। ट्रायल के पहले चरण में 7 दिन तक हाई रिस्क वाले समूह को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दी जाएगी, ताकि लक्षणों को अधिक गंभीर होने से रोका जा सके। इसी दौरान एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का ट्रायल भी होगा। ऐसे मरीज जिनमें लगातार खांसी और शरीर का अधिक तापमान दिखेगा, उन्हें यह दवा दी जाएगी। 

ड्रग के नतीजों के आधार पर सब तय होगा
शोधकर्ता क्रिस बटलर के मुताबिक, ट्रायल में शामिल ड्रग का मरीजों पर क्या असर दिख रहा है, उसी नतीजों के आधार पर दवाओं को क्लीनिकल प्रैक्टिस का आधार बनाया जाएगा। उम्मीद है जल्द ही यह इलाज का हिस्सा बनेंगी। 

100 से अधिक वैक्सीन और टेस्टिंग प्रोग्राम शुरू किए
शोधकर्ताओं ने दुनियाभर में 100 से अधिक टेस्टिंग और वैक्सीन प्रोग्राम शुरू किए हैं। इस बीच गिलीड साइंसेज की रेमडेसिवीर ड्रग का इस्तेमाल कोरोना के गंभीर पीड़ितों पर किया रहा है। इस दवा को पहले इबोला का इलाज करने के लिए विकसित किया गया था लेकिन कोरोना के मरीजों पर बेहतर परिणाम दिखने पर संक्रमितों को बचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन को गेम चेंजर बताया था, इसके बाद देशभर में इस दवा का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया गया। ऐसे मरीज जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही और ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है उन्हें यह दवा इमरजेंसी ड्रग के रूप में दी जा रही है।

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रोज 100 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना; 24 घंटे में 1500 से ज्यादा लोग स्वस्थ, 11 दिनों में रिकवरी रेट 6% बढ़कर 31.5% हुआ


  • गृह मंत्रालय ने दी जानकारी, सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया- पैदल घर जा रहे मजदूरों के लिए बसों का प्रबंध कराएं
  • स्वास्थ्य मंत्रालय की संदिग्ध संक्रमितों के लिए नई गाइडलाइन- जिन लोगों में कम लक्षण हैं, उन्हें तीन दिन बुखार न आने पर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जाएगा

दैनिक भास्कर

May 11, 2020, 08:16 PM IST

नई दिल्ली. गृह मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अभी तक 468 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से देश के विभिन्न जगहों पर फंसे 5 लाख प्रवासी मजदूरों, छात्रों, सैलानियों को उनके घर तक पहुंचाया गया है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव ने कहा कि अब अगले 2 हफ्ते तक रोजाना कम से कम 100 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी है। इसके लिए रणनीति तैयार की जा चुकी है। पैदल अपने घरों के लिए निकले लोगों को भी राज्य सरकारें बसों से उनके घर तक पहुंचाएंगी।
श्रीवास्तव ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों के मुख्य सचिवों और स्वास्थ्य सचिवों के साथ सोमवार को बैठक हुई है। इसमें सभी को निर्देश दिया गया है कि वह प्रवासियों मजदूरों को हर संभव सहायता प्रदान करें। उन्हें रेल की पटरियों का प्रयोग करने से रोकें। अगर ज्यादा संख्या में मजदूर पैदल चलते दिखें तो विशेष बस का प्रबंध कराकर उनके घर तक पहुंचाएं।

11 दिनों  में रिकवरी रेट में 6% का इजाफा 

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 4213 केस बढ़े हैं। वहीं 1559 लोग ठीक हुए हैं। रिकवरी रेट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले 11 दिनों में 6% का इजाफा हुआ है। 1 मई को रिकवरी रेट 25.37% था जो अब 31.5% पहुंच गया है। 

पिछले 11 दिनों का रिवकरी रेट 

तारीख रिकवरी रेट
11 मई 31.5%
10 मई 30.76%
9 मई 29.9%
8 मई                 29.36%              
7 मई 28.83%
6 मई 28.72%
5 मई 27.41%
4 मई 27.52%
3 मई 26.59%
2 मई 26.65%
1 मई 25.37%

तीन दिन बुखार न आने पर कर दिया जाएगा डिस्चार्ज

अग्रवाल ने बताया कि कोरोना संक्रमितों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार जिन लोगों में कम लक्षण हैं उन्हें अगर तीन दिन बुखार नहीं आता है तो उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसे लोगों को सात दिनों तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। वहीं जिन लोगों को पहले से एचआईवी जैसे इम्युनो समस्या हैं उन्हें पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही डिस्चार्ज किया जाएगा।

आरोग्य सेतु एप अब 12 भाषाओं में, डेटा लीक होने की खबरें बेकार
केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई एम पॉवर ग्रुप के चेयरमैन ने आरोग्य सेतु एप के बारे में जानकारी दी। बताया कि ये एप अब 12 भाषाओं में उपलब्ध है। अब तक इसके 9.8 करोड़ यूजर्स हैं। सबसे तेज 5 करोड़ यूजर्स बनने वाला दुनिया का पहला एप बन चुका है। ग्रुप के मुताबिक इस एप के जरिए 13 हजार लोग संक्रमितों की पहचान हो पाई है। इसके अलावा 1 लाख 40 हजार लोग ऐसे भी मिले जो संक्रमित लोगों की संपर्क में आए थे। ग्रुप ने एप के डेटा लीक की खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि आरोग्य सेतु से जुड़े डेटा किसी को नहीं दिया जाता। 30 दिन के भीतर आम यूजर्स के डेटा हटा दिया जाता है। जिनका टेस्ट किया जा रहा है उनका डेटा 45 दिन तक सर्वर पर रखा जाता है। जिनका इलाज चल रहा है उनका डेटा उनके ठीक होने तक तक रखा जाता है और उसके बाद हटा दिया जाता है।