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मां की मौत हो चुकी थी, बच्चा कफन को चादर समझकर खेलता रहा… इस उम्मीद में कि मां अभी उठेगी


  • गुजरात से लौटी थी महिला, मुजफ्फरपुर स्टेशन पहुंचने से पहले ही ट्रेन में भूख-प्यास से मौत हो गई थी
  • 25 मई को मुजफ्फरपुर स्टेशन पर ही 4 साल के बच्चे की मौत हुई, परिजनों ने कहा था- भूख और गर्मी से जान गई

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 03:26 PM IST

पटना. मुजफ्फरपुर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें ढाई साल का बच्चा मां के शव को ढंकने वाली चादर से खेलता दिख रहा है। बच्चे को पता नहीं कि अब उसकी मां इस दुनिया में नहीं रही। चादर, जो अब कफन बन चुकी है, उसे वह जितना भी हटाए, मां नहीं उठेगी। लेकिन बच्चा इस उम्मीद है कि मां अभी उठेगी, जरूर उठेगी।

यह महिला गुजरात से लौटी थी। बीते रविवार वह ट्रेन में सवार हुई। खाना और पानी न मिलने के चलते ट्रेन में महिला की स्थिति खराब हो गई। सोमवार को ट्रेन के मुजफ्फरपुर पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। महिला के शव को जब प्लेटफॉर्म पर रखा गया, तब उसका ढाई साल का बच्चा करीब पहुंच गया। वह मां के पास खेलने लगा। उसे जगाने की कोशिश करने लगा।

चार साल के बच्चे की भी हुई थी मौत

देश भर से प्रवासी श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बिहार लौट रहे हैं। रोज 100 से अधिक ट्रेन प्रवासियों को लेकर बिहार आ रही हैं। ट्रेन में खाना और पानी न मिलने की शिकायतें भी मिल रही हैं।

मुजफ्फरपुर स्टेशन पर सोमवार को चार साल के बच्चे इरशाद की भी मौत हुई थी। पश्चिम चंपारण जिले के तुलाराम घाट के रहने वाले मो. पिंटू शनिवार को दिल्ली से पटना के लिए चले थे। सोमवार सुबह मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचे। मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान इरशाद की मौत हो गई। पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी और खाना ना मिलने की वजह से बच्चे की मौत हो गई।

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1200 किमी का सफर 500 रुपए की साइकिल से तय किया था, पिता के साथ हुए हादसे के बाद पढ़ाई छोड़ी थी, अब फिर शुरू करेंगी


  • ज्योति पिता के साथ हुए हादसे के बाद दरभंगा से दिल्ली पहुंची थीं
  • ज्योति फिलहाल होम क्वारैंटाइन में हैं, वो एक महीने बाद साइक्लिंग फेडरेशन का ट्रायल देने दिल्ली जाएंगी

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:25 PM IST

दरभंगा. (अलिंद्र मिश्र) लॉकडाउन ने लाखों प्रवासियों को ताउम्र न भूलने वाला दर्द दिया। इस दौरान कई कहानियां या कहें आपबीती सामने आईं। कोई सैकड़ों किलोमीटर भूखे-प्यासे पैदल चलकर अपने घर लौटा। किसी ने रास्ते में ही जान गंवा दी। इस बीच इंसान के हौसले और चट्टान जैसे मजबूत इरादों की कहानी भी सामने आई। एक मिसाल ज्योति कुमारी की है। वो बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के सिरहूल्ली गांव में रहती हैं। 13 साल की ज्योति बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 10 मई को दिल्ली से चलीं।16 मई को दरभंगा पहुंचीं। उन्होंने सात दिन में 1200 किलोमीटर दूरी तय की।

ज्योति की ‘ज्योति’ सात समंदर पार अमेरिका भी पहुंची। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ने उन्हें ट्विटर पर सराहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी ने ज्योति की तारीफ की है।

ज्योति नेे कहा- शुक्रिया इवांका दीदी

तारीफ और हौसलाअफजाई के लिए ज्योति ने इवांका को धन्यवाद कहा। ज्योति ने कहा, “मैं पहले इवांका दीदी को नहीं जानती थी। अब जान गई हूं। उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया। इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। वो बहुत बड़ी शख्सियत हैं। उन्होंने मेरे जैसी छोटी बच्ची की तारीफ की। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं बहुत खुश हूं।”

ज्योति को सम्मानित करते एसएसबी के अधिकारी।

पिता के साथ हुए हादसे के बाद छूट गई थी पढ़ाई

ज्योति के परिवार में छह लोग हैं। दो भाई, दो बहन और माता-पिता। पिता मोहन पासवान अकेले दिल्ली में रहकर रिक्शा चलाते थे। मां गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए खाना बनाती हैं। उन्हें हर महीने दो हजार रुपए मिलते हैं। ज्योति बताती हैं, “माता-पिता की कमाई से किसी तरह घर चल रहा था। मैं गांव के स्कूल में पढ़ने जाती थी। एक ट्रक ने मेरे पिता के रिक्शा को टक्कर मार दी। उनका घुटना टूट गया। मैं पढ़ाई छोड़कर दिल्ली आ गई। ताकि पापा का ख्याल रख सकूं। उनके इलाज में बचाकर रखा पूरा पैसा खर्च हो गया। मां ने कई लोगों से कर्ज भी लिया।

मां और भाई-बहन के साथ ज्योति कुमारी।

500 रुपए में खरीदी साइकिल
ज्योति ने कहा. “मैंने साइकिल चलाना सीख रखा था। दिल्ली में मेरे पास साइकिल नहीं थी। लॉकडाउन के चलते जब भूखे मरने की नौबत आई तब जन-धन खाते से 500 रुपए निकाले। इस पैसे से एक पुरानी साइकिल खरीदी। उसी पर पापा को बैठाकर ले आई। मैंने बेटी होने का फर्ज निभाया। जब भी ऐसा मौका मिलेगा। माता-पिता की सेवा करती रहूंगी।”

इस साइकिल पर पिता को बैठाकर दिल्ली से दरभंगा आई थीं ज्योति। पैडल्स के सहारे उनके पैरों ने 1200 किलोमीटर सफर तय किया। पिता पीछे बैठे थे। क्योंकि घुटने में फ्रेक्चर था।

अब एक सपना

ज्योति कहती हैं, “मैं पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहती हूं, ताकि समाज के लिए कुछ अच्छा कर सकूं। अभी तो लॉकडाउन है। ये खत्म होता है तो फिर स्कूल में नाम लिखवाउंगी। मैं दिल्ली नहीं जाऊंगी। यहीं आगे पढ़ना है। साइकिलिंग फेडरेशन ने ट्रायल के लिए बुलाया है। इसके लिए एक महीने बाद ट्रायल देने दिल्ली जाऊंगी। अभी होम क्वारैंटाइन में हूं।”

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राज्य में 1079 संक्रमित; मुख्यमंत्री ने प्रवासियों से कहा- पैदल न आएं, थाने में फोन करें, गाड़ी मिलेगी


  • राज्य के 5162 क्वारैंटाइन सेंटर में 2.7 लाख से अधिक लोग रह रहे
  • तीन मई के बाद बिहार आने वाले 391 प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव

दैनिक भास्कर

May 16, 2020, 02:52 PM IST

पटना. बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या 1079 हो गई है, जबकि 452 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इस बीमारी से अब तक सात लोगों की मौत हुई है। ट्रेन और बस से प्रवासी मजदूरों को बिहार लाया जा रहा है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में मजदूर, साइकिल, ट्रक या किसी और साधन से घर लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रवासियों से पैदल न आने की अपील की है।  राज्य सरकार ने फैसला किया है कि क्वारैंटाइन सेंटर में हंगामा करने वाले प्रवासियों को सरकारी लाभ नहीं मिलेगा।

पैदल न आएं, थाने में फोन करें, गाड़ी मिलेगी: नीतीश 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे क्वारैंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूरों को आर्थिक सहायता देने के लिए अभी से ही तैयारी करें। इन मजदूरों के खाते में ट्रेन किराए के साथ ही 500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को लाने की व्यवस्था की गई है। इसलिए लोगों को छिपकर या पैदल आने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों द्वारा नजदीकी थाने या प्रखंड में सूचना देने पर उन्हें वाहनों के जरिए उनके गांवों तक पहुंचाने की व्यवस्था है।
क्वारैंटाइन सेंटर में 2.7 लाख लोग रह रहे

15 मई तक 231 ट्रेन से करीब तीन लाख प्रवासी बिहार लौटे हैं। दूसरे राज्यों से लौटे छात्रों को होम क्वारैंटाइन में रहने को कहा गया है। वहीं, प्रवासी मजदूरों को उनके जिले के ब्लॉक में बने क्वारैंटाइन सेंटर में रखा गया है। राज्य के 5162 क्वारैंटाइन सेंटर में 2.7 लाख से अधिक लोग रह रहे हैं।

158 आपदा राहत केंद्र चलाए जा रहे

राज्य में 158 आपदा राहत केंद्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें 74 हजार लोग रह रहे हैं। तीन मई के बाद बिहार आने वाले 391 प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें 122 दिल्ली, 105 गुजरात, 77 महाराष्ट्र, 23 पश्चिम बंगाल और 21 हरियाणा से आए हैं। शनिवार को 40 विशेष ट्रेन से 60 हजार से अधिक प्रवासी बिहार लौट रहे हैं। 

हंगामा करने वाले प्रवासियों को नहीं दिया जाएगा सरकारी लाभ
राज्य सरकार ने निर्णय किया है कि हंगामा करने वाले प्रवासियों को सरकारी लाभ नहीं मिलेगा। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखा है। पत्र में लिखा गया है कि उन्हीं प्रवासियों को रेल भाड़ा और प्रतिपूर्ति की राशि मिलेगी, जो 14 दिन तक प्रखंड क्वारैंटाइन केंद्र में रहेंगे और उसके बाद फिर 7 दिन तक होम क्वारैंटाइन भी अनुशासित ढंग से पूरा करेंगे। हंगामा करने वाले मजदूरों को रेल भाड़ा और अन्य राशि नहीं मिलेगी।

पटना: यहां प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घर लौट रहे हैं। रास्ते में थकान मिटाने के लिए थोड़ी देर सड़क किनारे ही आराम कर लेते हैं।

100 का आंकड़ा छूने वाला पटना दूसरा जिला

राजधानी पटना के दीघा एरिया में कोरोना ने फिर दस्तक दी है। यहां की एक युवती कोरोना संक्रमित मिली है। इससे पहले भी दीघा की एक महिला कोरोना संक्रमित मिली थी। हालांकि, इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्‌टी मिल चुकी है। इसके साथ ही पटना में कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 100 हो गई है। इससे पहले मुंगेर में भी संक्रमितों की संख्या 100 से ज्यादा हो गई थी। यहां कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 122 है।

ऑनलाइन क्लास के लिए खुलेंगे निजी स्कूल

स्कूलों और कोचिंग क्लासेस को ऑनलाइन क्लास चलाने की अनुमति मिल गई है। स्कूल और कोचिंग में रोस्टर के हिसाब से शिक्षक आएंगे। बच्चों को स्कूल और कोचिंग संस्थान में आने पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

बक्सर में क्वारैंटाइन होने से पहले ही 37 मजदूर फरार
दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात से बक्सर पहुंचे 37 मजदूर बस चालक से मारपीट के बाद फरार हो गए। गुरुवार देर शाम श्रमिक स्पेशल ट्रेन से बक्सर उतरने के बाद सभी को अहिरौली के बिहार पब्लिक स्कूल में बनाए गए क्वारैंटाइन सेंटर में रखा गया था। शुक्रवार सुबह उन्हें प्रतापसागर के पास स्थित मातृप्रेम बीएड कॉलेज में क्वारैंटाइन करने के लिए बस से भेजा गया था। वहां पहुंचने से पहले ही सभी ने क्वारैंटाइन सेंटर में जाने से इनकार कर दिया और बीच रास्ते में बस रुकवाने की कोशिश की।

बस ड्राइवर के मना करने पर उसके साथ मारपीट की और उतरकर भाग गए। एक साथ 37 मजदूरों के फरार होने की सूचना के बाद अनुमंडल प्रशासन में हड़कंप मच गया।

मधुबनी: बासी चावल देने का आरोप लगा प्रवासियों ने किया हंगामा
शुक्रवार को मधुबनी जिले के एक क्वारैंटाइन सेंटर में लोगों ने बासी चावल देने का आरोप लगाकर हंगामा किया। यहां 550 प्रवासियों को क्वारैंटाइन किया गया है। प्रवासियों ने क्वारैंटाइन सेंटर में तोड़फोड़ मचा दी। बीडीओ नवल किशोर ठाकुर ने क्वारैंटाइन सेंटर पहुंच कर प्रवासियों से बात करने की कोशिश की, तो उनपर भी हमला कर दिया। चार घंटे तक हंगामा हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने समस्या दूर करने का आश्वासन दिया। तब जाकर प्रवासी मजदूर शांत हुए।

अररिया: रानीगंज-अररिया सड़क पर हंगामा करते प्रवासी।

अररिया: खराब खाना देने का आरोप लगा प्रवासियों ने किया हंगामा

अररिया जिले के रानीगंज में क्वारैंटाइन केंद्र में आक्रोशित प्रवासियों ने शुक्रवार को हंगामा किया। प्रवासी मजदूर खराब खाना का आरोप लगाकर सड़क पर उतर आए। लालजी उच्च विद्यालय स्थित क्वारैंटाइन सेंटर के गेट के बाहर रानीगंज अररिया मार्ग को जाम कर दिया। प्रवासियों ने आरोप लगाया कि दिन का बचा खाना रात के भोजन में मिलाकर दिया जाता है। रात की बची हुई सब्जी अगले दिन नाश्ते में खिलाई जा रही है। तेल-साबुन नहीं मिलता है। गंदा कपड़ा पहनने पर मजबूर हैं।