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विशेषज्ञों की राय: बारिश में बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, नमी में तीव्र होते हैं वायरस


  • वैज्ञानिक जेर्ड इवांस कहते हैं कि अभी यह पता नहीं कि सीमित बारिश का असर वायरस पर क्या होगा
  • प्रोफेसर जेर्ड बेटेन कहते हैं कि बारिश कोरोनावायरस को डायल्यूट (घोलकर कमजोर कर देना) कर सकती है

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 05:53 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी एपलाइड फिजिक्स लेबोरेटरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक जेर्ड इवांस कहते हैं कि अभी यह पता नहीं कि सीमित बारिश का असर वायरस पर क्या होगा। हालांकि, अधिकांश विशेषज्ञ यह मानते हैं कि बारिश में नमी के कारण वायरस तीव्र हो जाता है, जिससे बारिश में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

हालांकि, वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ, मेडिसिन और एपिडिमियोलॉजी के प्रोफेसर जेर्ड बेटेन कहते हैं कि बारिश कोरोनावायरस को डायल्यूट (घोलकर कमजोर कर देना) कर सकती है। जिस तरह धूल बारिश के पानी में घुलकर बह जाती है, ठीक वैसे ही यह कोरोनावायरस भी बह सकता है। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश साबुन के पानी की तरह सतह को डिसइंफेक्ट करने में सक्षम नहीं है।

बारिश और कोरोना से जुड़े दो अहम सवाल

क्या बारिश से वायरस साफ नहीं हो सकते हैं?

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के मुताबिक, ऐसे मामले भी आए हैं जिनमें 17 दिनों के बाद भी सतह पर कोरोना वायरस पाया गया है। ऐसे में फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता है कि बारिश से किसी सतह, मैदान या कुर्सी पर लगा वायरस साफ हो जाएगा। इसलिए बारिश में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। 

क्या बारिश से कोरोनावायरस धीमा भी नहीं पड़ेगा?
यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर की एपिडिमियोलॉजी डिपार्टमेंट की संस्थापक और वैज्ञानिक जेनिफर होर्ने के मुताबिक, बारिश का पानी वायरस की सफाई नहीं कर सकता है। इससे वायरस फैलने-पनपने की रफ्तार भी धीमी नहीं होगी। यह उसी तरह है कि हाथ पानी से धोएंगे तो वायरस नहीं मरेगा, साबुन लगाना पड़ेगा।

भारतीय विशेषज्ञ भी बोले- वायरस की सक्रियता बढ़ेगी

ये तीन तथ्य जो बताते हैं कि बारिश में सावधानी बढ़ानी पड़ेगी

  • वायरस देर तक रहता है: एम्स के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. संजय राय का कहना है कि बारिश और कोरोना पर अध्ययन नहीं हुआ है। लेकिन, वायरस की सक्रियता में कमी नहीं बल्कि तीव्रता और बढ़ेगी। बारिश में तापमान और आद्रता किसी भी वायरस के फैलने और अधिक देर तक रहने में मददगार होती है। 
  • जहां बारिश वहां भी मामले आए: आईसीएमआर की ओर से कोविड-19 के लिए बनाई गई रिसर्च और ऑपरेशन टीम के सदस्य को-एपिडेमोलॉजिस्ट प्रो.डॉ.नरेंद्र अरोड़ा कहते हैं कि बारिश में कोरोना कम होगा इसकी संभावना नहीं है। इंडोनेशिया और सिंगापुर में पूरे वर्ष बारिश होती है, लेकिन वहां लगातार मामले आ रहे हैं। 
  • अस्पताल पर बोझ बढ़ेगा: राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के डॉ.एसी धारीवाल कहते हैं कि बारिश के मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया, सामान्य फ्लू वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी, यह एक अलग परेशानी है। ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती होंगे तो संक्रमण का खतरा भी ज्यादा होगा।

(इनपुट: पवन कुमार)

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हॉटस्पॉट न्यूयॉर्क में 83 दिन के बाद काम पर लौटेंगे 4 लाख लोग, चर्च भी खुला मगर 10 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं


  • ग्रीस ने यूरोपीय देशों समेत 29 देशों की सूची तैयार की है, इन देशों के लिए ग्रीस 15 जून से खुल सकता है
  • न्यूयॉर्क सिटी 15 मार्च से बंद है, गवर्नर क्यूमो ने कहा है कि न्यूयॉर्क सिटी में अलग-अलग चरणों में लॉकडाउन में ढील दी जाएगी

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 05:52 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क सिटी में 8 जून से लॉकडाउन खुल जाएगा। करीब 4 लाख कर्मचारी 83 दिन के बाद काम पर लौट सकेंगे। न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने इसकी घोषणा की है। न्यूयॉर्क सिटी 15 मार्च से बंद है। इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में लॉकडाउन में ढील दी गई थी, लेकिन न्यूयॉर्क सिटी में नहीं दी गई थी।

गवर्नर क्यूमो ने कहा है कि न्यूयॉर्क सिटी में अलग-अलग चरणों में लॉकडाउन में ढील दी जाएगी। पहले चरण में निर्माण कार्य, उत्पादन और माल की थोक आपूर्ति की अनुमति दी जा रही है। लोग कृषि, वानिकी और मछली पालन के कार्य दोबारा शुरू कर सकेंगे। न्यूयॉर्क के अन्य 5 क्षेत्र लॉकडाउन में छूट के दूसरे चरण में खोले जाएंगे।

इसके तहत रियल एस्टेट सर्विस, खुदरा दुकानें और कुछ हेयर सैलून खोलने की अनुमति होगी। अमेरिका में 17.99 लाख से ज्यादा मरीज और एक लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। न्यूयॉर्क सिटी में 1.99 लाख केस और 20,000 मौतें हुई हैं।

टकराव: अमेरिका ने चीनी छात्रों को आने से रोका; चीन बोला- यह नस्लवाद है

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से संबंध रखने वाले चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं के देश में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है। ट्रम्प ने कहा कि चीन अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के आधुनिकीकरण के लिए संवदेनशील अमेरिकी टेक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा को हासिल करने का अभियान चला रहा है।

यह स्थिति अमेरिका के लिए जोखिम भरी है। इस मामले पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा कि अमेरिका शीत युद्ध की योजना बना रहा है। अमेरिका चीनी छात्रों के कानूनी अधिकारों का उल्लंघन न करे। वह नस्लवादी रुख न अपनाए।

यूरोप: पर्यटन उद्योग बचाने के लिए बॉर्डर खोलने की तैयारी
यूरोपीय देशों में ऑफिस, रेस्तरां और कुछ उद्योग खुल चुके हैं। अब इन देशों की सरकारें पर्यटन उद्योगों को बचाने की योजना बना रही है। इसके लिए ये देश बॉर्डर खोलने की तैयारी कर रहे हैं, खासकर शेंगेन क्षेत्र के देश। इस क्षेत्र में 26 देश हैं। इस क्षेत्र में शामिल देशों के लोगों को यहां घरेलू यात्रा की तरह आवागमन की अनुमति है।

यह लक्जमबर्ग के शेंगेन शहर में 1985 में हुए समझौते का हिस्सा है। बॉर्डर खोलने के लिए यूरोपीय अधिकारी नई गाइडलाइंस तैयार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सब ठीक रहा तो बुल्गारिया, सर्बिया की सीमाएं 1 जून से खुल जाएंगी। वहीं ग्रीस ने यूरोपीय देशों समेत 29 देशों की सूची तैयार की है।

इन देशों के लिए ग्रीस 15 जून से खुल सकता है। चेक रिपब्लिक, हंगरी, स्लोवाकिया भी इसी तरह की तैयारियां कर रहे हैं। फ्रांस, जर्मनी और पश्चिमी यूरोप के अन्य देश आपस में इस मसले पर बात कर रहे हैं। ये भी 15 जून से बॉर्डर खोल सकते हैं।

चर्च खुल रहे, अब कारोबार खुलने को तैयार...

न्यूयॉर्क सिटी का सेंट मेल चर्च खुल गया है, लेकिन यहां 10 से ज्यादा लोग एक साथ जमा नहीं हो सकते। अब शहर में जल्द ही कारोबार भी खुलने वाला है।

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ब्राजील में स्पेन से ज्यादा मौतें हुईं, यहां अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा 4.68 लाख मरीज: अब तक 60.29 लाख संक्रमित


  • दुनिया में अब तक 3 लाख 66 हजार 802 लोगों की मौत हो चुकी है, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1 लाख 4 हजार 542 जानें गईं
  • ब्राजील में मौतों का आंकड़ा 27 हजार 944 हो गया है, वहीं स्पेन में अब तक 27 हजार 121 लोगों ने जान गंवाई हैं

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 08:39 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 60 लाख 29 हजार 950 लोग संक्रमित हैं। 26 लाख 59 हजार 239 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 66 हजार 802 हो गया है। उधर, ब्राजील में 27 हजार 944 की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा स्पेन (27,121) से ज्यादा है। ब्राजील में एक दिन में 1,124 लोगों ने दम तोड़ा है। यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे ज्यादा संक्रमित देश है। यहां मरीजों की संख्या 4.68 लाख से ज्यादा है।

कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 17,93,530 1,04,542 5,19,569
ब्राजील 4,68,338 27,944 1,93,181
रूस 3,87,623 4,374 1,59,257
स्पेन 2,85,644  27,121  1,96,958
ब्रिटेन 2,71,222 38,161 उपलब्ध नहीं
इटली 2,32,248 33,229 1,52,844
फ्रांस 1,86,238 28,662 67,191
जर्मनी 1,83,019 8,594 1,64,100
भारत 1,73,491 4,980 82,627
तुर्की 1,62,120 4,489 1,25,963

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

अमेरिका: एक दिन में 1225 मौतें

अमेरिका में 24 घंटे में 1225 लोगों की मौत हुई है। यहां मरने वालों की संख्या एक लाख चार हजार 542 हो चुकी है। देश के सबसे संक्रमित राज्य न्यूयॉर्क को 8 जून से खोलना शुरू किया जाएगा। गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने कहा कि गैर-जरूरी कंस्ट्रक्शंस और मैन्युफैक्चरिंग खोले जाने के बाद लगभग चार लाख लोग काम पर जाएंगे। यहां बसों और ट्रेनों का हमेशा साफ किया जा रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम लोगों के लिए बिल्कुल सुरक्षित होगा।

न्यूयॉर्क में बिजनेस खोले जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते लोग। गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने कहा है कि राज्य को 8 जून से खोलना शुरू किया जाएगा।

फ्रांस: 24 घंटे में 52 की मौत
फ्रांस में 24 घंटे में 52 लोगों की मौत हुई है। यहां मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 28,714 हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक यहां 1 लाख 1 हजार 390 लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इनमें से 17,904 की हालत गंभीर है। 67,803 मरीजों के स्वस्थ्य होने के बाद इन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई है। वहीं, अब तक 28,714 की मौत हुई है।

द.अफ्रीका: 1800 से ज्यादा नए केस मिले
दक्षिण अफ्रीका में मार्च में संक्रमण का पहला मामला सामने आया था। उसके बाद से शुक्रवार को पहली बार सबसे ज्यादा 1837 नए केस मिले हैं। देश में अब संक्रमितों की संख्या 29 हजार 240 हो चुकी है। वहीं, एक दिन में 34 लोगों की मौत हुई है। इसके सा ही देश में मरने वालों की संख्या 611 हो चुकी है। यहां अब तक 15 हजार 93 लोग ठीक हो चुके हैं। 24 घंटे में 24 हजार 452 टेस्ट किए गए हैं। कुल 6 लाख 80 हजार से ज्यादा टेस्ट हो चुके हैं।

चीन: चार नए मामले मिले
चीन में कोरोनावायरस के चार नए मामले सामने आए हैं। नेशनल हेल्थ कमीशन ने शनिवार को कहा कि नए मामलों में से दो शांडोंग प्रांत से, एक शांघाई से और एक मामला गुआंगडोंग प्रांत से सामने आया है। किसी मरीज के मौत की खबर नहीं है। देश में अब तक 82 हजार 995 संक्रमित हैं, जबकि 4634 लोगों की जान जा चुकी है। 

मैक्सिको: 9415 मौतें
मैक्सिको में 24 घंटे में 371 लोगों की मौत हुई है। इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 9415 हो गई है। उप स्वास्थ्य मंत्री हुगो लोपेज-गेटेल ने बताया कि इस दौरान मरीजों की संख्या 3227 बढ़ने के साथ ही कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 84 हजार 627 हो गई है।

ओमान: 811 नए मामले
ओमान में शुक्रवार को 811 नए मामले सामने आए। संक्रमितों की संख्या बढ़कर 9,820 हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ओमान के 315 नागरिकों समेत सभी नए मामले सामुदायिक संपर्क से जुड़े हैं। देश में अब तक 2,177 मरीज बीमारी से ठीक हुए हैं, जबकि 40 लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय ने लोगों से क्वारैंटाइन नियम का पालन करने और सार्वजनिक जगहों पर नहीं जाने का आग्रह किया है।

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चार एशियाई देशों में छूट देते ही कोरोना के मरीज बढ़ने लगे, अब फिर से सख्ती; दक्षिण कोरिया में पिछले 24 घंटे में 79 नए केस


  • दक्षिण कोरिया तो शुरुआत से ही कोरोना को काबू में रखकर चल रहा था, लगभग 5 करोड़ की आबादी वाला ये देश हर छोटी कोशिश को भी तवज्जो दे रहा था
  • स्कूल बंद कर दिए गए थे, लोगों को घर से काम करने को कह दिया गया, लेकिन 20 मई से दोबारा स्कूल खुले और छूट मिली, तो संक्रमण बढ़ने लगा

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 06:01 AM IST

सियोल/मनीला/कोलंबो/जकार्ता. कोरोना को लेकर एशियाई देशों में स्थिति बिगड़ती जा रही है। जिन देशों ने शुरुआत में कोरोना को संभाल लिया था, वहां पर छूट के बाद मरीज बढ़ने लगे हैं। इनमें दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, श्रीलंका और इंडोनेशिया प्रमुख हैं। दक्षिण कोरिया तो शुरुआत से ही कोरोना को काबू में रखकर चल रहा था।

लगभग 5 करोड़ की आबादी वाला ये देश हर छोटी कोशिश को भी तवज्जो दे रहा था, स्कूल बंद कर दिए गए थे, लोगों को घर से काम करने को कह दिया गया। मार्च के अंत में तो रोज 20 हजार लोगों की जांच की जा रही थी। तब यह दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा थी।

दोबारा स्कूल खुले और छूट मिली तो बढ़ने लगा संक्रमण

लेकिन 20 मई से दोबारा स्कूल खुले और छूट मिली, तो संक्रमण बढ़ने लगा। गुरुवार को 79 नए मरीज मिले। इसके बाद स्कूल-कॉलेज दोबारा बंद करने के आदेश दे दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री जोंग यून-कियोंग ने कहा कि फिर से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की जरूरत पड़ सकती है, क्योंकि लोगों की बढ़ती गतिविधियों की वजह से संक्रमण के संपर्कों का पता लगाना मुश्किल है। नए मामलों में से ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनी से जुड़े हैं।

फिलीपींस: वुहान से भी लंबा लॉकडाउन, पर छूट मिलते ही सारी कोशिशें बेकार हो गईं

यहां पिछले 24 घंटे में 1046 केस सामने आए हैं। जबकि इससे पहले एक हफ्ते में रोज औसत 300 केस सामने आ रहे थे। जनवरी में पहला मामला आने के बाद यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। जबकि देश में इतनी सख्ती थी कि राष्ट्रपति दुतेर्ते ने कह दिया था कि लॉकडाउन तोड़ने पर गोली मार दें। यहां 16 मार्च से सख्ती शुरू हुई थी। लॉकडाउन खत्म होने तक यह वुहान से लंबा हो जाएगा। 11 मई को मनीला एयरपोर्ट और 16 मई को मेट्रो और मॉल भी खोल दिए गए। इसलिए केस बढ़ने लग गए। सोमवार से सख्ती के साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करने की योजना है।

  • संक्रमित- 16634, मौतें- 942

श्रीलंका: कुवैत से लौटे 250 संक्रमित, रविवार से फिर देशभर में सख्ती होगी

द्वीपीय देश श्रीलंका में बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं और पहले से मौजूद निगरानी तंत्र के कारण सिर्फ 10 मौतें हुईं। स्थिति अच्छी रहने पर 52 दिनों के लॉकडाउन के बाद 11 मई को सारे बाजार खोल दिए गए। पिछले एक हफ्ते में सिर्फ दो ही दिन संक्रमितों की संख्या तीन अंकों में पहुंची। पर कुवैत से हाल में लौटे 250 लोगों के पॉजिटिव पाए जाने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। रविवार से देश में लॉकडाउन के सख्त नियम फिर से लागू करने का फैसला लिया गया है।

  • संक्रमित- 1548, मौतें- 10

इंडोनेशिया: मई में दोगुने हो गए मामले, सुदूर द्वीपों तक पहुंच गया संक्रमण

दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में मार्च के आखिरी दिन इमरजेंसी लागू की गई थी, पर सख्त लॉकडाउन कभी भी नहीं रहा। मई की शुरुआत तक इंडोनेशिया ने काबू रखा था, पर महीना खत्म होते-होते सुदूर द्वीप मालुकु तक कोरोना पहुंच गया है। यहां से लोगों की आवाजाही जावा और बाली में भी है, इसलिए खतरा वहां भी बढ़ गया है। मई के पहले हफ्ते में देश में 12 हजार संक्रमित थे, जो बढ़कर 25,316 हो गए हैं। इसके बाद सुरबाया जैसे प्रांतो में 10 हजार से ज्यादा लोगों की रैंडम सैंपलिंग शुरू कर दी है। 

  • संक्रमित- 25216, मौतें- 1520
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ट्रम्प ने सुरक्षा के मद्देनजर कुछ चीनी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई, डब्ल्यूएचओ से सभी रिश्ते तोड़ने का ऐलान किया


  • शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा- विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन का पूरी तरह से नियंत्रण है
  • अमेरिका ने कोरोना पर चीन और डब्ल्यूएचओ की सांठगांठ की बात कही थी, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोकी

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 01:41 AM IST

वॉशिंगटन. दुनियाभर में फैली कोरोना महामारी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को एक बार फिर चीन और डब्ल्यूएचओ पर कटघरे में खड़ा किया। अमेरिका पहले ही डब्ल्यूएचओ की फंडिंग रोक चुका है। अब ट्रम्प ने स्वास्थ्य संगठन के साथ सभी रिश्ते खत्म करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम डब्ल्यूएचओ के कोटे का फंड स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली किसी दूसरी संस्था को देंगे।

ट्रम्प ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन का पूरा नियंत्रण है। चीन उसे 40 मिलियन डॉलर देता है, लेकिन अमेरिका एक साल में 450 मिलियन डॉलर की मदद डब्ल्यूएचओ को देता है। उन्होंने हमारी मांग नहीं मानी, इसलिए हम डब्ल्यूएचओ से संबंध खत्म कर रहे हैं। ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था कि कोरोनावायरस दुनिया के लिए चीन का एक बुरा तोहफा है।

चीन पर जासूसी और जानकारियां चुराने का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन पर लंबे समय तक जासूसी करने और औद्योगिक जानकारियां चोरी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका की अहम रिसर्च को बेतहर तरीके से सुरक्षित रखने की घोषणा करूंगा। हम विदेशी जोखिमों के तौर पर पहचान रखने वाले चीन के कुछ नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाएंगे।

अमेरिका v/s डब्ल्यूएचओ

1. यह विवाद क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति का आरोप है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के मामले में चीन को लेकर गंभीर नहीं था। इसी वजह से कोरोना संक्रमण दुनियाभर में फैल गया। ट्रम्प ने दावा किया कि डब्ल्यूएचओ अपने काम में विफल रहा है। उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ को फंडिंग रोकी।

2. डब्ल्यूएचओ को आखिर फंड मिलता कितना है?

  • अब तक 15% फंड अकेले अमेरिका देता था।
  • यूएस ने डब्ल्यूएचओ को 2019 में 553 मिलियन डॉलर दिए थे।
  • ब्रिटेन 08% फंड देता है।
  • अकेले बिल एंड मेलिंडा गेट्स 10% फंड देते हैं।

3. डब्ल्यूएचओ इस फंडिंग को खर्च कहां करता है?

  • टीकाकरण अभियान चलाने, हेल्थ इमरजेंसी और प्राथमिक इलाज में दुनियाभर के देशों की मदद करने में फंड खर्च होता है।
  • 2018-19 में डब्ल्यूएचओ ने फंड का 19.36% हिस्सा यानी लगभग 1 बिलियन डॉलर पोलियो उन्मूलन पर खर्च किया।
  • अफ्रीकी देशों में चल रहे डब्ल्यूएचओ के प्रोजेक्ट्स के लिए 1.6 बिलियन डॉलर खर्च किए गए। 

4. क्या डब्ल्यूएचओ महानिदेशक और चीन के बीच कोई कनेक्शन है
जुलाई 2017 में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक का पद संभालने वाले डॉ. टेडरोस अधानोम गेब्रियेसस इथोपिया के नागरिक हैं। उन्हें चीन के प्रयासों की वजह से ये पद मिलने के आरोप लगते रहे हैं। वे इस संस्थान के पहले अफ्रीकी मूल के डायरेक्टर जनरल हैं। आरोप है कि चीन ने टेडरोस के कैंपेन को ना सिर्फ सपोर्ट किया बल्कि अपने मत के अलावा अपने सहयोगी देशों के भी मत दिलवाए। अमेरिका और चीन दोनों ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी सदस्य हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को देने वाले फंड में बढ़ोतरी की है।

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चीन खुद इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करता है, जब भारत यही करता है तो चीन रुकावटें खड़ी करता है, गश्त में बाधा डालता है


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है, दोनों देशों मसले को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया
  • चीन ने यहां सैन्य तैनाती बढ़ाई, जवाब में भारत ने भी यही किया

नेशनल सिक्युरिटी एडवायजरी बोर्ड के सदस्य प्रो. बिमल पटेल

May 29, 2020, 10:18 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चल रहा है। दोनों देशों के सैनिकों के बीच संघर्ष भी हुआ। अमेरिका ने मध्यस्थता की पेशकश की। दोनों ही देशों ने इसे ठुकरा दिया। कहा- मसला बातचीत से हल कर लेंगे। बहरहाल, इस मसले पर भास्कर ने प्रोफेसर (डॉक्टर) बिमल एन. पटेल से उनकी राय जानी। प्रोफेसर पटेल गुजरात की रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर जनरल हैं। इसके अलावा वे नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य भी हैं। यहां भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव और इससे जुड़े मुद्दों पर उनकी राय….

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हो रही घटनाओं को कई तरह से देख सकते हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि गलतफहमियां क्यों बढ़ीं। सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच कोई ऐसी सीमा नहीं है, जिसे भारत और चीन दोनों ही मानते हों। 
चीन यहां अपना इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। लेकिन, जब भी भारत यही काम करता है तो वह विरोध करता है। हमारी गश्त को भी प्रभावित किया जाता है। भारत की तरफ से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किया ही जाना चाहिए और इस पर जोर भी दिया गया है। सैन्य टुकड़ियों की तैनाती को लेकर भ्रम की स्थिति है। लेकिन, इस बारे में कयास नहीं लगाए जाने चाहिए।
झड़पें पहले भी होती रही हैं। लिहाजा, हालिया घटनाओं को अपवाद नहीं माना जा सकता। इसको सुलझाने में वक्त लगता है। अफसर और एजेंसियां हर घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हैं। जमीनी हकीकत के बारे में फैसला सेना पर छोड़ना चाहिए। हमारी सेनाओं को पूरा समर्थन है और हमेशा मिलना चाहिए। देश की अखंडता और प्रभुसत्ता को बनाए रखना हर राज्य का कर्तव्य है। भारत भी यही कर रहा है। लेकिन, इसी समय हम तनाव बढ़ाए बिना शांति से मामले को हल करने की कोशिश भी कर रहे हैं।  
भारत ने कभी यथास्थिति को बदलने की कोशिश नहीं की। और हम किसी दूसरी ताकत को भी ऐसा नहीं करने देंगे। इस मामले के कुछ दूसरे पहलू भी हैं। इसे चीन की विस्तृत रणनीति का भी हिस्सा नहीं मानना चाहिए। इस मामले का (लद्दाख में तनाव) भारत के नए एफडीआई नियमों से भी सीधा संबंध नहीं है। क्योंकि, यह नियम देश के आर्थिक हित ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। कई बार ये देखा गया है कि कुछ देश अपने अंतरराष्ट्रीय मामलों का इस्तेमाल घरेलू राजनीति या उद्देश्य के लिए करते हैं। 
नेपाल के मामले में भी यही बात है। लिपुलेख रोड का उसने विरोध किया। लेकिन, इसमें चीन को लाना या जोड़ना सही नहीं होगा। चीन ने भारत में मौजूद अपने नागरिकों को वापस लाने का फैसला किया। लेकिन, ये छात्र, पर्यटक और शॉर्ट टर्म वीजा होल्डर्स थे। इन हालात में तो कोई भी देश यही करता। फिर चाहे वो भारत हो या चीन।  
फिलहाल, तनाव के जो हालात हैं। उन्हें पहले की तरह शांतिपूर्ण और दोनों देशों की बातचीत से हल करना चाहिए। हमारी लीडरशिप और 2020 का भारत दुनिया के अहम मामलों में निर्णायक भूमिका निभाता है। इस दौरान हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नीतिगत हितों का भी ध्यान रखते हैं। 

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संक्रमण से मौत के मामले में चीन से आगे निकला भारत, देश में अब तक 4797 मौतें; आज 86 लोगों ने कोरोना से दम तोड़ा


  • महाराष्ट्र में अब तक 1982 मरीजों की जान गई, गुजरात में 960 संक्रमितों की मौत हुई
  • राजस्थान में अब तक 184 ने दम तोड़ा, मध्यप्रदेश में 321 की जान गई

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 05:54 PM IST

नई दिल्ली. देश में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 4797 हो गई। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मौतों का आंकड़ा 4706 है। फिर भी यह संख्या चीन में संक्रमण से हुई मौतों से कहीं ज्यादा है। क्योंकि, चीन में कोरोना संक्रमण से हुईं मौतों की संख्या 4634 है। 

गुरुवार को देश में 176 संक्रमितों की मौत हुई। इनमें महाराष्ट्र में 85, गुजरात में 22 और दिल्ली में 13 मरीजों की जान गई। इसके अलावा उत्तरप्रदेश में 15, दिल्ली में 13, तमिलनाडु में 12, मध्यप्रदेश में 8, राजस्थान में 7, पश्चिम बंगाल में 6, तेलंगाना में 4, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर और आंध्रप्रदेश में 1-1 मरीज की मौत हुई। 

महाराष्ट्र में अब तक कोरोना से 1982 और गुजरात में 960 संक्रमित जान गंवा चुके हैं। इससे पहले, बुधवार को एक दिन में सबसे ज्यादा 187 मरीजों ने दम तोड़ा। अकेले महाराष्ट्र में रिकॉर्ड 105 लोगों की जान गई। यह राज्य में एक दिन में मृतकों की सबसे बड़ी संख्या है। 

महाराष्ट्र में कोरोना का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। यहां हर 14 मिनट में 1 मौत हो रही है, जबकि हर घंटे 91 मामले सामने आ रहे हैं। 

टॉप-10 शहर जहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं 

शहर

मौतें
मुंबई                           1097
अहमदाबाद 764
पुणे 291
कोलकाता 191
इंदौर 119
जयपुर 83
उज्जैन 54
सूरत 65
ठाणे 149
भोपाल 51

28 मई को 176 मौतें

तारीख

मौतें
15 मई               95
16 मई 106
17 मई 165
18 मई 131
19 मई 147
20 मई  132
21 मई 148               
22 मई 147
23 मई 142
24 मई 156
25 मई 150
26 मई 170
27 मई 187
28 मई 176
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अब तक 59.04 लाख संक्रमित: रूस में 24 घंटे में 8 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आए: महामारी को देखते हुए ब्रिक्स सम्मेलन स्थगित किया गया


  • अब तक दुनिया में 3 लाख 62 हजार 10 मौतें, सबसे ज्यादा अमेरिका में 1 लाख 3 हजार 330 लोगों की जान गई
  • रूस अब ब्रिक्स और एससीओ समिट की अगली तारीख महामारी की स्थिति देखते हुए तय करेगा

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 08:00 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 59 लाख 4 हजार 658 लोग संक्रमित हैं। 25 लाख 79 हजार 629 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 62 हजार 10 हो गया है। रूस में पिछले 24 घंटे में 8 हजार 371 नए मामले सामने आए हैं। महामारी को देखते हुए रूस ने ब्रिक्स( ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और दक्षिण अफ्रीका) समूह और शंघाई कोऑपरेशन आर्गेनाइजेशन (एसओ) का सम्मेलन स्थगित कर दिया। इन दोनों समूहों का सम्मेलन इस साल रूस की अध्यक्षता में होने वाला था।

महामारी की स्थिति को देखते हुए एससीओ और ब्रिक्स समिट की अगली तारीख सदस्य देशों को बताई जाएगी। रूस में अब तक कुल 3 लाख 79 हजार 051 मामले सामने आए हैं। 4 हजार 142 मौतें हुई हैं और 1 लाख 50 हजार 993 लोग स्वस्थ हुए हैं। 

कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 17,68,461 1,03,330 4,98,725
ब्राजील 4,38,812  26,764 1,93,181
रूस 3,79,051 4,142 1,50,993
स्पेन 2,84,986  27,119 1,96,958
ब्रिटेन 2,69,127 37,837 उपलब्ध नहीं
इटली 2,31,732 33,142 1,50,604
फ्रांस 1,82,913 28,596 66,584
जर्मनी 1,82,313 8,555 1,63,200
तुर्की 1,60,979 4,461 1,24,369
भारत 1,65,348 4,710 70,786

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

ब्राजील से लौट सकेंगे अमेरिकी लोग: ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ब्राजील पर लगाया गया ट्रैवेल बैन सख्त है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ब्राजील से लौटने के इच्छुक अमेरिकी नागरिकों को अपने देश आने की इजाजत दी जाएगी। यह ठीक चीन से आने पर लगाए गए बैन की तरह है। हम इतने सख्त नहीं हो सकते कि अमेरिकी लोगों को उनके देश में आने की इजाजत न दी जा सके। अमेरिका ने पिछले हफ्ते ब्राजील से आने वालों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई थी। 

अमेरिका के मिनेपोलिस में अफ्रीकन-अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉड की मौत के विरोध में प्रदर्शन करता एक व्यक्ति।

ब्रिटेन सोमवार से पाबंदिया हटाना शुरू करेगा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जाॅनसन ने गुरुवार को कहा कि देश में सोमवार से पाबंदिया हटानी शुरू की जाएगी। इसे कई चरणों में धीरेे-धीरे हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाबंदियों में यह छूट इस बात पर निर्भर है कि वायरस नियंत्रित रहे। हमने साथ मिलकर संक्रमण रोकने में हासिल किया है, उसे बेकार नहीं कर सकते। लॉकडाउन के मौजूदा नियमों में दी जा रही छूट सिमित है। लोगों को अब भी सावधान रहने की जरूरत है। इसके तहत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने पर 6 लोगों को घर के बाहर एक साथ जुटने की इजाजत दी जाएगी।

लंदन में एक सरकारी अस्पताल के बाहर राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के समर्थन में प्रदर्शन करते डॉक्टर। 

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बाहर जाकर खाने के मुकाबले टेकआउट और हाेम डिलीवरी में जाेखिम कम; वायरस भाेजन से नहीं फैलता, जाे इच्छा हो, वह मंगवा सकते हैं


  • लाॅकडाउन खुल रहा है, ऐसे में रेस्तरां से हाेम डिलीवरी के विकल्प में खतरा नहीं
  • फूड सेफ्टी स्पेशलिस्ट्स और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट बता रहे हैं तमाम जवाब

एमेलिया निरेनबर्ग

May 29, 2020, 06:03 AM IST

वॉशिंगटन. लाॅकडाउन से धीरे-धीरे मिल रही छूट के साथ ही देश-दुनिया के कई शहराें में रेस्तरां और मिठाई की दुकानाें से टेकआउट या हाेम डिलीवरी की सुविधा शुरू हाे गई है। काेराेना काल में अकेले रह रहे या भाेजन न बना पाने वाले लाेगाें के लिए यह विकल्प अधिक सुविधाजनक है। हालांकि, इन तरीकाें में कोरोनावायरस के संक्रमण के जाेखिम काे लेकर भी कई सवाल हैं। फूड सेफ्टी स्पेशलिस्ट्स और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट बता रहे हैं तमाम जवाब…

 कुछ सामान्य निर्देशाें पर अमल करते रहें, तो आप बाहर के भाेजन का आनंद ले सकते हैं

क्या बेहतर है: टेकआउट या डिलीवरी?

रटगर्स यूनिवर्सिटी के फूड साइंस विशेषज्ञ डाेनाल्ड शेफनर कहते हैं, ‘सतह से संक्रमण फैलने के बहुत कम प्रमाण हैं। भाेजन से संक्रमण फैलने के प्रमाण नहीं हैं।’ नाॅर्थ कैराेलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के फूड सेफ्टी स्पेशलिस्ट बेन चैपमैन के मुताबिक, ‘बाहर खाने के मुकाबले टेकआउट और डिलीवरी दाेनाें में जाेखिम कम है।

हालांकि, काॅन्टैक्टलेस डिलीवरी थाेड़ी सुरक्षित है। इसमें व्यक्ति भाेजन दरवाजे पर रख जाता है। ऑर्डर और पेमेंट ऑनलाइन हाे जाता है। काेई रेस्तरां हाेम डिलीवरी नहीं करता ताे टेकआउट भी अपनाया जा सकता है। काेलाेराडाे स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की असि. प्राे. एलिजाबेथ कार्लटन कहती हैं, ‘ऐसी जगह न जाएं, जहां 20 लाेग इंतजार कर रहे हाें। रेस्तरांकर्मी काे बाेलें कि वह पैकेट रखे और आपके उठाने से पहले चला जाए।

पैकेजिंग में कितना जाेखिम है?
पैकेजिंग से खतरा कम है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग के पेडियाट्रिशियन डाॅ. जाॅन विलियम कहते हैं, ‘संक्रमित व्यक्ति पैकेट काे छू ले ताे भी ट्रांसमिशन का खतरा कम है। यह तभी हाे सकता है जब वह अपने हाथ संक्रमित करे, पैकेट काे छुए और आप उसे उसी स्थान से छुएं।’ फिर भी संदेह है ताे पैकेट काे डिसइंफेक्ट करें। हाथ धाेएं और भाेजन काे प्लेट में ट्रांसफर कर लें।

बर्तन के बारे में क्या?
भाेजन डिस्पाेजेबल बर्तनाें में आता है। आप घर पर भाेजन कर रहे हैं ताे आपको इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी।

मुझे क्या ऑर्डर करना चाहिए?
चूंकि माना जा रहा है कि वायरस भाेजन से नहीं फैलता, इसलिए आप जाे चाहे मंगवा सकते हैं- पिज्जा, सलाद आदि। काेर्नेल यूनिवर्सिटी के काेर्नेल फूड वेंचर सेंटर की डायरेक्टर ओल्गा पैडिला-जैकाैर कहती हैं, ‘जाेखिम लाेगाें से परस्पर मिलने पर है, भाेजन के प्रकार में नहीं। कच्चे और आपके भाेजन में  अंतर नहीं है।’ यदि आप अब भी चिंतित हैं ताे भाेजन काे गर्म कर लें।

…ताे किस बात की चिंता करनी चाहिए?
कर्मचारियाें की सुरक्षा की चिंता करें। जब ऑर्डर करें ताे रेस्तरां से यह जरूर पूछें कि कर्मचारियाें की सुरक्षा कैसी है। उन्हाेंने मास्क, ग्लव्ज आदि पहने हैं या नहीं।

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ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश पर भारतीय विदेश मंत्रालय का जवाब- पड़ोसी के साथ बातचीत से मसला सुलझाने की कोशिशें जारी


  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि चीन और भारत के सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है
  • इससे पहले, ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकराया था

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 09:50 PM IST

नई दिल्ली.. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को लद्दाख और सिक्किम में भारत-चीन के बीच जारी विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस पेशकश पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि पड़ोसी के साथ मसले का शांतिपूर्ण हल निकालने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था। भारत ने कहा था कि यह उसका आंतरिक मसला है।

भारत तीसरे पक्ष के दखल से इनकार कर चुका है
एक दिन पहले चीन ने कहा था कि भारत से साथ सीमा पर स्थित स्थिर और नियंत्रण में है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था- दोनों पक्ष तनाव को कम करने में जुटे हैं, लेकिन भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। भारत और चीन के पास कई कूटनीतिक तंत्र मौजदू हैं। किसी भी हालात का निपटारा शांतिपूर्ण ढंग से किया जा सकता है।

श्रीवास्तव ने फिर दोहराया कि भारतीय सेना ने एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) का उल्लंघन नहीं किया था। भारत, चीन के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सेना हमारे लीडर्स की सहमति और मार्गदर्शन का ईमानदारी से पालन करती है। हम भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं।

चीन के बाद भारत ने भी बढ़ाई सैनिकों की संख्या

लद्दाख में हाल ही में गालवन नाला एरिया के पास चीन और भारत के बीत तनाव बढ़ गया है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन करीब 5 हजार जवान तैनात कर चुका है। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

इसी महीने दोनों सेनाओं के बीच तीन बार अलग-अलग जगहों पर टकराव हो चुका है। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

डोकलाम के बाद सबसे बड़ा टकराव

  • अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

  • भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। साल के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी।

भारत और चीन के बीच हाल में हुए विवाद

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पेंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त  झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया, फिर झड़प रुकी।

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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सभी लीग बिना फैंस के शुरुआत की तैयारी में, 4 में से 3 अमेरिकी वैक्सीन बनने तक स्टेडियम जाकर मैच नहीं देखना चाहते


  • फॉक्स नेटवर्क जैसे कई टीवी नेटवर्क बिना दर्शकों के लाइव टेलीकास्ट पर विचार कर रहे, आर्टिफिशियल क्राउड से सीटें भरी जाएंगी
  • 7.5 लाख करोड़ रुपए की अमेरिकी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को खेल न होने से अब तक 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका

न्यूयॉर्क (अमेरिका) से भास्कर के लिए मोहम्मद अली

May 28, 2020, 07:10 AM IST

वॉशिंगटन. दो महीने की नेशनल इमरजेंसी के दौरान पहली बार शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गोल्फ खेलते नजर आए। अमेरिका में कोरोनावायरस से मरने वाले लोगों का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है। इस दौरान अगर देश का राष्ट्रपति गोल्फ खेल रहा हो तो उसकी आलोचना होना लाजमी है।

ट्रम्प ने कहा, ‘हम खेल की वापसी चाहते हैं। देश में खेल शुरू हाेने की आवश्यकता है। हम इसके लिए काम भी शुरू कर चुके हैं। चाहते हैं कि खेल जैसा पहले था, वैसा हो जाए। 80-90 हजार की क्षमता वाले स्टेडियम में सिर्फ 15 हजार फैंस न हों।’

देश में अधिकतर खेल गतिविधियां मार्च से बंद हैं। हालांकि, मई से धीरे-धीरे कुछ गतिविधियां शुरू हो रही हैं। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) और नेसकार के इवेंट हो चुके हैं।

आर्टिफिशियल क्राउड से स्टेडियम भरने की योजना: स्पोर्ट्स इंडस्ट्री ऐसी किसी भी खेल गतिविधि को बढ़ावा नहीं दे रही, जिसमें भीड़ जुटे और फिजिकल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन हो। टीमें, एसोसिएशन, लीग, ब्रॉडकास्टर, स्पॉन्सर का मुख्य फोकस बिना दर्शकों के खेल शुरू करवाना है।

फॉक्स नेटवर्क जैसे कई टीवी नेटवर्क बिना दर्शकों के लाइव टेलीकास्ट पर विचार कर रहे हैं। वे खाली सीटों को आर्टिफिशियल क्राउड से भरने की योजना पर काम कर रहे हैं। न्यू जर्सी की सेटन हाल यूनिवर्सिटी के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिकी आने वाले समय में लाइव गेम टीवी पर देखना पसंद करेंगे।  

मेजर लीग ने कहा- टूर्नामेंट के लिए कॉस्ट कटिंग जरूरी

ईएसपीएन के एनालिसिस के अनुसार, 7.5 लाख करोड़ रुपए की अमेरिकी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को खेल न होने से अब तक 90 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। ब्रॉडकास्टिंग रेवेन्यू के साथ-साथ खिलाड़ी, स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले लोग सभी इससे प्रभावित हुए हैं।

कई मेजर लीग ने स्टाफ और खिलाड़ियों को सूचित कर दिया है कि आने वाले दिनों में अगर सरवाइव करना है और खेलों का आयोजन करना है तो कॉस्ट कटिंग करनी होगी।

एमएलएस और एनबीए के मुकाबले डिज्नी के कॉम्प्लेक्स में हो सकते हैं
बास्केटबॉल, बेसबॉल, फुटबॉल और अमेरिकन फुटबॉल की बड़ी लीग की योजना खेलों को बिना दर्शकों के आयोजित करने की है। मेजर लीग सॉकर (एमएलएस) ने फ्लोरिडा डिज्नी वर्ल्ड में मैच आयोजित करने का प्रस्ताव दिया है।

एनबीए की सभी 30 टीमें सीजन दोबारा शुरू करने को लेकर विचार कर रही हैं। लीग का बाकी सीजन ऑरलैंडो के डिज्नी वर्ल्ड में जुलाई के अंत में शुरू हो सकता है। 

मेजर लीग सॉकर: 1200 से ज्यादा लोग 14 दिन तक क्वारेंटाइन रहेंगे
एमएलएस अगर डिज्नी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में होती है तो खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ के 1200 से ज्यादा लोगों को वाल्ट डिज्नी वर्ल्ड के पास बड़े रिजॉर्ट में 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में रहना होगा। खिलाड़ी परिवार को साथ नहीं ले जा सकेंगे।

खिलाड़ी ईएसपीएन के वाइड वर्ल्ड ऑफ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रैक्टिस करेंगे। खिलाड़ी जून के मध्य में वहां पहुंच सकते हैं। खेल जुलाई में शुरू हो सकते हैं।

एनबीए: हेड कोच के लिए वर्कआउट सेशन प्रतिबंधित, ग्लव्स भी जरूरी
एनबीए 11 मार्च से स्थगित है। मई के पहले हफ्ते में घोषणा की गई थी कि एनबीए की टीमें जल्द ही प्रैक्टिस शुरू कर सकती हैं। खिलाड़ियों को एरिया को सैनिटाइज करना जरूरी है। सोशल डिस्टेंस मेंटेन करना होगा।

हेड कोच और पहली पंक्ति के असिस्टेंट के लिए वर्कआउट सेशन प्रतिबंधित है। हर टीम के साथ सिर्फ चार सदस्य हो सकते हैं। उनका भी मास्क और ग्लव्स पहनना अनिवार्य है।

अमेरिका की आधी आबादी का मानना है कि गेम बिना लाइव ऑडियंस के हों
ईएसपीएन के सर्वे के अनुसार, आधे से ज्यादा फैंस लाइव स्पोर्ट्स नहीं देख रहे। उन्होंने कहा है कि गेम बिना फैंस और लाइव ऑडियंस के होने चाहिए। फैंस को इस बात की भी चिंता है कि अगर वे स्टेडियम में गेम देखने जाएंगे तो वे संक्रमित हो सकते हैं।

सर्वे के अनुसार, चार में से तीन अमेरिकी तब तक स्टेडियम में मैच देखने नहीं जाना चाहते, जब तक कि वैक्सीन नहीं बन जाती।

अंपायरों को सबसे ज्यादा खतरा

सिर्फ खिलाड़ियों को ही रिस्क नहीं है। अंपायर, रेफरी, कोच, टीवी क्रू के सदस्यों को भी उतना ही खतरा है। अधिकतर अंपायरों की उम्र 50 साल से ज्यादा है और उन्हें रिस्क काफी ज्यादा है।

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ब्रिटेन समेत यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों को आशंका- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप से खतरे में पड़ सकती है प्राइवेसी; पारदर्शिता पर भी सवाल


  • वैज्ञानिक कोरोना संक्रमण पर नजर रखने के लिए तैयार किए गए 30 देशों के ऐप की स्टडी कर रहे
  • वे ऐप के व्यवहार, डेटा की प्राइवेसी को लेकर पैदा हो रही शंकाओं को लेकर संतुष्ट नहीं है

राजीव रंजन सिंह

May 28, 2020, 06:20 AM IST

लंदन. दुनिया के कई देश कोरोना के प्रसार को मापने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप पर काम कर रहे हैं। भारत में आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च हो चुका है, जबकि ब्रिटेन के ऐप एनएचएस-एक्स का पायलट टेस्ट चल रहा है। वैज्ञानिक करीब 30 देशों के ऐप की स्टडी कर रहे हैं। वे इन ऐप के व्यवहार, खासकर डेटा की प्राइवेसी संबंधी शंकाओं को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।

ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स ने भी इन ऐप की आलोचना करते हुए खुला पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि ये ऐप यूजर्स के डेटा हैंडलिंग, उनकी निजता के बारे में पारदर्शी नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर जब दो लोग मिलते हैं, तो उनके ऐप ब्लूटूथ के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में आते हैं। ऐसे संपर्कों का ब्यौरा दोनों व्यक्तियों के मोबाइल ऐप में सेव होता है।

कई ऐप यूजर के लोकेशन का डेटा भी लेते हैं। अगर ये डेटा हैकर के हाथ लग जाए, ऐप के नियंत्रक इससे यूजर्स की स्थिति की पहचान करने लगें, तो यह निजता के लिए बड़ा खतरा होगा।

वैज्ञानिक लॉन्च से पहले ऐप का विश्लेषण करना चाहते

वैज्ञानिकों को ऐप लॉन्च होने से पहले ऐसे दुष्प्रभावों का विश्लेषण करने का मौका मिले। यह विश्लेषण यूजर्स के लिए उपलब्ध हो। वे तय कर सकें कि उनके लिए ऐप ठीक है या नहीं। डेटा प्रोटेक्शन कानून का पालन हो। ऐप को एमआईटी टेक्नोलॉजिकल रिव्यू परख रही है।

एमआईटी टेक्नोलॉजिकल रिव्यू ने 5 पैमानों पर एप को परखा

  • स्वैच्छिक: ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं।
  • सीमित इस्तेमाल: डेटा सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित के लिए उपयोग किया जा रहा है।
  • डेटा नष्ट करना : डेटा तय समय (आमतौर पर 30 दिन) में नष्ट हो जाएगा। यूजर्स खुद भी चाहें तो अपना डेटा डिलीट कर सकेंगे।
  • न्यूनतम सूचनाएं: ऐप कोविड-19 के संबंध में ट्रेसिंग के लिए जरूरी सूचनाएं ही लेता है।
  • पारदर्शिता: ऐप से जुड़ीं नीतियां, डिजाइन, सोर्स कोड सार्वजनिक किए जा चुके हैं।

चीन का ऐप किसी पैमाने पर खरा नहीं 

  • अमेरिका: फिलहाल अमेरिका के किसी ऐप का नाम सामने नहीं आ रहा है।
  • ब्रिटेन : एनएचएस-एक्स ऐप। यह स्वैच्छिक, पारदर्शिता, न्यूनतम सूचना के पैमाने पर खरा।
  • इटली: इम्युनी ऐप। यह पांचों पैमानों पर खरा।
  • फ्रांस: स्टॉप कोविड ऐप। यह स्वैच्छिक है। अन्य पैमानों पर खरा नहीं उतरा।
  • चीन: चाइनीज हेल्थ कोड सिस्टम ऐप। यह पांचों पैमाने पर खरा नहीं उतरा है।
  • जर्मनी: कोरोना ऐप। यह स्वैच्छिक है। डेटा नष्ट हो सकेगा। अन्य पैमानों पर खरा नहीं है।
  • भारत:  आरोग्य सेतु ऐप। डेटा नष्ट हो सकेगा। पारदर्शी है। अन्य पैमानों पर खरा नहीं।
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चीन ने कहा- भारतीय सीमा पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में, बातचीत से मामला सुलझा लेंगे; ट्रम्प बोले- अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार


  • चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- हम समझौते का सख्ती से पालन कर रहे
  • लद्दाख में गावलन नाला क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हाल ही में तनाव बढ़ गया है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 05:30 PM IST

बीजिंग. चीन ने बुधवार को कहा कि भारतीय सीमा पर स्थिति पूरी तरह से स्थिर और नियंत्रण में है। दोनों देशों के पास आपसी बातचीत के जरिए ऐसे मुद्दों को हल करने का तंत्र मौजूद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का यह बयान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेना में जारी गतिरोध के बीच आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर चीन की स्थिति स्पष्ट है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपाति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि चीन और भारत के सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है। इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था। भारत ने कहा था कि यह उसका आंतरिक मसला है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दो अनौपचारिक शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए  झाओ लिजियन कहा, ‘‘हम दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी महत्वपूर्ण सहमति और समझौते का सख्ती से पालन कर रहे हैं।’’

‘बेहतर रिश्ते रखने की जिम्मेदारी दोनों देशों की’
वहीं, भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग ने कहा कि भारत और चीन साथ मिलकर कोरोनावायरस से मिलकर जंग लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बेहतर संबंध रखना दोनों देशों की जिम्मेदारी है। दोनों तरफ के युवाओं को भी यह समझना चाहिए। हमें उन चीजों को दूर रखना होगा, जो आपसी रिश्तों पर बुरा असर डाले। आपसी चर्चा के जरिए ही मतभेद सुलझाने चाहिए।

चीन के बाद भारत ने भी बढ़ाई सैनिकों की संख्या

लद्दाख में हाल ही में गालवन नाला एरिया के पास चीन और भारत के बीत तनाव बढ़ गया है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन करीब 5 हजार जवान तैनात कर चुका है। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसी महीने दोनों सेनाओं के बीच तीन बार अलग-अलग जगहों पर टकराव हो चुका है। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

डोकलाम के बाद सबसे बड़ा टकराव

  • अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है। 

  • भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी।

भारत और चीन के बीच हाल में हुए विवाद

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पेंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त  झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया, फिर झड़प रुकी।

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।



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राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से कहा- सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखकर जंग की तैयारियां तेज करें


  • जिनपिंग ने आर्मी के साथ मीटिंग में ऐसा कहा, हालांकि किसी खतरे का जिक्र नहीं किया
  • दूसरी ओर लद्दाख में भारत-चीन के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 12:55 PM IST

बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग ने सेना से कहा है कि ट्रेनिंग और जंग की तैयारियां तेज कर दें। सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखते हुए खुद को तैयार करें और देश के आधिपत्य (सॉव्रिन्टी) के लिए मजबूती से डटे रहें। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने कहा कि उलझे हुए मसलों को मुस्तैदी और असरदार तरीके से डील करें।

जिनपिंग ने मंगलवार को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के डेलिगेशन की प्लेनरी मीटिंग में ऐसा कहा। उन्होंने किसी खतरे का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका बयान ऐसे समय आया है जब बॉर्डर पर चीन और भारत के जवानों के बीच तनाव बना हुआ है।

चीन ने इस साल रक्षा बजट 6.6% बढ़ाया
जिनपिंग ने डिफेंस में साइंटिफिक इनोवेशन पर जोर दिया। रक्षा खर्च पर उन्होंने कहा कि एक-एक पाई का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा नतीजे मिलें। इससे पहले 22 मई को चीन ने अपना रक्षा बजट 6.6% बढ़ाकर 179 अरब डॉलर कर दिया। ये भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना है।

डिफेंस बजट बढ़ाने पर चीन के रक्षा प्रवक्ता वु क्यान ने कहा था कि इस समय हम नए खतरों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ताइवान का खास तौर से जिक्र किया, जिसने चीन का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है।

चीन ने लद्दाख में सैनिक बढ़ाए हैं
चीन ने पिछले कुछ दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैनिकों की संख्या बढ़ाई है। चीन की फौज ने भारतीय इलाकों में घुसपैठ कर अस्थाई ठिकाने भी बनाए हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस महीने तीन बार सैनिकों की झड़प भी हो चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

लद्दाख में भारत चीन जितने सैनिक तैनात रखेगा: रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों बैठकों में मोदी और राजनाथ को चीन की हरकतों पर भारतीय सेना के जवाब की जानकारी दी गई। मीटिंग में दो अहम फैसले लिए गए। पहला- इस क्षेत्र में सड़क निर्माण जारी रहेगा। दूसरा- भारतीय सैनिकों की तैनाती उतनी ही रहेगी जितनी चीन की है।

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अमेरिकी विशेषज्ञ मास्क की जगह फेस शील्ड काे तरजीह दे रहे, इसे पहनना और दोबारा उपयोग करना आसान, यह संक्रमण से भी बचाती है


  • मास्क से खुजली हाेती है, लाेग बात करते हुए इसे उतार लेते हैं, इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ने की आशंका होती है
  • साेशल डिस्टेंसिंग और हाथ धाेने की आदत के साथ फेस शील्ड का उपयाेग भी संक्रमण का फैलाव कम करने में मदद कर सकता है

कन्वुल शेख

May 26, 2020, 06:01 AM IST

वॉशिंगटन. दुनियाभर में लाेगाें ने काेराेना संक्रमण से बचने के लिए मास्क काे अपना लिया है। अधिकतर सरकाराें ने भी इसे अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, कुछ अमेरिकी डाॅक्टर फेस शील्ड काे अपनाने की सलाह दे रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के इंफेक्शियस डिसीज फिजिशियन डाॅ. इल पेरेंसेविच कहते हैं, ‘टेस्टिंग और काॅन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने, साेशल डिस्टेंसिंग और हाथ धाेने की आदत के साथ फेस शील्ड का उपयाेग भी संक्रमण का फैलाव कम करने में मदद कर सकता है।’

यह महज विचार नहीं है। सिंगापुर में प्रीस्कूल छात्राें और शिक्षकाें काे अगले महीने स्कूल खुलने पर फेस शील्ड दिए जाएंगे। फिलाडेल्फिया में स्वास्थ्य विशेषज्ञाें ने अनुशंसा की कि स्कूल खुलें ताे शिक्षक फेस शील्ड पहनें।

काेराेनावायरस के ड्राॅपलेट हवा में तैरते रहते हैं- डॉ. शेरी
बाेस्टन के वुमंस हाॅस्पिटल में डर्मेटाेलाॅजिस्ट डाॅ. शेरी यू कहते हैं, ‘काेराेनावायरस के ड्राॅपलेट हवा में तैरते रहते हैं, इसलिए आंखों और पूरे चेहरे काे सुरक्षित करना बहुत जरूरी है। शील्ड काे स्टरलाइज और साफ किया जा सकता है। ये टूटने या दरार पड़ने तक इस्तेमाल की जा सकती हैं। एल्काेहाॅल वाले तरल से साफ करने या साबुन या गर्म पानी से धाेकर भी इन्हें संक्रमण मुक्त किया जा सकता है।’

फेस शील्ड आंखाें समेेत पूरे चेहरे की सुरक्षा करती है- डाॅ. पेरेंसेविच
डाॅ. पेरेंसेविच मानते हैं कि फेस शील्ड आंखाें समेेत पूरे चेहरे की सुरक्षा करती है। चेहरे काे बार-बार छूने से बचाती है। चश्मे या टाेपी के साथ भी इसे पहनना आसान है। ये सिर पर कुछ हिस्से काे ही घेरती हैं, जबकि मास्क से आधे से अधिक चेहरा ढंक जाता है। मास्क के कपड़े या मटेरियल से बार-बार खुजली हाेती है। कई लाेग मास्क गलत तरीके से पहनते हैं। यह नाक से लटका रहता है या सिर्फ मुंह ही ढंकता है।

लाेग बार-बार मास्क ठीक करते रहते हैं। बात करते वक्त वे मास्क उतार लेते हैं, जिससे जाेखिम बढ़ जाता है। दूसरी तरफ कपड़े का मास्क जहां संक्रमण फैलाने से राेकता है, वहीं यह पहनने वाले काे संक्रमण से नहीं बचाता है। डाॅ. पेरेंसेविच कहते हैं, लिप-रीडिंग पर निर्भर रहने वाले लाेगाें के लिए फेस शील्ड बेहतर है। फेस शील्ड से लिप मूवमेंट आसानी से दिख जाते हैं।

एक कफ सिम्यूलेशन शाेध के मुताबिक, यदि आपने फेस शील्ड पहनी है और काेई व्यक्ति 18 इंच की दूरी पर भी खांसता है ताे वायरस से प्रभावित हाेने का खतरा 96% तक कम हाेता है।

अधिक रिसर्च से पता चलेगा कि फेस शील्ड बेहतर होती हैं
कुछ स्थितियाें में फेस शील्ड एन95 मास्क की तरह प्रभावी नहीं है। डाॅ. विलियम लिंडस्ले कहते हैं, ‘यदि आप किसी कुर्सी पर बैठे हैं और सामने वाला व्यक्ति खड़ा है या आप खड़े हैं और दूसरा व्यक्ति आपके पीछे खड़ा है, ताे ड्राॅपलेट फेस शील्ड के इर्दगिर्द से घुस सकते हैं।’ डाॅ.पेरेंसेविच कहते हैं कि अधिक रिसर्च से यह मालूम पड़ सकेगा कि फेस शील्ड मास्क से बेहतर हाेती हैं, ये पूरे चेहरे काे ही सुरक्षित नहीं करतीं, बल्कि इन्हें गलत तरीके से पहनना बिल्कुल असंभव है।

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चीन ने कहा- अमेरिका दोनों देशों को नए शीत युद्ध की तरफ धकेल रहा है, हम कोरोनावायरस के सोर्स की जांच के लिए तैयार


  • चीन के विदेश मंत्री वॉन्ग यी ने कहा- बिना देरी किए हॉन्गकॉन्ग में नया सुरक्षा कानून लागू करेंगे
  • यी ने कहा- अमेरिका विकास के रास्ते पर बढ़ते चीन को नहीं रोक पाएगा

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 10:30 PM IST

बीजिंग. चीन के विदेश मंत्री वॉन्ग यी ने रविवार को कहा है कि चीन के दरवाजे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने के लिए खुले हैं। हम कोरोनावायरस के सोर्स की जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन इसमें राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए। अमेरिकी नेता वायरस की उत्पत्ति को लेकर झूठ बोल रहे हैं। वे चीन को कलंकित करना चाहते हैं। साथ ही कहा कि अमेरिका चीन के साथ संबंधों को नए शीत युद्ध की ओर धकेल रहा है।

यी ने कोरोनावायरस से उपजे तनाव और हॉन्गकॉन्ग की स्थिति पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “अमेरिका की कुछ राजनीतिक ताकतों ने चीन और अमेरिका के संबंधों को गिरफ्त में ले रखा है। चीन की अमेरिका को बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अमेरिका भी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते चीन को नहीं रोक सकता।” 

झूठ का सहारा ले रहा है अमेरिका
वॉन्ग ने अमेरिका पर पलटवार किया। कहा, “अमेरिका में राजनीतिक वायरस फैल रहा है। यह चीन पर हमला करने और आरोप लगाने के हर मौके का इस्तेमाल करता है। वहां के कुछ नेताओं ने बुनियादी तथ्यों की पूरी तरह से नकारा। वो झूठ का इस्तेमाल कर चीन को टारगेट कर रहे हैं, साजिशें रची जा रही हैं।” 

हॉन्गकॉन्ग में लागू करेंगे नया सुरक्षा कानून
यी ने हॉन्गकॉन्ग का भी जिक्र किया। कहा, “हम बिना देरी किए हॉन्गकॉन्ग में नया सुरक्षा कानून लागू करेंगे। पिछले साल हॉन्गकॉन्ग में चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालने की कोशिश की गई। इसके बाद यह कानून लाना जरूरी था।”

बता दें कि चीन ने हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र की आवाज दबाने के लिए हाल ही में एक कानून पेश किया है। इस कानून के जरिए चीन अब हॉन्गकॉन्ग को भी अपने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के दायरे में लाने की कोशिश कर रहा है। हॉन्गकॉन्ग में चीन के इस कदम का जबरदस्त विरोध हो रहा है। अमेरिका समेत कई देशों ने चीन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है।

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चीन ने पिछले हफ्ते एक भारतीय जवान को बंदी बनाया, बाद में रिहा किया: रिपोर्ट


  • भारत और चीन के बीच लद्दाख में कई दिनों से तनाव चल रहा है
  • हाल के दिनों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कई झड़पें भी हुईं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 11:07 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच लद्दाख क्षेत्र में तनाव जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने पिछले हफ्ते भारत के एक जवान को बंदी बना लिया था। बाद में उसे रिहा कर दिया गया। सरकार की तरफ से ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई है।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच इस महीने तीन बार झड़प हो चुकी है। इन घटनाओं पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बयान जारी किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय सैनिक अपनी सीमा में ही गतिविधियों को अंजाम देते हैं। भारतीय सेना की लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पार एक्टिविटीज की बातें सही नहीं हैं।

वास्तविकता यह है कि यह चीन की हरकतें हैं, जिनकी वजह से हमारी रेगुलर पेट्रोलिंग में रुकावट आती है। इसी महीने 5 और 9 मई को भारत और चीन के सैनकों के बीच पूर्वी लद्दाख में झड़प की घटनाएं सामने आईं थीं। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भी दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे।

विवाद सुलझाने के लिए दोनों देशों के कमांडरों की मीटिंग
भारत और चीन में हाल ही में लद्दाख के गालवन नदी क्षेत्र में विवाद बढ़ गया था। अब इसको सुलझाने के लिए दोनों देशों के फील्ड कमांडरों ने बैठक की है। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुई। इसमें भारत की 81 ब्रिगेड के अधिकारी और उनके चीनी समकक्ष शामिल हुए। निर्माण कार्यों को लेकर गालवन नदी क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच पिछले दो सप्ताह से तनाव चल रहा है।

इस महीने झड़पें कहां, कब और कैसे हुई?1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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चीन के साथ तनाव के बीच सेना प्रमुख नरवणे ने लद्दाख का दौरा किया, 3 हफ्ते से क्षेत्र में टकराव की स्थिति है


  • लद्दाख में चीन के साथ गालवन नाला, डेमचौक और पैंगोंग त्सो झील में टकराव है
  • 5 मई को दोनों देशों के 200 सैनिक आमने सामने आ गए, 12 जख्मी भी हुए

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:10 PM IST

नई दिल्ली. भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चल रहे विवाद के बीच सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने शनिवार को लद्दाख का दौरा किया। यहां उन्होंने टॉप फील्ड कमांडरों के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया।

सूत्रों के मुताबिक, लद्दाख में चीन के साथ तीन जगह- गालवन नाला, डेमचौक और दौलत बेग और पैंगोंग त्सो झील में तनाव है। गालवन नाला में दोनों देशों के 300-300 सैनिक आमने-सामने हैं। इस इलाके पर चीन अपना दावा कर रहा है। भारतीय सेना के फील्ड कमांडर चीन के कमांडरों से बात कर रहे हैं और मामले का हल निकालने की कोशिश की जा रही है।

सीमा पर दोनों देशों ने सैनिक बढ़ाए  
पिछले दिनों लद्दाख की पैंगोंग त्सो झील और गालवन घाटी में दोनों देशों ने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी थी। यहां पिछले दो हफ्ते से टकराव बना हुआ है। इसे लेकर ब्रिगेड कमांडरों की फ्लैग मीटिंग भी हुई, लेकिन बेनतीजा रही। चीन की इस हरकत पर भारत के सेना के टॉप अफसर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उधर, अमेरिका ने भी कहा था है कि चीनी सैनिकों का आक्रामक बर्ताव खतरे की तरफ इशारा करता है।

भारत के सड़क बनाने से टकराव शुरू हुआ 

  • दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैंगोंग त्सो झील के पास भारत के सड़क निर्माण से शुरू हुई। दरअसल, लद्दाख के पूर्वी इलाके में आवागमन के लिए सड़क नेटवर्क को मजबूत कर रहा है। इस पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने आपत्ति जताई। इसके बाद चीन ने इस इलाके में अपने जवानों की संख्या बढ़ाना शुरू कर दिया। भारत ने भी इस इलाके में तैनाती बढ़ा दी। 
  • भारत ने साफ किया है कि वह अपने इलाके में सड़क निर्माण कर रहा है। और यह ठीक वैसा ही जैसा चीन ने अपने इलाके में किया है। इसके बाद चीनी सैनिक इस इलाके में बने हुए हैं। चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो झील में अपनी स्पीड बोट्स की मौजूदगी भी बढ़ा दी है। डेमचौक और दौलत बेग ओल्डी जैसे इलाकों में भी दोनों देशों के सैनिकों की संख्या में इजाफा हुआ है। 

हाल में दोनों सैनिकों के बीच कहां-कहां झड़प हुईं 

  • 5 मई, पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील:  शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
  • 9 मई, नाकू ला सेक्टर:  यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर घूंसे चलाए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 
  • 9 मई को ही लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की सेना के हेलिकॉप्टर दिखने के बाद भारतीय वायुसेना सतर्क हो गई। भारतीय वायुसेना ने भी सुखोई समेत दूसरे फाइटर जेट (लड़ाकू विमानों) से पेट्रोलिंग शुरू कर दी। एलएसी के पास चीन के हेलिकॉप्टर उसी दौरान देखे गए, जब उत्तरी सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों में झड़प हुई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई के सूत्रों के मुताबिक, चीन के हेलिकॉप्टरों ने एलएसी को क्रॉस नहीं किया, लेकिन पहले कई बार ऐसा हो चुका है।
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दुनिया में 10 लाख केस होने में 94 दिन लगे, सिर्फ 48 दिन में मरीजों की संख्या 40 लाख के पार पहुंची


  • महामारी की शुरुआत के 94 दिन बाद भी सबसे ज्यादा 2 लाख 50 हजार 708 केस अमेरिका में ही थे
  • 50 लाख संक्रमितों में से 19 लाख 71 हजार से ज्यादा लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 05:02 PM IST

वॉशिंगटन. कोरोनावायरस का पहला मामला 31 दिसंबर को चीन के वुहान शहर में मिला था। इसके बाद देखते ही देखते पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई। बुधवार को दुनियाभर में मरीजों की संख्या 50 लाख पार कर गई। 31 दिसंबर से 2 अप्रैल यानी  94 दिन में 10 लाख केस सामने आए थे। वहीं, केवल 46 दिन में संक्रमितों की संख्या 40 लाख के पार पहुंच गई।

संक्रमण के 50 लाख केस में 19 लाख 71 हजार 193 ठीक हो चुके हैं। यानी 86% मरीजों का अब अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। वहीं, तीन लाख 25 हजार 172 की मौत हो चुकी है, जो कुल आंकड़ों का 14% है। वहीं, एक्टिव केस 27 लाख 5 हजार 882 हैं। मतलब ये वो केस हैं, जो अभी अस्पताल में भर्ती हैं या जिनमें कोरोना की पुष्टि हो चुकी है।

दुनिया के 10 सबसे प्रभावित देशों का हाल

अमेरिका: महामारी के शुरू होने से 94 दिन में भी सबसे ज्यादा केस अमेरिका में ही थे यानी 2 अप्रैल तक देश में दो लाख 50 हजार 708 केस हो चुके थे। जबकि 48 दिनों में यहां 13 लाख 19 हजार 878 केस मिले। यहां बुधवार तक मरीजों की संख्या 15 लाख 70 हजार 583 पहुंच गई है। यहां अब तक 3 लाख 61 हजार 180 ठीक हो चुके हैं।

रूस: यहां संक्रमण का आंकड़ा 2 लाख 99 हजार 941 हो गया है। यहां मई में तेजी से संक्रमण फैला है। इस महीने अब तक यहां 1 लाख 94 हजार 274 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, दो अप्रैल तक यहां केवल 3548 केस थे, जबकि 48 दिन में 3 लाख 5 हजार 157 केस सामने आए।

स्पेन: यूरोप का तीसरा सबसे संक्रमित देश है। यहां भी मार्च में काफी तेजी से मामले बढ़े थे। यहां 2 अप्रैल तक 1 लाख 12 हजार 65 केस थे। जबकि 48 दिन में 1 लाख 66 हजार 738 मामले सामने आए। अभी यहां दो लाख 78 हजार 803 मामले हैं।

ब्राजील: यहां संक्रमण के मामले मई में काफी तेजी से बढ़ने शुरू हुए। इस महीने यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 79 हजार 776 केस मिले हैं। ब्राजील में दो अप्रैल तक केवल 8,044 केस थे। वहीं, अगले 48 दिनों में यहां 2 लाख 63 हजार 841 मामले सामने आए। यहां अब तक 1 लाख 6 हजार 794 मरीज ठीक हुए।

ब्रिटेन: यहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख 48 हजार 818 है। यहां 2 अप्रैल तक 33 हजार 718 केस मिले थे। वहीं, 48 दिन में 2 लाख 15 हजार 100 केस मिले हैं। अप्रैल में यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 41 हजार 779 मामले सामने आए हैं।

इटली: यह यूरोप के सबसे प्रभावित देशों में से एक है। यहां 2 अप्रैल तक अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा 1 लाख 15 हजार 242 मामले थे। जबकि 48 दिन में 1 लाख 11 हजार 457 मरीज मिले। अब यहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख 26 हजार 699 है। इटली में मार्च में सबसे ज्यादा 1 लाख 4 हजार 91 केस सामने आए।

फ्रांस: यहां फिलहाल 1 लाख 80 हजार 809 लोग संक्रमित हैं। यहां 2 अप्रैल तक 59 हजार 105 केस सामने आए थे। वहीं, 48 दिन में 1 लाख 21 हजार 704 केस मिले थे। यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 10 हजार 189 मामले अप्रैल में सामने आए थे।

जर्मनी: यहां अब तक 1 लाख 77 हजार 842 मामले सामने आए हैं। देश में दो अप्रैल तक 84 हजार 794 केस मिले थे। जबकि 48 दिन में 93 हजार 78 मरीज मिले थे। जर्मनी में सबसे ज्यादा 85 हजार 28 केस अप्रैल में सामने आए।

तुर्की: मध्य-पूर्व के देशों में तुर्की में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। यहां दो अप्रैल तक 18 हजार 135 केस थे, जो अगले 48 दिनों में 1 लाख 33 हजार 480 मामले सामने आए। फिलहाल, यहां 1 लाख 51 हजार 615 मरीज मिल चुके हैं। यहां अप्रैल में सबसे ज्यादा 1 लाख 4 हजार 525 मामले सामने आए थे।

ईरान: यहां अब तक 1 लाख 24 हजार 603 मामले सामने आए हैं। यहां 2 अप्रैल तक 50 हजार 468 केस मिले थे। वहीं, अगले 48 दिन में 74 हजार 135 मामले सामने आए। यहां अप्रैल में सबसे ज्यादा 49 हजार 47 केस मिले।

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जानवरों के मुकाबले इंसान के शरीर में आसानी से घुस जाता है कोरोनावायरस, ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का दावा


  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना का संक्रमण जिस प्रजाति में अधिक होगा, अगली बार संक्रमण उसमें तेजी से होगा
  • पैंगोलिन और चमगादड़ के मुकाबले कोरोना इंसानी कोशिका में तेजी से प्रवेश करने में सफल होता है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 06:43 AM IST

सिडनी. नया कोरोनावायरस जानवरों के मुकाबले इंसानों को तेजी से जकड़ता है, यह दावा ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में किया है। फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, संक्रमण को समझ के लिए अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि कोरोनावायरस का ‘स्पाइक प्रोटीन’ इंसानों में पाए जाने वाले रिसेप्टर ACE-2 से मिलकर अधिक तेजी से कोशिका को संक्रमित करता है। पैंगोलिन और चमगादड़ के मुकाबले कोरोना इंसानी कोशिका में तेजी से प्रवेश करने में सफल होता है।

एक ही प्रजाति को बार-बार संक्रमित करना आसान
शोधकर्ता और वायरस विशेषज्ञ निकोलाई पैत्रोव्स्की के मुताबिक, कोरोनावायरस उस प्रजाति को आसानी से संक्रमित करता है जिससे वह सबसे ज्यादा संक्रमित कर चुका होता है। वहीं किसी नई प्रजाति को वह आसानी से संक्रमित नहीं कर पाता। यह चौंकाने वाली बात है कि यह इंसानी कोशिका को पहले भी संक्रमित कर चुका है। 

‘ऐसा लगता है कि यह इंसानों को संक्रमित करने के लिए परफेक्ट’
वायरस विशेषज्ञ निकोलाई कहते हैं कि शायद वायरस पहले कभी इंसानी कोशिका को संक्रमित कर चुका है, हो सकता है ऐसा लैब में प्रयोग के दौरान हुआ हो। इस वायरस की संरचना और व्यवहार को देखकर लगता है कि जैसे यह इंसानों को संक्रमित करने के लिए परफेक्ट है।

अब तक वाहक का पता नहीं चल पाया
निकोलाई के मुताबिक, कोरोना के मामले में सबसे अहम बात है कि अब तक इसका मुख्य वाहक नहीं पहचाना जा सका है। जैसे मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (ऊंट) के जरिए फैला था और सार्स सिवेट कैट के जरिए। वहीं इबोला वायरस का संक्रमण बंदरों ने फैलाया था, लेकिन अब तक कोरोना का वाहक नहीं खोजा जा सका है। इसलिए कई बातें साफ नहीं हो पा रही हैं। 

वायरस की उत्पत्ति पर अभी और रिसर्च की जरूरत
निकोलाई कहते हैं कोरोनावायरस की उत्पत्ति पर अभी और रिसर्च करना बाकी है। चीन के वुहान में पैंगोलिन और चमगादड़ को करीबी सोर्स माना जा रहा है लेकिन ऐसा भी सम्भव है कि लैब में इन दोनों के क्रॉस कंटामिनेशन से नई तरह का वायरस पैदा हो सकता है।

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अमेरिका में कोरोना के डर के बीच साइकिलें खरीद रहे हैं लोग; बिक्री एक महीने में 600 फीसदी बढ़ी


  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट में जाने से बचने के लिए साइकिल और बाइक खरीद रहे हैं अमेरिकी
  • फिटनेस बाइक की बिक्री 66%, लेजर बाइक्स की बिक्री 121% और इलेक्ट्रिक बाइक्स की बिक्री 85% बढ़ी

क्रिस्टिना गोल्डबॉम

May 20, 2020, 06:00 AM IST

वॉशिंगटन. कोरोनोवायरस की वजह से पूरी दुनिया लगभग दो महीने तक घरों में सिमटी रही। अब जिंदगी दोबारा पटरी पर लौटने की कोशिश कर रही है, तो दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। अमेरिका में सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कम करने के लिए लोग अब साइकिल की तरफ लौट रहे हैं। उनकी चिंता खुद को फिट रखने की तो है ही, भीड़भाड़ से बचने और खुद को संक्रमण से बचाने की भी है।

हालात ये हो गए हैं कि देश में साइकिलों की कमी हो गई है। दो महीने पहले जिन स्टोर्स में साइकिलें धूल खा रही थीं, वे अब खाली पड़ी हैं। ग्राहकों को अब लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

फिनिक्स, सिएटल में बिक्री तीन गुना बढ़ी

ब्रुकलिन में तो साइकिलों की बिक्री 600% तक बढ़ गई है। ज्यादातर दुकानें पहले से तीन गुना साइकिलें-बाइक बेच चुकी हैं और ग्राहकों की लंबी वेटिंग लिस्ट भी है। फिनिक्स, सिएटल में बिक्री तीन गुना बढ़ी है। वॉशिंगटन डीसी के एक रिटेलर बताते हैं- ‘अप्रैल तक तो स्टोर की सभी साइकिलें बिक चुकी थीं।’

लेजर बाइक्स की बिक्री सबसे ज्यादा 121% बढ़ी

मार्केट रिसर्च फर्म एनपीडी ग्रुप के मुताबिक मार्च में साइकिल की बिक्री तो बढ़ी ही है, रिपेयरिंग और इक्विपमेंट की बिक्री भी दोगुना हो गई है। फिटनेस बाइक की बिक्री 66%, लेजर बाइक्स की बिक्री 121%, इलेक्ट्रिक बाइक्स की बिक्री 85% और बच्चों की साइकिल की बिक्री 59% तक बढ़ गई है।

कोरोना की वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। ऐसे में डिमांड बढ़ने से अमेरिका साइकिलों की गंभीर कमी से जूझ रहा है।

ब्रिटेन, फ्रांस में कारों के प्रभुत्व को साइकिल से चुनौती

ब्रिटेन और फ्रांस में भी साइकिलों की बिक्री बढ़ी है। जानकारों के मुताबिक कई दशकों बाद पहली बार कारों के प्रभुत्व को साइकिल से चुनौती मिल रही है। कई जगह कारों के लिए रास्ते बंद, सिर्फ पैदल या साइकिल की मंजूरी कई राज्यों ने भीड़ कम करने के लिए अहम फैसले लिए हैं।

न्यूयॉर्क ने 322 किमी सड़कें सिर्फ पैदल और साइकिल यात्रियों के लिए रखी हैं। ओकलैंड में 10% रास्तों पर सिर्फ साइकिल वाले जा सकेंगे। सिएटल में 33 किमी का रास्ता पैदल या साइकिल वालों के लिए रिजर्व है। न्यूयॉर्क और सिएटल इन फैसलों को हमेशा के लिए लागू कर सकते हैं।

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लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा, भारतीय सेना ने भी यहां तैनाती बढ़ाई


  • पिछले दिनों लद्दाख की गालवन घाटी में चीन ने अपने हिस्से में कुछ टेंट लगाए
  • भारतीय सेना की हालात पर पैनी नजर, सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 11:17 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है। दोनों ही सेनाओं ने इन दोनों इलाकों में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, हाल के दिनों में यहां दो बार भारत और चीन के सैनिकों में हिंसक झड़पें हुई हैं। पिछले दिनों ही चीनी आर्मी के हेलिकॉप्टरों ने भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की थी। जवाब में भारत ने यहां सुखोई जैसे फाइटर जेट तैनात कर दिए। 

60 साल से तनाव का केंद्र 
गालवन नदी या कहें घाटी क्षेत्र दोनों सेनाओं के बीच तनाव का केंद्र रहा है। 1962 में यहां शुरू हुई झड़प जंग में तब्दील हो गई थी। गालवन नदीं और पेन्गोंग लेक के करीब दोनों सेनाओं ने टुकड़ियां बढ़ा दी हैं। चीन ने गालवन घाटी के अपनी तरफ वाले हिस्से में कुछ टेंट लगाए हैं। भारतीय सेना उसकी हरकतों पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारतीय सेना ने भी यहां गश्त बढ़ा दी है। 

5 मई को हुई थी झड़प
5 मई की सुबह भारत और चीन के सैनिकों के बीच पेन्गोंग लेक एरिया में हिंसक झड़प हुई। इस दौरान रॉड, डंडे और पत्थरों का इस्तेमाल दोनों तरफ से हुआ। इसके बाद 9 मई को सिक्किम के नाकु ला दर्रे में भी 150 भारतीय और चीनी सैनिक भिड़ गए। दोनों के करीब 10 सैनिक घायल हुए। 

दोनों सरकारें चुप
खास बात ये है कि इन हालिया झड़पों के बावजूद आधिकारिक तौर पर दोनों देशों की सेनाओं या विदेश मंत्रालय ने कुछ नहीं कहा। पिछले हफ्ते भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक सवाल पर सिर्फ इतना कहा था कि भारत सीमा पर शांति बनाए रखना चाहता है। चीनी मीडिया ने तनाव के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि ये झड़पें होती आई हैं लेकिन, दूसरा डोकलाम नहीं होगा। 

चीन क्यों परेशान?
भारत ने हाल ही में मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख और धारचूला के बीच 90 किलोमीटर लंबा शानदार रोड बनाया। इसको बनाते समय सैन्य जरूरतों को प्राथमिकता दी गई। नेपाल ने संभवत: चीन के इशारे पर ऐतराज भी जताया, लेकिन बाद में वो खामोश हो गया। आर्मी चीफ जनरल नरवणे ने चीन का नाम लिए बगैर यही संकेत दिया था। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि आर्मी चीफ नेपाल जाएंगे या नहीं। आमतौर पर भारतीय सेना प्रमुख चार्ज लेने के बाद नेपाल का दौरा करते आए हैं। 

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अब कोविड 19 से संक्रमित बच्चों में भी नजर आने लगे हैं गंभीर लक्षण, चीन के डॉक्टर ने कहा- पैरेंट्स डर के कारण बच्चों को अस्पताल नहीं ला रहे


  • अमेरिका में पिछले हफ्ते मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेट्री डिसीज के चलते तीन बच्चों की मौत हुई है
  • इससे पहले कोविड 19 से जूझ रहे बच्चों में व्यसकों की तुलना में मामलू लक्षण नजर आ रहे थे

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 07:02 PM IST

पैरी क्लास. कोरोनावायरस का असर बड़ों की तुलना में बच्चों पर कम पड़ा है। लेकिन एक नई शोध हमारी सोच को एक बार फिर बदल सकती है। अब तक इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों को एक समूह के तौर पर अलग रखा गया था, लेकिन हाल ही में मिले सबूतों में पता चला है कि, कुछ बच्चे गंभीर रूप से बीमार हैं। हालांकि हम यह जानने की शुरुआत कर रहे हैं कि, कौन सबसे ज्यादा खतरे में है और पैरेंट्स को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

बीते हफ्ते आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटी समेत कई दूसरे इलाकों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेट्री डिसीज के चलते भर्ती कराया गया था। इस बीमारी के कारण तीन की मौत भी हुई थी। इसके साथ ही एक नई रिसर्च में बच्चों में वायरस के व्यवहार को समझाया गया था, जो कि बड़ों से अलग था।

नॉनरेस्पिरेट्री संप्टम्स थे, लेकिन बाद में कोविड 19 निकला
मंगलवार को फ्रंटियर्स इन पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित हुई क्लीनिकल रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में पांच बच्चों को नॉनरेस्पिरेट्री लक्षणों के बाद भर्ती कराया गया था। बाद में फेंफड़ों में कुछ परेशानी के बाद यह कोविड निकला। वुहान के टोंगजी हॉस्पिटल में चीफ पीडियाट्रीशियन डॉक्टर वेंबिन ली ने बताया कि, हमारी रिपोर्ट में पांच में से चार मरीजों को बुखार और खांसी थी। पहली बार में पांच में से चार मामलों में पाचन से जुड़े लक्षण सामने आए। 

पैरेंट्स के डर भी है एक कारण
डॉक्टर ली ने लिखा कि, कोविड 19 के फैलने के बाद पीडियाट्रिक एमरजेंसी डिपार्टमेंट में आने वालों में कमी हुई है। इसका कारण है माता-पिता का डर। पैरेंट्स अपने बीमार बच्चों को अस्पताल लाने में डर रहे हैं, जिसके कारण परेशानियां ज्यादा बढ़ रही हैं। न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मेडिसिन और हसेनफेल्ड चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा संक्रामक रोगों के निदेशक डॉक्टर एडम रैटनर के मुताबिक, बच्चों को कोविड 19 नहीं होता या उन्हें केवल मामूली लक्षण होते हैं, यह आइडिया सरलीकरण है। यह सच है कि यहां बच्चों में कोरोना के मामले कम पाए गए हैं और मृत्यु दर भी बड़ों की तुलना में कम है, लेकिन हमने कई गंभीर रूप से बीमार बच्चे भी देखे हैं।

नवजात बच्चों में बीमारी के मामले
कुछ मामले सामने आए जहां नवजात बच्चे बीमार थे। अप्रैल के अंत में जामा ने एक मामला रिपोर्ट किया जहां, एक महिला के प्लेसेंटा से वायरस को अलग किया गया था। यह महिला दूसरी तिमाही में गर्भपात का सामना कर रही थी। स्वित्जरलैंड के लुसाने यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर डेविड बॉड बताते हैं कि, प्लेसेंटा में वायरस का ब्लडस्ट्रीम के जरिए आता है। डॉक्टर के मुताबिक, सार्स और मर्स के वक्त संक्रमित महिलाओं में कम वजन वाले बच्चों को जन्म देने की संभावना अधिक थी। 

डॉक्टर रैटनर ने बताया कि, “उन्होंने कई संक्रमित बच्चों की देखभाल की है। इनमें से ज्यादातर मामूली रूप से बीमार थे। लेकिन इन्हें गहन देखभाल वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत थी”। कुछ बच्चें गंभीर रूप से बीमार होते हैं, लेकिन प्रीस्कूल और स्कूल जाने वाले बच्चों में कोविड 19 मामूली स्तर पर रहता है। इम्युनोडिफीशिएंसी और कीमोथैरेपी वाले बच्चे गंभीर बीमारी के जोखिम में होते हैं। इनमें से कई लक्षण कावासाकी बीमारी की तरह होते हैं। 

बॉस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में कावासाकी प्रोग्राम के निदेशक डॉक्टर जेन न्यूबर्गर ने कहा कि, “हम एक सिंड्रोम की लहर को देख रहे हैं, जिसमें शॉक और गंभीर सूजन शामिल है”। शॉक का मतलब जब शरीर के किसी अंग को पर्याप्त खून नहीं मिल रहा। इनमें से कुछ बच्चों का दिल कमजोर था। कावासाकी बीमारी का पता लगाने वाली कोई लैब नहीं है और इसका कारण भी ज्ञात नहीं है। 

डॉक्टर मोसे आर्दिती कावासाकी बीमारी पर 30 से काम कर रहे हैं। डॉक्टर मोशे बताते हैं कि, खासकर लंदन और न्यूयॉर्क में मिले मामले कोविड 19 के संपर्क में आए बच्चों में कावासाकी बीमारी को रिप्रिजेंट करते हैं। यह नहीं कहा जा सकता कि, दोनों के बीच लिंक क्या है। कावासाकी लगने वाली बीमारी से जूझ रहे बच्चों का इलाज कर रहे डॉक्टर फिलिप काह्न के अनुसार, कावासाकी बीमारी से पीड़ित ज्यादातर बच्चे बेहतर हैं, बगैर किसी लंबे समय की परेशानी के। डॉक्टर काह्न बताते हैं कि, यह बचपन में एकबार होने वाली बीमारी है। 

अगर आपको लगता है कि बच्चा ज्यादा बीमार है तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
डॉक्टर न्यूबर्गर ने कहा कि, बड़ों की तुलना में बच्चों के गंभीर रूप से प्रभावित होने की संभावना कम है। लेकिन अगर माता-पिता को लगता है कि, बच्चा ज्यादा बीमार है तो तुरंत डॉक्टर से बात करें और अस्पताल पहुंचें। डॉक्टर रैटनर बताते हैं कि, यह बीमारी अब भी हमारे लिए नई है। हम अब भी कई चीजों को पहली बार देख रहे हैं।

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चीन की लैब का दावा- नई दवा से महामारी रोकी जा सकती है, वैक्सीन की भी जरूरत नहीं होगी


  • शोधकर्ताओं ने कहा- यह दवा कुछ समय के लिए वायरस से लड़ने के लिए इम्यून बढ़ाती है
  • वैज्ञानिकों ने कहा- ट्रायल दूसरे देश में करेंगे, क्योंकि चीन में संक्रमण के मामले कम हुए

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 01:57 PM IST

बीजिंग. चीन की एक लैब का दावा है कि वह एक ऐसी दवा बना रही है, जो कोरोना महामारी को काबू कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस दवा से न सिर्फ संक्रमित जल्दी ठीक हो रहे हैं, बल्कि यह कुछ समय के लिए वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरोधी क्षमता (इम्यून) भी बढ़ा रही है।

वैज्ञानिक इस दवा की टेस्टिंग चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में कर रहे हैं। बाद में इंसान पर इसका परीक्षण ऑस्ट्रेलिया या किसी अन्य देश में किया जाएगा, क्योंकि चीन में संक्रमण के मामले कम हो गए हैं। कोरोनावायरस की शुरुआत चीन से ही हुई है। इसके बाद धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया में फैल गया। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी वैक्सीन बनाने की होड़ लगी हुई है।

जानवरों पर परीक्षण सफल

यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सन्नी झी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि जानवरों पर इसका परीक्षण सफल रहा है। जब हमने एक संक्रमित चूहे के अंदर न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी इंजेक्ट किया तो 5 दिन के बाद वायरल लोड 2500 तक कम हो गया। इसका मतलब है कि इस संभावित दवा असर हुआ है। यह दवा न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का इस्तेमाल करती है, जिसे इंसान का प्रतिरोधी तंत्र तैयार करता है, ताकि कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित होने से बचाया जा सके। झी की टीम ने 60 ठीक हुए मरीजों से एंटीबॉडी को निकाला।

एंटीबॉडी के इस्तेमाल से बीमारी का इलाज संभव
टीम की रिसर्च रविवार को एक जर्नल में प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि एटीबॉडी के इस्तेमाल से बीमारी का इलाज संभव है। साथ ही इससे रिकवरी टाइम भी कम हो जाता है। झी ने कहा कि एंटीबॉडी के लिए उनकी टीम दिन-रात काम कर रही थी। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल ट्रायल की योजना पर काम चल रहा है। 

‘एक टीका बनने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं’
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि ये न्यूट्रिलाइज्ड एंटीबॉडी महामारी के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण दवा बन सकती है। वहीं, पिछले हफ्ते एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा था कि चीन में पहले से ही पांच वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल किया जा रहा है। वहीं, डब्ल्यूएचओ का कहना है कि टीका विकसित करने में 12 से 18 महीने लग सकते हैं।

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ट्रम्प की डब्ल्यूएचओ को चिट्‌ठी, 30 दिन में सुधार न होने पर फंडिंग स्थाई तौर पर फ्रीज करने की चेतावनी दी


  • राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा- हमारे साथ सही बर्ताव नहीं हुआ, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग कम करने की योजना बना रहे
  • ट्रम्प ने कहा- मैं डेढ़ हफ्ते से हर दिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की एक गोली जिंक के साथ ले रहा हूं

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 10:08 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को चिट्ट्‌ठी लिखकर चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा है कि 30 दिन में संगठन में सुधार करें। ऐसा न करने पर आपको दी जा रही फंडिंग स्थाई रूप से फ्रीज कर दी जाएगी और अमेरिका संगठन का सदस्य बने रहने पर भी दोबारा विचार करेगा।

ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में भी डब्ल्यूएचओ की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘वे (डब्ल्यूएचओ) चीन की कठपुतली है। यह कहना बेहतर होगा कि वे चीन केंद्रित हैं। अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सालाना 450 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रु.) देता है। इसे कम करने की योजना बनाई जा रही है क्योंकि हमारे साथ सही बर्ताव नहीं हुआ।’’

हर दिन हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की दवा लेता हूं: ट्रम्प
ट्रम्प ने दावा किया कि वे कोरोना से बचने के लिए हर दिन मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जिंक के साथ लेते हैं। उन्होंने कहा मैं पिछले डेढ़ हफ्ते से हर दिन ऐसा कर रहा हूं। जब उनसे पूछा गया कि वे यह दवा क्यों ले रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘क्योंकि मैं सोचता हूं यह अच्छा है, मैंने इसके बारे में कई अच्छी कहानियां सुनी हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे कि कई लोग खास तौर पर फ्रंटलाइन पर काम करने वाले कर्मचारी यह दवा लेते हैं।’’

‘व्हाइट हाउस के फिजीशियन ने इसके इस्तेमाल की सलाह दी’
ट्रम्प ने कहा, ‘‘व्हाइट हाउस के एक डॉक्टर ने भी कहा कि मैं यह दवा ले सकता हूं। हालांकि, पहल मैंने की थी। मैंने उनसे पूछा था कि आप इस दवा के बारे में क्या सोचते हैं? उन्होंने कहा कि अगर आप चाहें तो ले सकते हैं। अगर इससे कोई असर नहीं हुआ तब भी आप बीमार नहीं पड़ेंगे या आपकी मौत नहीं होगी। मैं हर दिन एक गोली लेता हूं। समय आने पर बंद कर दूंगा।’’

एफडीए ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न लेने की चेतावनी दी थी
अमेरिकी सरकार के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने चेतावनी दी थी कि कोरोना के इलाज या इसे रोकने के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल नहीं किया जाए। एफडीए ने इसके साइड इफेक्टस को ध्यान में रखते हुए यह बात कही थी। इससे दिल से जुड़ी समस्याएं सामने आई थीं। मौजूदा नियमों के मुताबिक इसका इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में किया जा सकता है।

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महामारी में स्कैम से कैसे बचें; वेबसाइट का डोमेन नेम देखें, एड ब्लॉकर इंस्टॉल कर जानकारी चुराने वाले विज्ञापन रोकें


  • विशेषज्ञाें ने कहा- महामारी में इनबाॅक्स, फाेन आदि पर हमले के आसार बढ़ जाते हैं
  • जानें खुद काे स्कैम और हैकिंग से किन तरीकाें से सुरक्षित रहा जा सकता है

ब्रायन एक्स. चेन

May 19, 2020, 06:05 AM IST

न्यूयॉर्क. कोरोनावायरस में बढ़ी अनिश्चितता ऑनलाइन जालसाजी करने वालों के लिए बड़ा माैका लेकर आई है। बेरोजगार सरकार से मदद की आस लगाए हैं। काेई बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर फाेन करता है या ई-मेल भेजता है ताे उसे नजरअंदाज करना मुश्किल हाे जाता है। आइए जानें खुद काे स्कैम और हैकिंग से किन तरीकाें से सुरक्षित रहा जा सकता है: 

फर्जी वेबसाइट्स से महारथी भी धोखा खा जाते हैं

  • यूआरएल चेक करें: फर्जी वेबसाइट सरकारी या बैंक की वेबसाइट की ही तरह नजर आती है। डाेमेन नेम से फर्जीवाड़ा उजागर हाे सकता है। इसके लिए एड्रेस बार पर देखें कि यह .com या .org या gov.in है या नहीं।
  • एड ब्लाॅकर इंस्टाॅल करें : निजी जानकारी जुटाने वाले विज्ञापनाें से बचने के लिए एड ब्लाॅकर इंस्टाॅल करें।  

स्कैम कॉल से ऐसे बचें

  • फाेन रख दें, दाेबारा काॅल करें : काॅलर पर संदेह हाे ताे काॅल काटकर कस्टमर सर्विस पर फाेन करके तस्दीक करें।
  • काॅन्टेक्ट लिस्ट : ठग किसी बैंक के नंबर से स्पूफ काॅल करे ताे आप समझ नहीं पाएंगे। इसलिए काॅन्टेक्ट लिस्ट से ऐसे नंबर हटा दें।

ई-मेल और टेक्स्ट मैसेज

  • चेक भेजने वाले को जांचें: असली और फर्जी ई-मेल एड्रेस में एक-दाे कैरेक्टर का अंतर हाेता है। इसी तरह स्कैम टैक्स्ट के फाेन नंबर 10 से अधिक अंक के हाेते हैं।
  • चेक करें, क्लिक न करें : अंजान लिंक पर क्लिक करने या जवाब देने से बचें। कई लिंक पर माउस का कर्सर ले जाने पर पेज का प्रिव्यू दिख जाता है। संदिग्ध पेज दिखे ताे उसे स्पैम मार्क कर दें या डिलीट कर दें। 

वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं…

  • नेटवर्क सिक्यूरिटीः कंप्यूटर की तरह वाई-फाई राउटर भी सुरक्षित हाेना चाहिए। इसका लेटेस्ट वर्जन हाे। पासवर्ड भी स्ट्राॅन्ग हाे।
  • निजी और ऑफिस के सिस्टम अलग हों: वर्क फ्राॅम हाेम के चलते कर्मचारी निजी कंप्यूटर, ई-मेल एड्रेस या मैसेजिंग एप इस्तेमाल करने लगते हैं। हाे सकता है आपके उपकरण और एप कंपनी के नेटवर्क सिक्युरिटी जैसे सुरक्षित न हाे। इसलिए कंपनी के सिस्टम, इंटरनेट अकाउंट और साॅफ्टवेयर पर ही काम करें।
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अमेरिका में कोरोना की वजह से शहर छोड़ रहे अमीर, 4.20 लाख लोगों ने न्यूयॉर्क छोड़ा, यहां 1% की सालाना कमाई 16 करोड़ रु.


  • 1 मार्च से 1 मई तक न्यूयॉर्क सिटी की 5% से ज्यादा आबादी शहर छोड़कर जा चुकी
  • यहां साढ़े तीन लाख से ज्यादा मरीज और 28 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है

केविल क्विली

May 19, 2020, 06:05 AM IST

न्यूयॉर्क. अमेरिका इस समय कोरोना से दुनिया में सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है। यहां 15 लाख से ज्यादा मामले और 90 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इनमें सबसे ज्यादा असर न्यूयॉर्क पर पड़ा है, जहां साढ़े तीन लाख से ज्यादा मरीज और 28 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इस बीच, एक चौंकाने वाली खबर आई है कि कोरोना की वजह से न्यूयॉर्क सिटी में रहने वाले अमीर शहर छोड़कर जा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1 मार्च से 1 मई के बीच करीब 4.20 लाख लोग शहर छोड़कर जा चुके हैं, जो यहां की कुल आबादी का करीब 5% है। इनमें भी एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का है, जो आर्थिक रूप से संपन्न है और शहर के अमीरों में गिने जाते हैं। खास बात यह है कि सालाना 16 करोड़ रुपए कमाने वाले शहर के 1% अमीर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर किसी आइलैंड या महंगी जगह गए हैं।

‘80% आबादी ने शहर नहीं छोड़ा है’
वहीं, सालाना करीब 67 लाख रुपए कमाने वाली 80% आबादी ने शहर नहीं छोड़ा है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर डॉ. किम फिलिप्स-फेन कहते हैं, ‘हर समुदाय अलग व्यवहार कर रहा है। यहां से जाने वाले ज्यादातर श्वेत हैं। इन जगहों पर महंगा किराया है और गरीबी कम है। यह कहना मजबूत बात है कि सब साथ हैं, लेकिन ऐसा है नहीं।’

विश्लेषण से बता चला है कि सबसे ज्यादा लोग अपर-ईस्ट साइड, वेस्ट विलेज, सोहो और ब्रुकलिन हाइट्स छोड़कर गए हैं। संपन्न माने जाने वाले इन चारों इलाकों में करीब 40% आबादी कम हो गई है। इनमें ऐसे लोग भी हैं, जो डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा किराया चुका रहे थे, ज्यादातर के पास कॉलेज की डिग्री है और करीब 75 लाख रुपए तक कमा रहे थे। इनके अलावा छात्रों ने भी शहर छोड़ा है।

साउथ फ्लोरिडा, कनेक्टिकट जैसी जगहों पर शिफ्ट हुए ज्यादातर लोग

न्यूयॉर्क सिटी में 1% अमीरों की सालाना कमाई 16 करोड़ रुपए हैं। वे महंगे आइलैंड और शहरों में शिफ्ट हुए हैं। दक्षिणी फ्लोरिडा, कनेक्टिकट, पेन्सिल्वेनिया, न्यूजर्सी, मार्था विनयार्ड, केप कॉड, रोड आइलैंड, हैम्पटन, हडसन वैली और जर्सी शोर इनकी पसंदीदा जगहों में शामिल हैं। रिपोर्ट में इन्हें तथाकथित ‘कोरोनावायरस शरणार्थी’ कहा गया है।

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न्यूयॉर्क राज्य के ब्रुकलिन में बड़ी संख्या में पार्क पहुंचे लोग; पेरिस में नदी किनारे लग गई भीड़


  • मेडिकल एक्सपर्ट्स अभी भी लोगों के बाहर निकलने पर चिंता जता रहे हैं
  • लोग बाहर निकलने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 06:23 AM IST

न्यूयॉर्क. तस्वीर अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य के ब्रुकलिन की है। यहां पर लॉकडाउन में ढील के बाद पहले वीकेंड पर बड़ी संख्या में लोग डोमिनो पार्क में पहुंचे थे।  सोशल डिस्टेंसिंग बरतने के लिए यहां पर पहले से ही बड़े घेरे बनाए गए थे। पर इन घेरों में लोग परिवार समेत बैठे दिखे। मेडिकल एक्सपर्ट्स अभी भी लोगों के बाहर निकलने पर चिंता जता रहे हैं।

बार-बार चेतावनी के बाद भी लोग घूमने-फिरने के लिए निकल रहे हैं। अमेरिका में कोरोना के 15 लाख से ज्यादा केस आ चुके हैं। वहीं फ्रांस में 1 लाख 79 हजार लोग कोरोना की चपेट में हैं।

पेरिस में भी सीन नदी के किनारे बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। 
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हीथ्रो एयरपोर्ट प्रमुख बोले- संक्रमण से ठीक हुए लोगों के लिए इम्युनिटी पासपोर्ट बने, ताकि अर्थव्यवस्था सुधरे


  • दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में रोज ढाई लाख लोग आते थे, अब 5-6 हजार
  • डीजीसीए ने कहा- भारत में अभी इम्युनिटी पासपोर्ट पर कोई विचार नहीं

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 06:23 AM IST

लंदन. दुनिया के सबसे व्यस्त ब्रिटेन के हीथ्रो एयरपोर्ट के प्रमुख जॉन हॉलैंड काये ने ‘इम्युनिटी पासपोर्ट’ व्यवस्था को लागू करने की वकालत की है। उन्होंने इसके तहत कोरोनावायरस से स्वस्थ होने वालों को रिस्क फ्री का सर्टिफिकेट देने के साथ ही इसे दुनियाभर में लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

इस व्यवस्था से यात्रा से पहले ही उस शख्स को यह पता होगा कि इस इम्युनिटी पासपोर्ट के जरिए उसे दूसरे देश में जाने की इजाजत है। ऐसे लोग छुट्टियों पर भी जा सकेंगे। उन्होंने अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कोरोना के कम जोखिम वाले देशों के बीच फिर से उड़ान सेवा शुरू करने पर भी बल दिया है।

ब्रिटेन में हवाई यात्रियों की संख्या 97% घटी
जॉन हॉलैंड ने रविवार को एक टीवी शो में कहा कि ब्रिटेन में यात्रियों की संख्या 97% घटकर 5-6 हजार रह गई है, जबकि संक्रमण फैलने से पहले रोजाना 2.5 लाख हुआ करती थी। यह ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक का अब तक का सबसे निचला स्तर है। आशंका है कि यह लंबे समय तक यूं ही रहेगा।

इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए हमारी सरकार से अपील है कि अंतरराष्ट्रीय मानक पर अन्य देशों के साथ मिलकर काम हो, ताकि कोरोना से कम प्रभावित देशों के बीच विमान सेवाएं फिर से बहाल हो सकें। इसके लिए यह जरूरी है कि उन लोगों को इम्युनिटी पासपोर्ट या रिस्क फ्री सर्टिफिकेट जारी किया जाए, जो कोरोनावायरस से ठीक हो चुके हैं।

भारत में इम्युनिटी पासपोर्ट पर अभी विचार नहीं
देश में इम्युनिटी पासपोर्ट पर अभी विचार नहीं हो रहा है। डीजीसीए के अनुसार अभी केवल मंत्रालय से जारी लाॅकडाउन के नियमों का पालन किया जाएगा। हालांकि, एयरलाइंस कंपनियों को फ्लाइट ऑपरेशंस के दौरान कोरोना संबंधी गाइडलाइन जारी की गई है, जिसे फालो करना होगा।

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लॉकडाउन में लोगों को खाना-सामान दे रहीं आपराधिक गैंग, सरकार ने कहा- इनसे मदद न लें, नतीजे बुरे होंगे


  • अस्पताल भी इनकी मदद ले रहे, छोटे कारोबारियों को कर्ज भी दिया
  • सरकार की चेतावनी- अपराधियों के गैंग नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रहीं

दैनिक भास्कर

May 18, 2020, 06:16 AM IST

इगुआला. पिछले कुछ दिनों से दक्षिणी मैक्सिको के ग्युरेरो के कई इलाकों में रहवासियों को बिलबोर्ड्स दिखाई दे रहे हैं। इनमें लिखा है ‘इगुआला के रहवासियों, आप घर पर ही रहें, हम बाहर किसी तरह की अराजकता नहीं चाहते, आप लॉकडाउन का सम्मान करें, अगर कोई बाहर मिलता है तो हम उसे गंभीर चोट पहुंचाएंगे।’ ये संदेश स्थानीय अधिकारियों या सरकार की ओर से नहीं बल्कि ड्रग्स गैंग द्वारा लिखवाए गए हैं।

यह सिर्फ अकेला मामला नहीं है। मैक्सिको के कई राज्यों में इन आपराधिक गैंग्स ने कर्फ्यू लगा रखे हैं। इस दौरान लोगों को खाने-पीने और जरूरत का सामान भी इन्हीं गैंग्स के लोग पहुंचा रहे हैं। हालांकि, सरकार लोगों से आग्रह कर रही है कि इन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों से मदद न लें, वरना भविष्य में इसके नतीजे खतरनाक होंगे।

25 से 30 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद दी
कुछ हफ्तों पहले इटली, ब्राजील और अल सल्वाडोर से भी इसी तरह की खबरें मिलीं थी। इटली के नैपल्स और पलेर्मो में भी कुछ आपराधिक गैंग्स लोगों को खाना और ड्रग्स दे रहीं थीं। दक्षिणी इटली में तो लोगों को 25 से 30 हजार रुपए तक की आर्थिक मदद और तोहफे दिए गए।

मैक्सिको के कुछ अस्पताल इन गैंग्स की मदद ले रहे हैं
कोरोना के दौर में मैक्सिको के गुरेरो, मिचोआकेन, तमुलिपास और गुआनाजुआटो जैसे गरीब राज्यों में ये संगठन खाना पहुंचा रहे हैं। इसी तरह उत्तरी मैक्सिको की एक गैंग फूड बॉक्स के साथ हैंड सैनिटाइजर दे रही है। इस सील्ड बॉक्स पर गैंग का नाम लिखा रहता है। इसके अलावा मैक्सिको के कुछ अस्पताल मेडिकल उपकरण की कमी पूरी करने के लिए इन गैंग्स की मदद ले रहे हैं।

संकट खत्म होने पर गैंग्स आपसे मदद मांगेगे: सरकार

मैक्सिको के अलावा कोलंबिया, द.अफ्रीका और जापान में भी संगठित अपराध समूह जरूरी सामान की सप्लाई कर रहे हैं। इटली की तरह ही मैक्सिको की ये गैंग्स छोटे कारोबारियों को कम दरों पर कर्ज भी दे रही हैं। पर सरकार ने लोगों को चेतावनी दी है कि ये गैंग्स नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। जब संकट खत्म हो जाएगा तो ये एहसान का बदला मनी लॉन्ड्रिंग, पुलिस से सुरक्षा के रूप में मांगेंगे।