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70 साल में अमेरिका ने 4 जंग लड़कर 1 लाख 1 हजार सैनिक खोए, लेकिन कोरोना के 4 महीने में 1 लाख से ज्यादा लोगों की जान गईं


  • दुनियाभर में संक्रमण के कुल मामलों का 30 फीसदी से ज्यादा केवल अमेरिका में
  • अमेरिका में संक्रमण का पहला मामला 21 जनवरी को वॉशिंगटन में आया था

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 07:17 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में इस समय संक्रमण के 17 लाख से ज्यादा मामले हैं। यहां पर मरने वालों की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। वर्ल्ड वॉर-2 के बाद अमेरिका ने चार बड़े युद्धों का सामना किया है। इस दौरान जितने सैनिक मारे गए, कोरोनावायरस के चलते चार महीने में उससे ज्यादा लोगों की जान गई है। देश में संक्रमण का पहला मामला 21 जनवरी को मिला था। दुनियाभर के कुल संक्रमितों के 30% से ज्यादा मामले यहां हैं।

अमेरिका में बीबीसी के पत्रकार जॉन सोपेल का कहना है कि कोरिया, वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में जितने अमेरिकी महिला-पुरुष सैनिकों की जान गई, उससे ज्यादा लोगों की मौत महामारी से हुई है। सोपेल ने बताया कि अगर कोई कोरोना से हुई मौतों की तुलना अमेरिका में कैंसर व सड़क हादसे में हुई मौतों से करें तो भी चौंकाने वाले परिणाम ही सामने आएंगे।

युद्ध   मरने वालों की संख्या
कोरियाई युद्ध (1950-1953) 36,500
वियतनाम युद्ध (1961-1975) 58,000
इराक युद्ध      (2003-2011) 4500
अफगानिस्तान (2001 से अबतक) 2000

अमेरिका में सबसे ज्यादा मौतें, लेकिन मृत्यु दर के हिसाब से पीछे
अमेरिका में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले आए हैं। मौतें भी सबसे ज्यादा हुई हैं। लेकिन, अगर मृत्युदर के हिसाब से देखें तो अमेरिका का नौवां स्थान आता है। आबादी के लिहाज से मौतों की तुलना के आधार पर बेल्जियम, ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे देश अमेरिका से आगे हैं। न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 20 राज्यों में कोरोना के नए मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। यहां नॉर्थ कैरोलिना और विसकॉन्सिन में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आए हैं। 

न्यूयॉर्क में कम हुई मरने वालों की संख्या
अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क है। यहां मरने वालों की संख्या 21 हजार के करीब है। कुछ दिनों पहले यहां रोज सैकड़ों लोगों की मौत हो रही थी। हालांकि, अब यहां संक्रमण से मौतों के मामलों में कमी आई है।

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टि्वटर के सीईओ जैक डोर्सी ने ट्रम्प के आरोपों से इनकार किया, बोले- फैक्ट चेक का काम हमारे कर्मचारियों पर छोड़ दें


  • जैक डोर्सी ने बुधवार को कहा- हम दुनिया भर के चुनावों के बारे में गलत और विवादित जानकारी के बारे में बताते रहेंगे
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा था कि टि्वटर फ्री स्पीच को रोकना चाहता है, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:11 PM IST

वॉशिंगटन. ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से लगाए गए राष्ट्रपति चुनाव में दखल देने के आरोपों को नकारा है। डोर्सी ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘‘फैक्ट चेक के लिए एक कंपनी के तौर पर आखिर कोई न कोई जिम्मेदार होगा, वो मैं हूं। कृपया हमारे कर्मचारियों पर यह काम छोड़ दीजिए। हम दुनिया भर के चुनावों के बारे में गलत और विवादित जानकारी के बारे में बताते रहेंगे। अगर हमसे कोई गलती होती है तो इसे भी स्वीकार करेंगे।’’

मंगलवार को ट्रम्प ने मेल-इन बैलेट्स पर दिए गए अपने बयान को गलत बताने पर ट्विटर पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि टि्वटर फ्री स्पीच को पूरी तरह से रोकना चाहता है। राष्ट्रपति होने के नाते मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।
हमारे लिए यह अहम है कि हम ज्यादा निष्पक्ष रहे: डोर्सी
डोर्सी ने गुरुवार को एक अन्य ट्वीट में कहा कि फैक्ट चेक करने पर हम सच्चाई से किसी प्रकार का समझौता नहीं कर रहे। हमारा इरादा गलत और विवादास्पद बयानों को सामने लाना है। हमारे लिए यह अहम है कि हम ज्यादा निष्पक्ष रहे। लोग खुद यह समझ जाएंगे कि हमने फैक्ट चेकिंग क्यों की है।

 क्यों ट्रम्प के दो ट्वीट्स पर लगे फैक्ट चेक के लेबल?

उन्होंने ट्वीटर की सिविक इंटिग्रिटी पॉलिसी के बारे में बताया। इसी पॉलिसी के मुताबिक,  26 मई को किए गए ट्रम्प के दो ट्वीट्स पर फैक्ट चेक का लेबल लगाया गया था। कंपनी के नियमों के मुताबिक, टि्वटर पर चुनाव के समय और तारीख के बारे में भ्रामक जानकारी नहीं दी जा सकती। 



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यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रन का दावा-कोरोना की वजह से इस साल के अंत तक भारत समेत दुनिया भर में 8.6 करोड़ बच्चे गरीब होंगे


  • महामारी से प्रभावित होने वाले करीब दो तिहाई बच्चे अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई देशों के होंगे
  • महामारी की वजह से गरीब होने वाले बच्चों की संख्या पिछले साल की तुलना में 15% बढ़ जाएगी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 09:53 AM IST

वॉशिंगटन. कोरोना की वजह से 2020 के अंत तक 8.6 करोड़ बच्चे गरीब हो जाएंगे। इससे दुनिया भर में गरीबी से प्रभावित बच्चों की कुल संख्या 67.2 करोड़ हो जाएगी। यह पिछले साल की तुलना में 15% ज्यादा होगी। इनमें से करीब दो तिहाई बच्चे अफ्रीकी और भारत समेत अन्य दक्षिण एशियाई देशों के होंगे। यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रेन के साझा अध्ययन में यह बात सामने आई है।

इससे पहले वर्ल्ड बैंक ने भी महामारी से दुनियाभर में गरीबी बढ़ने की आशंका जताई थी। बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपॉस ने पिछले हफ्ते एक कॉन्फ्रेंस में कहा था कि इससे पूरी दुनिया में छह करोड़ लोग बेहद गरीब हो जाएंगे। वे पिछले तीन साल में किए गए अपने सभी प्रॉफिट भी गंवा देंगे।  

सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का विस्तार करे सरकार

यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रेन ने सभी सरकारों से अनुरोध किया है कि वे अपनी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली का विस्तार करें। स्कूलों में बच्चों को खाना उपलब्ध करवाने में तेजी लाएं, जिससे महामारी के असर को कम किया जा सके। दोनों एजेंसियों ने वर्ल्ड बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और करीब 100 देशों की आबादी के आधार पर महामारी फैलने का आकलन किया है। इसके मुताबिक, महामारी के यूरोप और मध्य एशिया में ज्यादा फैलने की ज्यादा आशंका है।

तत्काल कदम उठाएं तो महामारी का असर कम हो सकता है

यूनिसेफ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोर ने कहा है कोरोना की वजह से परिवारों पर बड़े पैमाने पर आर्थिक संकट आएगा। इससे बच्चों में गरीबी कम करने में अब तक हुई प्रगति कई साल पीछे हो जाएगी। बच्चे जरूरी सेवाओं से वंचित हो जाएंगे। हालांकि, सेव द चिल्ड्रेन के प्रमुख इंगर एशिंग के मुताबिक, तत्काल और निर्णायक कदम उठाकर गरीब देशों पर पड़ने वाले महामारी के असर को रोका जा सकता है। इससे महामारी से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले बच्चों को भी बचाया जा सकेगा। इन बच्चों पर कम समय में भी भूख और कुपोषण का ज्यादा असर हो सकता है। इससे उनके पूरे जीवन पर असर पड़ने का खतरा है।

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खराब मौसम की वजह से स्पेसएक्स की लॉन्चिंग टली, दो अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स को अंतरिक्ष भेजा जाना था


  • अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स रॉबर्ट बेनकेन और डगलस हर्ले को इस मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस सेंटर भेजा जाना है
  • अब इस मिशन की लॉन्चिंग 30 मई को होगी, यह नासा और स्पेसएक्स का साथ में पहला मानव मिशन होगा

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 07:45 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में खराब मौसम की वजह से स्पेसएक्स की लॉन्चिंग टालनी पड़ी। इसे 27 मई की रात को दो बजकर तीन मिनट पर नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से दो अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स के साथ उड़ान भरनी थी, लेकिन 16 मिनट पहले मिशन को रोक दिया गया। अब 30 मई को इसे अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

2011 के बाद यह पहला मौका था जब अमेरिका अपने देश से स्वदेशी रॉकेट की मदद से अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) भेजने वाला था। दरअसल, नासा एलन मस्क की निजी कंपनी स्पेस एक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस भेजने जा रहा है। स्पेस एक्स का क्रू ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट फॉल्कन रॉकेट के ऊपर लगाया गया है। इससे अमेरिकी एस्ट्रोनॉट्स रॉबर्ट बेनकेन और डगलस हर्ले मौजूद रहेंगे। दोनों पहले भी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं।

20 साल साल से मिशन पर काम चल रहा है

  • नासा 2000 के दशक की शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर क्रू की आवाजाही का काम छोड़ने की योजना बना रहा है। इसी के तहत, उसने एक प्रोग्राम शुरू किया। इसमें निजी फर्मों को शामिल किया।
  • अमेरिका ने 2011 में यान भेजने बंद कर दिए थे। इसके बाद अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों को रूस की उड़ानों का सहारा लेना पड़ा। इसका खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके बाद नासा ने स्पेस एक्स को बड़ी आर्थिक मदद देकर अंतरिक्ष मिशन के लिए मंजूरी दी।
  • इसके बाद अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की स्पेसएक्स एयरोस्पेस सेक्टर की दिग्गज कंपनी बोइंग के साथ आगे आई। एलन मस्क ने स्पेसएक्स कंपनी को 2002 में बनाया था। इसका मकसद अंतरिक्ष में ट्रांसपोर्टेशन की लागत को कम करना है। साथ ही मंगल ग्रह पर इंसानी बस्तियां बनाना भी है। एलन मस्क की इस कंपनी ने 2012 में पहली बार अंतरिक्ष में अपना कैप्सूल भेजा।

12 दिन अंतरिक्ष में रहकर 16 सूर्योदय देखेंगे, 71-71 करोड़ रु. दिए
कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को यात्रा से पहले 15 दिनों तक क्वारैंटाइन में रखा गया। दोनों यात्री 12 दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे। इसके लिए दोनों पर 71-71 करोड़ रु. खर्च किए हैं। इस दौरान वे 16 सूर्योदय देख सकेंगे।

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अब तक 57.88 लाख संक्रमित: ब्राजील में मरीजों की संख्या 4 लाख के पार, यहां 25 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई


  • ब्राजील में 24 घंटे में 1086 नए मामले सामने आए हैं, यहां अब तक 1 लाख 66 हजार लोग ठीक हो चुके हैं
  • अमेरिका में 3 महीने में 1 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई, दुनिया में सबसे ज्यादा तबाही यहां हुई

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 07:54 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 57 लाख 88 हजार 782 लोग संक्रमित हैं। 24 लाख 97 हजार 593 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 57 हजार 425 हो गया है। वहीं, ब्राजील में 24 घंटे में 1086 लोगों ने दम तोड़ा है। यहां मौतों का आंकड़ा 25 हजार 687 हो गया है, जबकि मरीजों की संख्या 4 लाख 14 हजार से ज्यादा हो गई है।

कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 17,45,803 1,02,107 4,90,130
ब्राजील 4,14,661  25,697 1,66,647
रूस 3,70,680 3,968 1,42,208
स्पेन 2,83,849  27,118 1,96,958
ब्रिटेन 2,67,240 37,460 उपलब्ध नहीं
इटली 2,31,139 33,072 1,47,101
फ्रांस 1,82,913 28,596 66,584
जर्मनी 1,81,895 8,533 1,62,800
तुर्की 1,59,797 4,534 1,22,793
भारत 1,58,086 4,522 67,749

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

अमेरिका: 24 घंटे में करीब 1500 मौतें
अमेरिका में 24 घंटे में लगभग 1500 मौतें हुई हैं, जबकि 20 हजार से ज्यादा नए मामले मिले हैं। यहां मौतों का आंकड़ा एक लाख 2 हजार से ज्यादा हो गया है। वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान और कोरिया की 44 साल की लड़ाई में जितनी जान गई, 3 महीने में करीब उतनी ही मौतें अमरिका में हुई हैं।

अमेरिका रूस को 150 वेंटिलेंटर और भेजेगा
अमेरिका रूस को शनिवार को 150 वेंटिलेटर्स और भेजेगा। वाययर मेडिकल कंपनी के प्रतिनिधि पैट्रिक ओ’कॉनर ने इसकी जानकारी दी। कॉनर ने बताया कि 150 और एलटीवी 2200 वेंटिलेटर्स शनिवार को भेजे जाएंगे। पिछले हफ्ते एक सैन्य विमान से अमेरिका ने 50 वेंटिलेटर भेजे थे। अमेरिका रूस को कुल 50 लाख 60 हजार डॉलर के उपकरण भेजेगा।

तुर्की: 1035 मामले सामने आए
तुर्की में 1035 नए मामले सामने आने के साथ ही देश में संक्रमितों की संख्या 1 लाख 59 हजार 797 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री फाहरेतिन कोजो ने बुधवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में 34 और लोगों की मौत हुई है। अब तक यहां 4431 लोग जान गंवा चुके हैं। 24 घंटे में 1286 मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। एक दिन में यहां कोरोना के 21,043 टेस्ट किए गए हैं। अब तक कुल 18 लाख 94 हजार 650 टेस्ट हो चुके हैं।

मिस्र: लगभग 20 हजार मामले
मिस्र में संक्रमण के 910 नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही यहां संक्रमितों की संख्या 19,666 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने खालीद मुगाहेद ने बताया कि 24 घंटे में 910 नए मामले सामने आए हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। अब तक यहां 816 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। 5205 लोग स्वस्थ्य हुए हैं।

चिली: 82,289 संक्रमित
चिली में अब तक 82,289 मामले सामने आए हैं और यहां 841 लोगों की मौत हुई है। 24 घंटे में 4328 मरीज मिले, जबकि 35 लोगों की जान जा चुकी है। अब तक यहां 33,540 मरीज स्वस्थ्य हुए हैं। मामले बढ़ने के कारण स्वास्थ्य मंत्री जेमी मनालिच ने राजधानी सैंटियागो और महानगर क्षेत्र में लॉकडाउन 29 मई से आगे बढ़ाने की घोषणा की।

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ब्रिटेन समेत यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों को आशंका- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप से खतरे में पड़ सकती है प्राइवेसी; पारदर्शिता पर भी सवाल


  • वैज्ञानिक कोरोना संक्रमण पर नजर रखने के लिए तैयार किए गए 30 देशों के ऐप की स्टडी कर रहे
  • वे ऐप के व्यवहार, डेटा की प्राइवेसी को लेकर पैदा हो रही शंकाओं को लेकर संतुष्ट नहीं है

राजीव रंजन सिंह

May 28, 2020, 06:20 AM IST

लंदन. दुनिया के कई देश कोरोना के प्रसार को मापने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप पर काम कर रहे हैं। भारत में आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च हो चुका है, जबकि ब्रिटेन के ऐप एनएचएस-एक्स का पायलट टेस्ट चल रहा है। वैज्ञानिक करीब 30 देशों के ऐप की स्टडी कर रहे हैं। वे इन ऐप के व्यवहार, खासकर डेटा की प्राइवेसी संबंधी शंकाओं को लेकर संतुष्ट नहीं हैं।

ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स ने भी इन ऐप की आलोचना करते हुए खुला पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि ये ऐप यूजर्स के डेटा हैंडलिंग, उनकी निजता के बारे में पारदर्शी नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर जब दो लोग मिलते हैं, तो उनके ऐप ब्लूटूथ के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में आते हैं। ऐसे संपर्कों का ब्यौरा दोनों व्यक्तियों के मोबाइल ऐप में सेव होता है।

कई ऐप यूजर के लोकेशन का डेटा भी लेते हैं। अगर ये डेटा हैकर के हाथ लग जाए, ऐप के नियंत्रक इससे यूजर्स की स्थिति की पहचान करने लगें, तो यह निजता के लिए बड़ा खतरा होगा।

वैज्ञानिक लॉन्च से पहले ऐप का विश्लेषण करना चाहते

वैज्ञानिकों को ऐप लॉन्च होने से पहले ऐसे दुष्प्रभावों का विश्लेषण करने का मौका मिले। यह विश्लेषण यूजर्स के लिए उपलब्ध हो। वे तय कर सकें कि उनके लिए ऐप ठीक है या नहीं। डेटा प्रोटेक्शन कानून का पालन हो। ऐप को एमआईटी टेक्नोलॉजिकल रिव्यू परख रही है।

एमआईटी टेक्नोलॉजिकल रिव्यू ने 5 पैमानों पर एप को परखा

  • स्वैच्छिक: ऐप डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं।
  • सीमित इस्तेमाल: डेटा सिर्फ सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित के लिए उपयोग किया जा रहा है।
  • डेटा नष्ट करना : डेटा तय समय (आमतौर पर 30 दिन) में नष्ट हो जाएगा। यूजर्स खुद भी चाहें तो अपना डेटा डिलीट कर सकेंगे।
  • न्यूनतम सूचनाएं: ऐप कोविड-19 के संबंध में ट्रेसिंग के लिए जरूरी सूचनाएं ही लेता है।
  • पारदर्शिता: ऐप से जुड़ीं नीतियां, डिजाइन, सोर्स कोड सार्वजनिक किए जा चुके हैं।

चीन का ऐप किसी पैमाने पर खरा नहीं 

  • अमेरिका: फिलहाल अमेरिका के किसी ऐप का नाम सामने नहीं आ रहा है।
  • ब्रिटेन : एनएचएस-एक्स ऐप। यह स्वैच्छिक, पारदर्शिता, न्यूनतम सूचना के पैमाने पर खरा।
  • इटली: इम्युनी ऐप। यह पांचों पैमानों पर खरा।
  • फ्रांस: स्टॉप कोविड ऐप। यह स्वैच्छिक है। अन्य पैमानों पर खरा नहीं उतरा।
  • चीन: चाइनीज हेल्थ कोड सिस्टम ऐप। यह पांचों पैमाने पर खरा नहीं उतरा है।
  • जर्मनी: कोरोना ऐप। यह स्वैच्छिक है। डेटा नष्ट हो सकेगा। अन्य पैमानों पर खरा नहीं है।
  • भारत:  आरोग्य सेतु ऐप। डेटा नष्ट हो सकेगा। पारदर्शी है। अन्य पैमानों पर खरा नहीं।
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नेपाल में नए नक्शे को संविधान में शामिल करने के प्रस्ताव पर चर्चा टली, सभी पार्टियां पूरी तरह सहमत नहीं


  • नेपाल ने नए मानत्रित में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपना क्षेत्र बताया है
  • निचले सदन से प्रस्ताव पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी, सरकार के पास 10 वोट कम
  • हाल ही में भारत के सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा- नेपाल ने ऐसा किसी और (चीन) के कहने पर किया

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 06:14 PM IST

काठमांडू. नेपाल के संविधान में देश के नए मानचित्र को शामिल करने के प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा टल गई है। इस मुद्दे पर सभी पार्टियों की सहमति नहीं बन पाई है। यह चर्चा पहले भी एक बार टलने के बाद बुधवार को तय की गई थी। अब ये चर्चा कब होगी इसका दिन नहीं तय किया गया है। नेपाल की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेंजेटेटिव (प्रतिनिधि सभा) में संशोधन के लिए बुधवार को चर्चा होनी थी। कानून मंत्री शिवमाया तुंबहाम्पे को 2 बजे प्रस्ताव पेश करना था।

नेपाल ने 18 मई को जारी किया था नया मानचित्र
भारत ने हाल ही में लिपुलेख तक सड़क निर्माण किया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन भी किया था, इसके बाद ही नेपाल की सरकार ने विरोध जताते हुए 18 मई को नया मानचित्र जारी किया था। इसमें भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में बताया था। इसके बाद 22 मई को संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव भी दिया था। हाल ही में भारत के सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने कहा कि नेपाल ने ऐसा किसी और (चीन) के कहने पर किया।

संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई वोट की जरूरत
नेपाल की सरकार को संविधान में संशोधन के लिए दो-तिहाई वोट की जरूरत है। प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली ने सबकी सहमति से प्रस्ताव पारित करने के लिए मंगलवार शाम सभी पार्टियों की बैठक बुलाई थी, लेकिन मधेसी पार्टियों के नेता संशोधन के प्रस्ताव के साथ अपनी मांगों को भी शामिल करने का दबाव बना रहे हैं। जनता समाजबादी पार्टी के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर एएनआई से बताया, हम यह भी चाहते हैं कि हमारी लंबे समय की मांगों पर ध्यान दिया जाए, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। 

मधेसी पार्टियां सरकार से इस प्रस्ताव पर अपनी भी कई मांगे मनवाना चाहती हैं। -फाइल फोटो

नेपाल की सरकार को 10 वोटों की कमी

सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को निचले सदन को निचले सदन से प्रस्ताव पास कराने के लिए 10 सीटों की जरूरत है। इसलिए सरकार को दूसरी पार्टियों को भी मनाना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ओली और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने सभी पार्टियों से कहा है कि राष्ट्रीय एजेंडे में अपना पॉलिटिकल एजेंडा न लाएं।

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चीन ने कहा- भारतीय सीमा पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में, बातचीत से मामला सुलझा लेंगे; ट्रम्प बोले- अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार


  • चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- हम समझौते का सख्ती से पालन कर रहे
  • लद्दाख में गावलन नाला क्षेत्र में दोनों देशों के बीच हाल ही में तनाव बढ़ गया है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 05:30 PM IST

बीजिंग. चीन ने बुधवार को कहा कि भारतीय सीमा पर स्थिति पूरी तरह से स्थिर और नियंत्रण में है। दोनों देशों के पास आपसी बातचीत के जरिए ऐसे मुद्दों को हल करने का तंत्र मौजूद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का यह बयान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेना में जारी गतिरोध के बीच आया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर चीन की स्थिति स्पष्ट है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपाति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि चीन और भारत के सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है। इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था। भारत ने कहा था कि यह उसका आंतरिक मसला है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दो अनौपचारिक शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए  झाओ लिजियन कहा, ‘‘हम दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी महत्वपूर्ण सहमति और समझौते का सख्ती से पालन कर रहे हैं।’’

‘बेहतर रिश्ते रखने की जिम्मेदारी दोनों देशों की’
वहीं, भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग ने कहा कि भारत और चीन साथ मिलकर कोरोनावायरस से मिलकर जंग लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बेहतर संबंध रखना दोनों देशों की जिम्मेदारी है। दोनों तरफ के युवाओं को भी यह समझना चाहिए। हमें उन चीजों को दूर रखना होगा, जो आपसी रिश्तों पर बुरा असर डाले। आपसी चर्चा के जरिए ही मतभेद सुलझाने चाहिए।

चीन के बाद भारत ने भी बढ़ाई सैनिकों की संख्या

लद्दाख में हाल ही में गालवन नाला एरिया के पास चीन और भारत के बीत तनाव बढ़ गया है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन करीब 5 हजार जवान तैनात कर चुका है। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसी महीने दोनों सेनाओं के बीच तीन बार अलग-अलग जगहों पर टकराव हो चुका है। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

डोकलाम के बाद सबसे बड़ा टकराव

  • अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है। 

  • भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी।

भारत और चीन के बीच हाल में हुए विवाद

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पेंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त  झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया, फिर झड़प रुकी।

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।



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राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना से कहा- सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखकर जंग की तैयारियां तेज करें


  • जिनपिंग ने आर्मी के साथ मीटिंग में ऐसा कहा, हालांकि किसी खतरे का जिक्र नहीं किया
  • दूसरी ओर लद्दाख में भारत-चीन के बीच पिछले कुछ दिनों से तनाव की स्थिति बनी हुई है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 12:55 PM IST

बीजिंग. चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग ने सेना से कहा है कि ट्रेनिंग और जंग की तैयारियां तेज कर दें। सबसे मुश्किल हालात को ध्यान में रखते हुए खुद को तैयार करें और देश के आधिपत्य (सॉव्रिन्टी) के लिए मजबूती से डटे रहें। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक जिनपिंग ने कहा कि उलझे हुए मसलों को मुस्तैदी और असरदार तरीके से डील करें।

जिनपिंग ने मंगलवार को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के डेलिगेशन की प्लेनरी मीटिंग में ऐसा कहा। उन्होंने किसी खतरे का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन उनका बयान ऐसे समय आया है जब बॉर्डर पर चीन और भारत के जवानों के बीच तनाव बना हुआ है।

चीन ने इस साल रक्षा बजट 6.6% बढ़ाया
जिनपिंग ने डिफेंस में साइंटिफिक इनोवेशन पर जोर दिया। रक्षा खर्च पर उन्होंने कहा कि एक-एक पाई का इस्तेमाल इस तरह किया जाए कि ज्यादा से ज्यादा नतीजे मिलें। इससे पहले 22 मई को चीन ने अपना रक्षा बजट 6.6% बढ़ाकर 179 अरब डॉलर कर दिया। ये भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना है।

डिफेंस बजट बढ़ाने पर चीन के रक्षा प्रवक्ता वु क्यान ने कहा था कि इस समय हम नए खतरों और चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने ताइवान का खास तौर से जिक्र किया, जिसने चीन का हिस्सा होने से इनकार कर दिया है।

चीन ने लद्दाख में सैनिक बढ़ाए हैं
चीन ने पिछले कुछ दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास सैनिकों की संख्या बढ़ाई है। चीन की फौज ने भारतीय इलाकों में घुसपैठ कर अस्थाई ठिकाने भी बनाए हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस महीने तीन बार सैनिकों की झड़प भी हो चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से चर्चा की
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

लद्दाख में भारत चीन जितने सैनिक तैनात रखेगा: रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों बैठकों में मोदी और राजनाथ को चीन की हरकतों पर भारतीय सेना के जवाब की जानकारी दी गई। मीटिंग में दो अहम फैसले लिए गए। पहला- इस क्षेत्र में सड़क निर्माण जारी रहेगा। दूसरा- भारतीय सैनिकों की तैनाती उतनी ही रहेगी जितनी चीन की है।

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ट्रम्प ने कहा- ट्विटर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में दखलंदाजी कर रहा; वे बोलने की आजादी का गला घोंट रहे, ये होने नहीं दूंगा


  • ट्विटर ने गलत सूचनाओं को प्रसारित करने से रोकने के लिए एक नया फैक्ट चैकिंग सिस्टम शुरू किया है
  • ट्रम्प के मुताबिक- मेरे लिए जो भी बातें फैलाई जा रहीं, उनका फैक्ट चैक फेक मीडिया सीएनएन और वॉशिंगटन पोस्ट कर रहे

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 10:28 AM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नाराजगी जताई है। ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि ट्विटर 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में दखलंदाजी कर रहा है। वे बोलने की आजादी का गला घोंटना चाहते हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं होने नहीं दूंगा।

ट्रम्प ने ट्वीट किया, ‘‘वे (ट्विटर)कहते हैं कि मेरा मेल-इन बैलेट्स पर दिया गया बयान बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और झूठ फैलाएगा। ये बात एकदम गलत है। ये फैक्ट चैक फेक मीडिया ग्रुप सीएनएन और अमेजन वॉशिंगटन पोस्ट ने किया है। ट्विटर फ्री स्पीच को पूरी तरह से रोकना चाहता है। राष्ट्रपति होने के नाते मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।’’ 

मंगलवार को ट्विटर की तरफ से कहा गया था कि मेल-इन बैलेट्स (मतपत्रों को डाक से भेजना) से करप्शन आएगा। ट्विटर ने यह अनुमान भी जताया था कि मेलबॉक्स चोरी कर लिए जाएंगे।



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अब तक 56.83 लाख संक्रमित और 3.52 लाख मौतें: जर्मनी ने सोशल डिस्टेंसिंग का नियम 29 जून तक बढ़ाया


  • नियम के मुताबिक, जर्मनी में सार्वजनिक जगहों पर लोग 10 की संख्या तक ही जमा हो सकते हैं
  • जर्मनी में संक्रमण के 1.81 लाख मामले सामने आ चुके हैं और 8498 लोगों की मौत हुई है

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 08:28 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 56 लाख 83 हजार 802 लोग संक्रमित हैं। 24 लाख 30 हजार 527 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 52 हजार 200 हो गया है। उधर, जर्मनी में महामारी को रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का नियम 29 जून तक बढ़ा दिया गया है। सार्वजनिक जगहों पर लोग 10 की संख्या तक ही जमा हो सकते हैं। देश में 1.81 लाख संक्रमित हैं, जबकि 8498 लोगों की जान जा चुकी है।

कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 17,25,275 1,00,572 4,79,969
ब्राजील 3,94,507  24,593 1,58,593
रूस 3,62,342 3,807 1,31,129
स्पेन 2,83,339  27,117 1,96,958
ब्रिटेन 2,65,227 37,048 उपलब्ध नहीं
इटली 2,30,555 32,955 1,44,658
फ्रांस 1,82,722 28,432 65,199
जर्मनी 1,81,288 8,498 1,62,000
तुर्की 1,58,762 4,397 1,21,507
भारत 1,50,793 4,344 64,277

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

अमेरिका: मौतों का आंकड़ा 1 लाख के पार
worldometers के मुताबिक, अमेरिका में मरने वालों की संख्या मंगलवार रात एक लाख से ज्यादा हो गई। यह दुनिया के किसी भी देश में सबसे ज्यादा मौतें हैं। यहां 24 घंटे में करीब 700 लोगों ने म तोड़ा है। वहीं, 19 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं।

मार्च के बाद पहली बार मंगलवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की बिल्डिंग खोली गई। इस दौरान गेट पर स्वास्थ्यकर्मी मास्क पहने नजर आए।

ब्रिटेन: 37 हजार से ज्यादा मौतें
ब्रिटेन में 24 घंटे में 134 लोगों की जान गई है। इसके साथ ही देश में मरने वालों की संख्या 37 हजार 48 हो चुकी है। मंगलवार सुबह तक देश में 2 लाख 65 हजार 227 लोग संक्रमित थे। ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स ने मंगलवार को घोषणा की कि ब्रिटेन और वेल्स में 15 मई तक कोरोनावायरस से जुड़ी 42,173 मौतें हुईं हैं। इसमें महामारी से जुड़े संदिग्ध मामले भी शामिल हैं।

महामारी के दौरान लंदन में ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट के पास से मास्क पहनकर गुजरता युवक। देश में अब तक 2.65 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं।

रूस: एससीओ सम्मेलन स्थगित

रूस ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन को स्थगित करने का फैसला किया है। एससीओ सम्मेलन इस साल 22 और 23 जुलाई को सेंट पीटसबर्ग में होना था। सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस सम्मेलन को स्थगित करने का फैसला लिया है। अधिकारी ने बताया कि सम्मेलन को महामारी के कारण स्थगित किया गया है। हालांकि सम्मेलन का स्थगन पूरी तरह से तय नहीं किया गया है।

फ्रांस: 28,530 लोगों की मौत

यूरोपीय देश फ्रांस में अब तक 28 हजार 530 लोगों की जान चुकी है। यहां मरने वालों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक केवल अस्पतालों में 18,195 मौतें हुई हैं और बाकि 10,335 मरीजों की मौत घर में या अन्य जगहों पर हुई हैं। यहां अब तक 1 लाख 82 हजार 722 लोग संक्रमित हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को एक कार प्लांट का दौरा किया। इस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारी मास्क पहने नजर आए।

पोलैंड: 21,867 मामलों की पुष्टि
पोलैंड में 24 घंटे में 236 नए मामले मिले हैं। यहां संक्रमितों की संख्या 21 हजार 867 हो गई है। वहीं, मरने वालं की संख्या 1,013 हो चुकी है। हालांकि पोलैंड में मार्च के बाद इस सोमवार को कोरोना से एक भी मौत दर्ज नहीं की गई।

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भारतवंशी अमेरिकी दंपती ने पोर्टेबल वेंटिलेटर बनाया, साढ़े 7 हजार रु हो सकती है लागत; अमेरिका में वेंटिलेटर की कीमत 7.5 लाख रु से ज्यादा


  • वेंटिलेटर को बनाने वाले देवेश रंजन जॉर्ज डब्ल्यू वुड्रफ स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रोफेसर, पत्नी कुमुदा डॉक्टर
  • दोनों ने 3 हफ्ते में बनाया प्रोटोटाइप वेंटिलेटर, जल्द शुरू होगा बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन, भारत में भी मिलेगा

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 02:51 PM IST

वॉशिंगटन. कोरोनावायरस को हराने और लोगों को राहत देने के लिए दुनियाभर में कोशिशें जारी हैं। अमेरिका के जॉर्जिया के भारतवंशी दंपती ने एक बेहद सस्ता वेंटिलेटर तैयार किया है। उनके मुताबिक, अगर इसे ज्यादा तादाद में बनाया जाए तो इसकी लागत 100 डॉलर (करीब साढ़े सात हजार रुपए) आएगी। अमेरिका में फिलहाल वेंटिलेटर की कीमत 10 हजार डॉलर (करीब 7.56 लाख रुपए) है।

वेंटिलेटर को बनाने वाले देवेश रंजन जॉर्जिया के जॉर्ज डब्ल्यू वुड्रफ स्कूल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं। उनकी पत्नी कुमुदा अटलांटा में डॉक्टर हैं। दोनों ने प्रोटोटाइप वेंटिलेटर को महज 3 हफ्ते में तैयार कर लिया। इस वेंटिलेटर का प्रोडक्शन जल्द शुरू होने वाला है। यह भारत में भी मिलेगा।

इसमें फायदा भी कमाया जा सकता है: रंजन
प्रो. रंजन ने न्यूज एजेंसी को बताया कि अगर इसे बनाने में 500 डॉलर (करीब 39 हजार रुपए) भी लगते हैं तो भी आप बाजार में फायदा कमा लेंगे। यह एक ओपन एयरवेंट जीटी वेंटिलेटर है। यह एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के इलाज के लिए बनाया गया है। कोरोनावायरस के मरीजों में यही सिंड्रोम बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। इसके चलते फेफड़े सख्त हो जाते हैं और सांस लेने में दिक्कत होती है। लिहाजा मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। रंजन ने यह भी साफ किया कि यह कोई आईसीयू वेंटिलेटर नहीं है। इस तरह के वेंटिलेटर ज्यादा महंगे होते हैं।

देवेश का बिहार तो कुमुदा झारखंड से ताल्लुक 
देवेश रंजन बिहार के पटना में पैदा हुए और पले-बढ़े। तमिलनाडु के त्रिची के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने बैचलर डिग्री ली। यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मेडिसन से मास्टर्स और पीएचडी की। 6 साल से वे जॉर्जिया टेक में पढ़ा रहे हैं। वहीं, कुमुदा 6 साल की उम्र में माता-पिता के साथ रांची से अमेरिका पहुंची थीं। न्यूजर्सी में उन्होंने मेडिकल ट्रेनिंग ली।

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डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल रोका; दवा के साइड इफेक्ट को देखते हुए फैसला


  • मेडिकल जर्नल लेन्सेट की स्टडी के मुताबिक- हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से मरीजों को खतरा बढ़ता है
  • दूसरी ओर अमेरिका, ब्राजील समेत कई देश इस दवा के इस्तेमाल का समर्थन कर रहे हैं

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 10:31 AM IST

जेनेवा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल फिलहाल रोक दिया है। इस दवा के साइड इफेक्ट्स को देखते हुए ये फैसला लिया गया। डब्ल्यूएओ के चीफ टेड्रॉस गेब्रयेसस के मुताबिक मेडिकल जर्नल लेन्सेट की एक स्टडी में पिछले हफ्ते कहा गया था कि कोरोना के मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने से उनको जान का जोखिम बढ़ सकता है।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के अलावा दूसरे ट्रायल जारी
गेब्रयेसस ने सोमवार को बताया कि ट्रायल में शामिल दुनियाभर के सैकड़ों अस्पतालों ने कोरोना के मरीजों को ऐहतियातन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देना बंद कर दिया है। इसके अलावा दूसरे ट्रायल जारी हैं। डेटा सेफ्टी मॉनिटरिंग बोर्ड आंकड़ों की समीक्षा कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लेने की बात कही
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन आमतौर पर आर्थराइटिस (गठिया) के मरीजों को दी जाती है, लेकिन कई देशों का मानना है कि ये दवा कोरोना से बचाव में भी मददगार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले हफ्ते कहा था कि वे खुद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन ले रहे हैं। इसके बाद कई देशों ने इस दवा को थोक में खरीदना शुरू कर दिया था। ब्राजील का स्वास्थ्य मंत्रालय भी कोरोना के हल्के लक्षणों वाले मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन देने की सिफारिश कर चुका है।

रिसर्च में दावा- हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोना के मरीजों को फायदा नहीं
दूसरी ओर लेन्सेट की स्टडी में कहा गया था कि दोनों दवाओं के गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। खासतौर से दिल की धड़कन असामान्य (एबनॉर्मल) हो सकती है। कोरोना के मरीजों को इन दवाओं से कोई फायदा नहीं होता। सैकड़ों अस्पतालों में भर्ती 96 हजार मरीजों के रिकॉर्ड के आधार पर लेन्सेट की स्टडी में ये दावा किया गया था।

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अब तक 55.87 लाख संक्रमित और 3.47 लाख मौतें: डब्ल्यूएचओ कोरोना के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का ट्रायल नहीं करेगा


  • ‘लैंसेट’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाज करा रहे लोगों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से मौतों की आशंका बढ़ी हुई नजर आई
  • अमेरिका में अब तक 99 हजार 805 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि संक्रमण का आंकड़ा 17 लाख 6 हजार 226 हो गया है

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 08:23 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 55 लाख 87 हजार 129 लोग संक्रमित हैं। 23 लाख 65 हजार 645 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 47 हजार 861 हो गया है। उधर, डब्ल्यूएचओ ने सुरक्षा कारणों के चलते संक्रमण के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर रोक लगा दी है। संस्था ने कहा कि ‘लैंसेट’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाज करा रहे लोगों में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से मौतों की आशंका बढ़ी हुई नजर आई है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस गेब्रियेसस ने सोमवार को बताया कि 17 देशों के चार सौ अस्पतालों में कोरोना के मरीजों पर शुरू किए गए ट्रायल के कार्यकारी समूह की सिफारिश पर यह फैसला किया गया। ‘लैंसेट’ में शुक्रवार को एक रिपोर्ट में बताया गया था कि जिन मरीजों को यह दवा अलग से या माइक्रोलाइड एंटी बायोटिक के साथ दी गई थी, उनमें मृत्यु दर ज्यादा पाई गई।
कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 17,06,226 99,805 4,64,670
ब्राजील 3,76,669 23,522 1,53,833
रूस 3,53,427 3,633 1,18,798
स्पेन 2,82,480 26,837 1,96,958
ब्रिटेन 2,61,184 36,914 उपलब्ध नहीं
इटली 2,30,158 32,877 1,41,981
फ्रांस 1,82,942 28,432 65,199
जर्मनी 1,80,789 8,428 1,61,200
तुर्की 1,57,814 4,369 1,20,015
भारत 1,44,950 4,172 60,706

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

अमेरिका: 99,805 मौतें

अमेरिका में हर दिन होने वाली मौतों में कमी आ रही है। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, सोमवार को यहां 532 लोगों की जान गई है। देश में अब मरने वालों की संख्या 99 हजार 805 हो चुकी है। वहीं, एक दिन में करीब 19 हजार नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही संक्रमण का आंकड़ा 17 लाख 6 हजार 226 हो गया है।

महामारी के दौरान न्यूयॉर्क में मेमोरियल डे पर परेड देखते मास्क पहने लोग।

ट्रम्प ने गोल्फ खेलने का बचाव किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 23 मई को लॉकडाउन लागू होने के 75 दिन बाद गोल्फ खेलने पहुंचे थे। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। वे लगातार दूसरे दिन भी गोल्फ खेलने गए। इसका लोगों ने जमकर विरोध किया। गोल्फ क्लब के बाहर कुछ लोग तख्तियां लेकर खड़े थे। इन पर लिखा था- 1 लाख लोग मारे गए हैं। हमें चिंता है। क्या आपको चिंता है? ट्रम्प ने अपना बचाव करते हुए ट्वीट कर कहा- बाहर निकलने के लिए या थोड़ा एक्सरसाइज करने के लिए मैं हर वीकेंड पर गोल्फ खेलता हूं। फर्जी और भ्रष्टाचारी न्यूज ने इसको ऐसे दिखाया जिससे यह पाप की तरह लगने लगा।

24 घंटे में 1.02 लाख मरीज मिले: डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में 24 घंटे में 1 लाख 2 हजार 790 संक्रमित मिले हैं, जबकि 4380 लोगों की मौत हुई है। वहीं, संक्रमण का कुल आंकड़ा 50 लाख से ज्यादा हो गया है, जबकि तीन लाख 42 हजार लोगों की जान जा चुकी है।

स्पेन: विदेशी नागरिक क्वारैंटाइन नहीं होंगे

जर्मन न्यूज कंपनी डॉयचे वेले के अनुसार स्पेन के पर्यटन मंत्री रेयेस मरोतो ने सोमवार को कहा कि सरकार विदेशी पर्यटकों को जुलाई से देश में आने की अनुमति दे सकती है। तब तक 14 दिन के अनिवार्य क्वारैंटाइन को हटा दिया जाएगा। इस बयान का स्टॉक मार्केट में भी असर हुआ। प्रमुख होटल संचालक मेलिया होटल्स ने शुरुआती कारोबार में 14% की वृद्धि दर्ज की। स्पेन पर्यटकों का दूसरा पसंदीदा देश है। यहां हर साल करीब आठ करोड़ पर्यटक आते हैं।

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अमेरिकी विशेषज्ञ मास्क की जगह फेस शील्ड काे तरजीह दे रहे, इसे पहनना और दोबारा उपयोग करना आसान, यह संक्रमण से भी बचाती है


  • मास्क से खुजली हाेती है, लाेग बात करते हुए इसे उतार लेते हैं, इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ने की आशंका होती है
  • साेशल डिस्टेंसिंग और हाथ धाेने की आदत के साथ फेस शील्ड का उपयाेग भी संक्रमण का फैलाव कम करने में मदद कर सकता है

कन्वुल शेख

May 26, 2020, 06:01 AM IST

वॉशिंगटन. दुनियाभर में लाेगाें ने काेराेना संक्रमण से बचने के लिए मास्क काे अपना लिया है। अधिकतर सरकाराें ने भी इसे अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, कुछ अमेरिकी डाॅक्टर फेस शील्ड काे अपनाने की सलाह दे रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के इंफेक्शियस डिसीज फिजिशियन डाॅ. इल पेरेंसेविच कहते हैं, ‘टेस्टिंग और काॅन्टैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाने, साेशल डिस्टेंसिंग और हाथ धाेने की आदत के साथ फेस शील्ड का उपयाेग भी संक्रमण का फैलाव कम करने में मदद कर सकता है।’

यह महज विचार नहीं है। सिंगापुर में प्रीस्कूल छात्राें और शिक्षकाें काे अगले महीने स्कूल खुलने पर फेस शील्ड दिए जाएंगे। फिलाडेल्फिया में स्वास्थ्य विशेषज्ञाें ने अनुशंसा की कि स्कूल खुलें ताे शिक्षक फेस शील्ड पहनें।

काेराेनावायरस के ड्राॅपलेट हवा में तैरते रहते हैं- डॉ. शेरी
बाेस्टन के वुमंस हाॅस्पिटल में डर्मेटाेलाॅजिस्ट डाॅ. शेरी यू कहते हैं, ‘काेराेनावायरस के ड्राॅपलेट हवा में तैरते रहते हैं, इसलिए आंखों और पूरे चेहरे काे सुरक्षित करना बहुत जरूरी है। शील्ड काे स्टरलाइज और साफ किया जा सकता है। ये टूटने या दरार पड़ने तक इस्तेमाल की जा सकती हैं। एल्काेहाॅल वाले तरल से साफ करने या साबुन या गर्म पानी से धाेकर भी इन्हें संक्रमण मुक्त किया जा सकता है।’

फेस शील्ड आंखाें समेेत पूरे चेहरे की सुरक्षा करती है- डाॅ. पेरेंसेविच
डाॅ. पेरेंसेविच मानते हैं कि फेस शील्ड आंखाें समेेत पूरे चेहरे की सुरक्षा करती है। चेहरे काे बार-बार छूने से बचाती है। चश्मे या टाेपी के साथ भी इसे पहनना आसान है। ये सिर पर कुछ हिस्से काे ही घेरती हैं, जबकि मास्क से आधे से अधिक चेहरा ढंक जाता है। मास्क के कपड़े या मटेरियल से बार-बार खुजली हाेती है। कई लाेग मास्क गलत तरीके से पहनते हैं। यह नाक से लटका रहता है या सिर्फ मुंह ही ढंकता है।

लाेग बार-बार मास्क ठीक करते रहते हैं। बात करते वक्त वे मास्क उतार लेते हैं, जिससे जाेखिम बढ़ जाता है। दूसरी तरफ कपड़े का मास्क जहां संक्रमण फैलाने से राेकता है, वहीं यह पहनने वाले काे संक्रमण से नहीं बचाता है। डाॅ. पेरेंसेविच कहते हैं, लिप-रीडिंग पर निर्भर रहने वाले लाेगाें के लिए फेस शील्ड बेहतर है। फेस शील्ड से लिप मूवमेंट आसानी से दिख जाते हैं।

एक कफ सिम्यूलेशन शाेध के मुताबिक, यदि आपने फेस शील्ड पहनी है और काेई व्यक्ति 18 इंच की दूरी पर भी खांसता है ताे वायरस से प्रभावित हाेने का खतरा 96% तक कम हाेता है।

अधिक रिसर्च से पता चलेगा कि फेस शील्ड बेहतर होती हैं
कुछ स्थितियाें में फेस शील्ड एन95 मास्क की तरह प्रभावी नहीं है। डाॅ. विलियम लिंडस्ले कहते हैं, ‘यदि आप किसी कुर्सी पर बैठे हैं और सामने वाला व्यक्ति खड़ा है या आप खड़े हैं और दूसरा व्यक्ति आपके पीछे खड़ा है, ताे ड्राॅपलेट फेस शील्ड के इर्दगिर्द से घुस सकते हैं।’ डाॅ.पेरेंसेविच कहते हैं कि अधिक रिसर्च से यह मालूम पड़ सकेगा कि फेस शील्ड मास्क से बेहतर हाेती हैं, ये पूरे चेहरे काे ही सुरक्षित नहीं करतीं, बल्कि इन्हें गलत तरीके से पहनना बिल्कुल असंभव है।

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पायलट ने तीन बार चेतावनी को नजरअंदाज किया था; जांच टीम पर भी सवाल उठे, इसमें सभी सदस्य एयरफोर्स के अफसर


  • एटीसी ने बताया कि पायलट को प्लेन की ऊंचाई मेंटेन करने के लिए तीन बार चेतावनी दी गई थी
  • जांच टीम में किसी कमर्शियल पायलट को शामिल न करने पर पायलट संघ ने उठाए सवाल

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 09:32 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के कराची में 22 मई को हुए प्लेन क्रैश में पायलट की तीन गलतियां सामने आ रही हैं।  पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक, पायलट को एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) ने तीन वॉर्निंग दीं। उसने तीनों बार इन्हें अनसुना कर दिया। दूसरे शब्दों में कहें तो पायलट ने एटीसी के आदेशों का पालन नहीं किया। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के पायलट्स एसोसिएशन ने हादसे की जांच के लिए बनाई गई समिति पर सवालिया निशान लगाए। संगठन के मुताबिक, जांच टीम में एक भी कमर्शियल पायलट नहीं रखा गया। जबकि, क्रैश होने वाला एयरक्राफ्ट कमर्शियल या पैसेंजर प्लेन था। 

22 मई को पीआईए का प्लेन ए-320 कराची जा रहा था। यह प्लेन कराची में जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ही जिन्ना गार्डन एरिया में क्रैश हो गया। इस हादसे में 97 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2 लोग बचाए गए थे। 

1. पहली चेतावनी
जियो न्यूज ने एटीसी के हवाले से बताया- लाहौर से कराची आ रहा पीआईए का प्लेन ए-320 जब जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 15 नॉटिकल मील (27.78 किलोमीटर) दूर था, तब वह 10 हजार फीट ऊंचाई पर था। एटीसी ने पायलट से कहा- एयरक्राफ्ट की ऊंचाई सात हजार फीट रखें। पायलट का जवाब था कि वो इस ऊंचाई से संतुष्ट है।

2. दूसरी चेतावनी
जब प्लेन 10 नॉटिकल मील (18.52 किमी) दूर था तब इसकी ऊंचाई सात हजार फीट थी। इसे तीन हजार फीट होना चाहिए था। इसीलिए, एटीसी ने दूसरी चेतावनी दी। पायलट ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया। उसने जवाब दिया कि वो ऊंचाई से संतुष्ट है और हालात संभाल लेेगा। 

3. तीसरी चेतावनी
प्लेन जब पहली कोशिश में लैंड नहीं हो पाया तो पायलट ने खुद ही गो-अराउंड (गोल चक्कर) का फैसला लिया। इस दौरान प्लेन 1800 फीट की ऊंचाई पर था। एटीसी ने तीसरी वाॅर्निंग दी। प्लेन को तीन हजार फीट की ऊंचाई पर ले जाने को कहा। इस पर पायलट ने जवाब दिया कि वो इसके लिए कोशिश कर रहा है। चंद मिनट बाद एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया।

फ्यूल की कमी नहीं थी

यह साबित हो चुका है कि प्लेन में ईंधन यानी फ्यूल की कमी नहीं थी। रिपोर्ट में कहा गया कि प्लेन में इतना ईंधन था कि वह 2.34 घंटे तक उड़ सकता था। लाहौर से कराची आने में सिर्फ 1.33 घंटे लगते हैं। अब जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गलती का जिम्मेदार पायलट था या कोई टेक्निकल फॉल्ट भी क्रैश की वजह बना। 

सीएए भी जारी कर चुका है रिपोर्ट
पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी (सीएए) की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट ने जिन्ना नेशनल एयरपोर्ट पर उतरने की पहली कोशिश में तीन बार रनवे छुआ था। रनवे पर रगड़ के साथ चिंगारी भी भड़की थी। तीसरी बार रनवे छूने के बाद पायलट ने प्लेन को फिर से हवा में उठा लिया था। माना जा रहा है कि इसी दौरान ऑयल और फ्यूल पंप खराब हुए। इनमें लीकेज हुई होगी। इसके चलते प्लेन ज्यादा ऊंचाई पर नहीं जा पाया और क्रैश हो गया। अजीब बात यह है कि इस दौरान कॉकपिट में मौजूद क्रू ने एटीसी को कोई जानकारी नहीं दी थी। 

जांच टीम पर सवाल
पाकिस्तान में पायलटों के संघ और विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जांच टीम पर सवाल उठाए हैं। प्लेन क्रैश की जांच एयर फोर्स कर रही है। पाकिस्तान एयरलाइंस पायलट एसोसिएशन (पाल्पा) के सेक्रेटरी कैप्टन इमरान नैरेजो ने ‘द डॉन’  अखबार से कहा, ‘‘जांच टीम सही नहीं है। इसमें कॉमर्शियल पायलट को शामिल नहीं किया गया है। कॉमर्शियल प्लेन से जुड़े हादसे को एक कॉमर्शियल पायलट ही बेहतर तरीके से समझ सकता है।’’ पाकिस्तान ने प्लेन क्रैश की जांच के लिए चार सदस्यीय एक जांच टीम बनाई है। इसमें तीन सदस्य ‘एयरक्राफ्ट एक्सिडेंट इंवेस्टिगेशन बोर्ड’ के हैं, जबकि एक एयरफोर्स के सेफ्टी बोर्ड से है। ये तीन महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।

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नेपाल के रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना प्रमुख के बयान को देश का अपमान बताया; जनरल नरवणे ने कहा था- किसी और के इशारे पर लिपूलेख का विरोध कर रहा है नेपाल


  • सेना प्रमुख नरवणे ने कहा था कि नेपाल किसी और के इशारे पर विरोध कर रहा
  • नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी भारतीय सेना प्रमुख के बयान पर आपत्ति जताई थी

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 05:04 PM IST

काठमांडू. लिपुलेख-धाराचूला मार्ग के मुद्दे पर भारत और नेपाल में बयानबाजी जारी है। कुछ दिन पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने कहा था कि नेपाल किसी और के इशारे पर इस रास्ते का विरोध कर रहा है। अब नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने भारतीय सेना प्रमुख केे बयान की आलोचना की है। पोखरेल ने सोमवार को कहा- लिपुलेख मुद्दे पर भारतीय सेना प्रमुख का बयान हमारे देश के इतिहास का अपमान है। क्या भारतीय सेना प्रमुख का राजनीतिक बयान देना पेशेवर है? 
भारत ने 8 मई को लिपुलेख-धाराचूला मार्ग का उद्घाटन किया था। नेपाल ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए आपत्ति जताई थी। भारत ने इसे खारिज कर दिया था।
  

नरवणे का बयान अपमानजनक
पोखरेल ने ‘द राइजिंग नेपाल’ अखबार को दिए इंटरव्यू में लिपूलेख मुद्दे पर सवालों के जवाब दिए। जनरल नरवणें के बयान पर कह, ‘‘ उनका बयान अपमानजनक है। नेपाल के इतिहास, सामाजिक विशेषता और स्वतंत्रता की अनदेखी की गई है। भारतीय सेना प्रमुख ने नेपाली गोरखा जवानों की भावनाओं को भी आहत किया है। वो भारत की रक्षा के लिए अपना जीवन दांव पर लगा देते हैं।’’
नेपाली सेना की मिसाल 
नेपाल के रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘सेना प्रमुख का ऐसे राजनीतिक बयान देना कितना पेशेवर है? हमारे यहां ऐसा नहीं होता। नेपाली सेना ऐसे मामलों पर नहीं बोलती। नेपाल के एक करीबी और दोस्त के रूप में भारत को सकारात्मक प्रतक्रिया देनी चाहिए। जब बातचीत होगी तो हम स्पष्ट शब्दों में सब सामने रखेंगे। बातचीत दिमाग से नहीं बल्कि तथ्यों और सुबूतों के आधार की जाएगी।”
पिछले हफ्ते नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी कहा था कि दो पड़ोसी देशों के बीच सेना का बोलना सही नहीं है।

जनरल नरवणे ने कहा क्या था?
15 मई को जनरल नरवणे ने लिपुलेख दर्रे से 5 किलोमीटर पहले तक सड़क निर्माण पर नेपाल की आपत्ति पर हैरानी जताई थी। नरवणे ने चीन का नाम लिए बगैर उसकी तरफ इशारा किया था। नरवणे ने कहा था, “संभावना है कि नेपाल ऐसा किसी और के कहने पर लिपूलेख रास्ते का विरोध कर रहा है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की ओर से बनाई गई सड़क काली नदी के पश्चिम में है। इसलिए, मुझे नहीं पता कि वे (नेपाल) किस बात का विरोध कर रहे हैं।

लिपुलेख मार्ग के उद्घाटन के बाद नेपाल ने आपत्ति जताई थी
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 8 मई को लिपुलेख-धाराचूला मार्ग का उद्घाटन किया था। नेपाल ने इसे एकतरफा फैसला बताते हुए आपत्ति जताई थी। उसका दावा है कि महाकाली नदी के पूर्व का पूरा इलाका नेपाल की सीमा में आता है। जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था- लिपुलेख हमारे सीमा क्षेत्र में आता है। पहले भी इसी रास्ते से मानसरोवर यात्रा होती रही है। हमने अब सिर्फ इसी रास्ते पर निर्माण कर तीर्थ यात्रियों, स्थानीय लोगों और कारोबारियों के लिए अच्छी सड़क के जरिए आवाजाही को आसान बनाया है। 

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एलओसी पहुंचे आर्मी चीफ बाजवा ने कहा- कश्मीर विवादित क्षेत्र, अगर इसमें राजनीतिक और सैन्य तरीके से चुनौती दी गई तो माकूल जवाब देंगे


  • बाजवा ने कहा- कश्मीर को वैश्विक मुद्दा बनाने में हम नाकाम रहे, दुनिया को बात समझाने में भारत को कामयाबी मिली
  • ‘कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाया, जबकि यह नैतिक और संवैधानिक रूप से सही था’

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 04:31 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने ईद के मौके पर नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास स्थित पूना सैक्टर का दौरा किया। इस मौके पर भी उन्होंने कश्मीर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर को वैश्विक मुद्दा बनाने में नाकाम रहा। जबकि भारत दुनिया को अपनी बात समझाने में कामयाबी मिली। लिहाजा वैश्विक समुदाय का ध्यान कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और हिंसा से हट गया है। कश्मीर विवादित क्षेत्र है, किसी ने राजनीतिक और सैन्य रूप से चुनौती दी, तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

बीते कुछ दिनों में सीमापार घुसपैठ की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कश्मीर में 3 मई को मुठभेड़ में भारतीय सेना के कर्नल आशुतोष समेत 5 जवानों के शहीद होने के बाद भारत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मई में सुरक्षाबल 3 बड़े एनकाउंटर कर चुके हैं। यह भी रिपोर्ट्स आई थीं कि भारत की कार्रवाई की डर से पाकिस्तान एयरफोर्स ने अपनी सीमा में गश्त बढ़ा दी है। इन्हीं सब के चलते बाजवा नियंत्रण रेखा पर जायजा लेने गए थे।

कश्मीर विवादित हिस्सा
बाजवा के मुताबिक- ‘‘कश्मीर विवादित हिस्सा है। भारत ने उसे हमेशा हिस्सा बताया। भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनते हुए उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। वहां से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 भी हटा दिया, जबकि यह नैतिक और संवैधानिक रूप से सही था। हम कश्मीरियों के साथ इस बार भी भाईचारे से ईद मना रहे हैं। कश्मीर में भी भारत ने लॉकडाउन कर रखा है ताकि हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके।’’ बाजवा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान आर्मी खतरों को लेकर सतर्क है। सुरक्षा को लेकर हम देश की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।

मंत्री के बयान का भी जिक्र किया
बाजवा ने पाकिस्तान के सूचना मंत्री शिबली फराज के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान के लोग कश्मीरियों पर ढाए जा रहे जुल्मों को नहीं भूलेंगे। शिबली ने ट्वीट किया था- ‘‘कश्मीर पर हिंदुत्ववादी मोदी सरकार ने कब्जा कर लिया है। इससे पूरी दुनिया के सामने संकट खड़ा हो गया है।’’

कश्मीर में बीते 13 दिन में 3 बड़े एनकाउंटर
19 मई, श्रीनगर: सुरक्षाबलों ने डाउनटाउन इलाके में हिजबुल मुजाहिदीन 2 आतंकियों को मार गिराया। इसमें से एक जुनैद सहराई था जो अलगाववादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत प्रमुख मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा था।
16 मई, डोडा: सुरक्षाबलों ने डोडा के खोत्रा गांव में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी ताहिर को 5 घंटे चली मुठभेड़ में मार गिराया था।
6 मई, पुलवामा: सुरक्षाबलों ने हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज नायकू को मारा गिराया था। वह दो साल से मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था। वह बीमार मां से मिलने पुलवामा के गांव बेगपोरा आया था। पुलिस को इस गांव में नायकू और उसके कुछ साथियों की मौजूदगी का इनपुट मिला था।

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विवादित इलाकों में चीन के 5 हजार सैनिक, सड़क बनाने के लिए भारी मशीनें लाया; भारत ने भी ताकत बढ़ाई, पुल भी बना रहा


  • भारत और चीन के जवानों के बीच इस महीने तीन बार टकराव, कमांडर लेवल पर बातचीत से मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी हुई
  • रिपोर्ट में कहा गया- चीन ने भारतीय जवानों को बंधक बनाने के बाद छोड़ा, भारतीय सेना ने इन रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 04:13 PM IST

नई दिल्ली. लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास कई सेक्टरों में चीन ने करीब 5 हजार जवान तैनात कर दिए हैं। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इसी महीने दोनों सेनाओं के बीच तीन बार अलग-अलग जगहों पर टकराव हो चुका है। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

गलवान नाले के पास दोनों सेनाएं डटीं

  • न्यूज एजेंसी एएनआई को सूत्रों ने बताया कि एलएसी के पास चीन ने अपने सैनिकों को दौलत बेग ओल्डी और इससे जुड़े इलाकों के पास तैनात किया है, जहां पर भारतीय सेना की 81 और 114 ब्रिगेड तैनात है।
  • चीन की सेना एलएसी के पास स्थित पेनगॉन्ग लेक के पास अपने जवानों को ले आई है। इसके साथ ही वह यहां पर भारी वाहन भी लाई है। गलवान नाला एरिया में भारतीय पोस्ट केएम 120 से करीब 15 किमी दूर चीनी सैनिकों ने अपने टेंट लगा लिए हैं। चीन गलवान में बंकर बनाने के लिए भारी उपकरण भी ला रहा है।
  • भारतीय सीमा इस तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने पर ऐतराज भी जाहिर कर चुका है, लेकिन चीनी सेना लगातार काम में जुटी है।
  • इसी इलाके में भारतीय सेना ने पेट्रोलिंग पोस्ट 14 के पास ब्रिज बना रही है। इसका चीन की सेना ने विरोध किया था।
  • पोस्ट केएम 120 पर किसी भी वक्त सेना और आईटीबीपी के 250 जवान रहते हैं। लेकिन, भारत अब यहां ज्यादा जवान और उपकरण भेज रहा है। ईस्टर्न लद्दाख सेक्टर में भारत दौलतबेग ओल्डी में एयरफील्ड का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख में जवान भेजने में कर रहा है।
  • दौलत बेग ओल्डी में भारतीय सड़क के पास एयरफील्ड बनाने के पुराने प्रपोजल पर भी फिर से विचार किया जा रहा है। यह इलाका इस लिहाज से अहम है कि यहां पर चीन की सेना भारत के एरियल मूवमेंट पर नजर नहीं रख सकती है।

जवान बंधक बनाए जाने की रिपोर्ट पर भारत ने कहा- ये गलत हैं

भारतीय सेना ने रविवार सुबह एक रिपोर्ट को लेकर बयान जारी किया था। इसमें कहा गया था कि चीन की सेना ने भारतीय सैनिकों को कुछ दिन बंधक बनाने के बाद छोड़ा। सेना ने कहा- सीमा पर किसी भी भारतीय सैनिक को बंधक नहीं बनाया गया। जब मीडिया इस तरह की अपुष्ट चीजों को पब्लिश करता है तो यह केवल राष्ट्रीय हितों को चोट पहुंचाता है

इस महीने भारत और चीन में तीन झड़पें हुईं

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पैंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त इस झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया। फिर झड़प रुकी। 

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न लाइव इंटरव्यू दे रही थीं, इसी दौरान भूकंप आ गया; अब वीडियो वायरल हो रहा


  • रिक्टर पर भूकंप की तीव्रता 5.8 आंकी गई, पीएम ने कोई नुकसान न होने की जानकारी दी
  • जेसिंडा 2017 में न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री बनी थीं, दुनियाभर में वह काफी लोकप्रिय हैं

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 03:43 PM IST

वेलिंगटन. न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न सोमवार को राजधानी वेलिंगटन में टीवी पर लाइव इंटरव्यू दे रही थीं। इसी दौरान भूकंप आ गया। वह कुछ देर के लिए रुकीं तो जरूर, लेकिन उन्होंने अपना इंटरव्यू शांतिपूर्वक जारी रखा। भूकंप पर जेसिंडा का लाइव रिएक्शन अब सुर्खियां बटोर रहा है।

जिस समय भूकंप आया आर्डर्न ने शो के होस्ट रेयान ब्रिज से कहा, ‘‘रेयान…हम एक भूकंप का सामना कर रहे हैं। यहां चीजें हिल रही हैं…अगर तुम देखो तो मेरे पीछे की चीजें भी हिल रही हैं, पार्लियामेंट बिल्डिंग थोड़ी ज्यादा हिल रही है।’’ इस दौरान कैमरा और दूसरी चीजें भी हिलने लगती हैं। इसके बाद उन्होंने अपने होस्ट को आश्वासन दिया कि वह सुरक्षित हैं और फिर से इंटरव्यू शुरू हुआ। थोड़ी ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। 

भूकंप की तीव्रता 5.8 थी  

जियोनेट के अनुसार, वेलिंगटन और उसके आसपास के क्षेत्र में आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.8 आंकी गई। इसका केंद्र वेलिंगटन के पास के ही शहर लेविन के उत्तर-पश्चिम में जमीन से 30 किलोमीटर अंदर था। 

कोई नुकसान नहीं हुआ
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आर्डर्न ने जानकारी दी कि भूकंप से किसी को नुकसान नहीं हुआ। न्यूजीलैंड भूकंपीय रूप से सक्रिय ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है। प्रशांत महासागर में यह इलाका 40 हजार किमी में फैला है। 2011 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 185 लोग मारे गए थे। 2016 में यहां साउथ आईलैंड के कैकोरा में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें केवल 2 लोग मारे गए थे, लेकिन अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था। 

आर्डर्न 2017 में प्रधानमंत्री बनीं थीं
जेसिंडा आर्डर्न 2017 में न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री बनीं थीं। तब से लेकर अब तक कई  संकटों का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए कारण वह बहुत लोकप्रिय हो गई हैं। चाहे वो पिछले साल क्राइस्टचर्च में बड़े पैमाने पर गोलीबारी हो, दिसंबर में ज्वालामुखी विस्फोट या मौजूदा कोरोनावायरस महामारी हो। 



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अब तक 54.97 लाख संक्रमित और 3.46 लाख मौतें: ब्राजील संक्रमण का दूसरा हॉटस्पॉट बना, यहां से आने वाले यात्रियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया


  • अमेरिका ने उन विदेशी नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है जो पिछले 14 दिनों में ब्राजील गए थे
  • अमेरिका के बाद संक्रमण के सबसे ज्यादा 3 लाख 63 हजार 618 मामले ब्राजील में हैं

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 09:41 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 54 लाख 97 हजार 443 लोग संक्रमित हैं। 23 लाख 1 हजार 957 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 46 हजार 669 हो गया है। अमेरिका में अब तक 99 हजार 300 लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका ने उन विदेशी नागरिकों पर यात्रा प्रतिबंध लगाया है जो पिछले 14 दिनों में ब्राजील गए थे। दक्षिण अमेरिकी देश हाल में कोरोनावायरस को लेकर दुनिया का दूसरा हॉटस्पॉट बन गया है।
व्हाइट हाउस की तरफ से रविवार को जारी बयान के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि ब्राजील से आने वाले विदेशी नागरिक कोरोना के प्रसार की वजह न बनें।

कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 16,86,436 99,300 4,51,702
ब्राजील 3,65,213 22,746 1,49,911
रूस 3,44,481 3,541 1,13,299
स्पेन 2,82,852 28,752 1,96,958
ब्रिटेन 2,59,559 36,793 उपलब्ध नहीं
इटली 2,29,858 32,785 1,40,479
फ्रांस 1,82,584 28,367 64,617
जर्मनी 1,80,328 8,371 1,60,300
तुर्की 1,56,827 4,340 1,18,694
भारत 1,38,536 4,024 57,692

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

‘अमेरिका कोरोना का पहला वैक्सीन बनाएगा’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रोबर्ट ओ ब्रायन ने दावा किया कि कोरोना का वैक्सीन सबसे पहले अमेरिका बनाएगा। हम थेरेपी और टिका बनाने के लिए जोर-शोर से काम कर रहे हैं। वैक्सीन बनने के बााद उसे केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया के साथ साझा करेंगे। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार नहीं किया है कि चीन अपने लिए वैक्सीन चुराने की कोशिश करेगा।
ब्राजील: 3.63 लाख संक्रमित
ब्राजील में संक्रमण के मामले 3 लाख 65 हजार 213 हो गए हैं। वहीं, यहां 22 हजार 746 लोगों की मौत हो चुकी है। यहां एक दिन में संक्रमण के 16 हजार 220 मामले समने आए हैं, जबकि 703 लोगों की मौत हुई है। 

ब्राजील में प्रतिबंधों को लेकर प्रदर्शन करते राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के समर्थक।

अमेरिका में 24 घंटे में 638 जान गई

अमेरिका में एक दिन में 638 लोगों की मौत हुई। देश में मरने वालों की संख्या 99 हजार 300 हो गई है। यहां संक्रमितों की संख्या 16 लाख 86 हजार 436 हो चुकी है। वहीं, न्यूयॉर्क में संक्रमण के 3 लाख 71 हजार 193 केस हो चुके हैं। अमेरिका ब्राजील को 1000 वेंटिलेटर्स डोनेट कर रहा है। अमेरिका सरकार ने कहा है कि जल्द ही रक्षा और व्यापार में दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत किया जाएगा।

मेमोरियल डे विकेंड के दौरान न्यूयॉर्क के कोनी आईलैंड पर बैठे लोग। राज्य में संक्रमण के 3.71 लाख मामले हो चुके हैं।

चीली: 70 हजार केस

चीली में संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती मरीजों की संख्या के चलते यहां स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। देश में अब तक 70 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 700 लोगों की मौत हो चुकी है। राजधानी सैंटियागो में प्रतिबंधों को और सख्त कर दिया गया है।

चीली में सरकार द्वारा लोगों को फूड पार्सल उपलब्ध कराया जा रहा है।

ब्रिटिश पीएम ने अपने सलाहकार का बचाव किया

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लॉकडाउन के उल्लंघन के आरोपों को लेकर मुख्य सलाहकार डोमिनिक कुमिंग का बचाव किया है। जॉनसन ने कहा कि ऐसी स्थिति में कोई भी पिता ऐसा ही करता। डोमिनिक मार्च के अंत में खुद और पत्नी के पॉजिटिव आने के बाद अपने बच्चों को लेकर लंदन से डरहम गए थे। ताकि बच्चों की देखभाल हो सके।

ब्रिटेन : 1 जून से खुलेंगे स्कूल
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने रविवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें अपने उस सहयोगी को पद से हटाने की मांग खारिज कर दी जिन पर लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप हैं। साथ ही कह कि 1 जून से स्कूल खुल जाएंगे। कुछ स्कूल 15 जून से खुलेंगे। इसके लिए सख्त गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं। क्लासेज में बच्चों की संख्या तय की जाएगी। सैनिटाइजेशन का सही इंतजाम हो। आउटडोर एक्टिविटीज बढ़ाई जाएं। अगर कोई स्टाफर या बच्चा संदिग्ध दिखे तो फौरन उसका टेस्ट कराया जाए।

इजरायल: 4 दिन में कोई मौत नहीं
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, संक्रमण के चलते चार दिनों में एक भी मौत नहीं हुई है। 20 मई को आखिरी मौत हुई थी। यहां मरने वालों की संख्या 279 है। देश में संक्रमण के पांच नए मामले मिले हैं। कुल आंकड़ा बढ़कर 16 हजार 717 हो गया है। यह 7 मार्च के बाद से सबसे कम संख्या है। स्वास्थ्य मंत्री ने रविवार को कहा कि जारी प्रतिबंधों में 14 जून से राहत दी जाएगी। ड्रामा, फिल्में और शो जनता के लिए फिर से शुरू होंगे। इस दौरान लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए मास्क लगाना होगा।

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फ्रांस ने कहा- भारत को राफेल जेट फाइटर्स तय वक्त पर मिलेंगे, इनकी डिलीवरी में देरी नहीं होगी


  • फ्रांस के राजदूत ने कहा- जो रूपरेखा बनी थी, उसका पूरा पालन किया जा रहा है
  • भारत ने फ्रांस से 36 राफेल जेट्स खरीदे हैं, इसमें 30 लड़ाकू और छह ट्रेनर विमान हैं

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 11:47 PM IST

नई दिल्ली. फ्रांस ने कहा है कि भारत को 36 राफेल विमानों की डिलीवरी तय वक्त पर ही की जाएगी। इसमें देरी नहीं होगी। भारत में फ्रांस के राजदूत एमैनुएल लेनैन ने कहा- विमानों की डिलीवरी उसी समय पर होगी जो तय की गई थी। लेनैन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में बताया कि राफेल जेट की डिलीवरी को लेकर जो रूपरेखा बनी थी, अभी तक उसका पूरा पालन किया गया है।

डील के अनुसार, फ्रांस ने अप्रैल के अंत तक एक राफेल जेट भारत को दे दिया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पहला राफेल आठ अक्टूबर को प्राप्त किया था। लेनैन ने कहा, “हम जल्द से जल्द फ्रांस से चार राफेल जेट की पहली खेप भारत लाने के लिए व्यवस्थाएं करने में भारतीय वायुसेना की मदद कर रहे हैं। अभी ऐसा कोई कारण नहीं हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जाए कि शेड्यूल को बनाए रखा नहीं जाएगा।”
इन 36 राफेल जेट्स में 30 फाइटर जेट्स हैं और छह ट्रेनर विमान हैं। ट्रेनर जेट्स दो सीटों वाले होंगे। इनमें फाइटर जेट्स के सभी फीचर होंगे।

58 हजार करोड़ की लागत से 36 राफेल जेट्स खरीदे गए हैं
भारत ने सितंबर 2016 में लगभग 58 हजार करोड़ रुपये की लागत से 36 राफेल लड़ाकू जेट की खरीद के लिए फ्रांस के साथ डील साइन की थी। राफेल जेट के आने से  भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी। यह विमान कई ताकतवर हथियारों को ले जाने में सक्षम है। इसमें मिटियोर एयर टू एयर और स्कैल्प क्रूज मिसाइल साथ भी लगी होंगी।

मिसाइल सिस्टम के अलावा, राफेल जेट और भी मोडिफाइड होकर आएंगे। इसमें इजरायल हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, रडार वॉर्निंग रिसीवर, लो बैंड जैमर, 10 घंटे की उड़ान की डेटा रिकॉर्डिंग, इन्फ्रा-रेड सर्च और ट्रैकिंग सिस्टम शामिल हैं।

कोरोना संक्रमण से जूझ रहा है फ्रांस
कोरोनावायरस के बढ़ते संक्रमण को काबू करने के लिए फ्रांस उलझा हुआ है। ऐसे में आशंकाएं थीं कि महामारी के कारण राफेल की डिलीवरी में देरी हो सकती है। फ्रांस में अब तक 1 लाख 45 हजार मामले सामने आए हैं, जबकि 28 हजार 330 लोगों की मौत हो चुकी है।

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जांच रिपोर्ट में गंभीर सवाल; लैंडिंग की पहली कोशिश में प्लेन ने रनवे को तीन बार छुआ, फिर भी एटीसी को कोई सूचना नहीं दी


  • रनवे पर मिले रगड़ने के निशान, जांचकर्ताओं ने कहा- इसी वजह से इंजन में खराबी आई होगी
  • पाकिस्तान के के नागरिक उड्‌डयन प्राधिकरण (सीएए) ने तैयार की रिपोर्ट, ब्लैक बॉक्स की जांच शुरू

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 09:34 PM IST

कराची. पाकिस्तान के कराची में शुक्रवार को हुए विमान हादसे की शुरुआती रिपोर्ट में प्लेन ऑपरेशन को लेकर कई  सवाल सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी क्या वजह थी, जिससे कॉकपिट में बैठे क्रू मेंबर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) को वक्त पर जानकारी नहीं दे पाए।

जियो न्यूज के अनुसार पाकिस्तान के जांचकर्ता पीआईए (पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस) के प्लेन हादसे की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हादसा पायलट की गलती से हुआ? या कोई तकनीकी खामी थी।

तीन बार रनवे को छुआ
 सीएए की रिपोर्ट के अनुसार, फ्लाइट ने जिन्ना नेशनल एयरपोर्ट पर उतरने की पहली कोशिश में तीन बार रनवे को छुआ था। रनवे पर रगड़ के साथ चिंगारी भी भड़की थी। तीसरी बार रनवे छूने के बाद पायलट ने प्लेन को फिर से हवा में उठा लिया। सबसे अजीब बात यह है कि इस दौरान कॉकपिट में मौजूद क्रू ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को कोई जानकारी नहीं। ऐसी स्थिति में प्लेन के आटोमैटेड इमरजेंसी सिस्टम बंद हो जाते हैं। तेज अलार्म बजने लगता है। इसको अनदेखा करना असंभव है।

रगड़ से इंजन के खराब होने की आशंका
‘द न्यूज इंटरनेशनल’ ने सीएए के सूत्रों के हवाले से बताया कि संभवत: जब विमान जमीन से रगड़ खाया होगा तो इंजन का ऑयल और फ्यूल पंप खराब हो गए होंगे। इनमें लीकेज हुई होगी। इसके चलते पायलट को विमान ऊंचा ले जाने के लिए जरूरी थ्रस्ट नहीं मिला होगा। पायलट ने पहली बार लैंडिंग के दौरान एटीसी को किसी खराबी की जानकारी नहीं दी। और खुद गो-अराउंड (गोल चक्कर) का फैसला लिया। इसके बाद एटीसी को जानकारी दी गई।

इंजन में खराबी
एटीसी ने पायलट को विमान को तीन हजार फीट की ऊंचाई पर ले जाने को कहा था, लेकिन वह केवल 1800 फीट की ऊंचाई तक ही ले जा पाया। इसके बाद जब फिर से कहा गया तो फर्स्ट ऑफिसर (पायलट) ने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं। जांचकर्ताओं ने बताया कि इंजन में खराबी की वजह से प्लेन उतनी उंचाई पर नहीं पहुंच पाया। इसके बाद प्लेन झुका और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
 
ब्लैक बॉक्स की जांच शुरू की गई
पीआईए के सीईओ अरशद मलिक ने बताया है कि विमान का ब्लैक बॉक्स जांच टीम को दे दिया गया है। पीआईए के इंजीनियरिंग और मेंटीनेंस डिपार्टमेंट के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त विमान की दो महीने पहले जांच की गई थी और इसने दुर्घटना से एक दिन पहले मस्कट से लाहौर के लिए उड़ान भरी थी।

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न्यूयॉर्क टाइम्स ने फ्रंट पेज पर 1000 मृतकों के नाम छापे, शीर्षक लिखा- अमेरिका 1 लाख मौतों के करीब, एक बेहिसाब नुकसान


  • अखबार ने मृतकों का नाम, उम्र और पता के बाद उनके बारे में एक लाइन लिख कर उन्हें याद किया
  • सोशल मीडिया यूजर्स ने मृतकों को याद करने के इस अनूठे तरीके के लिए अखबार को धन्यवाद दिया

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 04:42 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 1 लाख के करीब पहुंच गई। अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने रविवार को अपने फ्रंट पेज पर 1000 मृतकों के नाम छापे। अखबार ने इन सभी के लिए सिर्फ एक लाइन का शोक संदेश लिखा, ‘‘अमेरिका 1 लाख मौतों के करीब, एक बेहिसाब नुकसान। वे महज एक लिस्ट में शामिल नाम नहीं थे, वे हम सब थे।’’

अखबार ने लिखा कि यहां जिन एक हजार लोग के नाम हैं, वे कुल मौतों का सिर्फ 1% हैं। यह लिस्ट इतनी लंबी थी कि अखबार के 12वें पेज तक मृतकों के नाम लिखे जाते। इन लोगों का नाम, उम्र और पता के बाद उनके बारे में एक लाइन लिख कर उन्हें याद किया गया।

अखबार का फ्रंट पेज सोशल मीडिया में वायरल

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने इस आर्टिकल में लिखा कि सिर्फ संख्या के आधार पर वायरस का अमेरिका पर असर मापा नहीं जा सकता। चाहे मृतकों, मरीजों या इसकी वजह से नौकरियां गंवाने वालों की संख्या क्यों न हो। अखबार ने शनिवार देर रात जैसे ही अपने फ्रंट पेज का स्क्रीन शॉट जारी किया, यह सोशल मीडिया में वायरल हो गया। यूजर्स ने मृतकों को याद करने के इस अनूठे तरीके के लिए अखबार को धन्यवाद दिया।

मृतकों को इस अंदाज में याद किया गया:

  • राेमी कॉन, 91- न्यूयॉर्क सिटी, गेस्टापो से 56 यहूदी परिवारों को बचाया था।
  • अल्बर्ट पेट्रोसेली, 73- न्यूयॉर्क सिटी के एक चीफ, जिन्होंने 9/11 के दुर्भाग्यपूर्ण दिन आए कॉल का जवाब दिया था।
  • सेड्रिक डिक्सन, 48- न्यूयॉर्क सिटी, हार्लेम के एक पुलिस डिक्टेटिव, जिनके पास पूछताछ का गिफ्ट था।
  • बैसी ऑफिओंग, 25-  जिसने अपने दोस्त की बदतर हालत देखी और उनका सर्वश्रेष्ठ सामने लेकर आए।
  • चार्ल्स कॉन्स्टैंटिनो, 86- मेनलो पार्क, एनजे, न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ 40 सालों तक काम किया। 

9/11 के बाद भी ऐसे ही मृतकों को याद किया था

न्यूयॉर्क टाइम्स ने दूसरी बार इस अंदाज में इस तरह का काम किया है। इससे पहले 2011 के 9 सितंबर को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले में मारे गए लोगों को ऐसे ही श्रद्धांजलि दी थी। इस हमले में 2 हजार 977 लोगों की मौत हुई थी और 25 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। 

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अब तक 54.17 लाख संक्रमित और 3.44 लाख मौतें: यूरोप में मरीजों की संख्या 19 लाख के करीब, रूस सबसे ज्यादा प्रभावित


  • अमेरिका में अब तक 98 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 16.66 लाख संक्रमित हैं
  • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में 24 घंटे में 1.09 लाख मौतें हुई हैं, और 5600 जानें गईं हैं

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 01:46 PM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 54 लाख 17 हजार 348 लोग संक्रमित हैं। 22 लाख 54 हजार 299 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 44 हजार 194 हो गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित यूरोप में संक्रमण का आंकड़ा 18 लाख 94 हजार 967 हो गए हैं। यह कुल आंकड़ों का करीब 35% है। महाद्वीप में सबसे ज्यादा मामले रूस में तीन लाख 44 हजार 481 हैं। 
कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 16,66,828 98,683 4,46,914
ब्राजील 3,49,113  22,165 1,42,587
रूस 3,44,481 3,541 1,13,299
स्पेन 2,82,370 28,678 1,96,958
ब्रिटेन 2,57,154 36,675 उपलब्ध नहीं
इटली 2,29,327 32,735 1,38,840
फ्रांस 1,82,469 28,332 64,547
जर्मनी 1,79,986 8,366 1,59,900
तुर्की 1,55,686 4,308 1,17,602
ईरान 1,33,521 7,359 1,04,072

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।
ट्रम्प के गोल्फ खेलने पर विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 75 दिन में पहली बार अपने प्राइवेट गोल्फ कोर्स में गोल्फ खलने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ चल रहे सीक्रेट सर्विस के एजेंटों ने मास्क पहना था, लेकिन राष्ट्रपति बिना मास्क के नजर आए। महामारी के बीच उनके गोल्फ खेलने जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

राष्ट्रपति ट्रम्प 75 दिनों में पहली बार गोल्फ खेलने अपने प्राइवेट गोल्फ कोर्स पहुंचे।

24 घंटे में 1.09 लाख केस मिले: डब्ल्यूएचओ
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 24 घंटे में 1 लाख 9 हजार 536 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 5600 लोगों की मौत हुई है। उत्तरी और दक्षिण अमेरिका में पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा केस मिले हैं। वहीं, यूरोप में मरने वालों की संख्या 1 लाख 73 हजार के करीब पहुंच गई है।

अमेरिका: एक दिन में 1127 मौतें
अमेरिका में अब तक सबसे ज्यादा 98 हजार 683 लोगों की जान गई है। देश के सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क में 24 घंटे में 84 लोगों की जान गई है। यहां मार्च के बाद पहली बार एक दिन में मरने वालों की संख्या 100 से कम दर्ज की गई है। देश में 24 घंटे में 1127 लोगों की मौत हुई है। यहां संक्रमितों का आंकड़ा 16 लाख 66 हजार 828 हो गया है। न्यूयॉर्क में अब संक्रमण और मौतों की संख्या में कमी आ रही है। यहां अब तक 3 लाख 69 हजार 656 लोग संक्रमित हैं, जबकि 29 हजार 112 की मौत हो चुकी है।

कैलिफोर्निया में कोरोना मरीज को अस्पताल ले जाते स्वास्थ्यकर्मी। अमेरिका में महामारी से गोरों की तुलना में अश्वेत तीन गुना ज्यादा प्रभावित हैं।  

ब्राजील: 3.49 लाख केस

ब्राजील में संक्रमण के 3 लाख 49 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। अमेरिका के बाद यह दूसरा सबसे संक्रमित देश है। यहां 22 हजार 165 लोगों की जान जा चुकी है।

ब्राजील के एक कब्रिस्तान में कोरोना से जान गंवाने वाले एक युवक के शव को दफन करते परिजन।

इटली: 32,735 लोगों की मौत हुई
इटली में 24 घंटे में 119 लोगों की जान गई है। यहां मरने वालों की संख्या अब 32 हजार 735 हो गई है। वहीं, संक्रमण का आंकड़ा 2 लाख 29 हजार 327 हो चुका है। देश में अब तक 1 लाख 38 हजार 840 ठीक हो चुके हैं।

इटली में बोरगेज गैलरी को दोबारा लोगों की लिए खोल दिया गया है। हालांकि, लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।

स्पेन: मौतों में कमी
स्पेन के स्वास्थ्य और समाज कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को पुष्टि की कि नई मौतों और मामलों में कमी आई है। यहां 24 घंटे में 48 लोगों की जान गई है, जबकि 466 नए केस मिले हैं। यहां अब तक 2.82 लाख संक्रमित हैं, जबकि 28 हजार 678 लोगोम की मौत हो चुकी है।

स्पेन की वोक्स पार्टी ने कोरोनावायरस से निपटने को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

चिली: 65,393 संक्रमित
चिली में संक्रमितों की संख्या 65 हजार 393 पहुंच गई है और 673 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि 3237 नए मामलों में 299 बिना लक्षण वाले मामले भी शामिल है। मार्च में देश में पहली बार बीमारी का पता चलने के बाद से अब तक कुल 4 लाख 57 हजार 332 टेस्ट किए गए हैं।

चीली में क्वारैंटाइन में रहने के दौरान सरकार से मदद न मिलने के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया।

द.कोरिया: 25 नए मामले
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, लगातार तीसरे दिन यहां संक्रमण का मामला 20 से ऊपर रहा। नए मामलों में आठ विदेशी नागरिकों के थे। वहीं, अब तक देश में 266 लोगों की मौत हो चुकी है। कुल मृत्यु दर 2.38% रहा। देश में संक्रमण को लेकर 3 जनवरी के बाद से 8 लाख 20 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है। 7 लाख 88 हजार 766 लोग टेस्ट में नेगेटिव पाए गए हैं, जबकि 20 हजार 333 सैम्पल्स की जांच की जा रही है।

तुर्की: 1.55 लाख मामले
तुर्की में शनिवार को 1100 नए मामले मिले। देश में संक्रमितों की संख्या 1 लाख 55 हजार 686 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री फहार्टिन कोजा ने कहा कि 24 घंटे में 32 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों की संख्या 4,308 हो गई है। उन्होंने कहा कि 1,491 मरीज ठीक हुए हैं। अब तक कुल 1 लाख 17 हजार 602 मरीज ठीक हो चुके हैं।

इस्तानबुल में एक होटल की स्टाफ टेबल को साफ करती हुई। एशिया में तुर्की में सबसे ज्यादा मामले हैं।

ईरान: 7359 मौतें
ईरान में एक दिन में 59 लोगों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 7,359 हो गई। देश में अब तक 1 लाख 4 हजार 72 मरीज ठीक हो चुके हैं। एक दिन पहले राष्ट्रपति हसन रूहानी ने देश के पर्यटन स्थल, संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों को खोलने की घोषणा की है। महामारी के कारण करीब तीन महीने तक बंद रहने के बाद यह रविवार को फिर से खुलेंगे। रूहानी ने कहा कि सोमवार से सुबह तीन घंटे के लिए और दोपहर तीन घंटे के लिए पवित्र उपसना स्थल खुलेंगे।

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अमेरिकी नौसेना ने नए लेजर हथियार का परीक्षण किया, उड़ते हुए विमान को भी नष्ट कर सकता है


  • 16 मई को किया गया था टेस्ट, अमेरिकी नौसेना ने परीक्षण की जगह नहीं बताई
  • लेजर हथियार की पावर भी नहीं बताई गई, 150 किलोवॉट होने की उम्मीद

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 04:26 PM IST

हॉन्गकॉन्ग. अमेरिकी नौसेना ने एक हाई-एनर्जी लेजर हथियार का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण प्रशांत महासागर में एक जंगी जहाज पर किया गया। नौसेना की पैसिफिक फ्लीट ने कहा कि यह हथियार इतना ताकतवर है कि उड़े रहे एयरक्राफ्ट को हवा में ही नष्ट कर सकता है। 

नेवी ने इस परीक्षण के फोटो और वीडियो भी जारी किए हैं। इसमें दिख रहा है कि वॉरशिप के डेक से एक तेज लेजर बीम निकल रही है। वीडियो के मुताबिक, इस लेजर बीम के सामने आने वाला ड्रोन जलने लगता है। नौसेना का कहना है कि लेजर हथियार ड्रोन या हथियारों वाली छोटी नौकाओं के खिलाफ भी काम आ सकता है। 

16 मई को प्रशांत महासागर में हुआ टेस्ट
नौसेना ने अभी यह नहीं बताया है कि लेजर हथियार का टेस्ट कहां किया गया है। उन्होंने सिर्फ यह बताया है कि यह 16 मई को प्रशांत महासागर में परीक्षण हुआ था। लेजर हथियार की पावर के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी गई। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज की 2018 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हथियार की पावर 150 किलोवॉट हो सकती है। पोर्टलैंड के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन कैरी सैंडर्स ने कहा, ‘‘यूएवी और छोटे एयरक्राफ्ट पर इस टेस्ट को करके हमें इस लेजर हथियार के ताकत के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। नई पावर के साथ हम समुद्र में युद्ध को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।’’

इस तरह काम करता है लेजर हथियार
सीएनएन से बात करते हुए लेजर वेपन सिस्टम ऑफिसर लेफ्टिनेंट केल ह्यूज ने लेजर हथियारों के बारे में बताया था। उन्होंने बताया कि ये हथियार किसी भी चीज पर भारी मात्रा में फोटॉन डालते हैं। इससे उस चीज में आग लग जाती है। लेजर हथियार पर हवा और रेंज का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। केवल टारगेट सेट करना पड़ता है और काम हो जाता है।

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प्लेन क्रैश में बचे बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट का भारत से ताल्लुक; यूपी के अमरोहा आकर पुश्तैनी मकान देखना चाहते हैं


  • बैंक अफसर जफर मसूद का परिवार 1952 में पाकिस्तान चला गया था
  • मसूद का ताल्लुक पाकीजा फिल्म के डायरेक्टर कमाल अमरोही के खानदान से है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 04:08 PM IST

कराची. पाकिस्तान प्लेन हादसे में बचे सिर्फ दो लोगों में से एक जफर मसूद भारत से रिश्ता रखते हैं। मसूद पाकिस्तान के बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट हैं। उत्तर प्रदेश के अमरोहा के सद्दो मोहल्ले में उनके पुरखों का घर है। उनका परिवार 1952 में पाकिस्तान चला गया था। मसूद को भारत से बेहद लगाव है। वे एक बार अमरोही आकर पुश्तैनी घर को देखता चाहते हैं। ये बातें मुंबई में रह रहे मसूद के रिश्तेदार आदिल जफर ने बताईं।

जफर मसूद अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन हालत ठीक है।

मसूद के दादा वकील और पिता टीवी आर्टिस्ट थे

 मसूद का ताल्लुक पाकीजा फिल्म के डायरेक्टर कमाल अमरोही के खानदान से है। मसूद के परनाना ताकी अमरोही जो कि पाकिस्तानी पत्रकार थे, वे कमाल अमरोही के कजिन थे। मसूद के दादा मसूद हसन पाकिस्तान में वकील और पिता मुनव्वर सईद टीवी आर्टिस्ट थे।

प्लेन क्रैश में 97 लोगों की मौत

कराची में शुक्रवार को हुए प्लेन क्रैश में मसूद को 4 फ्रैक्चर हुए हैं। उनकी कॉलर बोन और हिप में चोट आई है। आदिल ने बताया कि उन्होंने मसूद के घरवालों से फोन पर बात की थी। हादसे में मसूद का जिंदा बचना उनके लिए किसी अजूबे से कम नहीं। क्योंकि, प्लेन में सवार 99 लोगों में से सिर्फ 2 की ही जान बच पाई।

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अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बिल पेश, इसमें यूएस में पढ़े विदेशी कामगारों को तरजीह देने का प्रस्ताव


  • एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ही ज्यादा होते हैं
  • बिल में कहा गया है कि एच-1बी धारक को नियुक्ति देने पर अमेरिकी वर्कर्स पर इसका उल्टा प्रभाव नहीं पड़ेगा
  • सीनेटर चक ग्रेसली ने कहा- इसका मकसद अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और बेहतर सैलरी सुनिश्चित करना

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 02:51 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एच-1बी वीजा कानूनों में बदलाव को लेकर बिल पेश किया गया है। इसमें अमेरिका में पढ़े विदेशी टेक प्रोफेशनल्स को तरजीह देने की बात कही गई है। बिल का मकसद अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा और बेहतर सैलरी सुनिश्चित करना है। एच-1बी वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ही ज्यादा होते हैं।

अगर बिल, कानून का रूप लेता है तो यह पहली बार होगा कि अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विस एच-1बी वीजा प्राथमिकता का आधार पर देगी। प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका में एजुकेटेड योग्य छात्रों को एच-1बी वीजा के लिए चुनना है। साथ ही इसके तहत उन छात्रों को भी मौका मिलेगा जिनके पास एडवांस्ड डिग्री है और जो ज्यादा सैलरी पा रहे हैं।

किन सांसदों ने बिल पेश किया
सीनेट में: चक ग्रेसली, डिक डर्बन।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में: बिल पास्क्रेल, पॉल गोसर, रो खन्ना, फ्रेंक पालोन और लांस गूडन। 

क्या है बिल का मकसद?
इसके तहत एच-1बी या एल-1 वीजाधारकों को अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने से रोकना है। बिल में साफतौर पर कहा गया है कि एच-1बी धारक को नियुक्ति देने पर अमेरिकी वर्कर्स पर इसका उल्टा प्रभाव नहीं पड़ेगा। विशेष रूप से बिल 50 से ज्यादा कर्मचारियों वाली ऐसी कंपनियों को प्रतिबंधित करेगा, जिनमें से कम से कम आधे एच-1बी या एल-1 वीजाधारक हैं। साथ ही वे कंपनियां जो अतिरिक्त एच -1 बी कर्मचारियों को काम पर रखती हैं।

‘हमारी नीतियां हमारा ही नुकसान कर रहीं’
सीनेटर ग्रेसली ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ कंपनियां हमारी बनाई नीतियों के आधार पर कम तनख्वाह पर कर्मचारियों को भर्ती करती हैं, जिससे अमेरिकियों को नुकसान होता है। हमें ऐसी नीतियां बनाने की जरूरत है, जिसमें अमेरिकन वर्कर्स को तरजीह मिले। हमारा बिल यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाता है कि कार्यक्रम अमेरिकियों और कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए समान रूप से काम करते हैं।’’

क्या है एच-1बी वीजा?

एच-1 बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के जरिए करती हैं। नियम के अनुसार, अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। यूएससीआईएस के मुताबिक, एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।

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चारों तरफ आग थी, सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं; 10 फीट नीचे छलांग लगाकर खुद को बचाया


  • कराची में शुक्रवार को लैंडिंग से कुछ मिनट पहले प्लेन क्रैश हुआ था, 97 लोग मारे गए सिर्फ 2 बचे
  • इंजन फेल होने की वजह से हादसा हुआ, रिहायशी इलाके में क्रैश होने से कई घरों को भी नुकसान

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 12:46 PM IST

कराची. पाकिस्तान के कराची में शुक्रवार को हुए प्लेन हादसे में 99 में से सिर्फ 2 लोग बच पाए। इनमें से एक मोहम्मद जुबेर हैं। उन्होंने मीडिया को फोन पर हादसे के बाद का हाल बताया। जुबैर ने कहा- “चारों तरफ आग ही आग दिख रही थी। कुछ नजर नहीं आ रहा था, सिर्फ लोगों की चीख सुनाई पड़ रही थी। एक तरफ थोड़ी लाइट नजर आई, मैं अपनी सीट बेल्ट खोलकर उसी तरफ बढ़ गया। मैंने 10 फीट नीचे कूदकर खुद को बचाया।”

मोहम्मद जुबेर कराची के सिविल अस्पताल में भर्ती हैं।

लोग ईद मनाने आ रहे थे

पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर जुबेर गुजरांवाला में एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। प्लेन क्रैश होने की वजह से थोड़े जख्मी हो गए, लेकिन गनीमत रही कि जान बच गई। उन्होंने बताया- “ईद मनाने के लिए कई परिवार लाहौर से कराची आ रहे थे। जिस तरह सफर रहा उससे किसी को नहीं लगा कि कोई दिक्कत होगी, बल्कि सभी को सेफ लैंडिंग की उम्मीद थी।

लैंडिंग के एनाउंसमेंट के 2-3 मिनट में प्लेन क्रैश हो गया

जुबेर ने बताया- “पायलट ने लैंडिंग का एनाउंसमेंट कर दिया था, लेकिन अचानक प्लेन झटके खाने लगा। लोग सलामती की दुआ मांगने लगे। पायलट ने 10-15 मिनट के बीच लैंडिंग की दूसरी कोशिश की, लेकिन इस बार एनाउंसमेंट के 2-3 मिनट में ही प्लेन क्रैश हो गया।

बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट भी बचे

जुबेर के अलावा बचे दूसरे पैसेंजर पाकिस्तान के बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट जफर मसूद हैं। उन्हें 4 फ्रैक्चर हुए हैं, लेकिन हालत ठीक है। मसूद का रिश्ता भारत से भी है। वे उत्तर प्रदेश के अमरोहा शहर से ताल्लुक रखते हैं और पाकीजा फिल्म के डायरेक्टर कमाल अमरोही के खानदान से हैं।

अस्पताल में जफर मसूद।
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लोगों ने कहा- हमें तो हादसे की आवाज भी नहीं सुनाई दी, छत पर गए तो बस धुआं दिखाई दे रहा था


  • पीआईए का यात्री विमान कराची एयरपोर्ट में लैंडिंग से चंद मिनट पहले मॉडल कॉलोनी में क्रैश हो गया
  • हादसे के दौरान लोगों को लगा कि यह आवाज विमानों के लैंड या टेकऑफ की है, जो यहां के लिए आम बात है

जोया अनवर

May 22, 2020, 11:07 PM IST

कराची. पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) का यात्री विमान एक घनी आबादी वाले इलाके मॉडल कॉलोनी में क्रैश हो गया। पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला हफीज के मुताबिक, पीआईए की फ्लाइट पीके 803 लाहौर से कराची जा रही थी और इसमें 8 क्रू मेंबर्स समेत 98 लोग सवार थे। हादसे वाली जगह से अब तक 37 शव निकाले जा चुके हैं। इनमें एक 5 साल का बच्चा भी है।

जब प्लेन मॉडल कॉलोनी में क्रैश हुआ, उस वक्त लोगों को लगा कि ये सामान्य पीएमटी धमाका है, जो एयरपोर्ट के नजदीक बसी इस कॉलोनी के लिए आम बात है। यहां रहने वाली सीमा ने कहा कि उन्हें तो इस क्रैश की आवाज भी नहीं सुनाई दी। इसकी वजह यह हो सकती है कि इंजन से आवाज नहीं आ रही थी। उन्हें इस हादसे की खबर फोन पर बहन के जरिए मिली।

सीमा ने बताया कि जब वे बाहर देखने के लिए निकलीं तो हर जगह धुआं था। जल्द ही एम्बुलेंस आ गई। ऐसा लग रहा था, जैसे प्लेन दो इमारतों के बीच फंस गया था। थोड़ी ही देर बाद पावर कट हो गया। इसके बाद रेंजर्स ने रेस्क्यू वाले इलाके में लोगों और मीडिया के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी।

क्रैश साइट के करीब मेमन गोथ इलाके में रहने वाली फैजा ने कहा- हादसे की जगह हमारे घर से 7 किलोमीटर दूर है। हम लोग खुशकिस्मत हैं कि उस जगह से दूर थे। लेकिन, जब हम छत पर चढ़े तो हम वहां से धुआं उठता देख रहे थे। यहीं रहने वाली सलमा ने बताया कि मेरे बेटे के साथ पढ़ने वाला एक बच्चा मॉडल कॉलोनी में रहता है। शुक्र है कि वो और उसका परिवार हादसे के वक्त घर पर नहीं था। हम लोग इस हादसे से हिल गए हैं।

बिजली भी बंद
घटना स्थल से दो गली छोड़कर रहने वाली फारिया कहती हैं, “यह दिन भी किसी आमदिन की तरह था। बाहर तेज तपिश है। लिहाजा, हम घर में ही थे। मैं वॉटर पम्प का ऑयल चेंज कर रही थी। अचानक तेज धमाका हुआ। मुझे लगा कि कोई बम धमाका हुआ। बिजली भी बंद हो गई। ऊपर जाकर देखा तो प्लेन क्रैश हुआ था। कुछ ही देर में इलाका आग से घिर गया।”
 
लोगों ने मदद की
फारिया आगे कहती हैं, “लोग मदद कर रहे थे। आग लगी थी इसलिए, बहुत आगे जाना खतरनाक था। रमजान की वजह से लोग अफ्तारी भी बांट रहे थे। अब तक बिजली नहीं आई है। सैनिक लाशें निकाल रहे हैं। मैं अब भी सदमे में हूं कि कैसे अचानक कई लोगों के लिए यह दिन मनहूस बन गया। वो भी ईद से ठीक पहले।”  

नेटवर्क भी बंद
मुनीर भी इसी इलाके में रहते हैं। वो कहते हैं, “जहां हादसा हुआ। उसके करीब ही मेरे दोस्त का घर है। मैंने उसे फोन करने की कोशिश की लेकिन, नेटवर्क की दिक्कत आ गई है। मैंने उसके घर जाने की कोशिश की। लेकिन, इलाका आग और धुएं में घिरा था। एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड मौजूद हैं। लोग वीडियो बना रहे हैं। यहां अब भी क्रेन है। जो मलबा और लाशें हटा रही है।” 

हादसे में बाल-बाल बचे बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसीडेंट

बैंक ऑफ पंजाब के प्रेसीडेंट जफर मसूद पीआईए के उसी विमान में सवार थे, जो क्रैश हुआ। खुशकिस्मती से वह इस हादसे से बच गए। उनके चाचा मुमताज आलम ने कहा कि मसूद को मॉडल कॉलोनी के लोगों ने मलबे से निकाला। इसके बाद बचाव कर्मियों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। आलम कहते हैं- यह करिश्मा ही है कि मसूद बच गए। अब उनका परिवार अस्पताल में साथ है। मसूद ने अपनी मां को बताया कि वो सुरक्षित हैं। उनका फोन भी ठीक से काम कर रहा है।

सोशल मीडिया पर पैसेंजर लिस्ट सर्कुलेट होने पर नाराजगी
हादसे के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में विमान में सवार यात्रियों की लिस्ट जारी की गई। आमतौर पर सिविल एविएशन अथॉरिटी यह लिस्ट जारी करती है। डिजिटल राइट्स फाउंडेशन नाम का एनजीओ चलाने वाली निगात दाद कहती हैं कि यह निंदनीय काम है, क्योंकि इससे पैसेंजर्स की प्राइवेसी खत्म होती है। जरा उस परिवार के बारे में सोचिए जिसे इन जरियों से विमान में बैठे अपने करीबियों के बारे में पता चला होगा। जरा सोचिए कि वॉट्सऐप पर फॉरवर्ड हुई ऐसी किसी लिस्ट में कोई शख्स लगातार किसी अपने का नाम खोज रहा होगा।निगत ने कहा- केवल क्लिक्स और रेटिंग के लिए कई मीडिया हाउस उसूलों को ताक पर रख देते हैं। मुझे लगता है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों को प्रमाणिकता का भी ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि जब वे ट्विटर पर कोई सूचना शेयर करते हैं तो उनका यह कदम लोगों की भलाई की भलाई के काम नहीं आ रहा होता है। इसके उलट ये कदम कई लोगों को मुश्किल में डाल देता है। ऐसे कानून होने चाहिए कि इस तरह के हालात में लोगों की निजता का सम्मान किया जाए, ना कि चंद पलों की शोहरत के लिए ऐसी हरकत की जाए।

इस तरह यात्रियों की लिस्ट का सर्कुलेट होना चिंताजनक- एक्टिविस्ट

एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार आफिया सलाम ने कहा- इस तरह से लिस्ट का सर्कुलेट होना चिंताजनक है। जब मुख्यधारा का मीडिया इस तरह से जानकारियां शेयर करता है, तो उसे इतनी आसानी ने नहीं बख्शा जाना चाहिए। उन्हें तो इसे रोकने वालों की भूमिका में होना चाहिए था। चैनलों पर इस तरह से यात्रियों का नाम लिया जाना बेहद असंवेदनशील है। मुझे लगता है कि इसमें नियामक संस्थाओं को दखल देना चाहिए। पाकिस्तान ने अतीत में भी ऐसी त्रासदियों को देखा है। हर बार मीडिया इसी तरह के अपमानजनक काम करता है। इन्हें उसूलों, लोगों की निजता का ख्याल रखना चाहिए, लेकिन लगता है कि अतीत की घटनाओं से इन्होंने कोई सबक नहीं लिया है।