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‘द लैंसेट’ में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर छपी स्टडी पर उठ रहे सवाल, 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने कहा- डब्ल्यूएचओ हकीकत जांचे


  • वैज्ञनिक स्टडी में शामिल 6 महाद्वीपों के 600 से ज्यादा अस्पतालों का नाम बताए जाने की मांग कर रहे
  • डाटाबेस कंपनी सर्जिस्फीयर ने कहा- सोर्स पर नियंत्रण नहीं, हमने सिर्फ उपलब्ध डेटा को रिपोर्ट किया

दैनिक भास्कर

Jun 03, 2020, 01:52 PM IST

रॉनी कैरिन रैबिन. बीते हफ्ते मलेरिया की दवा क्लोरोक्वीन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर प्रकाशित हुई एक स्टडी पर सवाल उठ रहे हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों के इलाज में यह दवाइयां मदद नहीं कर रही हैं। साथ ही इससे ह्रदय संबंधित रोग और मौत की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 100 से ज्यादा साइंटिस्ट और क्लीनिशियन्स ने स्टडी की प्रमाणिकता के लिए डब्ल्युएचओ और दूसरी संस्थाओं से जांच कराए जाने की मांग की है। एक खुले पत्र में वैज्ञानिकों ने द लैंसेट के संपादक रिचर्ड हॉर्टन और दूसरे लेखकों से डेटा मुहैया कराने के लिए कहा है। 

काफी सुर्खियों में है क्लोरोक्वीन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन

  • क्लोरोक्वीन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन काफी समय से सुर्खियां में बनी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी लगातार इसका प्रचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस संक्रमण से बचने के लिए वे लगातार इसका सेवन भी कर रहे हैं।
  •  22 मई को प्रकाशित हुए द लैंसेट पेपर में अस्पताल में भर्ती हजारों मरीज का डाटा शामिल था। इसके बाद इन पेपर्स की महज पांच हफ्तों में समीक्षा की गई, आमतौर पर यह प्रक्रिया लंबा वक्त लेती है। इसके अलावा एक्सपर्ट्स ने स्टडी के तरीके और अस्पतालों के नाम न बताए जाने की आलोचना की है। शिकागो स्थित सर्जिस्फीयर कंपनी इस डाटा की मालिक है। 
  • वैज्ञानिकों ने लिखा कि अफ्रीका का डाटा बताता है कि महाद्वीप में कोविड 19 के 25 प्रतिशत संक्रमण के मामले और मौत के 40 प्रतिशत मामले सर्जिस्फीयर संबंधित अस्पतालों में सामने आए। इन अस्पतालों में मरीजों की इलेक्ट्रॉनिक डाटा रिकॉर्डिंग की जाती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, संक्रमण के मामले और मौतों का डाटा कलेक्शन इतना संभव नजर नहीं आ रहा है। 

सरकार की रिपोर्ट्स से मेल नहीं खा रहा डाटा

  • अलोचकों की चिंता का एक और कारण था कि ऑस्ट्रेलिया में कोविड 19 का डाटा सरकार की रिपोर्ट से मेल नहीं खा रहा था। द लैंसेट की प्रवक्ता एमिली हेड ने ईमेल के जरिए बताया कि जर्नल के पास पेपर को लेकर काफी सवाल आए हैं। यह प्रश्न लेखकों को भेज दिए गए हैं।
  • एमिली ने कहा कि हम जरूरत पड़ने पर और डाटा उपलब्ध कराएंगे। लैंसेट साइंटिफिक डिबेट को प्रोत्साहित करता है और इसकी प्रतिक्रियाओं को स्टडी में लेखकों की प्रतिक्रियाओं के साथ छापा जाएगा। शनिवार को जर्नल ने स्टडी में दो सुधार किए। लेकिन यह कहा गया कि पेपर की प्राप्तियों में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं।

6 महाद्वीपों के 671 अस्पतालों से लिया गया है डाटा

  • सर्जिस्फीयर के फाउंडर और मालिक डॉक्टर सपन एस देसाई ने कंपनी के डाटाबेस का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण और मौत की आधिकारिक गिनती वास्तविक से अलग हो सकती है, जो यह परेशानी को समझा सकती है।
  • पेपर के लेखकों ने कहा कि उन्होंने 6 महाद्वीपों के 671 अस्पतालों के डाटा की जांच की है। इन अस्पतालों ने अपनी पहचान बचाते हुए 15 हजार दवाई लेने वाले और 81 हजार दवाई नहीं लेने वाले मरीजों की बारीक जानकारी साझा की थी। डॉक्टर देसाई ने कहा कि दुनिया को यह समझना होगा कि यह रजिस्ट्री आधारित डाटा होता है। इसके सोर्स पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता है। हम केवल प्राप्त डाटा को रिपोर्ट कर सकते हैं। 

स्टडी पर सवाल उठाने वालों में कई बड़ी यूनिवर्सिटी शामिल

  • बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं ने भी सर्जिस्फीयर के डाटाबेस पर सवाल उठाए हैं। स्टडी की आलोचना करने वालों में हार्वर्ड के टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, पैंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी, वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी और ड्यूक यूनिवर्सिटी समेत एकेडमिक मेडिकल सेंटर्स के क्लीनिशियन्स, शोधकर्ता, स्टेटिसटीशियन्स और एथिसिसिस्ट्स शामिल हैं। 
  • ड्यूक क्लीनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉक्टर एड्रियन हर्नांडेज ने कहा कि पेपर में कई विसंगतियां हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यहां 600 से ज्यादा अस्पतालों का बड़ा डाटाबेस है और कोई इनके अस्तित्व के बारे में नहीं जानता। 
  • ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न स्थित मॉनेश यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर एलन चेंग ने ईमेल के जरिए बताया कि इस डाटाबेस में शामिल एक-एक अस्पताल की पहचान होनी चाहिए। आदर्श रूप से डाटाबेस को सार्वजनिक करना चाहिए, लेकिन अगर ऐसा संभव नहीं है तो इसकी स्वतंत्र रूप से समीक्षा की जानी चाहिए।
  • इस महीने द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी स्टडी ऑफ कोरोनावायरस पेशेंट्स भी सर्जिस्फीयर के डाटा पर आधारित थी। द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की प्रवक्ता जैनिफर जीस ने बताया कि जर्नल उठाए गए प्रश्नों से अवगत था और इन्हें देखा जा रहा था।
  • हार्वर्ड के प्रोफेसर डॉक्टर मंदीप आर मेहरा ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि, पेपर के लेखकों ने अस्पताल में भर्ती कोविड 19 के मरीजों की देखभाल के बारे में सूचित करने के लिए सर्जिस्फीयर से प्राप्त डाटा का लाभ उठाया है। क्योंकि क्लीनिकल ट्रायल्स के परिणाम कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। 

डब्ल्युएचओ ने सस्पेंड कर दिए थे क्लीनिकल ट्रायल्स
इससे पहले कुछ स्टडीज ने क्लोरोक्वीन और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से होने वाले नुकसान के बारे में बता चुकी हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन भी इसे लेकर चेतावनी जारी कर चुका है। लैंसेट पेपर के प्राकाशित होने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरी संगठनों ने इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल रोक दिए थे। 

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एक्सपर्ट्स की सलाह- इलाज से पहले अपने डॉक्टर या थेरेपिस्ट की डिग्री और लाइसेंस के बारे में पता करें, इलाज का तरीका भी पूछें


  • कोरोनावायरस के कारण 54% महिलाओं और 37% पुरुषों में मानसिक परेशानी बढ़ी है
  • इलाज की शुरुआत से पहले मरीज और डॉक्टर के बीच भरोसा स्थापित होना बेहद जरूरी
  • रिसर्च में दावा- डॉक्टर या थेरेपिस्ट का इंटरव्यू करना हमेशा मरीजों के लिए फायदेमंद है

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 04:17 PM IST

जूली फ्रागा/हिलेरी जेकब्स हेंडल. कोरोनावायरस महामारी ने हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर छोड़ा है। लोग चिंता, अकेलेपन से लेकर ट्रॉमा या दुख तक के शिकार हो रहे हैं। अप्रैल में कैंसर फैमिली फाउंडेशन ने एक सर्वे किया था। इस सर्वे में पाया गया कि, 54 प्रतिशत महिलाएं और 37 प्रतिशत पुरुषों ने कहा है कि महामारी ने उनकी मेंटल हेल्थ को बिगाड़ा है। इसमें परिवार सदस्य के बीमार होने, आर्थिक तंगी, नौकरी जाना जैसी कई चिंताएं शामिल हैं।

ऐसे में लोग थैरेपिस्ट का सहारा ले रहे हैं। अब नए थेरेपिस्ट के सामने परेशानियां बताना भी तनावभरा काम है। खासकर अभी के दौर में जब मीटिंग फोन और वीडियो कॉल पर हो रही हैं। रिसर्च बताती हैं कि थेरेपिस्ट का इंटरव्यू करना मरीजों के लिए फायदेमंद है, इससे उन्हें पता चलता है कि यह थेरेपी उनके लिए ठीक रहेगी या नहीं। क्योंकि डॉक्टर और मरीज के बीच सामंजस्य होना इलाज में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए अपने थेरेपिस्ट को जानना बेहद जरूरी है।

आपका प्रोफेशन बैकग्राउंड क्या है?
सबसे पहले अपने थेरेपिस्ट की डिग्री और लाइसेंस के बारे में जाने। इसके अलावा सेशन की फीस और यह भी पता करें कि वे इंश्योरेंस स्वीकारते हैं या नहीं। थैरेपी के मामले में हेल्थ एक्सपर्ट्स लगभग एक तरह की सेवाएं देते हैं, लेकिन उनकी शिक्षा, तरीके और दवाई देने की क्षमता में फर्क होता है। 

आप इलाज कैसे करेंगे?

  • ट्रॉमा और कई ट्रेजेडी आपके मानसिक स्वास्थ्य पर अनगिनत तरीकों से प्रभाव डालती हैं। चीन में हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला कि, 35 प्रतिशत लोगों ने कोविड 19 महामारी से संबंधित डिप्रेशन, पैनिक डिसऑर्डर और डर का सामना किया है।
  • क्लीनिकल साइकोलॉजी प्रोफेसर और इदाहो स्टेट यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता जोशुआ के स्विफ्ट बताते हैं कि, “किसी भी समस्या का कई तरीकों से इलाज किया जा सकता है। सभी मरीजों को अपने थेरेपिस्ट के इलाज के तरीकों की जानकारी लेनी चाहिए।’ अधिकांश तौर पर थैरेपिस्ट के जवाब देने के तरीके से उनके क्लीनिकल स्टाइल का पता चलता है।
  • कुछ डॉक्टर भावनात्मक दुख को गलत सोच का परिणाम समझते हैं। यह थेरेपिस्ट व्यवहार की रणनीतियों जैसे, मूड ट्रैकिंग और एक्सरसाइज पर भरोसा करते हैं। गंभीर घबराहट, नींद न आना और खाने में परेशानियों जैसी तकलीफों से जूझ रहे मरीजों के लिए यह तरीके असरदार साबित हो सकते हैं।

आपको किस तरह के मरीजों के साथ काम करना बेहतर लगता है?

  • इस तरह के सवाल थेरेपिस्ट की स्टाइल का पता करने में कारगर होते हैं। इससे आप उनके इलाज के तरीकों से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक थेरेपिस्ट जवाब दे सकता है कि “मैं आपके सवाल का जवाब दूंगा, लेकिन इससे पहले मैं यह जानना चाहता हूं कि मेरा जवाब आपको क्या मायने रखता है?”
  • वहीं कुछ मामलों में थेरेपिस्ट इसे मौके की तरह लेकर मरीज से पूछतें हैं “आप किस तरह के थैरेपिस्ट की तलाश में हैं?” थेरेपिस्ट के जवाब पर ध्यान देने के बजाए मरीजों को इस बात पर फोकस करना चाहिए कि, उनके रिएक्शन से आपको कैसा महसूस हुआ।
  • साइकोथैरेपी शोधकर्ताओं ने पाया है कि, असरदार थेरेपिस्ट समझदारी, प्रमाणिकता और विशेषता बताते हैं। पहली मुलाकात के दौरान यह क्वालिटी मरीज और डॉक्टर के बीच संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं।

मुझे कैसे पता लगेगा कि थेरेपी काम कर रही है?

  • तत्काल रूप से थेरेपी परेशानी दूर नहीं कर सकती है। ट्रीटमेंट कितने जल्दी शुरू हुआ, यह परेशानी की तीव्रता पर निर्भर करता है। महामारी के कारण आया तनाव किसी भी साइज का हो सकता है। किसी के लिए परेशानी भरे हालात जैसे वर्क फ्रॉम होम, घर से पढ़ाई और आवश्यक कार्यकर्ता होना तनाव ला सकता है।
  • अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार इस तरह की परेशानी से जूझ रहे मरीजों के लिए छोटी साइकोथेरेपी से फायदा हो सकता है। जो मरीज किसी प्रिय को खोने, बचपन के सदमें जैसी गंभीर परेशानियों से जूझ रहे हैं, उन्हें ट्रॉमा से निकलने तक केयर की जरूरत है।
  • न्यूयॉर्क में एईडीपी साइकोथेरेपिस्ट बेंजामिन लिप्टन कहते हैं कि अपने होने वाले थेरेपिस्ट के इंटरव्यू के बाद खुद से सवाल करें कि इस व्यक्ति के बारे में मुझे कैसा महसूस हो रहा है?” अगर आपको कोई भी चीज अनुचित लगती है तो अनुभव का सहारा लें। ऑनलाइन एक थेरेपिस्ट की योग्यता और रिव्यूज अच्छे हो सकते हैं, लेकिन अगर बातचीत ठीक नहीं रही तो भरोसा जमना मुश्किल हो सकता है।
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वायरस से उबरने के बाद महीनों तक भारी थकान और सांस की तकलीफ हो सकती है: ब्रिटेन की सबसे बड़ी एजेंसी की चेतावनी


  • नेशनल हेल्थ सर्विस के सलाहकार पैनल में शामिल वैज्ञानिकों ने जताई चिंता, कहा- वायरस मुक्त होने के बाद लम्बे समय तक शरीर पर रहेगा असर
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, शरीर पर कोरोना का बुरा असर कब तक रहेगा, इस पर रिसर्च की जा रही है

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 05:53 AM IST

कोरोना के मरीजों में कई महीनों तक अधिक थकान और सांस लेने की तकलीफ रह सकती है। यह अलर्ट ब्रिटेन की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य एजेंसी नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने कोरोना मरीजों के लिए जारी किया है।

एनएचएस के वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोनावायरस का असर शरीर पर लम्बे समय तक रह सकता है। कोरोना से उबरने के बाद शरीर पर इसका बुरा असर कब तक रहेगा, फिलहाल इस पर रिसर्च की जा रही है। 

सामान्य जीवन में नहीं लौट सकेंगे
मई में एनएचएस के वैज्ञानिकों ने कोरोना के गंभीर लक्षणों पर चर्चा की थी जिसमें स्ट्रोक, किडनी डिसीज और अंगों की घटती कार्यक्षमता पर बैठक चली थी।

बैठक में एनएचएस के वैज्ञानिकों का कहना था कि कोरोना के उबरने वाले ऐसे मरीजों की संख्या अधिक होगी जो वापस सामान्य जीवन में नहीं लौट सकेंगे।

यह मॉडल पूरे देश में लागू होगा
खासतौर पर कोरोना पीड़ितों के लिए बनाए गए एनएचएस हॉस्पिटल में पिछले सप्ताह, ऐसे मरीज रिकवर हुए जो इलाज के बाद लम्बे समय से कोरोना के असर से जूझ रहे थे।

एजेंसी का कहना है, यही मॉडल देश में अब कोरोना से उबरने वाले मरीजों के लिए अपनाया जाएगा ताकि उनकी मेंटल डिसऑर्डर, सांस लेने में तकलीफ और हृदय रोगों के कॉम्पिकेशन से लड़ने में मदद की जा सके

पिछले हफ्ते भी दी थी चेतावनी
एनएचएस ने पिछले हफ्ते एक अलर्ट जारी करते हुए कहा था कि जिन लोगों के शरीर में किसी तरह का डैमेज हुआ है उन्हें रिकवर करने में हम मदद करेंगे।

एनएचएस के चीफ एग्जीक्यूटिव सिमोन स्टीवेंस का कहना है, हमारा देश महामारी की चरम स्थिति से गुजर रहा है, अब हमें इससे उबरने के बाद दिखने वाले परिणामों से बचाव के तरीकों पर काम करने की जरूरत है।

कोरोना को हराने के बाद ऐसे ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ेगी
सिमोन स्टीवेंस के मुताबिक, कोरोना से उबरने वाले मरीजों को ट्रैकियोस्टॉमी वाउंड, हृदय और फेफड़ों के डैमेज रिपेयर करने वाली थैरेपी, मसल और सायकोलॉजिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।

वहीं, कुछ ऐसे मरीज भी हो सकते हैं जिन्हें सोशल सपोर्ट की जरूरत होगी। इसके लिए हमें तैयार रहने की जरूरत है।

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कोरोना को रोकने में कामयाब रहा जापान मॉडल; दुकानदारों ने खुद बंद की दुकानें, लोगों ने मास्क लगाकर और सोशल डिस्टेंसिंग से जीती लड़ाई, इमरजेंसी भी हटी


  • सरकार ने इमरजेंसी लगाई थी, पर किसी को दुकान बंद करने के लिए मजबूर नहीं किया, लोगों खुद ऐसा किया
  • दुनिया में सबसे कम मॉर्टेलिटी रेट जापान में, यहां 16 हजार 851 हजार संक्रमितों में केवल 891 लोगों की मौत
  • आलोचकों के मुताबिक- सरकार ने मौत के आंकड़े छुपाए, सेकंड वेब सरकार के दावों को कमजोर कर देंगी

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 01:34 PM IST

बेन डूली/मकीको इनोए. कोरोनावायरस के खिलाफ जहां अमेरिका समेत दुनिया के कई ताकतवर देश बेबस नजर आ रहे हैं। वहां काम और पर्यटकों के लिए मशहूर जापान ने इस घातक वायरस के खिलाफ करीब-करीब जीत हासिल कर ली है। प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने देश में महीने भर से जारी इमरजेंसी को हटा दिया है। दुनिया के कई हिस्सों में स्वास्थ्य अधिकारी लगातार टेस्ट की रट लगाएं हुए हैं, लेकिन जापान ने केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जांच की। जबकि मेडिकल एक्सपर्ट्स ने इस तरीके को लेकर चिंता जताई थी। उनका मानना था कि इससे संक्रमण फैलेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।

सबसे कम मॉर्टेलिटी रेट

  • दूसरे बड़े देशों के मुकाबले कोविड-19 के मामले में जापान में मॉर्टेलिटी रेट (मृत्युदर) काफी कम रही है। देश में अब तक 900 से कम मौतें हुईं। जबकि यूरोपीय देशों और अमेरिका में यह आंकड़ा हजारों और लाखों में है। यहां सरकार ने लोगों को कभी भी बिजनेस को बंद करने के लिए मजबूर नहीं किया। लेकिन कुछ लोगों ने यह कदम अपनी मर्जी से उठाया था।
  • पीएम आबे कहते हैं कि अनोखे जापानी तरीके को अपनाकर हम संक्रमण की लहर को लगभग पूरी तरह खत्म करने में सक्षम हुए हैं। यह जापान मॉडल।’ हालांकि जापान की उस उपलब्धि के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं है। आलोचकों का कहना है कि जापान ने मौत के आंकड़े कम बताए हैं। कुछ ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में संक्रमण की सेकंड वेब सरकार के खुद के बधाई के दावों को कमजोर कर सकती हैं।

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की मदद से संक्रमण रोकने में मिली कामयाबी

  • टेस्टिंग के जरिए आम जनता के बीच संक्रमण रोकने के बजाय जापान सरकार ने कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग पर फोकस किया। लोगों के रोजमर्रा की जिंदगी को रोकने के बजाय यहां सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर लोगों जागरूक किया। सरकार के उपायों और लोगों के बदले व्यवहार के कारण यह काम संभव हुआ।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के निदेशक कीजी फुकुदा बताते हैं कि एक व्यक्ति के ऐक्शन छोटे लग सकते हैं। लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग को पूरे देश में मिलकर लागू करने का प्रयास एक ठोस कदम हो सकता है।
  • एपिडेमियोलॉजिस्ट के मुताबिक वायरस की टेस्टिंग जरूरी है, क्योंकि इससे अधिकारियों को पॉजिटिव लोगों को आइसोलेट करने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह पता करने में भी मदद मिलती है कि कब स्कूल और दूसरी चीजें शुरू करनी हैं।
इमरजेंसी हटने के शिंजुकु डिस्ट्रिक्ट में खुले रेस्टोरेंट। करीब एक महीने तक जापान में इमरजेंसी लागू थी।

जापान के मुकाबले चीन ने अकेले वुहान में तीन गुना ज्यादा टेस्ट किए
हार्वर्ड के शोधकर्ताओं ने कहा था कि लक्ष्य सभी हल्के बुखार के लक्षण वालों की जांच का होना चाहिए। साथ ही पॉजिटिव पाए गए व्यक्ति के औसत 10 कॉन्टेक्ट्स की जांच होनी चाहिए। चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने महामारी बढ़ने के साथ ही टेस्टिंग को भी बढ़ा दिया था। जापान ने 18 फरवरी से जितनी जांच देशभर में की थीं, इसके मुकाबले चीन ने वुहान में केवल एक दिन में तीन गुना से ज्यादा टेस्टिंग की थी।

अस्पताल के संसाधनों को भी बचाया

  • जापान ने शुरुआत में लोगों से कह दिया था कि जिन्हें संक्रमण का संदेह है तो वे अगर चार दिन तक तेज बुखार महसूस कर रहे हैं तो ही मदद मांगे। 65 साल से ऊपर के लोगों के लिए केवल दो दिन था। यहां तक की कुछ गंभीर मरीजों को भी मना कर दिया गया। इससे इस बात को बल मिला कि सरकार असली समस्या को छुपा रही है।
  • मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना था कि इस तरह की गाइडलाइंस अस्पतालों के संसाधनों को बचाने के लिए जारी की गई थीं। संक्रामक रोग के नेशनल लॉ ने यह जरूरी किया कि जो भी पॉजिटिव पाया गया है, उसे देश के आइसोलेशन वॉर्ड में रखा जाएगा। इसमें वे लोग भी शामिल थे, जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे थे। कम टेस्टिंग के बावजूद पॉजिटिव मामलों की दर 1 प्रतिशत कम हुई है। सरकार के एक्सपर्ट पैनल का कहना है कि वर्तमान टेस्टिंग स्तर काफी है।
  • जब से जापान ने बिना लक्षणों वाले पॉजिटिव लोगों को नियमों में रियायत दी है। तब से यह देश एंटीबॉडीज के लिए सीमित टेस्टिंग की तैयारी कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इससे संक्रमित लोगों की संख्या समझने में मदद मिलेगी। इसके अलावा कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए स्मार्टफोन एप पर भी विचार किया जा रहा है।
  • जापान सरकार ने पहले यह कहा था कि टेस्ट किट का प्रोडक्शन बढ़ाना चाहिए, क्योंकि उनके पास इनकी सप्लाई कम थी। यह विवाद तब से खत्म हो गया है, जब जापान ने अपनी क्षमता की आधी किट का भी इस्तेमाल नहीं किया।
टोक्यो में कोरोनावायरस के लिए किया जा रहा स्वाब टेस्ट। जापान ने अपनी क्षमता की आधी किट का भी इस्तेमाल नहीं किया।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेताया: जापान के अनुभवों से कोई चीज तय न करें
सरकार समेत कई स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह चेतावनी दी है कि जापान के अनुभव से कोई निष्कर्ष न निकालें। उन्होंने चेताया है कि जापान अभी तक स्पष्ट नहीं है और संक्रमण की दूसरी और तीसरी लहर कभी भी स्ट्राइक कर सकती है। जैसे ही मौतों पर और आंकड़ा उपलब्ध होगा तो हो सकता है कि तस्वीर इतनी अच्छी न लगे।

बताए गए आंकड़ों से 10 या 20 गुना ज्यादा हो सकते हैं संक्रमण के मामले

  • कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जापान में बिना लक्षणों वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। कोरोनावायरस पर सरकार के एक्सपर्ट पैनल के डिप्टी हेड शिगेरु ओमी ने कहा कि संक्रमण के मामले वर्तमान के मामलों से 10 या 20 गुना ज्यादा हो सकते हैं। जापान में कोरोना के 17 हजार से कम मामले आए थे।
  • फरवरी में क्रूज शिप डायमंड प्रिंसेस पर फैले संक्रमण ने अधिकारियों को परेशान कर दिया था। इसपर हुई प्रतिक्रिया को आपदा की तरह देखा जा रहा था, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसे सीखने के मौके की तरह देखा।
  • एपिडेमियोलॉजिस्ट और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स ने शिप से मिले डाटा को जापान में वायरस को रोकने के लिए फ्रेमवर्क की तरह इस्तेमाल किया। एक पब्लिक एजुकेशन कैंपेन के जरिए लोगों से “थ्री C” से बचने की अपील की। इसमें ‘क्लोज्ड स्पेस विद पूअर वेंटिलेशन’, ‘क्राउडेड प्लेसेज’ और ‘क्लोज कॉन्टेक्ट’ शामिल थे।

जागरूकता और सजगता को अपनाया

  • टीवी टॉक शोज में भी होस्ट ने ‘कोई भी सवाल खराब नहीं होता’ दृष्टिकोण को अपनाया। उन्होंने वायरस के संबंध में दर्शकों की घबराहट और तनाव को शांत किया। इसके अलावा एक अच्छा फैक्टर पीएम आबे के स्कूल बंद करने का निर्णय था। पीएम ने फरवरी के अंत में किसी भी दूसरे देश से पहले यह फैसला लिया था। यह आइडिया शुरुआत में लोकप्रिय नहीं था।
  • हीरोशिमा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने सर्वे में पाया कि इसने बर्ताव में एकदम तुरंत बदलाव देखने को मिला। स्टडी में पाया गया कि घोषणा के बाद भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचने वाले लोगों की संख्या दोगुनी हो गई।

अप्रैल में जब मामले बढ़ने लगे तो पीएम ने स्टेट ऑफ एमरजेंसी की घोषणा की थी। लोगों से केवल जरूरी यात्राएं करने के लिए कहा गया। अब जब जापान दोबारा शुरू हो रहा है तो कुछ एक्सपर्ट्स इस बात से डर रहे हैं कि लोग अपनी सुरक्षा को कम कर रहे हैं। हालांकि पीएम ने सोमवार रात को दी अपनी स्पीच में कहा कि, स्टेट ऑफ एमरजेंसी हटाए जाने का मतलब नॉर्मल लाइफ की ओर वापस जाना नहीं है।

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महामारी के दौर में लोग किसी को भी घर बुलाने से डर रहे हैं, ऐसे में इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर वीडियो कॉल के जरिए परेशानियों को दूर कर रहे


  • हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के छात्रों ने वेबसाइट शुरू की, जिसमें लोग बिगड़ी हुई चीजों की फोटो अपलोड कर सलाह ले रहे हैं
  • प्रोफेशनल्स घर के लोगों को काम के दौरान अलग कमरे में रहने की सलाह देते हैं, ताकि कर्मियों का काम करने खुला रास्ता मिले
  • काम के दौरान घर की खिड़कियों और दरवाजों को खुला रखें, क्योंकि एक जगह पर तेज सांस लेने के दौरान वेंटिलेशन जरूरी है

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 04:04 PM IST

रोंडा कैजन. कोरोनावायरस के कारण लोग महीनों से अपने घरों में बंद थे। इस दौरान लोगों ने कोविड के डर के अलावा घर में मौजूद कई परेशानियों का सामना किया, जिसमें वॉशिंग मशीन का खराब होना, नल का बिगड़ जाना जैसी चीजें शामिल थीं। इस बीच एक और परेशानी थी कि घर के मालिक इन्हें सुधरवाने के लिए किसी को भी घर के भीतर आने नहीं देना चाहते थे। उन्हें संक्रमण का डर था। ऐसे में ये लोग परेशानियों से दो-दो हाथ करते रहे। लेकिन इंटरनेट और वर्चुअल सुविधाओं ने उनकी परेशानी खत्म कर दी है। 

इसी तरह की दिक्कतों का सामना मॉन्टक्लेयर में लेखक रशेल क्विन ईगन कर रहीं थीं। उनकी 6 साल पुरानी वॉशिंग मशीन खराब हो गई थी। ऐसे हालातों में उन्होंने अपने बच्चों को हिदायत दी कि, कपड़ों को तब तक पहनें, जब तन इनमें से बदबू न आने लगे। ईगन अपने घर में रिपेयरमैन को नहीं आने देना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने इस परेशानी को टालने का फैसला किया। 

होम रिपेयर का व्यापार कम हुआ
मार्च और अप्रैल में कई रिपेयर सर्विसेज के व्यापार में भारी गिरावट देखी गई। क्योंकि लोगों ने अपने जरूरी कामों को टाल दिया था। स्टे एट होम ऑर्डर्स में जरूरी कामों की छूट थी, लेकिन कई भी यह साफ नहीं था कि, कौन सी सेवाओं को जरूरी माना जाए। कई हालातों में छत से पानी टपकना, बेसमेंट में पानी भर जाना जैसे कामों को घर के मालिकों ने रोकना ठीक समझा।

घर में ज्यादा रह रहे, इसलिए चीजों का इस्तेमाल भी बढ़ गया है
हिप्पों इंश्योरेंस के अप्रैल में किए गए सर्वे में पाया गया कि, घर में रह रहे एक तिहाई अमेरिकियों को होम रिपेयर्स की जरूरत थी। होम सर्व नॉर्थ अमेरिका के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन कित्जी बताते हैं कि, आप सभी चीजों का काफी ज्यादा उपयोग कर रहे हैं, तो स्वभाविक है कि घर में कई दिक्कतें आएंगी। इसमें बोरडम भी अहम रोल निभाता है। हाथों को दिन में बिगड़े हुए सिंक में 20 बार धोना भी परेशानी का कारण है। 

ग्राहक के घर में जाने से पहले सावधानियां बरत रहे हैं कर्मी
मई की शुरुआत में ईगन ने लोकल कंपनी को फोन कर मशीन ऑर्डर की थी। डिलीवरी मैन घर पर ग्लवव्ज और मास्क लगाकर पहुंचे थे। ईगन ने कर्मियों से जूतों को डिसइंफेक्ट करने के लिए कहा। सीढ़ियों पर भारी मशीन को ले जाना मुश्किल काम था और ईगन तेज सांस को लेकर चिंतित थीं। उन्होंने कहा कि, मुझे उन लोगों के लिए बुरा लग रहा था, मझे नहीं पता कि क्या मैं दूसरों को भी जोखिम में डाल रही हूं।

कई ठेकेदारों ने घर में जाने से पहले सेफ्टी प्रोटोकॉल्स बनाए हैं। मिस्टर हैंडीमैन फ्रैंचाइज के रॉन पोटेस्की अपने कर्मचारियों को ग्लव्ज, मास्क और जूतों पर सुरक्षा के साथ भेजते हैं। इसके अलावा वे वैन, औजारों और काम की जगह को भी सैनिटाइज करते हैं। काम वाले दिन पोटेस्की घर के मालिक से पूछते हैं कि, क्या घर में कोई बीमार है? इसके अलावा बुरा महसूस कर रहे कर्मी भी घर पर रहते हैं।

पोटेस्की घर में रहने वालों के अलग कमरे में जाकर कर्मियों के लिए जगह छोड़ेने की सलाह देते हैं। घर के मालिकों को भी वेंटिलेशन के लिए खिड़कियों को खोल देना चाहिए और काम के बाद सतह को भी साफ करना चाहिए। कभी-कभी लोगों को केवल सलाह की जरूरत भी होती है।

शुरू हुआ वर्चुअल सर्विस का दौर
होमसर्व और हिप्पो ने फ्री वर्चुअल हाउस कॉल की शुरुआत की है। इसका उपयोग ग्राहक के साथ अन्य लोग भी कर सकते हैं। मार्च में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के छात्रों ने एक वेबसाइट ड्वेलिंग की शुरुआत की, जहां घर के मालिक अपनी परेशानियों को फोटो अपलोड कर और डिस्क्रिप्शन के जरिए बताते हैं। इसके अलावा वर्चुअल प्लेटफॉर्म स्ट्रीम के जरिए भी ठेकेदार, घर के मालिकों से जुड़ते हैं।

स्ट्रीम के प्रेसिडेंड रेयान फिंक के मुताबिक स्टे एट होम ऑर्डर्स के बाद इसमें काफी इजाफा हुआ है। ठेकेदार वीडियो कॉल पर देखकर परेशानियों का पता लगा रहे हैं। साथ ही वे घर के मालिकों को इसे ठीक करने का तरीका भी बता रहे हैं। 

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वैज्ञानिकों का नया दावा- वुहान वेट मार्केट से नहीं फैला कोरोना, चीनी चमगादड़ों में पहले से मौजूद था वायरस


  • वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा, संक्रमण का पहला मामला यहां से नहीं आया
  • चीन के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के डायरेक्टर गाओ फू ने कहा, यहां के दुकानदारों की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 08:08 AM IST

वुहान. कोरोना महामारी के चार महीने के बाद चीनी वैज्ञानिकों ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि कोरोनावायरस वुहान के वेट मार्केट से फैला है। यहां के वैज्ञानिकों का कहना है कि वेट मार्केट का रोल एक सुपर स्प्रेडर की तरह है, न कि किसी सोर्स की तरह। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन की इसे लेकर अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है।

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा, कोरोना के संक्रमण का पहला मामला वुहान की बाजार से नहीं आया है। महामारी की शुरुआत में शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोरोना वुहान के हुनान स्थित सी-फूड मार्केट से फैला। इसे अब चीनी वैज्ञानिकों ने इसे फिर नकार दिया है। 

डीएनए सबूतों में चमगादड़-पैंगोलिन पर शक

वैज्ञानिकों ने डीएनए सबूतों के आधार पर दावा किया है कि नोवल कोरोनावायरस Sars-CoV2 चीनी चमगादड़ों में पहले से मौजूद था। इंसानों में इसके आने में किसी बीच के वाहक जानवर की भूमिका हो सकती है और इसमें पैंगोलिन पर सबसे ज्यादा शक है।

चीन के सीडीसी ने भी दिया जवाब
वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के डायरेक्टर गाओ फू का कहना है कि वुहान के पशु बाजार से दोबारा सैम्पल लेने के बाद रिपोर्ट निगेटिव आई है। यह बताता है कि यहां के दुकानदार संक्रमित नहीं हुए।

1 जनवरी को मार्केट बंद करा दी गई थी
वुहान प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ को 31 दिसम्बर को निमोनिया की तरह दिखने वाले अलग किस्म के लक्षणों के बारे में बताया था, जो बाद में कोरोनावायरस के लक्षण के तौर पर पहचाना गया। शुरुआत में वुहान की मार्केट से कोरोना के 41 मामलों को जोड़ा गया। इसके बाद 1 जनवरी से मार्केट को बंद करा दिया गया था। 

सार्स में भी ऐसे ही बाजार से फैला था संक्रमण
अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रो. कोलिन कार्लसन के मुताबिक, 2002 और 2003 में आई सार्स महामारी के समय भी गुआंगडॉन्ग के एक ऐसे ही बाजार से संक्रमण फैला था। लेकिन, जांच के दौरान वुहान के बाजार में एक भी जानवर कोरोना पॉजिटिव नहीं मिला। अगर वो संक्रमित नहीं हुए तो इसका मतलब है कि उन्हें कोई ऐसा सम्पर्क नहीं मिला जिससे मामले फैलें। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी आशंका जताई थी
हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा था कि यह साफ है कि कोरोनावायरस के संक्रमण में वुहान की मीट मार्केट ने भूमिका रही है, लेकिन इस मामले में अभी और रिसर्च की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि या तो वुहान के मार्केट से यह वायरस विकसित हुआ या फिर यहां से इसका फैलाव हुआ है। चीन के अधिकारियों ने जनवरी में इस मार्केट को बंद कर दिया था, इसके साथ ही वन्यजीवों के व्यापार में अस्थायी प्रतिबंध भी लगा दिया था। 

पहला मामला वुहान की झींगा बेचने वाली महिला में सामने आया था

मार्च में मीडिया रिपोर्ट में कोविड-19 की पहली संक्रमित महिला के स्वस्थ होने का मामला सामने आया है। 57 वर्षीय महिला चीन के वुहान में झींगे बेचती थी। वेई गुझियान को पेशेंट जीरो बताया गया था। पेशेंट जीरो वह मरीज होता है, जिसमें सबसे पहले किसी बीमारी के लक्षण देखे जाते हैं। खास बात यह है कि करीब एक महीने चले इलाज के बाद यह महिला पूरी तरह से ठीक हो चुकी थी।

वुहान वेट मार्केट में 10 दिसंबर की घटना 
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह महिला उस समय संक्रमित हुई, जब वह वुहान के हुआन सी-फूड मार्केट में 10 दिसंबर को झींगे बेच रही थीं। इसी दौरान उसने एक पब्लिक वॉशरूम का इस्तेमाल किया था और इसके बाद उसे बुरी तरह से सर्दी-जुकाम ने जकड़ लिया।

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एक्सपर्ट्स की हिदायत- लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने को चैलेंज न मानें; युवा कतई न सोचें कि उन्हें कुछ नहीं होगा, क्योंकि वे जवान हैं


  • लंबे वक्त ही एक ही तरह का काम कर रहे लोग बिहेवियरल फैटीग का शिकार, इसलिए वे डर के बाद भी बाहर निकल रहे
  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक- शराब के आदी लोग एक डिसॉर्डर का शिकार होते हैं, वे कोई भी रिस्क लेने के लिए तैयार होते हैं

निसर्ग दीक्षित

May 31, 2020, 05:47 AM IST

सरकार ने 25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। इस दौरान दूध, दवाई जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने के निर्देश थे। ऐसे में कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के एक शख्स का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में दिख रहा युवक लॉकडाउन में बाहर घूमने के लिए फर्जी दूधवाला बनकर निकला था। हालांकि पुलिस ने जब कड़ाई से पूछा तो उसने सच बता दिया।

राजधानी दिल्ली स्थित लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन के साइकोलॉजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर कनिका के आहूजा का मानना है कि जिन लोगों में रिस्क टेकिंग बिहेवियर होता है, वो ऐसा करते हैं। यानी ऐसे लोग डर की परवाह नहीं करते। इस तरह के काम करने वालों के मन में हमेशा कुछ थ्रिल करने की इच्छा रहती है। कुछ एक्सपर्ट्स जिज्ञासा भी इसका कारण बताते हैं।

एक्सपर्ट्स हिदायत देते हैं कि लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने को चैलेंज की तरह कतई न लें। खासकर, युवा यह न सोचें कि उन्हें कुछ नहीं होगा, क्योंकि वे जवान हैं। 

करीब दो महीने से चल रहे इस लॉकडाउन के दौरान कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं थीं, जहां लोग न तो मास्क पहन रहे और न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि तमाम कोशिशों और अलर्ट के बाद भी लोग इन सावधानियों को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे हैं? एक्सपर्ट्स बता रहे हैं, इसके पीछे की प्रमुख वजह।

कुछ लोग क्यों नहीं पहन रहे मास्क ?
भोपाल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर पूनम सिंह बताती हैं कि नियमों का पालन नहीं करने वाले समूह में बच्चे और यंग एडल्ट्स शामिल हैं। यह लोग रिस्क एसेसमेंट कर रहे हैं। मीडिया में आ रहीं खबरों के मुताबिक इस वायरस से सबसे ज्यादा जोखिम में गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग हैं। ऐसे में इन लोगों को लगता है कि हमें ज्यादा खतरा नहीं है, इसलिए हम कुछ चीजें कर सकते हैं। वहीं, बागी रवैये वाले बच्चे विरोध के बाद भी घर से निकल रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि वे खुद पर काबू कर हालात पर नियंत्रण कर पाएंगे। वे मानते हैं कि, ऐसा करने पर उन्हें कुछ नहीं होगा।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने के पीछे क्या कारण हैं?
डॉक्टर आहूजा बताती हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन मध्यम या उच्च वर्ग कर पा रहा है, क्योंकि इसे अपनाना कई लोगों की हैसियत से परे है। कई बार घर में 6 फीट की दूरी बनाना कई बार मुमकिन नहीं है, क्योंकि कई घरों में जगह कम और लोग ज्यादा होते हैं। लॉकडाउन में घर बैठने का मतलब है, आपके पास घर या संसाधन मौजूद होना।’ 

डॉक्टर आहूजा बताती हैं कि एक तबका हैंड वॉश और साफ पानी जैसी चीजों से भी वंचित है। आपको घर से निडर होकर बाहर निकलना होगा और अपने आसपास डिफेंस मैकेनिज्म बनाना होगा। जब आपके अंदर अस वर्सेज देम वाली फीलिंग आ जाती है और आप सोचते हैं कि इससे होने वाला नुकसान मैं क्यों उठाऊं, जैसे इकोनॉमिक और सोशल लॉस। आप खुद को उन लोगों से अलग कर लेते हैं, जिन्हें कोविड से ज्यादा खतरा है।

डॉक्टर आहूजा के मुताबिक लोगों के दिमाग में अगर मरने का डर होगा तो यह नहीं करेंगे। इसे रोकने के लिए जागरूकता लानी होगी। क्योंकि आप बाहर से आकर घर वालों को भी खतरे में डाल सकते हैं।

बिहेवियरल फैटीग का शिकार हो रहे हैं लोग

  • डॉक्टर आहूजा बताती हैं कि लॉकडाउन के शुरुआती दौर का पालन बड़ी ही सख्ती के साथ हुआ था। लोग कई चीजों को लेकर डरे हुए होने के साथ-साथ उत्साहित भी थे। लंबे समय तक घर में रहकर लोग बिहेवियरल फैटीग का शिकार हो रहे हैं। ऐसे हालात में लोग काफी वक्त से चले आ रहे अपने रुटीन से थक जाते हैं और उन्हें अपनी प्रैक्टिसेज का फायदा नहीं मिलता।
  • उदाहरण के लिए लोग सफाई को लेकर काफी सजग थे, लेकिन समय के साथ जब उन्होंने देखा कि इसका परिणाम कुछ खास नहीं मिल रहा है, तो वे थक गए थे, क्योंकि वे उन लोगों को भी देख रहे हैं, जो सावधानियों को लेकर गंभीर नहीं थे, लेकिन उनकी हालत भी हमारी ही तरह है।

लोग जानबूझ बाहर क्यों निकल रहे हैं?

  • रिस्पेक्ट: लॉकडाउन के दौरान घर से बाहर निकलने को लोग चैलेंज की तरह ले रहे हैं। लोगों के मन में खासकर बच्चों के बीच यह धारणा बन चुकी है कि अगर वे बाहर निकलेंगे तो उनकी सोशल रिस्पेकट बढ़ेगी। वे यह कह सकेंगे कि जब कोई ऐसा नहीं कर पा रहा, तब वे ऐसा कर रहे हैं।
  • घर पर बिगड़ते हालात: घर पर लगातार रहने से हालात बिगड़ रहे हैं। पाबंदियां लगने के कारण लोग घर से बाहर निकल रहे हैं। घर में दबाव बन रहा है। इसलिए रिस्क लेकर भी घर से बाहर निकल रहे हैं।
  • कुछ नहीं होगा: जो लोग बाहर निकल रहे हैं या साथ में स्मोक शेयर कर रहे हैं, वो मान चुके हैं कि हमें कुछ नहीं होगा और अगर कुछ हो भी गया तो खास फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि हम जवान हैं।

लॉकडाउन के बीच लोग रीति-रिवाज को क्यों इतना तवज्जों दे रहे हैं?

  • दुनियाभर की कई लैब्स में कोविड 19 को हराने के लिए वैक्सीन की खोज की जा रही है। साइंटिस्ट दावा कर रहे हैं कि कोरोना की वैक्सीन सितंबर के अंत तक आ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह इतिहास का सबसे तेज वैक्सीन प्रोग्राम होगा। दवा न मिलने की स्थिति में कोरोना से बचने का उपाय है मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग करना।
  • सभी चेतावनियों के बाद भी लोग शादी, जन्मदिन, सालगिरह जैसे कई आयोजन कर रहे हैं और इसमें भीड़ भी शामिल हो रही है। डॉक्टर सिंह बताती हैं कि घर वालों, समाज के दबाव और रूढ़ीवादी सोच के कारण रीति रिवाज को मानना जरूरी हो रहा है। लोगों के बीच यह विचार विकसित नहीं हुए हैं कि इन सब चीजों के बारे में गहनता से सोचें।
  • डॉक्टर सिंह कहती हैं कि सोशल कस्टम इसलिए फॉलो किए जा रहे हैं, ताकि लोग हमारे बारे में गलत न सोचें। लोग इस मौके को अपने ताकत के प्रदर्शन की तरह भी उपयोग कर रहे हैं। वे इस दौरान कई दावे कर खुद को बड़ा साबित करने में लगे हुए हैं। साथ ही लोग समाज के डर के कारण ही अपनी ट्रेवल हिस्ट्री भी बताने में हिचक रहे हैं।
  • डॉक्टर सिंह के मुताबिक, लोगों को लग रहा है कि अगर वे अपनी बीमारी के बारे में किसी को बता देंगे, तो लोग उन्हें रिजेक्ट कर देंगे। आमतौर पर ऐसा देखने में भी आ रहा है। कोई भी संक्रमण को अपनी मर्जी से तो नहीं लेता है।

फ्रंटलाइन वर्कर्स को लोग गुस्से का शिकार क्यों बना रहे?

  • कुछ वक्त पहले देश के कई हिस्सों से डॉक्टर और पुलिस समेत कई फ्रंटलाइन वर्कर्स पर हमले की खबरें आईं थीं। लोगों ने सैंपल लेने पहुंची स्वास्थ्य कर्मियों की टीम पर जानलेवा हमले किए। वहीं, कई जगहों पर सुरक्षा इंतजामों नियमों को पालन करवाने में लगे पुलिसकर्मी भी इन हमलों का शिकार हुए। डॉक्टर सिंह इसके पीछे का कारण अफवाहों को बताती हैं।
  • डॉक्टर पून सिंह के मुताबिक लोअर सोशियो इकोनॉमिक वर्ग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। लोग पढ़े-लिखे नहीं होने के कारण दूसरों की बातों में आकर ऐसा कर रहे हैं। लोगों को डर है कि, पता नहीं ये हमें कहां लेकर जाएंगे या क्या खिलाएंगे। जबकि डॉक्टर आहूजा पुलिसकर्मियों के साथ हो रही बदसलूकी का जिम्मेदार भड़ास को मानती हैं।
  • डॉक्टर आहूजा ने कहती हैं कि नियम नहीं मानने पर पुलिसकर्मी फटकार लगाते हैं तो लोग तब प्रतिक्रिया देते हैं जब वे समूह में होते हैं। अकेले में इनका बर्ताव बदल जाता है। उन्होंने कहा कि, ये लोग कोविड पर गुस्सा नहीं निकाल पा रहे हैं, ऐसे में खुद को तसल्ली देने और आत्मविश्वास दिलाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।

शराब के लिए लोग लाइन में क्याें लग रहे?

  • लॉकडाउन 3.0 में सरकार ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए शराब की दुकानें खोलने का फैसला किया था। इस दौरान महीनों से बिना शराब के चल रहे शौकीनों ने राजधानी दिल्ली में दुकान के बाहर करीब 1 किमी लंबी लाइन लगा ली। हालांकि इस लाइन में जो केवल एक वर्ग नजर आ रहा था, वह था शराब के शौकीनों का।
  • डॉक्टर पूनम सिंह कहती हैं कि इसमें सबसे बड़ी परेशानी है लत, जो लोग एडिक्टेड हैं वे डर की परवाह नहीं करते हैं। यह एक तरह का डिसॉर्डर है। इससे जूझ रहे लोग कोई भी रिस्क लेने के लिए तैयार हैं। उन्हें किसी भी तरह से इसे हासिल करना है। इसके अलाव कुछ लोग कुछ लोगों में एंटी सोशल पर्सानालिटी होती है और उन्हें नियम तोड़ने में मजा आता है। जो भी नियम बनाए जाएंगे वे तोड़ेंगे।

घर में रहकर दिमाग को शांत कैसे रखें?

  • फिजीकल एक्सरसाइज: घर में मूवमेंट जरूर करते रहें। अवसाद से ग्रस्त लोगों में दो लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें अकेले रहना और एक जगह पर बने रहना शामिल है। पूरे दिन घर में बंद न रहे और सनलाइट लें।
  • लोगों से बातचीत करें: घर में रहने के दौरान लोगों से बातचीत करें। इसके लिए फोन कॉल से ज्यादा अच्छा है वीडियो कॉल पर बात करना। क्योंकि इसमें आप सामने वाले का चेहरा देखते हैं। इससे आपको और दूसरों को तसल्ली मिलती है।
  • हेल्दी टच: भारत में टच का बहुत महत्व है। हम आमतौर में भी घर में एक दूसरे को प्यार से, आशीर्वाद लेने में, आदर करने में छूते हैं। लेकिन कोरोनावायरस के कारण यह एकदम बंद हो गया है। टच बहुत जरूरी है। कम से कम घरवालों के साथ शारीरिक तौर पर व्यक्त करें। आप गलें मिल सकते हैं, हाथ मिला सकते हैं।
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दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाएं, 8 गिलास पानी पिएं; कोरोना से बचाव के लिए विटामिन-सी, डी को दिनचर्या में शामिल करें


  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक- भारत में बढ़ती गर्मी और ह्यूमिडिटी से सीजनल अफेक्टिव डिस्ऑर्डर की समस्या बढ़ती है
  • धूप से मिलने वाला विटामिन-डी कोरोना से लड़ने में मददगार, क्योंकि यह टी-सेल के निर्माण में सहायता करता है
  • अपने भोजन में हल्दी-जीरा-धनिया-लहसुन जरूर शामिल करें, यह इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी है

अनुज खरे

May 31, 2020, 05:40 AM IST

यह कोरोनाकाल की पहली गर्मी है। सामान्य तौर पर जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक से लेकर डायरिया और पसीने के कारण स्किन में एलर्जी जैसी कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। इस बार कोरोना के कारण इन दिक्कतों के साथ कुछ अलग तरह के कॉम्पलिकेशन भी दिखाई देंगे। हेल्थ एक्सपर्ट्स के सुझाए दिनभर के रूटीन को अपनाकर आप गर्मियों में हेल्दी रह सकते हैं। 

एक्सपर्ट्स की राय-

विटामिन सी के लिए नींबू, संतरा आंवला जैसे फलों का सेवन करें

1- दिल्ली के स्वस्थ अस्पताल की डॉक्टर माधवी ठोके का मानना है कि विटामिन सी किसी भी तरह के इंफेक्शन को रोकने और इम्युनिटी बढ़ाने में बहुत मददगार होता है।

2- डॉ. माधवी कहती हैं कि विटामिन सी के लिए नींबू, संतरा, मौसमी, किन्नू, स्ट्रॉबरी, जामुन, आंवला जैसे फलों का नियमित सेवन करें। इसके अलावा विटामिन बी और जिंक का सेवन किसी भी इंफेक्शन को रोक सकता है। 

3- धूप से मिलने वाला विटामिन-डी कोरोना से लड़ने में बहुत सहायक है। क्योंकि यह टी-सेल के निर्माण में सहायता करता है। 

4- डॉक्टर माधवी बताती हैं कि यही टी-सेल इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने में बेहद मददगार होती है। जो कोरोना वायरस से लड़ने में फ्रंटलाइन वॉरियर का काम करती है।

क्या करें और क्या न करें?

  • धूप हमारे शरीर के लिए अमृत 

आयुर्वेद चिकित्सक और बीमारियों पर 10 से ज्यादा किताबों के लेखक डॉक्टर अबरार मुल्तानी के अनुसार धूप हमारे शरीर के लिए अमृत है। धूप लेेने को आयुर्वेद में अताप स्नान कहा गया है। 
सामान्य तौर सुबह 7 से 10 बजे के बीच 10-15 मिनट धूप सेंकने से विटामिन-डी का निर्माण शरीर में होने लगता है। 

  • फ्रिज के ठंडे पानी को अवाइड करें

डॉक्टर मुल्तानी गुनगुना पानी भी इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बहुत बढ़िया मानते हैं। उनका कहना है कि यह पाचन और मेटाबॉलिज्म को सही रखता है। इसके अलावा फेफड़ों तथा गले को स्वस्थ रखता है। कोशिश करें कि जब भी प्यास लगे तो कुनकुना पानी ही लें। फ्रिज के ठंडे पानी को अवाइड करें।

  • चाय-कॉफी से बचें, नियमित अंतराल पर पानी पिएं

सीके बिरला हॉस्पिटल, नई दिल्ली के इंटरनल मेडिसिन विभाग के कंसल्टेंट डॉ. तुषार तायल के अनुसार डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी। पानी तीन तरह से शरीर से कम होता है।   

1. पसीने से।

2. किसी शारीरिक एक्टीविटी के माध्यम से। 

3. आपकी सांस से।

इन उपायों को अपनाकर आप खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं-

रूटीन ऐसा बनाइए कि बिना प्यास लगे भी पानी पिएं

  • डॉ. तुषार कहते हैं कि इससे चक्कर और कमजोरी आती है। नियमित रूप से यह स्थिति रहने से जान जाने का खतरा भी रहता है। चूंकि गर्मी में किसी भी तरह की एक्टिविटी में पसीना निकलता है और हम डिहाइड्रेट महसूस करते हैं। कुछ उपायों को अपना कर आप खुद को हाइड्रेट रख सकते हैं। 
  • डॉ. तुषार के मुताबिक, यदि आप घर पर भी हैं तब भी दिनभर में आधा लीटर पानी सांस के माध्यम से और आधा लीटर पानी पसीने के जरिए निकल जाता है। जब भी आपको प्यास लगती है तो इसका मतलब होता है आप 2 फीसदी डीहाइड्रेशन के शिकार तो हो ही चुके होते हैं।  
  • इसके अलावा रूटीन ऐसा बनाइए कि बिना प्यास लगे भी दिनभर में नियमित अंतराल में पानी पीते रहिए। इससे आपके शरीर से जो पसीना निकल रहा है उसकी लगातार भरपाई होती रहेगी।

खीरा, तरबूज, खरबूज जैसे फलों का सेवन करें 

  • डॉ. तुषार कहते हैं कि इसी तरह यदि आप वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो एक वॉटर बोतल पूरे समय अपने बाजू में रखें। नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। हो सके तो इसके लिए कोई अलॉर्म लगा लें जो आपको पानी पीने के बारे में रिमाइंड करवाता रहे।
  • खीरा, तरबूज, खरबूज जैसे फलों का सेवन करें जिनमें काफी मात्रा में वाटर कंटेंट होता है। ज्यादा मात्रा में चाय-कॉफी पीने से बचें। इसकी जगह लस्सी, छाछ, ताजे फलों के जूस को दिनचर्या में शामिल करें।

कम से कम दो बार नहाने की कोशिश करें

  • डॉ. तुषार के मुताबिक, ब्रेकफास्ट को किसी भी हालत में अवॉइड न करें। मसालेदार खाने से बचें। कम से कम दो बार नहाने की कोशिश करें। 
  • बहुत लंबे समय के लिए एसी रूम में बैठने से बचें। एसी के एयर फिल्टर नियमित रूप से साफ करते रहें। 
  • सुबह अपने कमरे की खिड़कियां जरूर खोलें ताकि क्रॉस वेंटिलेशन की प्रक्रिया हो, ताजी हवा कमरे में आए।
  • यदि बाहर जाना हो तो हमेशा एक गिलास पानी पीकर ही बाहर निकलें।

रिसर्च के मुताबिक-
20 यूरोपीय देशों में कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई, उनमें विटामिन डी की मात्रा बहुत कम थी

  • इसी तरह ब्रिटेन के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल के डॉक्टर पीटर क्रिश्चिचन के नेतृत्व में ब्रिटेन सहित 20 यूरोपियन देशों में हुई एक रिसर्च में पाया गया है कि कोरोना से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके ब्लड में विटामिन डी की मात्रा बहुत कम थी। 
  • लुसियाना और टेक्सस के रिसर्चर्स ने एक अस्पताल में भर्ती कोरोना के 19 मरीजों पर की गई रिसर्च में पाया है कि इनमें से 11 पेशेंट्स में विटामिन डी की भारी कमी थी। 
  • इंडोनेशिया में 780 कोरोना पॉजिटिव मरीजों के डॉक्युमेंट्स की जांच गई जिसमें पाया गया कि इनमें से जिन मरीजों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हुई सभी में विटामिन डी का स्तर सामान्य से बहुत कम था।
  • आयरलैंड की रिसर्च टीम ने यूरोपियन देशों की जनसंख्या का एनालिसिस करके पाया कि जिन देशों के लोगों में विटामिन डी का स्तर कम है वहां कोरोना से हुई मौत की दर ज्यादा है। 
  • इस रिसर्च के आधार पर उन्होंने सरकारों से अपील की है कि लोगों में विटामिन डी  का स्तर बढ़ाने के लिए तत्काल काम करें।

आयुष मंत्रालय के सुझाव-
कोरोना से बचाव के लिए योग-प्राणायाम कर बढ़ाए इम्युनिटी 

  • कोरोना से फाइट के लिए मजबूत इम्युनिटी सिस्टम की जरूरत होती है। जिसके लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी होता है। ताकतवर इम्युनिटी से आप किसी भी तरह के बाहरी बैक्टीरिया, वायरस से जबरदस्त तरीके से लड़ सकते हैं, परिवार और खुद को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। 
  • इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कुछ टिप्स शेयर किए हैं। इसके अनुसार नियमित रूप से आप योग, प्राणायाम करें। इसके लिए रोज कुछ समय निकालना ही चाहिए।
  • अपने भोजन में हल्दी-जीरा-धनिया-लहसुन जरूर शामिल करें। विशेष रूप से लहसुन में एलिसिन पाया जाता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी है। साथ ही ज्यादा तेल-मसाले वाले खाने से पूरी तरह दूरी रखें। 
  • किसी अच्छे ब्रॉन्ड का एक चम्मच च्यवनप्राश रोज सुबह या शाम पूरे परिवार सहित जरूर लें। जिन्हें डायबिटीज है, वे शुगर फ्री च्वयनप्राश ले सकते हैं।
  • काढ़ा बनाकर दिन में एक दो बार सेवन करें। काढ़ा तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ और मुनक्का के मिश्रण से तैयार किया जाता है। इसमें गुड की हल्की मात्रा या नीबू का रस मिला सकते हैं।
  • कोरोना के खिलाफ इम्युन सिस्टम मजबूत करने के लिए हल्दी मिला गोल्डन दूध बहुत उपयोगी है। इसे दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। 
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कोरोना मरीजों के कमरे और भीड़ वाली जगहों से ज्यादा खतरनाक है बिना वेंटिलेशन वाला बाथरूम, एक्सपर्ट्स की सलाह- मास्क पहनना ही बेहतर उपाय


  • सिर्फ गंदी सतह छूना ही कोरोनावायरस के फैलने का मुख्य जरिया नहीं, इसके लिए करोड़ों वायरस की जरूरत होती है
  • डच शोधकर्ताओं ने लार की बूंदों की स्टडी की, पाया कि सिर्फ दरवाजा या खिड़की खुलने भर से एयरोसोल्स दूर हो जाते हैं

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 08:57 PM IST

अपूर्वा मंडाविली. वैज्ञानिक मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने, 6 फीट की दूरी बनाने की सलाह देतें हैं। इसके पीछे कारण है, आप तक पहुंचे वायरस के कणों को कम से कम करना। वायरस के थोड़े से कण आपको बीमार नहीं बना सकते, क्योंकि आपका इम्यून सिस्टम ऐसा करने से पहले ही, उन्हें खत्म कर देगा। सवाल है कि संक्रमण फैलाने के लिए आखिर कितने वायरस की जरूरत होती है? इसका असरदार डोज कितना होना चाहिए?

इसका जवाब नामुमकिन है, क्योंकि संक्रमण के वक्त का पता करना बहुत कठिन होता है। साइंटिस्ट इसके लिए जानवरों पर स्टडी कर रहे हैं, लेकिन इंसानों में कोरोनावायरस के अलग-अलग डोज के साथ स्टडी करना ठीक नहीं होगा। जैसा कि वैज्ञानिक हल्के सर्दी के वायरस के साथ करते हैं। न्यूयॉर्क में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट एंजेला रासमुसेन कहती हैं कि सच्चाई यह है कि हमें यह एकदम नहीं पता। मुझे नहीं लगता कि हम एक अनुमान से बेहतर कुछ भी बना सकते हैं। 

कोविड के लिए सैकड़ों डोज की जरूरत पड़ सकती है

  • सार्स में अनुमानित डोज कुछ सैकड़ों कण होते हैं। जबकि मर्स में यह आंकड़ा बढ़कर हजारों तक पहुंच जाता है। डॉक्टर रासमुसेन बताती हैं कि, नए कोरोनावायरस, SARD-CoV-2 काफी हद तक सार्स से मिलता जुलता है। इसलिए इसका डोज भी सैकड़ों पार्टिकल्स तक हो सकता है। लेकिन भविष्यवाणियों को चुनौती देना वायरस की आदत होती है। 
  • आमतौर पर जिन लोगों में वायरस का स्तर ज्यादा होता है, फिर चाहे वो इंफ्लूएंजा, एचआईवी या सार्स हो। ऐसे लोगों को लक्षण भी ज्यादा दिखाई देते हैं और इनसे दूसरे लोगों तक वायरस पास होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन कुछ स्टडीज के अनुसार नए कोरोनावायरस के मामले में जिन लोगों में लक्षण नहीं होते, उन लोगों में भी गंभीर रूप से बीमार लोगों जितने वायरस होते हैं।
  • वहीं, कोरोनावायरस के मरीज लक्षणों के शुरू होने से पहले तक ज्यादा संक्रमित होते हैं और बीमार होने के बाद यह कुछ कम हो जाते हैं।

नाक का आकार, बाल और म्यूकस वायरस के डोज को प्रभावित कर सकता है

  • कुछ लोग कोरोनावायरस के गंभीर ट्रांसमिटर होते हैं, जबकि कुछ इसमें कंजूस होते हैं। ऐसा लगता है कि इस वायरस को तथाकथित तेजी से फैलाने वाले इसे प्रसारित करने में गिफ्टेड होते हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि ये लोग ऐसा अपनी बायोलॉजी के कारण करते हैं या बिहेवियर के चलते। 
  • वहीं, प्राप्त करने वालों पर व्यक्ति की नाक का आकार, नाक के अंदर बालों और म्यूकस संक्रमित करने वाली वायरस की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, डोज इसपर भी निर्भर करता है कि यह सांस खींचते वक्त अंदर गया है या निगला गया है। लोग किसी गंदी सतह को छूकर वायरस लेते हैं और अपने चेहरे और नाक पर लगा लेते हैं। लेकिन सीडीसी के मुताबिक, यह वायरस फैलने का मुख्य जरिया नहीं है। सांस अंदर लेने की तुलना में इस तरह से वायरस फैलने के लिए लाखों की संख्या में वायरस की जरूरत होगी। 

छोटी बूंदे हवा में काफी देर तक रह सकती हैं

  • खांसने, छींकने, गाने, बोलने और यहां तक कि तेज सांस लेने से भी हजारों वायरस युक्त बूंदे निकलती हैं। बॉस्टन स्थित बेथ इजरायल डीकोनेस मेडिकल सेंटर में वायरल इम्यूनोलॉजिस्ट डॉक्टर डेन बरूच बताते हैं कि यह साफ है कि वायरस के ट्रांसमिशन के लिए किसी बीमार को खांसने या छींकने की जरूरत नहीं है। 
  • बड़ी बूंदें भारी होती हैं और जल्दी ही नीचे आ जाती हैं। इसके अलावा सर्जिकल मास्क में भी घुस नहीं सकतीं। लेकिन 5 माइक्रॉन्स से कम डायामीटर वाली बूंदें यानी एयरोसोल्स हवा में घंटों तक रह सकती हैं। एयरोसोल से होने वाले ट्रांसमिशन में तीन चीजें बेहद जरूरी हैं। संक्रमित व्यक्ति से निकटता, हवा का बहाव और टाइमिंग।

केवल थोड़े हवा के बहाव से दूर हो जाते हैं एयरोसोल्स

  • खिड़की वाले और कम उपयोग में आने वाले बाथरूम की तुलना में एक ऐसा बाथरूम खतरनाक होता है जिसमें खिड़की नहीं है और लोगों का ज्यादा आना जाना है। इन सबसे अच्छा और सुरक्षित से किसी मास्क लगाए पड़ोसी से बातचीत करना।
  • हाल ही में डच शोधकर्ताओं ने एक खास स्प्रे नॉजल की मदद से लार की बूंदों की स्टडी की। उन्होंने पाया कि केवल दरवाजा या खिड़की खुलने भर से एयरोसोल्स दूर हो जाते हैं। स्टडी का नेतृत्व करने वाले और यूनिवर्सिटी ऑफ एम्सटर्डम में फिजिसिस्ट डैनियल बॉन कहते हैं कि एच हल्की सी हवा भी यह काम कर सकती है।

बिना वेंटिलेशन वाली टॉयलेट में मरीजों के कमरे से ज्यादा एयरोसोल कण पाए गए

  • अप्रैल में चीन के वुहान स्थित दो अस्पतालों में मिले ऑब्जर्वेशन प्रकाशित हुए थे। जिसमें पता चला था कि मरीजों के कमरे और भीड़-भाड़ वाले इलाकों के मुकाबले बिना वेंटिलेशन वाले बाथरूम में ज्यादा एयोरोसोल्स मिले।
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि ये पांच माइक्रॉन्स से छोटे थे, इसलिए इनमें वायरस कम होगा। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में क्वांटेटिव बायोलॉजिस्ट डॉक्टर जोशुआ रैबीनोवित्ज ने कहा कि आपको जोखिम में लाने के लिए ऐसी कई सारी बूंदों की जरूरत होगी। 

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बचाव का सबसे अच्छा तरीका मास्क

  • एक्सपर्ट बताते हैं कि भीड़ वाली भीतरी जगहों से बचने से अच्छा है कि लोग मास्क पहनें। अगर मास्क आपको वायरस युक्त बूंदों से पूरी तरह नहीं बचा सकता तो यह इनकी संख्या को कम कर देगा।
  • डॉक्टर रैबीनेवित्ज बताते हैं कि यह उस तरह का वायरस नहीं है, जिसके लिए हाथ धोना काफी है। हमें भीड़ को कम करना होगा और मास्क पहनने होंगे। 
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लॉकडाउन के दौर में कार की चाबी और दवाइयों को मासूमों की पहुंच से रखें दूर, घर में छोटे बच्चे हैं तो खिड़कियों को बंद करें


  • कोरोनावायरस के कारण इस बार बच्चों की गर्मियों की छुट्‌टी घर में ही गुजरेगी
  • गर्मियों का वक्त बच्चों के लिए खतरनाक, मई से अगस्त के बीच ज्यादा चोटें लगती हैं
  • बिजली के तार, फर्नीचर जैसी चीजें बच्चों के लिए बन सकती हैं दुर्घटना का कारण

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 01:42 PM IST

जोली कीर. कोरोनावायरस महामारी के कारण इस बार बच्चों की गर्मियों की छुट्‌टी घर में ही गुजरेगी। ऐसे में पैरेंट्स को घर में किसी दुर्घटना से बचने के लिए और ज्यादा ध्यान देना होगा। कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन में कम्युनिकेशन के डायरेक्टर जो मार्टियाक के मुताबिक, बच्चे पहले से ज्यादा वक्त घर में बिता रहे हैं। लेकिन दूसरे कामों में व्यस्त पैरेंट्स का फोकस भी उनपर कम हुआ है। ऐसे हालात में बच्चों के रिस्क के संपर्क में आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

सीडीसी के मुताबिक, गर्मियों का वक्त बच्चों के लिए खतरनाक होता है। नवजात से लेकर 19 साल के बच्चों को लगने वाली 40 फीसदी गैरइरादतन चोटें मई से अगस्त की बीच लगती हैं। इन परेशानियों से बचने के लिए सेफ्टी एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं।

  • बिजली के तार

बच्चों के लिए सेफ्टी प्रोडक्ट्स बनाने वाले सेफ्टी फर्स्ट के डायरेक्टर केली सेनिक बताती हैं कि आउटलेट कवर के अलावा भी बिजली के प्रति सेफ्टी रखना जरूरी होता है। अगर कोई तार ढीला है तो बच्चा उसे दांतों से काट सकता है, या खुद को उसमें फंसा सकता है। घर के बड़े घर में बिजली के तारों को कम कर सकते हैं या उनमें कवर लगा सकते हैं। फोन, टैबलेट और कंप्यूटर चार्जर बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

  • खिड़कियां
  1. कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन खिड़कियों को घर के पांच बड़े खतरों में से एक मानता है। एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, हर साल 5 साल या इससे कम उम्र के 7 बच्चों की खिड़की से गिरने से मौत हो जाती है। जबकि हर साल अमेरिका में अस्पतालों के एमरजेंसी रूम में 3 हजार बच्चों का इलाज किया जाता है। 
  2. विंडो स्क्रीन दुर्घटना रोकने के लिए सही नहीं हैं, इसलिए घर में विंडो गार्ड्स या स्टॉप लगाएं। इसके अलावा मार्टियाक ऐसे फर्नीचर के प्रति भी चेतावनी देते हैं, जो बच्चों को खिड़कियों तक पहुंचने में मदद करते हैं। जैसे खिड़कियों के पास कुर्सियां। वहीं, पर्दे के तारों से भी खतरा हो सकता है। इसलिए खिड़कियों को कॉर्डलेस तरीके से कवर करें। 

बुकशेल्फ, टीवी  जैसे बड़े और भारी फर्नीचर बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। ऐसे फर्नीचर पर एंकर और स्टॉप्स लगाएं, ताकि बच्चे इन्हें अपनी तरफ न खींच सकें। दराज के निचले हिस्सों में कोई भारी चीज रखें और रिमोट, खिलौनों जैसी कोई भी चीज न रखें। क्योंकि बच्चे इन्हें लेने की चाह में चोटिल हो सकते हैं।

  • घर के अंदर पानी से बचाव

सेफ किड्स वर्ल्डवाइड में प्रोग्राम डायरेक्टर एमिली सेमुअल के अनुसार, घर में रह रहे बच्चों की वॉटर सेफ्टी ज्यादा जरूरी है। पानी के आसपास घूम रहे बच्चों का ध्यान रखें। बच्चों के नजदीक ही रहें। उन्होंने कहा कि बच्चों के नहाते वक्त पहले ही टॉवेल, साबुन समेत जरूरी चीजें ले आएं। नहाने के दौरान बच्चे को अकेला छोड़कर न जाएं। 

  • बाहरी खतरे

सेमु्अल के मुताबिक कार भी एक बड़ा खतरा हो सकता है। बच्चे खुली गाड़ियों और ट्रंक में आसानी से जाकर खुद को लॉक कर सकते हैं। सेन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी में मौसम विज्ञानी जैन नल की व्हीकल हीटिंग स्टडी से पता चलता है कि, पार्क गाड़ी के अंदर का तापमान बाहर से औसत 19 डिग्री केवल 10 मिनट में बढ़ सकता है। पैरेंट्स को गाड़ी लॉक कर चाबियों को बच्चों की पहुंच और नजर से दूर रखना चाहिए।

  • मेडिसिन और क्लीनिंग प्रोडक्ट

बच्चों के सामने दवाई और घर की सफाई करने वाले प्रोडक्ट्स न छोड़ें। क्योंकि बच्चे इसे कैंडी समझकर खा सकते हैं। मार्टियाक बताते हैं कि कई लोग डिसइंफेक्ट प्रोडक्ट्स की खाली कैन और बोतलों को जमीन पर छोड़ जाते हैं। इस तरह का सामान केवल सुविधा के लिए कहीं भी नहीं छोड़ना चाहिए। सभी दवाइयां, क्लीनिंग प्रोडक्ट्स, ग्लू, पेंट जैसी चीजों को बंद कर और बच्चों से दूर रखना चाहिए।

  • छोटी चीजें जो गले में फंस सकती हैं

केवल तार ही नहीं, घर में मिलने वाली छोटी चीजें जैसे गेम के टुकड़े, सिक्के गले में फंस सकते हैं। बच्चों के खिलौनों को उनकी उम्र के हिसाब से चुनें और बड़े बच्चों के खिलौनों को छोटे बच्चों से दूर रखें। सेमुअल बच्चों की नजर से घर के खतरों का सर्वे करने की सलाह देते हैं। 

  • किचन सेफ्टी 

सेनिक बताती हैं कि किचन में बच्चों की सेफ्टी को काफी ज्यादा खतरा हो सकता है। इसमे उपकरण, टूटा कांच शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ा खतरा जलने से है। गर्म खाने या तरल को गिरने से बचाने के लिए स्टोव के बैक बर्नर का इस्तेमाल करें और बर्तन के हैंडल को कोनों से हटा दें। खाना बनाते वक्त बच्चे को गोद में लेने से बचें। सेनिक किचन में एक ऊंची कुर्सी की सलाह देती हैं जो बड़ों की नजर और पहुंच में हो। 

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लंबी रिंग फिंगर वाले पुरुषों को मौत का खतरा कम, 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च से पता चला


  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन देशों में पुरुषों की रिंग फिंगर (अनामिका) छोटी, वहां कोविड-19 से 30% तक ज्यादा मौतें हुईं
  • रिसर्च में दावा किया- टेस्टोस्टेरॉन नाम के सेक्स हार्मोन पर निर्भर है रिंग फिंगर का छोटा या लंबा होना

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:54 AM IST

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोरोना के संक्रमण और उंगुलियों के बीच एक कनेक्शन ढूंढ़ने का दावा किया है। उनका कहना है कि ऐसे पुरुष जिनकी रिंग फिंगर (अनामिका) लम्बी है उन्हें कोविड-19 से मौत का खतरा कम है।

डेली मेल की खबर के मुताबिक यह दावा ब्रिटेन की स्वानसी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च के बाद किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, छोटी रिंग फिंगर वाले पुरुषों में कोरोनावायरस के संक्रमण के बाद हल्के ही लक्षण देखे गए। 

छोटी रिंग फिंगर वालों में मौत का खतरा 30% तक ज्यादा 
शोधकर्ताओं ने जब उन देशों का अध्ययन किया जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती हैं। सामने आया कि वो देश कोरोना से सर्वाधिक मौतों के मामले में टॉप 3 में शुमार हैं। यहां अन्य देशों की तुलना में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 30% तक ज्यादा पाया गया। 

कहां-कैसी है रिंग फिंगर 
रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन, बुल्गारिया और स्पेन उन 10 देशों में शामिल हैं, जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती है। वहीं मलेशिया, सिंगापुर और रूस में पुरुषों की रिंग फिंगर लंबी होती है। छोटी रिंग फिंगर वाले 10 देशों में कोरोना वायरस से लगभग 1 लाख लोगों में से 4.9 (एवरेज) कोविड- 19 से मौत हुई। वहीं लंबी रिंग फिंगर वाले देशों में यह आंकड़ा 2.7 है। यानी मौत का आंकड़ा लगभग 50% तक कम है। 

सेक्स हार्मोन पर निर्भर है उंगली का लंबा होना 
विशेषज्ञों के अनुसार गर्भ में अगर बच्चे के टेस्टोस्टेरॉन का विकास ज्यादा होता है, तो उसकी रिंग फिंगर लंबी होती है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुषों का सेक्स हार्मोन होता है। यही शरीर में एसीई -2 रिसेप्टर्स की संख्या बढ़ाकर कोविड-19 से लड़ने में मदद करता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन रिसेप्टर्स की संख्या अधिक बढ़ने पर लंग्स के डैमेज होने का खतरा भी होता है। 

कैसे चेक करें रिंग फिंगर छोटी है या लम्बी? 
सबसे पहले अपनी इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) को लंबाई को मिलीमीटर में नापें। इसके बाद अपनी रिंग फिंगर की लंबाई नापें। इंडेक्स फिंगर की लंबाई से रिंग फिंगर की लंबाई के आंकड़े को घटाएं। आपकी रिंग फिंगर छोटी है या लंबी, यह इंडेक्स फिंगर और रिंग फिंगर की लंबाई के अंतर के आधार पर तय होगा। अगर यह अंतर 0.976 या इससे कम है तो आपकी रिंग फिंगर लंबी है। अगर यह 0.99 या उससे ज्यादा है तो रिंग फिंगर छोटी है। 

कोविड-19 के चलते महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की हो रही मौत 
रिसर्च में शामिल किए गए आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि कोविड-19 से महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की मौत हो रही है। हालांकि फिलहाल वैज्ञानिक इसका कारण नहीं खोज पाए हैं। इंग्लैंड और वेल्स का ही उदाहरण लें, तो यहां प्रति 1 लाख लोगों में कोविड-19 से मरने वाले पुरुषों का एवरेज 97.5 है। वहीं महिलाओं का एवरेज 46.5 है।

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कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीज घर पर भी ठीक हो सकते हैं, लेकिन सांस में परेशानी, सीने में दर्द, होंठ या चेहरा नीला होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें 


  • बीमारी के दौरान हर गतिविधी को मॉनिटर करें; लक्षण बिगड़ने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें
  • शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी, इसलिए खुद को वक्त दें और आराम करें
  • लो ऑक्सीजन वाले मरीजों को सांस की तकलीफ के बजाए चक्कर आने जैसी परेशानियां होती हैं

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 01:27 PM IST

मैगी एस्टर. कोविड-19 से संक्रमित होने के बारे में मालूम चलना डराने वाली बात होती है। लेकिन जैसे-जैसे लोग इससे उबर रहे हैं, विजेताओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही दूसरे लोगों को इनसे मार्गदर्शन भी मिलने लगा है। मैं और मेरे पति मार्च के आखिर में कोरोनावायरस की चपेट में आ गए थे। हममें बहुत मामूली लक्षण दिख रहे थे, लेकिन हम पहली बार इतने बीमार पड़े थे। हम ठीक से सांस नहीं ले पा रहे थे, हमें पता था कि हम अस्पताल नहीं जा सकते। लेकिन हम क्या कर सकते थे।

डॉक्टर्स नें हमें आराम करने, तरल पदार्थ लेने और बुखार कम करने के उपाय करने की सलाह दी। यह जरूरी था, लेकिन बीमारी की स्थिति को देखते हुए ठीक नहीं लगा। इस दौरान हमने इंटरनेट के जरिए अपने दोस्तों और साथ काम करने वालों की मदद ली, ताकि वायरस से लड़ने में ताकत मिले।

डॉक्टर्स की सहायता कब लें?

  • पहले यह पक्का कर लें कि आपकी बीमारी घर पर ठीक हो सकती है। लेकिन अगर आप सांस लेने में परेशानी, सीने में लगातार दबाव-दर्द, कंफ्यूजन, जागने में और जागे रहने में परेशानी, होंठों या चेहरे का नीला होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। 
  • कुछ लोगों में शुरुआत में बहुत मामूली लक्षण होते हैं, लेकिन बाद में यह गंभीर होते जाते हैं। इन मरीजों में पहले लक्षण दिखने के बाद 4 से 8 दिन तक जल्दी-जल्दी सांस लेने में परेशानी होती। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर और कैंब्रिज हेल्थ एलायंस में इंटरनिस्ट डॉक्टर पीटर कोहेन बताते हैं कि यही वक्त होता है, जब लोग बीमारी पर ध्यान देना शुरू करते हैं।
  • डॉक्टर कोहेन के मुताबिक अगर जल्दी-जल्दी सांस लेने की परेशानी दिन ब दिन बिगड़ती जाए तो डॉक्टर से बात करें। लो ऑक्सीजन लेवल वाले मरीजों को सांस की तकलीफ के बजाए चक्कर आने जैसी परेशानियां भी होती हैं। 

घर पर आपको किन चीजों की जरूरत होगी?

  • होम क्वारैंटाइन हैं तो थर्मामीटर, एसीटामिनोफेन या इबुप्रोफेन और पीडियालाइट खरीद लें। पल्स ऑक्सीमीटर भी मददगार हो सकता है। अगर आप बीमार हैं और आपके पास सामान नहीं है तो दोस्त या डिलीवरी सर्विस से सामान मंगवा लें।
  • घर पर रहने के दौरान किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। इस बात का भी ध्यान रखें, जब तक आपका दोस्त या डिलीवरी वाला कोई सामान देने आता है, तो जब तक वे चले नहीं जाते, तब तक सामान उठाने के लिए दरवाजा न खोलें।

प्रिसक्रिप्शन मदद कर सकती हैं

  • हो सकता है कि ओवर द काउंटर दवाएं पर्याप्त न हों। खासतौर पर कोविड-19 के कारण होने वाली खांसी या उल्टी का मन काफी गंभीर हो सकता है और आपको दवा के पर्चे की जरूरत पड़ सकती है। अगर आपको दवाई की जरूरत लग रही है तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें। स्थिति बिगड़ने का इंतजार न करें। 

सांस को शांत करें

  • सूखी हवा खांसी और सीने में दबाव को बढ़ा सकती है। अगर आपके पास ह्युमिडीफायर है तो उसका उपयोग करें नहीं तो गर्म शॉवर लें। कई पाठकों ने बताया कि पेट के बल लेटने पर उन्हें अच्छा महसूस हुआ। 

लक्षणों का ध्यान रखें

  • जब आप बीमार होने लगें तो एक लॉग तैयार कर लें। जब भी आप अपना तापमान जांचे या गोली खाएं तो लिख जरूर लें। जब भी खाना खाएं या पानी पिएं तो लिखें। अगर एक लक्षण ठीक हो रहा है और दूसरा बढ़ रहा है तो उसे लिखें। रिकॉर्ड बनाना आपको अपनी चिंता सबसे पहले करने में मदद करता है। 

मानसिक स्वास्थ्य मायने रखता है

  • कोविड-19 होना बेहद तनावभरा होता है। इसमें पैनिक अटैक आना, अवसाद या घबराहट महसूस करना असामान्य नहीं है। डॉक्टर से अपने मानसिक स्वास्थ्य में बात करने में संकोच न करें। यह भी आपके शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही जरूरी है।
  • द टाइम्स में न्यूज असिस्टेंट डेरेक नॉर्मन बताते हैं कि बीमारी के सबसे बुरे वक्त में जब वे सांस लेने में परेशानी महसूस करते थे, तो सीधे बैठकर सांस पर फोकस करते थे। इस दौरान वे किसी याद को ताजा भी करते थे। आंख बंद कर किसी याद को ताजा करते वक्त मैं उसमें पूरी तरह खो जाता हूं। 
  • स्मार्टर लिविंग के एडिटर टिम हरैरा ताजी हवा पर जोर देते हैं। बीमार होना भी ठीक है। आपको हर दिन ऐसी स्थिति से गुजारना ही है, इसलिए नेटफ्लिक्स देखें, जिगसॉ पजल सुलझाएं। या जो भी आप दिन गुजारने के लिए करना चाहें, वो काम करें।

लीनियर रकवरी की उम्मीद न करें

  • कुछ लोगों को शुरुआत में तो बहुत मामूली लक्षण होते हैं, लेकिन बाद में यह बिगड़ते जाते हैं। कुछ का बुखार बार-बार घटता-बढ़ता है। कुछ लोग सीधे दो हफ्तों तक बीमार और कुछ दिन बिना लक्षणों के रहते हैं।
  • ऐसे हालात बेहद सामान्य और दर्दनाक हैं। जितना हो सके आप खुद को वक्त दें। आपके आर्थिक हालात अगर अनुमति देते हैं तो आराम करें। 
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एयरपोर्ट पर कॉन्टेक्ट से बचने के लिए मोबाइल एप से करें बोर्डिंग, दुकानों पर नगद देने के बजाए डिजिटल पेमेंट का लें सहारा


  • अगर कैब से जा रहे हैं तो उतरने के बाद सीट और हैंडल को वाइप्स से साफ करने की कोशिश करें
  • स्टडी के मुताबिक, विंडो सीट पर बैठने से मरीजों के संपर्क में आने की संभावनाएं कम हो जाती हैं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:59 PM IST

तरीरो एमजिजेवा. कोरोनावायरस के कहर के बीच देश में हवाई सेवाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बार हवाई यात्रा करने जा रहे यात्रियों के लिए यह अनुभव एकदम अलग होगा। कोरोनावायरस के पहले और अभी के हालातों में काफी फर्क आया है। घर से निकलकल से एयरपोर्ट पहुंचने तक के नियम भी बदल गए हैं। करीब दो महीने बाद प्लेन की सीट पर बैठने जा रहे लोग  यात्रा के हर लेवल पर बदलाव महसूस करेंगे।

एयरपोर्ट पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका?

  • अगर आप किसी के साथ आइसोलेशन में हैं तो कोशिश करें कि वही व्यक्ति आपको अपनी कार से एयरपोर्ट पहुंचाए। याद रखें कि, फिलहाल कैब सर्विसेज शेयरिंग की सुविधा नहीं दे रही हैं इसलिए आपको पहले से ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है। यह काफी विनम्र होगा कि आप कैब की यात्रा के बाद गाड़ी की सीट और हैंडल को वाइप्स से साफ कर दें। हालांकि कंपनियां भी ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स को क्लीनिंग सप्लाई मुहैया कराने की कोशिश कर रही हैं। 

एयरपोर्ट जाने से पहले की तैयारियां?

  • हवाई यात्रा की प्रक्रिया में आप कई सतहों को छूते हैं। सार्वजनिक जगह पर किसी भी चीज को टच करने से बचें। अपने साथ मास्क, वाइप्स और सैनिटाइजर रखें। कुछ एक्सपर्ट्स ग्लव्ज रखने की भी सलाह देते हैं। हालांकि सीडीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक दस्ताने जरूरी नहीं हैं। अधिकांश एयरलाइन सेवाएं बोर्डिंग के दौरान कॉन्टेक्ट से बचने के लिए मोबाइल एप की सुविधाएं देती हैं। 

एयरपोर्ट पर क्या उम्मीद करना चाहिए?

  • एयरपोर्ट पर फ्लोर से लेकर हवा तक की गहन तरीके से सफाई की जा रही है। कई एयरपोर्ट्स अपने यहां हैंड सैनिटाइजर स्टेशन की संख्या में इजाफा कर रहे हैं। कई एयरपोर्ट्स पर दुकानें बंद हो सकती हैं और सभी एयरलाइंस प्लेन में खाना सर्व नहीं कर रही हैं। बेहतर होगा कि आप घर से ही अपना खाना लेकर जाएं। कई जगहों पर कैश का उपयोग नहीं किया जा रहा है इसलिए कॉन्टेक्टलेस पेमेंट की तैयारी रखें।

सिक्युरिटी जांच और चेक इन के वक्त सुरक्षित कैसे रहें?

  • यहां आपकी घर से की गईं तैयारियां काम आएंगी। कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा काम मोबाइल एप की मदद से हो जाए। हैंड सैनिटाइजर साथ रखें और सामान लेन देन के वक्त इस्तेमाल करें। जमीन पर बनाए हुए सेफ्टी मार्कर का ध्यान रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। भीड़ वाली जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग संभव नहीं हो पाती है इसलिए हमेशा मास्क पहनें। अगर आपके पास खाना है तो इसे साफ प्लास्टिक बैग में रखें। इसके अलावा बेल्ट, वॉलेट, चाबियां और फोन को अपने कैरी बैग में रखें। 

बोर्डिंग की भीड़ से कैसे बचें?

  • अपनी एयरलाइन से बोर्डिंग की वर्तमान प्रक्रिया के बारे में जानें। कई एयरलाइन्स लोगों को 10 के समूह में बोर्ड करती हैं। वहीं, कुछ सेवाएं यह प्रक्रिया रो के रूप में करती हैं। अधिकांश एयरलाइन्स गेट पर भीड़ से बचने के लिए कम लोगों को बोर्ड करती हैं और लोगों से अपने बोर्डिंग पास खुद स्कैन करने के लिए कहती हैं। यह नीतियां एयरलाइन्स के हिसाब से बदलती रहती हैं, लेकिन ज्यादातर सेवाएं यात्रियों से बोर्डिंग के वक्त और फ्लाइट में मास्क पहनने के लिए कहती हैं। 

क्या कोई मेरे पास वाली सीट पर बैठेगा?

  • हो सकता है। सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीरों में सीटें भरी हुई नजर आ रही हैं। हालांकि यह सही नहीं है। एयरलाइन्स फॉर अमेरिका कंपनी का कहना है कि, अधिकांश फ्लाइट्स 50 प्रतिशत से कम भरी हुई हैं। कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में कहा था कि, एयरलाइन्स डिस्टेंसिंग के लिए कुछ सीटें छोड़ने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कई मौकों पर बन रहे हालात इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं। जब आपको यह पता हो कि यात्रा के दौरान आपको नहीं उठना है तो विंडो सीट चुनें। क्योंकि विंडो सीट पर बैठने वाले लोग बीमार लोगों के संपर्क में कम आते हैं। 

क्या मुझे सीट को साफ करना जरूरी है?

  • सीट को साफ करना बुरा आइडिया नहीं है, लेकिन एयरलाइन्स का कहना है कि वे प्लेन की गहन सफाई कर रहे हैं। अधिकांश एयरलाइन्स ने कोविड 19 पेज तैयार किया है, जिसमें यह जानकारी होती है कि, वे आपको सुरक्षित रखने के लिए क्या कर रहे हैं। 

क्या मुझे हर वक्त मास्क पहने रहने की जरूरत है?

  • हां, ज्यादातर एयरलाइंस यात्रियों को सफर के दौरान मास्क पहनने के लिए कहती हैं। आपको पता होना चाहिए कि प्लेन में हवा साफ होती है। कमर्शियल प्लेन रिसाइकिल बिन हाई एफिशिएंसी पर्टिकुलेट एयर फिल्टर्स(HEPA) का इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्टेशन के मुताबिक यह फिल्टर्स हवा में तैर रहे 99 प्रतिशत माइक्रोब्स को पकड़ लेते हैं। मास्क को खाते-पीते वक्त ही हटाएं। 
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कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल काम में आने वाले इलास्टोमेरिक्स रेस्पिरेटर्स पहन रहे डॉक्टर्स, कहा- यह एन95 से ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक


  • दुनियाभर में मास्क की कमी के बाद स्वास्थ्य कर्मियों को एक ही मास्क को साफ कर बार-बार पहनना पड़ रहा है
  • आमतौर पर अस्पतालों में एन95 मास्क का उपयोग किया जाता है, इसका उपयोग केवल एक बार कर सकते हैं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:54 PM IST

क्रिस हैंबी. कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स भी अपनी सेफ्टी को लेकर काफी चिंतित हैं। महामारी फैलने के बाद दुनियाभर में मास्क की सप्लाई में भारी कमी आ गई थी। ऐसे में डॉक्टर्स अब इस दुविधा से उबरने के लिए इंडस्ट्रियल मॉडल्स का सहारा ले रहे हैं। अस्पतालों में उपयोग में आने वाले एन95 की भारी कमी के बाद अब इलास्टोमेरिक्समास्क दिखाई देने लगे हैं। आमतौर पर इनका उपयोग कंस्ट्रक्शन साइट्स और इंडस्ट्रिज में होता है। 

कनेटिकट स्थित येल न्यू हेवन हॉस्पिटल में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर ऐलेन फजार्डो बताती हैं कि, “मुझे लगता है कि इसने हमें संकट से बचाया है।” इससे पहले डॉक्टर फजार्डो भी एन95 मास्क के भरोसे रहने वाले डॉक्टर्स में से एक थीं, लेकिन जैसे ही चीन में वायरस फैलने लगा येल हॉस्पिटल ने करीब 1200 इलास्टोमेरिक्स रेस्पिरेटर्स खरीद कर डॉक्टर्स को दे दिए। 

रिसर्च ने लगाया था मास्क की कमी का अनुमान
करीब एक दशक पहले सरकार की मदद से चल रही रिसर्च ने मास्क की कमी का अनुमान लगाया था। कई फेडरल एजेंसियों ने भी अस्पतालों और नितीनिर्धारकों से इलास्टोमेरिक्समास्क का भंडार करने की अपील की थी। इस मास्क को सालों तक साफ कर के दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। बीते साल शोधकर्ताओं ने पाया था कि, हेल्थ केयर वर्कर्स को तेजी से मास्क को फिट करने और उपयोग करने के लिए तैयार किया जा सकता है। 

अमेरिका में सरकार ने नहीं दिखाई प्रोडक्शन में रुची
अमेरिका में कुछ ही अस्पताल मास्क का उपयोग कर रहे हैं और सरकार ने मास्क के निर्माण और वितरण को बढ़ाने में कोई प्रयास नहीं किए। उसी समय एन95 की कमी के हालात यह हैं कि, उन्हें साफ कर दोबारा उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। 

जैसे-जैसे यह वायरस बढ़ रहा है और मेडिकल सेंटर्स संक्रमण के दूसरी लहर का अनुमान लगा रहे हैं। इलास्टोमेरिक्स का उपयोग करने वाले स्वास्थ्य कर्मी इसकी क्षमता पर घबराहट जता रहे हैं। येल न्यू हेवन्स में इंफेक्शन प्रिवेंशन के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर रिचर्ड मार्टिनेलो कहते हैं कि, मुझे नहीं लगता हम कुछ ऐसा अनोखा काम कर रहे हैं जो कहीं और लागू करना मुश्किल होगा। 

एक कंपनी ने शुरू किया मास्क का निर्माण
व्यवसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अधिकारियों के मुताबिक, बंद पड़ीं इंडस्ट्रियल सुविधाओं में उपयोग में नहीं लाए गए इलास्टोमेरिक्स होने की संभावना है। इसके अलावा निर्माण लाइन शुरू कर इन्हें और तेजी से तैयार भी किया जा सकता है। एक मेन्युफेक्टरर एमएसए सेफ्टी ने अतिरिक्त कर्मियों को नियु्क्त कर निर्माण चालू किया है। 

अमेरिकन मेडिकल डिपो के अध्यक्ष अखिल अग्रवाल के अनुसार हम आज जहां सिंगल यूज रेस्पिरेटर्स के दोबारा उपयोग करने वाले हेल्थ वर्कर्स के साथ हैं, यह पागलपन है कि हम अस्पतालों में मल्टिपल यूज इलास्टोमेरिक्स को तैनात नहीं कर पा रहे हैं। इलास्टोमेरिक्स के उपयोग के साथ कई चुनौतियां हैं, जिसमें फिटिंग और क्लीनिंग शामिल है। लेकिन इससे पहले इसे इस्तेमाल करने में जो मुख्य परेशानी सांस्कृतिक और आर्थिक है। 

2003 से 2018 तक वर्कर्स के प्रोटेक्टिव गियर पर फोकस करने वाली सीडीसी लैब की रिसर्च शाखा चलाने वाले डॉक्टर रॉन शैफर बताते हैं कि, हां कुछ सवाल इसकी सफाई को लेकर हैं, लेकिन बुनियादी तौर पर यह प्रोडक्ट इन्हीं चीजों के लिए तैयार किए गए हैं। 

येल न्यू हेवन हॉस्पिटल में कोरोनावायरस मरीज बॉब श्वार्ट्ज से बात करती हुईं डॉक्टर ऐलेन फजार्डो

उपयोग करने वाले कर्मी हैं खुश
अमेरिका के करीब चार प्रमुख हेल्थ सिस्टम में इलास्टोमेरिक्स का प्रयोग किया जा रहा है। इंटरव्यू में कर्मियों ने इस मास्क की पीपीई की कमी को दूर करने के लिए तारीफ की और आभार जताया। बाल्टिमोर स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड मेडिकल सेंटर में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर एंड्रीय लेवीन बताते हैं कि, इससे मुझे सुरक्षा मिलती है और मैं अपना ध्यान जरूरी चीजों पर लगा पाता हूं, जो इस वक्त मरीज की देखभाल करना है। 

एडमिनिस्ट्रेटर्स इस बात पर संदेह जताते हैं कि, कई मेडिकल सेंटर्स को इलास्टोमेरिक्स के बारे में पता नहीं होगा। एन95 की मांग और कमी में इजाफे को देखते हुए एडमिनिस्ट्रेटर्स ने कहा कि इलास्टोमेरिक्स ने एक बचाव दिया है। एलिगेनी हेल्थ नेटवर्क में चीफ मेडिकल ऑपरेशन्स ऑफिसर डॉक्टर श्री चलीकोंडा कहते हैं कि, हमें नहीं पता कि यह महामारी कब तक रहेगी, न ही यह पता कि चक्रिय होगी या नहीं। लेकिन इन मास्क को स्टॉक में रखना और जरूरत पड़ने पर प्राप्त करना हमें सुकून देता है, जैसे हम अपनी किस्मत को खुद कंट्रोल कर रहे हैं। 

तैयारी की ओर एक अच्छा कदम
2009 में आई एच1एन1 महामारी ने अमेरिका में करीब 12 हजार जानें ली थीं। यह डॉक्टर चार्ली लिटिल के लिए बड़ा झटका था। कोलोराडो यूनिवर्सिटी में आपातकालीन तैयारी के बतौर निदेशक उन्होंने एक योजना बनाई। लेकिन जैसे ही फ्लू आया डॉक्टर लिटिल ने देखा कि, अस्पताल में एन95 की सप्लाई की खत्म हो रही है। जब खरीदने की कोशिश की तो यह बहुत थोड़े ही बचे थे। 

एक साल बाद उन्होंने अगली महामारी की तैयारी की। इससे वहीं सप्लाई चेन की परेशानियां होंगी। लेकिन एन95 का स्टॉक करने में अस्पताल के बजट और स्टोरेज एक बड़ा हिस्सा खर्च होगा। इसके अलावा दूसरा ऑप्शन था बैट्री से चलने वाले रेस्पिरेटर्स, जिसका मेंटेनेंस काफी महंगा होता है। इसके बाद तीसरी संभावना इलास्टोमेरिक्स थे। इसके कई मॉडल्स एन95 की तरह ही प्रोटेक्शन देने के लिए सर्टिफाइड थे। इनका उपयोग कई सालों तक किया जा सकता है, इसमें केवल फिल्टर बदलने की जरूरत होती है। एक इलास्टोमेरिक्स सैकड़ों एन95 का काम कर सकता है। 

एक महामारी में 170 करोड़ एन95 मास्क की जरूरत होगी
सीडीसी की स्टडी बताती है कि, एक महमारी के दौरान अमेरिकी मेडिकल और एमरजेंसी रिस्पॉन्स वर्कर को 170 करोड़ एन95 मास्क की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं ने पाया है कि, घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए बहुत कम जगह थी और संकट के समय दूसरे देश उन्हें एक्सपोर्ट करना बंद कर सकते हैं। वेटरन्स अफेयर्स विभाग की स्टडी में पता चला है कि, एन95 के स्टॉक करना संभव नहीं है। एजेंसियों ने इलास्टोमेरिक्स समेत अन्य विकल्पों की सलाह दी थी। 

वीए और ओएसएचए के एनालिसिस बताते हैं कि, इलास्टोमेरिक्स का स्टॉक करना कम खर्च का काम है। जबकि सीडीसी के शोधकर्ताओं के अनुसार इनका उपयोग करना सप्लाई डिमांड गेप को कम कर सकता है। 2015 में वीए की स्टडी बताती है कि हेल्थ केयर संगठनों की तैयारी का सबसे अच्छा तरीका है एन95 और इलास्टोमेरिक्स को मिलाकर खरीदना।

संकट के वक्त कारगर है इलास्टोमेरिक्स
नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंस, इंजीनियरिंग और मेडिसिन की एक पैनल ने पाया कि, इलास्टोमेरिक्स रोजमर्रा और संकट के समय प्रभावकारी है। लेकिन इसमें भी सफाई और पहनने को लेकर मार्गदर्शन जैसी कई परेशानियां हैं। 

‘सुरक्षित महसूस होता है’ 
डॉक्टर चकलीकोंडा और उनके साथी दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहे थे। उन्हें एमएसए सेफ्टी के जरिए अपना जवाब मिला। यह कंपनी कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए इलास्टोमेरिक्स समेत दूसरे सेफ्टी गियर तैयार करती है। उन्होंने कहा कि, हमें ऐसी कोई भी स्टडी नहीं मिली जो हमे ऐसा न करने में समर्थन करे। 

अस्पताल पहले से ही कर्मचारियों को एन95 ठीक से पहनने और उपयोग करने की ट्रेनिंग दे रहे थे। सीडीसी फंडेड शोधकर्ताओं ने पाया कि, यही ट्रेनिंग इलास्टोमेरिक्स के साथ भी दी जा सकती है। एलिजेनी जैफर्सन हॉस्पिटल के आईसीयू में नर्स मेडिसन शिल्डर्स के मुताबिक, मैं इसके लिए फिट थी और इसका उपयोग उस दिन मरीजों पर किया। 

इलास्टोमेरिक्स में काम करना आसान होता है
रबर के मास्क कर्मियों की आवाज को धीमा कर सकते हैं, लेकिन नर्सेज और डॉक्टर्स ने कहा कि, इलास्टोमेरिक्स एन95 से ज्यादा आरामदायक थे और उन्हें इसमें ज्यादा सुरक्षित महसूस हुआ। एलिजेनी जनरल हॉस्पिटल में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर टिफनी डुमोंट ने कहा कि, मुझे अब बात करते वक्त मास्क के नाक से फिसलने की चिंता नहीं होती। मुझे इसमें इतना सुरक्षित महसूस होता है कि मैं अपने मरीजों की देखभाल बगैर चिंता किए कर सकती हूं।

स्टडीज ने बताए सफाई के प्रभावी तरीके
सरकार के समर्थन से चल रही स्टडीज ने प्रभावी तरीकों से सफाई करने के तरीके बताए थे। इसके अलावा सीडीसी ने भी अप्रैल में गाइडलाइंस दी थीं। इलास्टोमेरिक्स का इस्तेमाल कर रहे कुछ फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कहा कि, वे महामारी के बाद एन95 की तरफ लौटेंगे, लेकिन कुछ ने बताया कि वे लगाततार इनका उपयोग जारी रखेंगे। 

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कोरोना के बीच रेस्टोरेंट में जाने से पहले स्टाफ से पूछें सुरक्षा के इंतजाम, केवल खाते वक्त ही हटाएं मास्क और आउटडोर टेबल चुनें


  • रेस्टोरेंट में हाथ साफ करने के इंतजाम हो सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट निजी सैनिटाइजर साथ ले जाने की सलाह देते हैं
  • अगर कोविड 19 के लक्षण दिख रहे हैं या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं तो बाहर खाने जाने से बचें

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 01:15 PM IST

पीट वैल्स. कोरोनावायरस के बीच कई इलाकों में रेस्टोरेंट खुल रहे हैं। इसका मतलब है आप बाहर खाना खा सकेंगे, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि आपको यह करना ही चाहिए। अगर आपने वायरस के नियंत्रण में आने से पहले बाहर जाने का फैसला कर लिया है तो अभी तक यह साफ नहीं है कि कौन सी जगह सुरक्षित है। रेस्टोरेंट और डाइनिंग रूम्स के लिए भी यह हालात एकदम नए हैं। हालांकि सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने रेस्टोरेंट मालिकों के लिए नई निर्देश जारी किए हैं। जिसमें गहन सफाई, सैनिटाइजेशन, डिसइंफेक्शन और वेंटिलेशन शामिल है।

न्यूयॉर्क मेडिकल कॉलेज में स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड प्रेक्टिस के डीन डॉक्टर रॉबर्ट डब्ल्यु एम्लर बताते हैं कि, कोविड 19 के प्रकोप के बाद रेस्टोरेंट खोलने के अच्छे तरीकों पर कोई साइंटिफिक स्टडी नहीं की गई है। हालांकि डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स आपको सुरक्षित रहने के उपाय बता रहे हैं। 

  • कम्युनिटी की हेल्थ की जानकारी लें

बाहर खाना खाने जाना आपका निजी फैसला है। कम से कम आपको बाहर खाने का विचार करने से पहले अपने इलाके और शहर में कोरोनावायरस की स्थिति का पता करना चाहिए। मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर क्रेग डब्ल्यु हेडबर्ग ने कहा कि, मैं इस बात की जागरूकता रखना चाहता हूं कि मेरे समाज में वायरस किस तरह से फैल रहा है। अगर आपको लगता है कि, कम्युनिटी में लगातार मामले बढ़ रहे हैं तो आपको यह मानना होगा कि, बाहर संक्रमण का खतरा है।

  • निजी जोखिम के बारे में जानें

डॉक्टर हेडबर्ग के मुताबिक, अगर किसी को कोविड 19 के लक्षण हैं या किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं तो घर पर ही रहना चाहिए। जैसे-जैसे लोग अपने घरों से बाहर निकलने लगेंगे, भीड़ जुटना आम हो जाएगी, लेकिन इससे वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। 

अगर कोई सीडीसी की हाई रिस्क कैटेगरी में आया है तो उसे घर पर ही रहना चाहिए। डॉक्टर एम्लर के अनुसार विशेष रूप से बुजुर्ग लोग जो 65 साल या इससे ऊपर हैं, उन्हें ज्यादा ध्यान देना चाहिए और उनके परिवार को ज्यादा ध्यान रखना होगा।    

  • जानें से पहले सवाल करें

किसी भी रेस्टोरेंट में जाने से पहले वहां के स्टाफ से सेफ्टी के बारे में पता करें। इसके अलावा उनकी वेबसाइट और सोशल मीडिया से इस बात की जानकारी लें। नॉर्थ कैरोलीना स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और फूड सेफ्टी स्पेशलिस्ट बेंजामिन चैपमैन बताते हैं कि, लोग जो चीजें सुनने की उम्मीद करेंगे वे हैं- “हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं, हमने हमारे स्टाफ को मास्क पहनना और हाथ धोने की उपयोगिता बताई है।”

  • पहुंचने के बाद आसपास देखें

जगह पर पहुंचने के बाद जब आप आसपास देखेंगे ततो यह आपको मैनेजमेंट की तैयारियों के बारे में पता लगेगा। डॉक्टर चैपमैन ने कहा कि, पहले की तरह ही काम करने वाले रेस्टोरेंट तो मैं नहीं जाना चाहूंगा। यह देखें कि, क्या टेबल्स दूरी पर हैं, क्या लोगों की बीच 6 फीट की दूरी बनाने की गुंजाइश हैं, क्या रेस्टोरेंट अपने स्टाफ और ग्राहकों को इकट्ठा होने की इजाजत दे रहा है। 

डॉक्टर हेडबर्ग के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा भीड़ से है। अगर लोगों की भीड़ लगी हुई है और स्टाफ-ग्राहक के बीच नजदीक जाकर बात की जा रही है तो वे लोग सावधानी का पालन नहीं कर रहे हैं। 

  • बाहर की टेबल चुनना अच्छा विकल्प है

वायरस अंदर ज्यादा तेजी से फैलता है। हाल ही मिले सबूतों से यह पता लगता है कि, बाहर संक्रमित होने का जोखिम कम होता है। 

  • चेहरा कवर करने की उम्मीद करें

सीडीसी ने बाहर जाने पर चेहरे को कपड़े से कवर करने या मास्क लगाने की सलाह दी है। यहीं बात रेस्टोरेंट के कर्मचारियों पर भी लागू होती है। डॉक्टर चैपमैन बताते हैं कि, इससे यह पता चलता है कि, बिजनेस बिना लक्षण वाले लोगों की समस्या को भी गंभीरता से ले रहा है। खाना खाने पहुंचे लोगों को खाते वक्त ही मास्क को अस्थाई रूप से हटाना चाहिए। एक नई स्टडी बताती है कि एक बिना वेंटिलेशन वाले रूम में बात करने से निकलने वाली बूंदें 14 मिनट तक हवा में रह सकती हैं।

  • डाइनिंग रूम में ग्लव्ज को लेकर चिंतित न हों

कई जगहों पर कानून के मुताबिक खाना बनाने वाले लोगों को ग्लव्ज पहनना जरूरी होता है। डाइनिंग रूम में होस्ट और खाना परसने वालों को ग्लव्ज जरूरी नहीं है। डॉक्टर एम्लर के मुताबिक, मुख्य परेशानी यह है कि अगर देर तक आप इन ग्लव्ज का इस्तेमाल करोगे तो आपको सुरक्षा का झूठा एहसास होगा। इससे अच्छा इस बात का ध्यान रखना है कि, हम हाथों को बार-बार धो रहे हैं और गंदे होने से बचा रहे हैं। 

  • सतहों को लेकर सतर्क रहें

हालांकि सतहों को वायरस फैलने का मुख्य जरिया नहीं माना जा रहा है, लेकिन फिर भी एक्सपर्ट्स छूने में आ रही सतहों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। लेमिनेटेड मेन्यू के बजाए चॉकबोर्ड मेन्यू को प्राथमिकता दें। अगर आप आम सतहों को छू रहे हैं तो हाथों को चेहरे पर न लगाएं और सैनिटाइजर या हैंड वॉश से साफ करें। रेस्टोरेंट आपको सैनिटाइजर मुहैया करा रहे हैं, लेकिन अपना खुद का सैनिटाइजर ले जाना बेहतर है। खाना खाने के पहले हमेशा हाथ धोने चाहिए।

  • आराम करें, लेकिन ज्यादा नहीं

आमतौर हम रेस्टोरेंट इसलिए जाते हैं कि, कुछ देर शांत होकर ठहर सकें और चिंताओं को दूर कर सकें। डॉक्टर हेडबर्ग के मुताबिक आप जितनी देर तक वायरस फैलने की आशंका वाले इलाके में रहते हैं, तो इससे कुछ न कुछ होने की संभावना बढ़ जाती है।

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महामारी के दौरान हवाई जहाज में सफर कर रहे हैं तो विंडो सीट को दें प्राथमिता, बैठने से पहले सीट को करें साफ


  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्लेन में दरवाजे या नल को छूने से पहले वाइप्स का इस्तेमाल करें
  • टिश्यु या पेपर टॉवेल की मदद से टच स्क्रीन को छुएं, इससे सतह और हाथ के बीच बैरियर बन जाएगा

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 07:26 PM IST

तरीरो एमजिजेवा. भारत में कोरोनावयरस संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन 4.0 चल रहा है। लेकिन सरकार ने दो महीने बाद 25 मई को घरेलू उड़ानें फिर से शुरू कर दी हैं। ऐसे में स्थानों पर पहुंचने की जद्दोजहद में लगे लोग अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंता में नजर आ रहे हैं। जॉन्स हॉप्किंस हॉस्पिटल में एसोसिए हॉस्पिटल एपिडेमियोलॉजिस्ट एरॉन मिलस्टोन ने कहा था कि, एयरप्लेन और सीट पब्लिक स्पेस थी और हम जानते हैं कि, जर्म्स सतह पर लंबे समय तक रह सकते हैं। इसलिए इसे साफ करने में कोई परेशानी नहीं है। 

बीते साल एक्ट्रेस नेओमी कैंपबेल का एयरप्लेन की सफाई करते वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक्ट्रेस मास्क और ग्लव्ज पहने हुए सफाई कर रही थीं और उनके इस व्यव्हार को ‘हद से ज्यादा’ माना जा रहा था। इतना ही नहीं वीडियो में एक्ट्रेस यह कहते हुए भी सुनाई दे रही थीं कि, जो भी छुएं उसे साफ करें। डेल्टा एयरलाइन्स और अमेरिकन एयरलाइन्स जैसी बड़ी एयर सर्विसेज ने कहा था कि, प्लेन की सफाई हमारी प्राथमिकता है। लेकिन कुछ यात्री अपने खुद के द्वारा किए गए उपायों को तवज्जों देते हैं।

  • हाथों को साफ रखें और चेहरे को छूने से बचें

यूनिवर्सिटी ऑफ विंसकंसिन मेडिसन में मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रयु मेहले कहते हैं कि, प्लेन में सतह को साफ करने में तब तक कोई परेशानी नहीं है, जब तक यह आपको सुरक्षा का झूठा एहसास नहीं देता। प्लेन में अपनी जगह को सैनिटाइज करना, हाथ धोना और दूसरी प्रेक्टिसेज के साथ होना चाहिए। एक मजबूत सतह को डिसइंफेक्ट करना और साबुन से हाथ धोना वायरस को मार देगा।

इसलिए पहले अपने हाथ साफ करें। डॉक्टर मेहले के मुताबिक, यह याद रखना जरूरी है कि आपके हाथ कहां थे और अपने हाथों को धोएं। अपने हाथों को साबुन और पानी से 20 सेकंड या इससे ज्यादा तक धोएं। अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो अच्छी मात्रा में हैंड सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

  • विंडो सीट चुनें

एमोरी यूनिवर्सिटी के एक स्टडी में पता चला है कि, फ्लू सीजन के दौरान प्लेन में सबसे सुरक्षित जगह विंडो सीट होती है। तीन से पांच घंटे की 10 फ्लाइट्स पर स्टडी कर शोधकर्ताओं ने पाया है कि, विंडो सीट पर बैठने पर वाले बीमार लोगों के संपर्क में कम आते हैं। एमोरी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नर्सिंग के प्रोफेसर और एमोरी में सेंटर फॉर नर्सिंग डेटा साइंस के निदेशक विकी स्टोवर हर्त्जबर्ग बताते हैं कि, एक विंडो सीट बुक करें और फ्लाइट के दौरान इधर-उधर जाने से बचें। हाइड्रेट रहें और अपने हाथों को चेहरे से दूर रखें। अपने हाथों की सफाई के प्रति चौकन्ने रहें। 

  • ठोस सतहों को डिसइंफेक्ट करें

जब आप अपनी सीट पर पहुंचे तो सतह को साफ करें। डॉक्टर मिलस्टोन के मुताबिक, अपने आसपास के एरिया को साफ करना बुरा नहीं है, लेकिन यह याद रखना भी जरूरी है कि, कोरोनावायरस सीट से उठकर आपके मुंह में नहीं जाएगा। लोगों को किसी गंदी चीज को छूकर हाथों को चेहरे से लगाने पर ज्यादा सतर्क होना चाहिए। डिसइंफेक्ट वाइप्स की पैकेट पर आमतौर पर यह लिखा होता है कि, कितनी देर तक सतह को साफ होने के लिए गीला रखना है। यह वक्त 30 सेकंड से लेकर कुछ मिनट का हो सकता है। 

डॉक्टर हर्त्जबर्ग ने बताया कि, अगर वहां टच स्क्रीन टीवी है तो उसका उपयोग टिश्यु की मदद से करें। पेपर टॉवेल या टिश्यु सतह और आपके हाथ के बीच में बैरियर बना देता है। माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम में इंफेक्शन प्रिवेंशन के निदेशक बर्नार्ड कैमिन्स ने कहा कि, हो सकता है  किसी बीमार व्यक्ति ने खांसकर दरवाजे या नल को छुआ हो। इसलिए बाथरूम में वाइप्स का इस्तेमाल करें।

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ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने बनाया कोरोना इन्हेलर, इसमें मौजूद ड्रग फेफड़ों पर कोरोना के असर को घटाएगी और हालत नाजुक होने से रोकेगी


  • इन्हेलर तैयार करने वाली ब्रिटेन की साउथैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा, 120 मरीजों पर ट्रायल जारी
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन्हेलर से दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है और वायरस के असर को कम करती है

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 07:14 PM IST

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने खास तरह का कोरोनावायरस इन्हेलर विकसित किया है जो संक्रमित मरीजों को वायरस से लड़ने में मदद करेगा। इसे तैयार करने वाली ब्रिटेन की साउथैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि इन्हेलर में ऐसे ड्रग का इस्तेमाल किया गया है जो संक्रमण के बाद फेफड़ों पर कोरोना के असर को कम करता है। ड्रग का कोड SNG001 बताया गया है। 

इंटरफेरान बीटा वायरस को रोकेगा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन्हेलर में मौजूद दवा में खास तरह का प्रोटीन है जिसे इंटरफेरान बीटा कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से शरीर में तब बनता है जब वायरस पहुंचता है। कोरोना मरीजों में इसे देकर उनकी वायरस से लड़ने में मदद की जा सकेगी।

कोविड-19 के लक्षणों में कमी आई
शोधकर्ताओं ने मुताबिक, कोरोना के 120 मरीजों पर इसका ट्रायल शुरू हो गया है। इस तरह के इलाज का प्रयोग मल्टीपल स्केलेरोसिस में किया जाता है। रिसर्च के दौरान जब हॉन्ग-कॉन्ग में दूसरी दवाओं के साथ इस ड्रग का प्रयोग कोरोना मरीजों पर किया गया तो उनके लक्षणों में कमी आई। 

ऐसे काम करती है दवा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मरीज इन्हेलर से ड्रग को खींचते हैं तो यह सीधेतौर पर फेफड़ों तक पहुंचती है और वायरस के असर को कम करती है। यह मरीजों की हालत नाजुक होने से रोकेगी। ट्रायल सफल होने पर साल के अंत तक इसके लाखों डोज तैयार किए जा सकेंगे।

कुछ यूं होगा ट्रायल
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ट्रायल के दौरान कोरोना पीड़ितों को लक्षण दिखने के 72 घंटे के अंदर इन्हेलर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्हें एक दिन में एक डोज दी जाएगी। उनके शरीर में ऑक्सीजन के लेवल और तापमान पर नजर रखी जाएगी। डॉक्टर 14 दिन तक असर को देखेंगे। ट्रायल में ज्यादातर 50 से अधिक उम्र के बुजुर्गों को शामिल किया गया है। 
जुलाई में सामने आए परिणाम
100 मरीजों पर ट्रायल पूरा होने पर सामने आने वाले परिणाम जुलाई में जारी किए जाएंगे। शोधकर्ता निक फ्रेंसिस के मुताबिक, कोरोना मरीजों को बेहतर इलाज की जरूरत है जो बीमारी की अवधि को कम करे और लक्षणों को गंभीर होने से रोके।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी- महामारी का दूसरा दौर आएगा, सिर्फ ये मानकर न बैठे रहें कि मामले घट रहे हैं


  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के इमरजेंसी प्रमुख डॉ. माइक रेयान ने चेतावनी देकर कहा- जहां मामले घट रहे, उन देशों में भी खतरा
  • रेयान ने कहा- महामारी दौर के रूप में आती है, कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर भी आ सकता है

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 04:38 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डल्बूएचओ) ने उन देशों को चेतावनी दी है जहां कोरोना संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक- जहां मामले घट रहे है, वहां ये अचानक बढ़ भी सकते है। इसलिए सिर्फ देखते न रहें। सरकारों को चाहिए कि वे महामारी रोकने के उपायों के साथ तैयार रहें।

डब्ल्यूएचओ के इमरजेंसी प्रमुख डॉ. माइक रेयान ने कहा, “दुनिया कोरोना संक्रमण की पहली लहर से जूझ रही है। कई देशों में मामले घट रहे हैं। मध्य और दक्षिण अमेरिका, दक्षिण एशिया और अफ्रीका में मामले बढ़ रहे हैं।”

संक्रमण की दूसरी लहर तेज हो सकती है

रेयान ने कहा, “महामारी वेब्स यानी लहरों के रूप में आती हैं। इसका मतलब है कि ये इसी साल उन क्षेत्रों में दोबारा आ सकती है, जहां मामले थम रहे हैं। अगर वर्तमान में चल रहे संक्रमण के पहले दौर को रोक भी लिया गया तो भी अगली बार संक्रमण की दर बेहद तेज हो सकती है।

सिर्फ ये मानकर न बैठें कि मामले घट रहे हैं
डॉक्टर रेयान के मुताबिक, “यह समझने की जरूरत है कि महामारी दोबारा उभर सकती है। हम सिर्फ ये मानकर नहीं बैठ सकते कि आंकड़ों में कमी आ रही और संकट कम हो रहा है। इसका दूसरा दौर भी आ सकता है।”

यूरोपीय देशों और अमेरिका को भी चेताया
उन्होंने कहा, “यूरोप और उत्तरी अमेरिका को बचाव की कोशिश करते रहने चाहिए। लगातार जांच के साथ बचाव की रणनीति बनाते रहने की जरूरत है, ताकि दूसरे दौर पर पहुंचने से खुद को रोक सकें। कई यूरोपीय देशों और अमेरिकी राज्यों ने लॉकडाउन के साथ उन उपायों से भी मुंह मोड़ लिया है जो संक्रमण को रोकते हैं। ये अर्थव्यवस्था को भी ठीक रखते हैं। 

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कोविड 19 के कारण 95 देशों में मीजल्स और पोलियो वैक्सीनेशन प्रभावित, 8 करोड़ बच्चे हो सकते हैं बीमारियों का शिकार


  • एक्सपर्ट्स ने कहा- कार्यक्रम जल्द शुरू करने होंगे नहीं तो हम एक प्रकोप के बदले दूसरे का जोखिम उठाएंगे
  • पाकिस्तान और कॉन्गो समेत 38 देशों में रुका पोलियो टीकाकरण, 27 देशों में मीजल्स कार्यक्रम सस्पेंड

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 12:47 PM IST

जैन हॉफमैन. कोरोनावायरस के कारण दुनियाभर में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम जमकर प्रभावित हुए हैं। डब्ल्युएचओ, यूनिसेफ और गावी की एक रिपोर्ट बताती है कि, इस महामारी के चलते विश्व में 8 करोड़ बच्चे खतरनाक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। कई एक्सपर्ट्स इस बात की चिंता जता रहे हैं कि, कोलेरा, रोटावायरस और डिप्थेरिया जैसी बीमारियों से होने वाली मौतें कोविड 19 के मुकाबले ज्यादा हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं ने 129 गरीब और मध्यम आय वाले देशों में सर्वे किया। इस सर्वे में उन्होंने पाया कि, 68 देशों में क्लीनिक और बड़े टीकाकरण अभियानों के जरिए वैक्सीन सेवाएं कुछ हद तक प्रभावित हुई हैं। मीजल्स कार्यक्रम को 27 देशों में सस्पेंड कर दिया गया है। जबकि, पाकिस्तान समेत 38 देशों में पोलियो प्रोग्राम रोक दिए गए हैं।

पोलियो को लेकर चेतावनी
हाल ही में पोलियो से निजात पाने में सफलता मिल गई थी। यह एक मुश्किल से मिली जीत थी। इसका कारण था बड़े टीकाकरण कार्यक्रम जो लाखों बच्चों तक पहुंचे, लेकिन रिपोर्ट में पोलियो को लेकर चेतावनी दी गई है। गावी के चीफ एग्जीक्यूटिव डॉक्टर सेठ बार्कले बताते हैं कि, हाल के कुछ वर्षों में विकासशील देशों ने कई बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण में बढ़त हासिल की थी। ज्यादा देशों में ज्यादा बच्चे पहले से ज्यादा बीमारियों से बचे। लेकिन केविड 19 के कारण यह प्रगति पर अब मीजल्स और पोलियो के बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। 

हालांकि यह समस्या विकसित देशों के साथ भी है। सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने इस हफ्ते बताया कि, टीकाकरण के मामले में मिशिगन के बच्चों के बीच कवरेज रेट 50 प्रतिशत से नीचे आ गया है। न्यूयॉर्क सिटी ने घोषणा की कि, महामारी के कारण हुए 6 हफ्ते के लॉकडाउन में बीते साल की तुलना में बच्चों को दिए जाने वाले डोज में 63 फीसदी की गिरावट हुई है।

समस्याएं आने के कई कारण हैं
सर्वे किए गए देशों के हेल्थ मिनिस्टर्स और मेडिकल प्रोवाइडर्स के अनुसार, इन समस्याओं के और भी कई कारण हैं। मार्च के अंत में अफ्रीका से सिरींज और वैक्सीन लेकर आने वाली 80 प्रतिशत फ्लाइट्स कैंसिल हो गईं। वैक्सीन देने वाले वर्कर्स  प्रोटेक्टिव गियर की कमी होने के कारण सप्लाई के साथ आगे बढ़ने में डर रहे हैं। माता-पिता अपने बच्चों को अस्पताल ले जाने से डर रहे थे। कई इलाकों में लॉकडाउन था। इसके अलावा कई स्वास्थ्य कर्मी कोविड 19 के खिलाफ जंग लड़ रहे थे। 

पोलियो संस्था ने की फिर से कार्यक्रम शुरू करने की अपील
अधिकारी अब विशलेषण कर रहे हैं। यह देखते हुए कि कोविड 19 दुनियाभर में फैल गया है। न केवल देशों में बल्कि राष्ट्रीय बॉर्डर्स पर भी इसका असर है। ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनीशिएटिव ने देशों से हालात का मूल्याकंन करने की अपील की है और महामारी से सुरक्षित टीकाकरण रणनीति बनाने की अपील की है। 

नाइजीरिया पोलियो से मुक्त होने की राह पर था, लेकिन महामारी के कारण यहां टार्गेट एरियाज में दो अभियान रद्द करने पड़े, जहां 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों को वैक्सीन मिलनी थी। कार्यक्रम रद्द होने पर नाइजीरिया में यूनिसेफ के लिए टीकाकरण के प्रमुख डॉक्टर अनीस सिद्दीकि ने कहा कि, नाइजीरिया में कैंपेन में कर्मियों को घर-घर जाना होता है, हम अभी ऐसा नहीं कर सकते।

एक्सपर्ट्स ने चेताया- “नहीं तो हम एक प्रकोप के बदले में दूसरे का जोखिम भी उठाएंगे”
कोरोनावायरस महामारी फैलने से पहले ही मीजल्स के मामले बढ़ रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2017 में मीजल्स के अनुमानित 75 लाख 85 हजार 900 मामले थे और 1 लाख 24 हजार मौतें हुईं थीं। 2018 में अंतरराष्ट्री आंकड़ों को जोड़ने पर सामने आया कि, मीजल्स के अनुमानित 97 लाख 69 हजार 400 मामले थे, जबकि इससे जुड़ीं 1 लाख 42 हजार 300 मौतें हुईं थीं। 2019 में अमेरिका में मीजल्स के 1282 मामले आए थे। यह 25 साल में सबसे ज्यादा था।

इम्युनाइजेशन एक्सपर्ट और मेडिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉक्टर फ्रैंक महौनी ने कहा कि, कोविड से पहले मीजल्स दुनियाभर में ट्रैवल कर रहे लोगों के साथ फैल रहा था। ज्यादा से ज्यादा बच्चों के प्रभावित होने के कारण यह भी एक अंतरराष्ट्री समस्या बन सकता है। यूनिसेफ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैनरिएट्टा फोर ने कहा कि, हालातों के कारम हमें टीकाकरण की कोशिशों को अस्थाई रूप से रोकना पड़ा। उन्होंने कहा कि, यह कार्यक्रम जल्द से जल्द शुरू होने चाहिए नहीं तो हम एक जानलेवा प्रकोप के बदले में एक और प्रकोप का जोखिम उठाएंगे।

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एक जैसे नजर आए यात्री और स्टाफ; सभी के चेहरे ढंके थे, ज्यादातर ने पहनी थी पीपीई किट


  • कोलकाता से रायपुर आने वाली फ्लाइट को अम्फान तूफान के असर के चलते कैंसिल कर दिया गया
  • दोपहर 3.20 बजे दिल्ली से भोपाल आएगी पहली फ्लाइट, शाम को वापस दिल्ली के लिए उड़ान भरेगी
  • दिल्ली से इंदौर एयरपोर्ट पहुंची इंडिगो की फ्लाइट, जगह-जगह यात्रियों के साथ ही लगेज भी सैनिटाइज हुआ

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 06:25 PM IST

भोपाल, इंदौर, जयपुर, रायपुर. लॉकडाउन में 62 दिन बाद सोमवार से घरेलू उड़ानें शुरू हो गईं। एयरपोर्ट पर यात्रियों के माथे पर उत्साह और घबराहट की लकीरें साफ दिख रही थीं। किसी के चेहरे के भाव नहीं दिखे, क्योंकि सभी यात्रियों के चेहरे ढंके हुए थे। ज्यादातर पीपीई किट भी पहने हुए थे, इससे यह पहचान में नहीं आ रहा था कि कौन यात्री है और कौन एयरपोर्ट स्टाफ या क्रू मेंबर है।

रायपुर में स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से फिर से उड़ानें शुरू कर दी गईं। सुबह पहले दिल्ली से फ्लाइट यात्रियों को लेकर पहुंची। यहां एंट्री गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। कुछ यात्री तो पीपीई किट पहनकर एयरपोर्ट पहुंचे।

रायपुर: दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु के लिए फ्लाइट रवाना; कोलकाता की रद्द

सोमवार को छत्तीसगढ़ के रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से यात्री उड़ानें शुरू कर दी गई हैं। दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु के लिए यहां से फ्लाइट रवाना हुई और इन्हीं शहरों से फ्लाइट यहां पहुंची भी। वहीं, कोलकाता से रायपुर आने वाली फ्लाइट को अम्फान तूफान के असर के चलते रद्द कर दिया गया है। लोगों को फ्लाइट में फेस शील्ड दी गई। कोई भी फ्लाइट फुल होकर नहीं पहुंची। 6 फ्लाइट में 80 फीसदी ही सीटें भरीं। रायपुर के ट्रेवल एजेंट शुभम अग्रवाल ने बताया कि किराए में इजाफा हुआ, लोगों को 30 से 40% बढ़े हुए दामों पर टिकट मिली, जो रायपुर से दिल्ली के बीच बुकिंग आम दिनों में 4 हजार रुपए तक होती थी। कई लोगों ने इस सफर के लिए 10 हजार रु. से ज्यादा का भुगतान किया। रायपुर एयरपोर्ट पर कुछ यात्री पीपीई किट पहनकर आए थे।

भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर वर्गाकार घेरा बनाकर उसमें यात्रियों का सामान रखवाकर उसे सैनिटाइज किया गया।

भोपाल: पहले दिन रनवे पर होंगी चार फ्लाइट

भोपाल एयरपोर्ट पर सभी तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं। 23 मार्च से रुकीं हवाई सेवाएं शुरू होने के बाद सोमवार को चार फ्लाइट रनवे पर दौड़ेंगी। दोपहर 1.50 बजे दिल्ली से चलकर 3.20 पहली फ्लाइट भोपाल आएगी। भोपाल से 5.30 बजे यह फ्लाइट वापस दिल्ली जाएगी। दिल्ली से एक और फ्लाइट शाम 6.20 बजे भोपाल आएगी। रात 8.20 वापस उड़कर 9.20 बजे दिल्ली पहुंचेगी। 

भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर सभी यात्रियों को सैनिटाइज करने के बाद उनका चेकअप भी किया गया।
दिल्ली से इंदौर पहुंची इंडिगो की फ्लाइट, एयरपोर्ट का नजारा कोरोना संक्रमण के कारण पूरी तरह से बदला नजर आया।
दिल्ली से इंदौर पहुंची इंडिगो की फ्लाइट, एयरपोर्ट का नजारा कोरोना संक्रमण के कारण पूरी तरह से बदला नजर आया।

इंदौर: एयरपोर्ट पर एंट्री के लिए आरोग्य सेतु एप, मास्क और ग्लव्स जरूरी

कोरोना संक्रमण के बीच सोमवार को पहली फ्लाइट दिल्ली से इंदौर एयरपोर्ट पर पहुंची। देवी अहिल्या विमानतल पर 10.25 मिनट में इंडिगो की 6ई 6509 फ्लाइट 61 यात्रियों को लेकर लैंड हुई। हालांकि सोमवार को एयरपोर्ट का नजारा कोरोना संक्रमण के कारण पूरी तरह से बदला नजर आया। नई व्यवस्थाओं के साथ फ्लाइट की सीट तक पहुंचने के लिए यात्रियों को करीब ढाई घंटे तक जांच के बीच से गुजरा पड़ा। यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग तो की ही गई।  एयरपोर्ट पर एंट्री के लिए आरोग्य सेतु एप, मास्क और ग्लव्स जरूरी हैं। साथ ही यात्रियों को ई-बोर्डिंग कार्ड दिखाना जरूरी था।

इंदौर के देवी अहिल्या एयरपोर्ट पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए तीन सेट वाली कुर्सियों में से दो को बांध दिया गया, जिससे इन पर एक व्यक्ति ही बैठ सके।
इंदौर के देवी अहिल्या एयरपोर्ट पर सांसद शंकर लालवानी पहुंचे और यहां के स्टाफ से बातचीत करके व्यवस्थाओं का हाल जाना।

जयपुर एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले यात्रियों का सामान भी सैनिटाइज किया गया।

जयपुर: पहले दिन 20 में से 12 फ्लाइट कैंसिल

देश में 62 दिन बाद घरेलू उड़ानें सोमवार से शुरू हो गईं। जयपुर एयरेपोर्ट से पहले दिन 20 फ्लाइट्स का शेड्यूल था जिसमें से 12 उड़ानों को रद्द कर दिया गया। अब केवल आठ उड़ानों का ही संचालन होगा। एयरपोर्ट पर सुबह 10 बजे हैदाराबाद के लिए फ्लाइट रवाना हुई। इसमें सवार होने आए यात्रियों ने कहा- ‘फ्लाइट्स फिर शुरू हुई है अच्छा लग रहा है, लेकिन थोड़ा डर भी है।’ उन्होंने कहा यात्रा नियमों की पालन होना चाहिए और सावधानी जरूरी है, सभी यात्रियों ने सावधानी बरती भी। कोरोना और लॉकडाउन की वजह से सरकार ने 25 मार्च से घरेलू यात्री उड़ानों को पूरी तरह बंद कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 22 मार्च से ही बंद हैं। इस दौरान मालवाहक उड़ानें और स्पेशल फ्लाइट्स का ऑपरेशन ही जारी रहा।

रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर यात्रियों ने सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन किया।

रांची: कोरोना संक्रमण से लड़ने का तैयार दिखा एयरपोर्ट

देशव्यापी लॉकडाउन के बीच सोमवार से घरेलू उड़ाने शुरू कर दी गई। ऐसे में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर कोरोना संक्रमण से लड़ने की पूरी तैयारी देखी गई। एयरपोर्ट के अंदर जाने के दौरान यात्रियों को हाथ सैनिटाइज करवाया गया। उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद ही उन्हें अंदर प्रवेश करने दिया गया। इसके साथ ही रांची एयरपोर्ट पर बाहर से आने वाले यात्रियों के हाथों में होम क्वारैंटाइन की मुहर लगा उन्हें 14 दिनों तक इसका पालन की हिदायत दी गई। कई यात्रियों ने तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से पीपीई किट पहन कर यात्रा की।

पुणे एयरपोर्ट पर यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए जांच के बाद फ्लाइट में चढ़ने दिया गया।

पुणे: एयरपोर्ट के बाहर नहीं दिखी गाड़ियों की भीड़
62 दिन बाद आज फिर एक बार पुणे एयरपोर्ट से उड़ान शुरू हुई। पुणे के लोहेगांव एयरपोर्ट का नजारा बदल-बदल था। पुणे एयरपोर्ट से आज कुल 11-11 फ्लाइट्स को देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए उड़ान भरने और लैंडिंग की अनुमति मिली है। दोपहर 12 बजे तक 6 फ्लाइट्स ने यहां से उड़ान भरी है। आम दिनों में जहां एयरपोर्ट के बाहर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतार नजर आती थी, वहीं सुबह 4 बजे के आसपास आज सिर्फ 10-12 गाड़ियां नजर आईं। हर गाड़ी ने तकरीबन 5-7 मीटर की दूरी अपने आप बनाई हुई थी। हर गाड़ी वाला बारी-बारी से एयरपोर्ट के मुख्य द्वार पर यात्रियों को छोड़ कर आगे की ओर बढ़ जा रहा था।

बठिंडा में रहने वाली प्रिया मुंबई में जॉब करती हैं। वह पीपीई किट पहनकर पसीने में भीग जरूर गईं, लेकिन यात्रा सुरक्षित रही।

चंडीगढ़: पीपीई किट पहनकर आई प्रिया बोलीं- पसीने से तर-बतर रही, लेकिन जर्नी सुरक्षित रही
सोमवार सुबह 11.30 बजे मुंबई से चंडीगढ़ पहुंची फ्लाइट में पीपीई किट पहन कर आने वाले दीपक कपूर और प्रिया ने बताया कि फ्लाइट में किट पहन कर असहज लग रहा था, लेकिन संक्रमण से बचना है तो एहतियात तो बरतना ही होगा। प्रिया ने कहा पीपीई किट के कारण पूरी तरह से पसीने से भीग गई थी, लेकिन यात्रा ठीक रही। प्रिया मुंबई में जॉब करती है और यहां पंजाब के बठिंडा की रहने वाली है। फ्लाइट से आए दीपक कपूर फिल्मों और एड फिल्मों में काम करते है, उनका कहना है कि उन्हें फ्लाइट से उतरते ही अपने घर में क्वारैंटाइन रहने के लिए कहा गया है।

यह परिवार लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट फ्लाइट में सवार होने आया था। पत्नी एयरपोर्ट कर्मचारी से लगेज सैनिटाइज करा रही थी तो पति इस लम्हें को कैमरे में कैद कर रहा थ। उनकी बच्ची इस नजारे को बहुत गौर से देख रही थी।

लखनऊ: पायलट बोले- एक्ससाइटेड था, पहले डर लगा, लेकिन एंट्री पाने के बाद अच्छा लगा
लखनऊ के चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुबह इंडिगो की फ्लाइट ने सुबह 5.35 में लखनऊ से हैदराबाद के लिए 44 यात्री रवाना हुए हैं। वहीं पहली फ्लाइट दिल्ली से लखनऊ आई हैं इसमें 106 यात्री आए हैं। यात्रियों ने कहां मैं बहुत खुश हूं मुझे घर जाने को मिल रहा हैं। यात्रा करने से पहले कई तरह के बदलाव देखने को मिले जो हमें ख़ुद करने पड़े। इंडिगो फ्लाइट के पायलट सुभान्ग पुरोहित ने कहा- “बहुत दिन बाद फ्लाइट के लिए एक्ससाइटेड था। जैसे स्कूटी बहुत दिन से न चलाई हो तो ग्रिप छूट जाती हैं वैसे ही इसमें भी होता था। एक चैलेंज था फिलहाल सबको लेकर सकुशल पहुंचना चैलेंज था।”

श्रीनगर एयरपोर्ट पर सभी यात्रियों को जांच के बाद अंदर जाने दिया गया।

श्रीनगर: 8 फ्लाइट शुरू, उमर अब्दुल्ला पहली फ्लाइट से दिल्ली गए
श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी दो महीनों के बाद सोमवार से घरेलू उड़ानें शुरू कर दी गईं। एयर एशिया की फ्लाइट से 46 यात्री दिल्ली के लिए रवाना हुए। श्रीनगर से कुल 8 फ्लाइट्स शेड्यूल की गई हैं। सामान्य दिनों में यहां से 28 फ्लाइट्स जाती रही हैं। श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के डायरेक्टर संतोष ढोके ने बताया, एयरपोर्ट पर सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन की पूरी व्यवस्था की गई है। सोशल डिस्टेंसिंग की व्यवस्था की निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए गए हैं। पहली फ्लाइट में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी श्रीनगर से दिल्ली गए हैं। इसके पहले पांच अगस्त को वे अपने पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य में आर्टिकल 370 हटाए जाने के पहले मिले थे।

श्रीनगर एयरपोर्ट कर्मियों ने पूरे कैंपस को सैनिटाइज किया।
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भारत ईरान को पीछे छोड़कर दुनिया में 10वां और एशिया का दूसरा सबसे संक्रमित देश बनने के करीब, 5 दिन से रोज आंकड़ा 5 हजार के पार


  • भारत में संक्रमण के 1 लाख 31 हजार 900 से ज्यादा मामले हैं, जबकि ईरान में 1 लाख 33 हजार 521 केस
  • दुनिया में यूरोप पहला, उत्तर अमेरिका दूसरा और एशिया तीसरा सबसे ज्यादा प्रभावित महाद्वीप

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 12:39 PM IST

नई दिल्ली. भारत में कोरोनावायरस के 1 लाख 31 हजार 900 से ज्यादा मामले हो गए हैं। दुनियाभर में यह 11वां सबसे संक्रमित देश है। वहीं, संक्रमण के मामले में एशिया में तीसरे नंबर पर है। 10वें सबसे संक्रमित देश ईरान में अभी 1 लाख 33 हजार 521 मामले हैं। रविवार को जब आधिकारिक आंकड़े जारी होंगे तो पूरी संभावना है कि ईरान को पीछे छोड़कर भारत दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा।

एशिया में तीसरे नंबर पर भारत

दुनिया के सबसे प्रभावित महाद्वीपों में यूरोप पहले, उत्तर अमेरिका दूसरे और एशिया तीसरे नंबर पर है। इसी तरह अगर एशिया की बात करें तो यहां में तुर्की में सबसे ज्यादा मामले हैं। यहां 1 लाख 55 हजार 686 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। इनमें से करीब 4308 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, अब भारत अभी तीसरे नंबर पर है। यहां 3868 लोगों की जान जा चुकी है।

एशिया के 10 सबसे ज्यादा संक्रमित देश

देश संक्रमण मौतें
तुर्की 1,55,686 4,308
ईरान 1,33,521 7,359
भारत 1,31,868 3,868
चीन 82,974 4,634
सऊदी अरब 70,161 379
पाकिस्तान 52,437 1,101
कतर 42,213 21
बांग्लादेश 32,078 452
सिंगापुर 31,068 23
यूएई 28,704 244

ईरान में भारत से करीब 2 हजार ज्यादा केस
ईरान में संक्रमण के मामले भारत से 2101 ज्यादा है। यहां 96 दिन में 1 लाख 33 हजार 521 मामले सामने आए हैं। वहीं, भारत में 116 दिन में 1 लाख 31 हजार 420 केस मिले। भारत में मई में सबसे ज्यादा 94 हजार 163 मामले सामने आए हैं। वहीं, ईरान में अप्रैल में सबसे ज्यादा 49 हजार 47 केस मिले।

एशिया: 9.37 लाख संक्रमित

एशिया में 9 लाख 37 हजार 210 लोग संक्रमित हैं, जबकि 27 हजार 68 लोगों की जान जा चुकी है। यहां सबसे ज्यादा 7,359 मौतें ईरान में हुई हैं। इस महाद्वीप में भारत में सबसे तेजी से मामले बढ़ रहे हैं। 19 मई से बाद यहां हर दिन संक्रमण का आंकड़ा 5 हजार के ऊपर ही रहा है। शनिवार को यहां 6661 केस मिले। अगर यहीं रफ्तार रही तो चार दिनों में यहां तुर्की से भी ज्यादा मामले हो जाएंगे।

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भोजन या उसकी पैकेजिंग से वायरस फैलने की संभावनाएं कम, डिलीवरी करते वक्त दूसरों से बनाकर रखें 6 फुट की दूरी


  • भोजन डिलीवरी करने से पहले व्यक्ति की एलर्जी पर विचार करें, जैसे- एक साल से छोटे बच्चे को शहद न दें
  • खाने की डिलीवरी लेने के बाद पैकेट को सावधानी से खोलें, काउंटर को साफ करें और हाथ धोकर खाएं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 03:44 PM IST

मार्गोक्स लेस्की. कोरोनावायरस के कारण सभी के बीच डर का माहौल है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि, एक शख्स किसी दूसरे के नजदीक जाकर मदद करने से डर रहा है। इस दौरान ऐसे कई मौके आ सकते हैं जब आपको किसी के लिए खाना तैयार करना या पहुंचाना पड़े। अब सवाल उठता है कि, क्या यह सुरक्षित है? कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में फूड साइंस विभाग में प्रोफेसर एलिजाबेथ ए बिन इसका जवाब हां में देती हैं। उन्होंने कहा, “कोविड के वक्त में खाने के कारण बीमार होना किसी की आखिरी चाहत होगी।”

खाना शेयर करने के दौरान और फूड पैकेजिंग के जरिए वायरस के चपेट में आने की संभावनाएं बेहद कम हैं। लेकिन इसके बाद भी आपको सावधानियां बरतनी होंगी। इस दौरान आपकी चिंता का कारण केवल वायरस नहीं होगा। कुछ टिप्स की मदद से आप वायरस फैलने की शिकार होने की रिस्क को कम कर सकते हैं। 

फूड सेफ्टी गाइडलाइंस का पालन करें और एलर्जी पर विचार करें

  • चार चीजों का ध्यान रखें- धोएं, अलग करें, पकाएं, ठंडा होने दें। आप इन्हें जानते हैं और इनका पालन भी करते हैं। लेकिन मौजूदा हालातों में इन्हें सख्ती से मानना जरूरी हो गया है। हाथों और सतहों को साफ रखने को लेकर अलर्ट रहें। निश्चित तापमान पर खाना बनाएं और उन्हें अच्छे से स्टोर करें।
  • गर्भवती महिलाओं, नर्सेज और बीमार लोगों को खाना पहुंचाना बहुत अच्छा काम है। लेकिन इस दौरान तय गाइडलाइंस और सुरक्षा का और भी ज्यादा ख्याल रखें।
  • आपको मास्क या ग्लव्ज पहनने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आप इससे चेहरे को छूने से बचते हैं या तसल्ली मिलती है तो इनका उपयोग करें।
  • जिन्हें आप खाना पहुंचा रहे है, उनकी एलर्जी का ख्याल रखें। उदाहरण के लिए प्रेग्नेंट महिलाओं को कच्चे दूध का पनीर न दें और एक साल से छोटे बच्चे को शहद न दें। अगर आपको कोई संदेह है, तो पहले जानकारी लें।
  • साबुन और ब्लीच किसी को भी गंभीर रूप से बीमार कर सकते हैं। ऐसे में सब्जियों और फलों को साबुन या ब्लीच से साफ न करें। इसके बजाए बहते ठंडे पानी से इन्हें धोएं।

कॉन्टेक्टलैस डिलीवरी या पिकअप की व्यवस्था करें

  • सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, कोरोनावायरस बीमार व्यक्ति के छींकने या खांसने पर निकलने वाली बूंदों से फैलता है। इसलिए सामने जाकर डिलीवरी करना बड़ा खतरा हो सकता है। जब भी खाना डिलीवर करें मास्क पहनें और 6 फीट की दूरी पर खाना रख दें। 

सावधानी से पैक करें और खोलें

  • खाने को प्लास्टिक, एल्युमीनियम फॉइल और धोकर दोबारा इस्तेमाल करने लायक पैक करें। इससे खाना दूषित नहीं होगा।
  • अगर आप फूड डिलीवरी मिलने को लेकर चिंतित हैं तो विचार करें कि, आप उसे कैसे खोलेंगे। डॉक्टर बिन सलाह देते हैं कि, खाने को लेकर आएं और काउंटर पर रखें। कंटेनर खोलें और खाने को बर्तन में निकालें। बैग को फेंक दें और कंटेनर अगर दोबारा उपयोग में आ सकता है तो उसे धो लें। काउंटर को साफ करें, हाथ धोएं, फिर खाना खाएं। डॉक्टर बिन बताते हैं कि, यह हम हर बार नहीं कर सकते, लेकिन अगर आप चिंतित हैं तो यह प्रक्रिया आपके मन को शांती दे सकती है।

तनाव न लेने का प्रयास करें

  • एक गहरी सांस लें और खुद को यह याद दिलाएं कि खाने या उसकी पैकेजिंग से वायरस फैलने की संभावना कम है। इसलिए सावधानी से पकाएं और डिलीवर करें। साथ ही घर वापस लौटने पर हाथ धोना न भूलें।
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अब तक 53.03 लाख संक्रमित: ब्राजील में 24 घंटे में 20 हजार से ज्यादा मरीजों की पुष्टि, यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे प्रभावित देश


  • ब्राजील में संक्रमण के अब तक 3.32 लाख मामले सामने आए, जबकि 21 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है
  • लेंसेट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया संक्रमण के दौरान हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन लेने से मरने का खतरा ज्यादा

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 08:52 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 53 लाख 3 हजार 393 लोग संक्रमित हैं। 21 लाख 58 हजार 510 लोग ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 39 हजार 992 हो गया है। ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में 24 घंटे में 20 हजार 803 नए केस मिले हैं और 1001 लोगों की मौत हुई। संक्रमण के मामले में यह अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित देश हो गया है। यहां कुल केस 3 लाख 32 हजार 382 हो चुका है, जबकि 21 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 16,45,094 97,647 4,03,201
ब्राजील 3,32,382 21,116 1,35,430
रूस 3,26,448 3,249 99,825
स्पेन 2,81,904 28,628 1,96,958
ब्रिटेन 2,54,195 36,393 उपलब्ध नहीं
इटली 2,28,658 32,616 1,36,720
फ्रांस 1,82,219 28,289 64,209
जर्मनी 1,79,713 8,352 1,59,000
तुर्की 1,54,500 4,276 1,16,111
ईरान 1,31,652 7,300 102,276

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।

अमेरिका: एक दिन में 1260 की मौत
अमेरिका में 24 घंटे में 1260 लोगों की जान गई है और संक्रमण के 24 हजार 197 मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही देश में मरने वालों की संख्या 97 हजार 647 हो गई है, जबकि 16 लाख 45 हजार 94 लोग संक्रमित हैं।

न्यूयॉर्क में बीच खोल दिए गए हैं। लॉन्ग बीच पर अपने बच्चे के साथ सर्फिंग करने जाता युवक।

ट्रम्प जो दवा ले रहे उससे मरने का खतरा ज्यादा
लेंसेट जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन या क्लोरोक्वीन दवा से कोई फायदा नहीं होता। इसके इस्तेमाल से मरने का खतरा ज्यादा है। आमतौर पर इस दवा का इस्तेमाल आर्थराइटिस के लिए किया जाता है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वे खुद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन टेबलेट लेते हैं। इसके बाद हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्विन के फायदों पर नई बहस शुरू हो गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कायले मैकनेनी और व्हाइट हाउस कोरोना टास्क फोर्स की सदस्य डॉ. डेबोराब ब्रिक्स महामारी को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान।

कनाडा: ‘संक्रमित होने वाले लोगों का पता लगाने को तैयार’
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने शुक्रवार को घोषणा की है कि उनकी सरकार हर दिन महामारी से संक्रमित होने वाले लोगों का पता लगाने के लिए तैयार है। ट्रूडो ने कहा कि सरकार ने इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया है जो एक दिन में 3,600 संपर्क पता लगा सकते हैं। इसके अलावा कनाडा सांख्यिकी ने 1,700 लोगों को प्रशिक्षित किया है जो एक दिन में 20 हजार लोगों का पता लगा सकते हैं। सरकार संभावित ऐप विकल्पों पर ध्यान लगा रहा है, जो संपर्क पता लगाने में सहायता करेगी। यह उपकरण चीन और अन्य देशों में पहले ही लागू हैं।

ब्रिटेन : 14 दिन सेल्फ आइसोलेशन में रहना होगा

गृह मंत्री प्रीति पटेल ने शुक्रवार को कहा कि 8 जून से जो भी व्यक्ति ब्रिटेन आएगा, उसे 14 दिन सेल्फ आइसोलेशन में रहना होगा। सिर्फ उन्हें इससे अलग रखा जाएगा जो छूट के दायरे में आते हैं। ब्रिटिश सरकार ने यात्रा से संबंधित नए नियम भी जारी किए हैं। नियम तोड़ने वालों को जुर्माना भी देना होगा। देश में अब तक 36 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 लाख 54 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं।

लंदन में एक बीच पर धूप सेंकते लोग। ब्रिटेन में 36 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

यूएई: 994 नए मामले
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में महामारी के 994 नए मामले आने से देश में संक्रमितों की कुल संख्या 27,892 हो गई है। यूएई स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि कई विदेशी नागरिकों में नए मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, सभी की हालत स्थिर है। देश में अब तक 13,798 लोग ठीक हो चुके है। वहीं, मरने वालों की संख्या 241 हो गई है।

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इस बार बर्थडे सेलिब्रेशन में पार्टी नहीं गेदरिंग करें, दोस्तों के साथ शेयर करें डिजिटल डिनर और वर्चुअल एक्टिविटीज में शामिल हों


  • जूम या फोन कॉल पर भी आप दोस्तों को बुलाकर पार्टी कर सकते हैं
  • किसी और के लिए पार्टी ऑर्गेनाइज करने में अपनी भूमिका को मजबूत करें

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 01:36 PM IST

प्रिया पार्कर. कोरोनावायरस महामारी फैलने के बाद से जिस तरह की बर्थडे पार्टीज को हम जानते थे, वो अब नहीं रहीं। अब न तो घर में लोगों की भीड़ है, न एक साथ खाना और न ही ग्रुप में सेलिब्रेशन। लेकिन ऐसे में जन्मदिन मनाना भी एक अच्छा कदम हो सकता है। इसलिए इस बार पार्टी के बजाए गेदरिंग के बारे में विचार करें।

यह मुमकिन है कि, इस बार आपके जन्मदिन पर लोग एकसाथ उपस्थित न हो पाएं। लेकिन लोगों को साथ लाने के कई खास तरीके और भी हैं। अपने जन्मदिन को इस तरह से प्लान करें कि, यह दिन आपके साथ-साथ दूसरों के लिए भी अर्थपूर्ण बन जाए।

जब आप एक जगह अटक जाते हैं तो आप भावनात्मक रूप से बढ़ते हैं
हम सभी इस महामारी का अनुभव अलग-अलग मौकों पर अलग तरीकों से और अलग ट्रॉमा के साथ कर रहे हैं। इस दौरान ऐसी कई चीजें हैं जिनपर हम काबू नहीं कर सकते हैं। लेकिन हम यह तय कर सकते हैं कि, वक्त किसके साथ, कब और क्यों बिताना है। इस आइडिया को चुनौती दें कि, जब हम घर पर होते हैं तो हमारे अंदर बदलाव नहीं होते हैं। हम प्रतिदिन बदल रहे हैं। जन्मदिन इसे दूसरों को याद रखने में मदद करेगा।

अगर आप पढ़ना चाहते हैं तो आप लोगों को एकसाथ किताब पढ़ने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। इसके अलावा आप दोस्तों को जूम पर डिजिटल डिनर के लिए बुला सकते हैं। इस दौरान उन सभी को बताएं कि, आप उनसे क्यों प्यार करते हैं।

अपने खुद के संस्कार (रिचुअल) तैयार करें
इस जन्मदिन को एक रेखा की तरह मानें, जिसे आप पार कर रहे हैं। सोचिए कि, आप तीन चीजें अपने साथ ले जा सकते हैं, लेकिन इसके साथ ही तीन चीजें छोड़नी भी होंगी। अब वो तीन कौन सी योग्यताएं, भरोसा या छवि होंगी जिन्हें आप साथ ले जानना चाहते हैं। और तीन चीजें जिन्हें आप छोड़ना चाहते हैं। संस्कार करते वक्त लोगों की जरूरत नहीं होती, लेकिन जब आप इन्हें लोगों के सामने करते हैं तो यह असरदार होती हैं। क्योंकि लोग इसे होते हुए देख रहे हैं।

कितनी भी पार्टियां कर सकते हैं
खासतौर से माइलस्टोन बर्थडे जैसे 25, 50 के मौके पर गेदरिंग के लिए कुछ परतें तैयार करें। अगर यह आपका 50वां जन्मदिन है तो दोस्तों और रिश्तेदारों के एक बड़े समूह को वर्चुअल कॉकटेल के लिए इनवाइट करें, इसके बाद छोटे ग्रुप को डिनर के लिए आमंत्रित करें। जहां आप सभी से अपनी कहानियां साझा करेंगे।

किसी और के लिए पार्टी ऑर्गेनाइज कर रहे हैं तो अपनी भूमिका बढ़ाएं
साथ आने की सबसे बड़ी ताकत यह है कि , इससे लोगों को समुदाय में एक जरूरी भूमिका निभाने का मौका मिलता है। अगर आप जूम, फोन कॉल या ग्रुप चैट पर लोगों को होस्ट कर रहे हैं तो लोग जैसे ही पहुंचे उनका स्वागत करें। म्यूट बटन का इस्तेमाल क्रिएटिविटी के साथ करें। लोगों को पार्टी के बारे में बताएं, उन्हें बताएं कि कैमरा कहां रखना है।

कुछ लोगों को पार्टी के लिए पहले ही तैयार कर लें
दो या तीन दोस्तों को पहले ही मैसेज कर उन्हें प्रचारक कै तौर पर तैयार कर लें। इन लोगों को पार्टी के बारे में बताएं और तैयार करें। इसके बाद एक बड़ समूह को एक औपचारिक निमंत्रण भेजें। इससे यह प्रचारक आपके इंविटेशन पर बड़े उत्साह के साथ प्रतिक्रिया देंगे। इससे बाकी दूसरे महमानों पर खास प्रभाव पड़ता है।

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ठीक हुए मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से संक्रमण का खतरा नहीं, साउथ कोरिया के शोधकर्ताओं का दावा


  • कोरिया के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के वैज्ञानिकों ने 285 कोरोना सर्वाइवर पर रिसर्च की
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, इलाज के बाद पॉजिटिव मिलने की वजह उनके शरीर में कोरोना के डेड पार्टिकल्स हैं​​​​

दैनिक भास्कर

May 21, 2020, 06:50 AM IST

इलाज के बाद कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की हफ्तों बाद रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इनसे संक्रमण नहीं फैल सकता। यह दावा साउथ कोरिया के शोधकर्ताओं ने किया है। कोरिया के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के वैज्ञानिकों ने ऐसे 285 कोरोना सर्वाइवर पर रिसर्च की जो इलाज के बाद पॉजिटिव मिले थे। 

लैब में नहीं विकसित हुआ वायरस
शोधकर्ताओं के मुताबिक, मरीजों में इलाज के बाद जो रिपोर्ट पॉजिटिव आई है उसका कारण शरीर में मौजूद कोरोनावायरस के मृत कण हो सकते हैं। इससे किसी को संक्रमण नहीं फैलता। ऐसे मरीजों में से वायरस का सैम्पल लिया गया। लैब में उसमें किसी तरह का विकास नहीं दिखा और साबित हुआ कि असंक्रमित कण हैं। 

285 सैम्पल का पीसीआर टेस्ट हुआ
शोधकर्ताओं का कहना है कि 285 मरीजों के सैम्पल में कोरोनावायरस के न्यूक्लिक एसिड की पुष्टि के लिए पीसीआर टेस्ट किया गया। जांच के जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि दोबारा पॉजिटिव आने वाले मरीजों में वायरस जिंदा है या उसका कोई हिस्सा है। रिसर्च में साबित हुआ कि पॉजिटिव आने वाले मरीजों में वायरस संक्रमण फैलाने के लिए सक्रिय नहीं होता। 

बदली साउथ कोरिया की गाइडलाइन
साउथ कोरिया के अधिकारियों का कहना है कि बदली हुई गाइडलाइन के मुताबिक, अब रिकवर हो चुके लोगों को स्कूल या ऑफिस जॉइन करने से पहले निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट दिखाना जरूरी नहीं होगा। कोरिया के सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (केसीडीसी) के मुताबिक, अब आइसोलेशन के बाद लोगों को किसी तरह का टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। 

82 दिनों में दोबारा रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है
सरकारी स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, संक्रमण के 82 दिनों तक कुछ मरीजों की रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव आ सकती है। लगभग सभी मामलों में कोरोना सर्वाइवर के शरीर में वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी विकसित हो जाती है। ब्लड टेस्ट में इसकी पुष्टि भी हुई है। 

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ऑनलाइन क्लासेज के कारण पैरेंट्स हो रहे तनाव का शिकार, एक्सपर्ट की सलाह- बच्चे की पढ़ाई के अलावा इंटरेस्ट पर भी दें ध्यान


  • पैरेंट्स अपने बच्चों की स्किल्स का पता करें और फिर उन्हें व्यवहार में लाएं
  • बच्चों की पसंद को ध्यान में रखें, उसकी दिलचस्पी को बढ़ाने में मदद करें

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 06:49 PM IST

जेसिका ग्रोस. कोरोनावायरस के कारण स्कूल बंद हैं। ऐसे में स्कूल मैनेजमेंट बच्चों की शिक्षा को जारी रखने के लिए ऑनलाइन क्लासेज का सहारा ले रहे हैं। लेकिन लंबे समय से चली आ रही इस ऑनलाइन एजुकेशन से माता-पिता को भी परेशानी होने लगी है।

एक पैरेंट्स के तौर पर- ‘इस दौरान हमें भी भावनात्मक समेत कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा। पहला बुरा मौका आया जब मैं बच्चों के कमरे में वीडियो इंटरव्यू में थी और बच्चों पर चिल्लाकर कहा था कि मुझे फर्क नहीं पड़ता कि जब तक तुम इस कमरे से बाहर रहोगे और तुम क्या करोगे।’

‘एक बार और ऐसा ही मौका आया जब मैंने पढ़ा कि, न्यूयॉर्क सिटी के स्कूल चांसलर ने कहा है कि सितंबर तक स्कूल शुरू होने की संभावना 50-50 है। मैं केवल यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि मैं कैसे जून में खत्म होने जा रहे स्कूल के वर्ष से कैसे गुजरुंगी। लेकिन अब मुझे यह मानना पड़ेगा कि, खराब दौर में भी मुझे रिमोट लर्निंग को मैनेज करना ही है। कई माता-पिता घर से ही बच्चों को शिक्षा दिलाने की कोशिश में थक चुके हैं। इसलिए मैंने एक लर्निंग स्पेशलिस्ट और स्कूल के प्रमुख से बात की।’

  • बच्चे के साथ अपना भी ध्यान रखें

लर्निंग स्पेशलिस्ट और पैरेंट एजुकेटर कैथरीन हिल बताती हैं कि, हर दिन कुछ समय अपने एहसासों का आकलन करने के लिए निकालें। रिमोट लर्निंग सभी के लिए नई चीज है। आपके लिए क्या है और क्या नहीं इस बात का पता करने के लिए पार्टनर या दोस्त की मदद लें। इसके अलावा आप अपने लिए नोट भी लिख सकते हैं। किंडरगार्टन टीचर अमेंडा मार्स्डन ने कहा कि, आप बच्चे के साथ भी वक्त बिताना चाहते हैं। अपने बच्चे को कोई भी कठिन शेड्यूल फॉलो करने के लिए मजबूर न करें।

  • जरूरी कौशल के बारे में बात करें

1- छोटे बच्चों को डिस्टेंस लर्निंग पूरी करने के लिए पैरेंट्स की मदद का ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन इस दौरान कई परिवारों में यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। बच्चे को स्कूल का साल खत्म होने तक किस कौशल के बारे में ज्यादा जानकारी होनी चाहिए, इस विषय में टीचर से बात करें। इसके बाद इन स्किल्स को बच्चे के व्यवहार में लाएं।

2- मार्स्डन राइटिंग का उदाहरण देती है। आप घर में बच्चों से किसी भी लिखने की सलाह दें। बच्चों को अलग-अलग विषयों पर लिखने के लिए तैयार करें। मार्स्डन कंप्यूटर या पेपर के बजाए चॉक से सफेद बोर्ड पर लिखने की सलाह देती हैं।

  • बच्चे को लर्निंग के लिए उत्साहित करें

1- बाल्डविन स्कूल की प्रमुख मारीसा पोर्जेस के अनुसार, सबसे जरूरी चीज जो बच्चा अपनी शिक्षा के शुरुआती वक्त में विकसित कर सकता है, वह है सीखने के प्रति प्यार। इसलिए जूम क्लासेज में अटेंडेंस के बजाए अपने बच्चे की दिलचस्पी के बारे में जाने कि, उसे क्या पसंद है। 

2- याद रखें कि इस वक्त में शिक्षक आपके साथ हैं: कई सारे शिक्षक माता-पिता भी होते हैं। ऐसे में उनसे अपने तनाव को लेकर बात करना फायदेमंद हो सकता है। मार्स्डन बताती हैं कि, याद रहे यह पूरी दुनिया में हो रहा है। और मैं खुद को याद दिलाना चाहता हूं कि, यह केवल मेरे साथ नहीं हो रहा, यह सभी के साथ घट रहा है। उन्होंने बताया कि, टीचर्स भी अपने बच्चों को मिस करते हैं। मैं अपने बच्चों के साथ जुड़ाव को मिस कर रही हूं।

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दुनिया में 10 लाख केस होने में 94 दिन लगे, सिर्फ 48 दिन में मरीजों की संख्या 40 लाख के पार पहुंची


  • महामारी की शुरुआत के 94 दिन बाद भी सबसे ज्यादा 2 लाख 50 हजार 708 केस अमेरिका में ही थे
  • 50 लाख संक्रमितों में से 19 लाख 71 हजार से ज्यादा लोगों को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 05:02 PM IST

वॉशिंगटन. कोरोनावायरस का पहला मामला 31 दिसंबर को चीन के वुहान शहर में मिला था। इसके बाद देखते ही देखते पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई। बुधवार को दुनियाभर में मरीजों की संख्या 50 लाख पार कर गई। 31 दिसंबर से 2 अप्रैल यानी  94 दिन में 10 लाख केस सामने आए थे। वहीं, केवल 46 दिन में संक्रमितों की संख्या 40 लाख के पार पहुंच गई।

संक्रमण के 50 लाख केस में 19 लाख 71 हजार 193 ठीक हो चुके हैं। यानी 86% मरीजों का अब अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है। वहीं, तीन लाख 25 हजार 172 की मौत हो चुकी है, जो कुल आंकड़ों का 14% है। वहीं, एक्टिव केस 27 लाख 5 हजार 882 हैं। मतलब ये वो केस हैं, जो अभी अस्पताल में भर्ती हैं या जिनमें कोरोना की पुष्टि हो चुकी है।

दुनिया के 10 सबसे प्रभावित देशों का हाल

अमेरिका: महामारी के शुरू होने से 94 दिन में भी सबसे ज्यादा केस अमेरिका में ही थे यानी 2 अप्रैल तक देश में दो लाख 50 हजार 708 केस हो चुके थे। जबकि 48 दिनों में यहां 13 लाख 19 हजार 878 केस मिले। यहां बुधवार तक मरीजों की संख्या 15 लाख 70 हजार 583 पहुंच गई है। यहां अब तक 3 लाख 61 हजार 180 ठीक हो चुके हैं।

रूस: यहां संक्रमण का आंकड़ा 2 लाख 99 हजार 941 हो गया है। यहां मई में तेजी से संक्रमण फैला है। इस महीने अब तक यहां 1 लाख 94 हजार 274 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, दो अप्रैल तक यहां केवल 3548 केस थे, जबकि 48 दिन में 3 लाख 5 हजार 157 केस सामने आए।

स्पेन: यूरोप का तीसरा सबसे संक्रमित देश है। यहां भी मार्च में काफी तेजी से मामले बढ़े थे। यहां 2 अप्रैल तक 1 लाख 12 हजार 65 केस थे। जबकि 48 दिन में 1 लाख 66 हजार 738 मामले सामने आए। अभी यहां दो लाख 78 हजार 803 मामले हैं।

ब्राजील: यहां संक्रमण के मामले मई में काफी तेजी से बढ़ने शुरू हुए। इस महीने यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 79 हजार 776 केस मिले हैं। ब्राजील में दो अप्रैल तक केवल 8,044 केस थे। वहीं, अगले 48 दिनों में यहां 2 लाख 63 हजार 841 मामले सामने आए। यहां अब तक 1 लाख 6 हजार 794 मरीज ठीक हुए।

ब्रिटेन: यहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख 48 हजार 818 है। यहां 2 अप्रैल तक 33 हजार 718 केस मिले थे। वहीं, 48 दिन में 2 लाख 15 हजार 100 केस मिले हैं। अप्रैल में यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 41 हजार 779 मामले सामने आए हैं।

इटली: यह यूरोप के सबसे प्रभावित देशों में से एक है। यहां 2 अप्रैल तक अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा 1 लाख 15 हजार 242 मामले थे। जबकि 48 दिन में 1 लाख 11 हजार 457 मरीज मिले। अब यहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख 26 हजार 699 है। इटली में मार्च में सबसे ज्यादा 1 लाख 4 हजार 91 केस सामने आए।

फ्रांस: यहां फिलहाल 1 लाख 80 हजार 809 लोग संक्रमित हैं। यहां 2 अप्रैल तक 59 हजार 105 केस सामने आए थे। वहीं, 48 दिन में 1 लाख 21 हजार 704 केस मिले थे। यहां सबसे ज्यादा 1 लाख 10 हजार 189 मामले अप्रैल में सामने आए थे।

जर्मनी: यहां अब तक 1 लाख 77 हजार 842 मामले सामने आए हैं। देश में दो अप्रैल तक 84 हजार 794 केस मिले थे। जबकि 48 दिन में 93 हजार 78 मरीज मिले थे। जर्मनी में सबसे ज्यादा 85 हजार 28 केस अप्रैल में सामने आए।

तुर्की: मध्य-पूर्व के देशों में तुर्की में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। यहां दो अप्रैल तक 18 हजार 135 केस थे, जो अगले 48 दिनों में 1 लाख 33 हजार 480 मामले सामने आए। फिलहाल, यहां 1 लाख 51 हजार 615 मरीज मिल चुके हैं। यहां अप्रैल में सबसे ज्यादा 1 लाख 4 हजार 525 मामले सामने आए थे।

ईरान: यहां अब तक 1 लाख 24 हजार 603 मामले सामने आए हैं। यहां 2 अप्रैल तक 50 हजार 468 केस मिले थे। वहीं, अगले 48 दिन में 74 हजार 135 मामले सामने आए। यहां अप्रैल में सबसे ज्यादा 49 हजार 47 केस मिले।

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नई स्टडी के मुताबिक- बात करने से भी फैल सकता है कोरोवायरस, बंद जगहों पर लोगों के नजदीक जाकर बातचीत करने से बचें


  • बिना मास्क के किसी व्यक्ति से बात करने से बचें, हल्के लक्षण वाले मरीज भी बीमार कर सकते हैं
  • खांसने या छींकने के अलावा तेज बोलने पर भी मुंह से निकलती हैं वायरस युक्त सांस की बूंदें

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 01:14 PM IST

नोवुल शेख. कोरोनावायरस बेहद संक्रामक है। कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति किसी दूसरे संक्रमित व्यक्ति के नजदीक भर जाने से ही बीमार हो सकता है। ऐसे में एक और नई खोज हमें डरा सकती है। हाल ही में हुई एक स्टडी में पता चलता है कि कुछ हालातों में बीमार व्यक्ति के साथ बात करने पर भी आप कोविड 19 का शिकार हो सकते हैं। फिर भले ही मरीज बेहद मामूली लक्षणों का सामना क्यों न कर रहा हो। स्टडी में पता चला है कि खांसने या छींकने के अलावा बात करने से भी हजारों वायरल बूंदे निकल सकती हैं।

द प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित एक शोध की मदद से हम यह जान सकते हैं कि कम लक्षणों से ग्रस्त मरीज भी ऑफिस, नर्सिंग होम जैसी छोटी जगहों पर दूसरों तक संक्रमण पहुंचा सकता है। इस स्टडी को अभी वास्तविक हालातों में किया जाना होगा। हालांकि डॉक्टर्स को अभी भी यह पता नहीं चल सका है कि किसी को संक्रमित करने के लिए कितने वायरस की जरूरत पड़ती है। लेकिन इससे यह साफ होता है कि मास्क के उपयोग से बीमार होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। 

एक खांसी में निकलती हैं 3 हजार सांस की बूंदें, जबकि छींकने से 40 हजार बूंदें

  • प्रयोगों से पता चला है कि खांसने या छींकने से कैसे हवा में सलाइवा और म्यूकस मिल जाते हैं। जिससे लाखों इन्फ्लूएंजा और दूसरे वायरस कण बनते हैं। एक खांसी से करीब 3 हजार रेस्पिरेट्री ड्रॉपलेट्स बनती हैं, जबकि छींकने से लगभग 40 हजार।
  • बातचीत के दौरान कितनी बूंदें निकलती हैं, इस बात का पता करे के लिए वैज्ञानिकों ने वॉलंटियर्स से बार बार ‘स्टे हेल्दी’ बोलने के लिए कहा। सभी सहयोगियों ने एक कार्डबोर्ड बॉक्स में इन शब्दों को बोला, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने ग्रीन लेजर की मदद से बूंदों को ट्रेक किया। 

एक मिनट तक तेज बोलने पर करीब एक हजार वायरस युक्त बूंदें बन सकती हैं 

  • लेजर स्कैन से पता चला कि बातचीत के वक्त हर सेकंड में 2600 छोटी बूंदें निकलती हैं। वैज्ञानिकों ने पुरानी स्टडीज के आधार पर जब इन बूंदों की संख्या और आकार का अनुमान लगाया तो पाया कि तेज बोलने से बड़े कण बनते हैं और इनकी संख्या भी ज्यादा होती है। हालांकि साइंटिस्ट ने मरीजों के बोलने पर निकलने वाली बूंदों को रिकॉर्ड नहीं किया है।
  • एक औसत मरीज के मुंह से निकले तरल में कोरोनावायरस जेनेटिक मटेरियल की गणना करने वाली स्टडी से मिली जानकारी के आधार पर शोधकर्ताओं ने बाताया कि, एक मिनट तक तेज बोलने पर करीब एक हजार वायरस युक्त बूंदें बन सकती हैं। 
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि मुंह से निकलने के बाद डिहाइड्रेशन के कारण बूंदें छोटी हो सकती हैं। इसके बावजूद यह बूंदें हवा में 8 से 14 मिनट तक तैर सकती हैं। स्टडी के मुताबिक इससे यह बात साफ होती है कि, एक बंद माहौल में बात करने से वायरस फैलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। शोधकर्ताओं ने बताया है कि प्रयोग एक नियंत्रित माहौल में रुकी हुई हवा के बीच किया गया था। 

6 फीट से ज्यादा दूरी तक भी जा सकती हैं बूंदें

सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने कहा है कि सांसों की बूंदों से बचने के लिए कम से कम 6 फीट की दूरी रखें। लेकिन कई वैज्ञानिकों ने तर्क दिए हैं कि यह कण 6 फीट से ज्यादा का सफर भी तय कर सकते हैं। यह मुंह से निकलने की ताकत, आसपास के तापमान और दूसरी स्थितियों पर निर्भर करती हैं। एक अन्य स्टडी में शोधकर्ताओं ने बताया कि, कुछ निश्चित आवाजें ज्यादा कण बना सकती हैं। इनमें ‘थ’ जैसे शब्द शामिल हैं। 

फेस टू फेस बात करने से बचें
फिलहाल शोधकर्ताओं को यह नहीं पता कि हर बात, खांसी और छींक में ये बूंदें होती हैं या नहीं, जिनमें वायरस के कण बराबर संख्या में शामिल होते हैं। या किसी को बीमार करने के लिए कितने वायरस की जरूरत होती है। वर्जीनिया टेक में सिविल और एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर लिन्से मार बताती हैं कि नई स्टडी ने इस दूरी बनाए रखने के मामले में नई चीजें शामिल की हैं कि वायरस की रोकथाम के लिए लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखना जरूरी है। डॉक्टर मार ने कहा कि इस सबूत के आधार पर बंद जगह में नजदीक जाकर लोगों से फेस टू फेस बात करन से बचना होगा। 

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मजदूर बोले- महाराष्ट्र में लाठियां मिलीं, मध्य प्रदेश में आए तो लगा हम पुलिस के मेहमान हैं; यूपी सरकार बसों से घर पहुंचा रही


  • यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले सुरेश आटो से ही निकले हैं, कहते हैं- मेरे जैसे 20 हजार आटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं
  • मध्य प्रदेश और यूपी में पैदल पलायन लगभग बंद; बाइक, ऑटो, टैक्सी, कार, ट्रक और सरकारी बसों में ही प्रवासी मजदूर जा रहे
  • मजदूर कहते हैं- बंबई में अपना बसेरा है, जिंदगीभर के लिए तो उसे छोड़ नहीं सकते, सबकुछ ठीक रहा तो फिर से लौटेंगे

गौरव पांडेय

May 20, 2020, 10:06 AM IST

रात के सवा 12 बजे रहे हैं। विदिशा से सागर जाने वाले हाईवे पर स्थित एक पेट्रोल पंप पर चार काली-पीली टैक्सी और दो आटो रिक्शा वाले खड़े हैं। यहां वे पेट्रोल-डीजल डलवाने के बाद सुस्ता रहे हैं। उनके साथ में छोटे बच्चे और महिलाएं भी हैं। कुछ यहीं पर चादर बिछाकर सोने की तैयारी भी कर रहे हैं। 
शरद चंद्र पांडेय यूपी के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं। कहते हैं कि हमें तीन दिन हो गए हैं, मुंबई से निकलेI हम वहां टैक्सी चलाते थे, लॉकडाउन से पहले अम्मा का आंख का ऑपरेशन कराने के लिए बंबई ले गए थे। लेकिन आंख ऑपरेशन छोड़िए बाकी धन्धा-पानी भी चौपट हो गया। खाने की लाले पड़ गए हैं, बस अब घर जा रहे हैं, कम से कम खाने-पीने को तो मिलेगा। कुछ नहीं तो खेती बारी है, वही कर लेंगे।

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। तीन दिन पहले मुंबई से पति के साथ आटो में निकली हैं। 

अनु सिंह बनारस की रहने वाली हैं। पति मुंबई में आटो चलाते हैं। कहती हैं कि शादी के बाद पति के साथ बंबई चली गई थी, तब से वहीं की होकर रह गई। आज ऐसे हालात हो गए हैं कि ऑटो से ही घर जाना पड़ रहा है। अब करें भी तो क्या करें। दो महीने से उनका (पति) का ऑटो खड़ा है। बंबई में कोरोना बढ़ ही रहा है। दो महीने हो गए, सरकार की तरफ से कोई मदद मिली नहीं। उलटा घर में बंदी बना दिया। अब जाएंगे गांव में ही कुछ करेंगे।
अवधेश शुक्ला बंबई की एक फाइनेंस कंपनी में काम करते थे, वे शनिवार को पांच बजे बाइक से प्रयागराज के लिए निकले हैं। कहते हैं कि कसोराघाट पर अभी बाइक खराब हो गई थी, पांच किलो मीटर खींच कर लाना पड़ा है। अब अंधेरा हो गया है, सुबह होने पर बनऊंगा, तब यहीं सो रहा हूं। 
मुंबई वापस जाने के सवाल पर अवधेश कहते हैं कि बंबई में भी अपना बसेरा है, जिंदगी भर के लिए तो उसे छोड़ सकते नहीं, गांव में भी तो बैठकर कुछ नहीं कर पाएंगे। अब चल रहे है, दो-चार दिन में पहुंच ही जाएंगे। वहां मरने से बेहतर है, घर चलें। दो महीने से कंपनी से सैलरी नहीं मिली। अब सेविंग के पैसे भी खत्म हो चुके हैं। मकान मालिक को किराये देने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे। 

मुंबई में आटो और काली-पीली टैक्सी चलाने वाले तीन-चार लोगों को ग्रुप बनाकर चल रहे हैं।

प्रतापगढ़ के पट्‌टी के रहने वाले सुरेश पांडेय बंबई में आटो चलते हैं। वे पूरे परिवार को लेकर गांव निकले हैं। कहते हैं कि मेरे जैसे 20 हजार से ज्यादा ऑटोवाले बंबई से यूपी-बिहार जा रहे हैं। सब कुछ ठीक रहा तो तीन-चार महीने में लौटूंगा, नहीं तो घर पर ही कुछ करूंगा। 

पट्‌टी के रहने वाले शरद अपने माता को आंख का ऑपरेशन कराने मुंबई लेकर गए थे, लेकिन अब बिना ऑपरेशन कराए लौट रहे हैं।

भानू मुंबई ड्राइविंग करते हैं। कहते हैं कि महाराष्ट्र वाले वैसे ही यूपी-बिहार वालों से जलते थे। अब तो उन्हें मौंका भी मिल गया है। वे मराठी लोगाें के लिए बस चला रहे हैं। बाहर वालों से कहते हैं कि बस का इंतजार करो एक दो हफ्ते का। दलाल बस के टिकट के लिए दो से तीन रुपए मांगते हैं। वहां रोक तो रहे हैं, लेकिन अब करेंगे क्या? अब भूखे थोड़े मरेंगे।

भानू बताते हैं कि रास्ते में महाराष्ट्र के पुलिस वालों ने भी खूब परेशान किया, कईयों को तो डंडे भी पड़ रहे। लेकिन मध्य प्रदेश सीमा में पहुंचते ही सब बदल गया। रास्ते में जगह-जगह ऐसी व्यवस्था मिली कि बता नहीं सकते हैं, इसी धरती पर स्वर्ग नजर आ रहा है, टू स्टार थ्री स्टार इंस्पेक्टर खुद अपने हाथ से चाय, छांछ, ब्रेड, नाश्ता दे रहे हैं। यहां कोई दिक्कत नहीं है। भगवान चाहेंगे तो दो-तीन दिन में घर पहुंच जाएंगे, फिर खेती शुरू करेंगे। 

  • मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर में दो हजार लोग बस के इंतजार में

सुबह के सात बज रहे हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले की सीमा पर करीब दो हजार से ज्यादा लोगों का जमावड़ा है। मध्य प्रदेश की बसें महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को यहीं पर छोड़ रहे हैं। इनमें ज्यादातर इंदौर की सिटी बसें हैं। लेकिन अभी यहां यूपी की दो बस ही खड़ी हैं। ऐसे मे लोग इधर-उधर बैठे हैं, पुलिस प्रशासन ने लोगों के लिए चाय-नाश्ते का बंदोबस्त कर रखा है।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश बार्डर पर ललितपुर जिले में बस का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।

यहां से ललितपुर शहर पहुंचते हैं तो प्रयागराज कुंभ के लिए चलाई गई कुछ स्पेशल बसें बार्डर की ओर जाते हुए दिखाई देती हैं। ललितपुर-झांसी हाईवे पर एक पति-पत्नी अपने दो छोटे बच्चों को  रेहड़ी वाले ठेले पर बिठाकर ले जा रहे हैं। हाइवे पर और पैदल चलने वाले लोग तो बहुत कम दिखाई दे रहे हैं। हां, ट्रकों और मिनी ट्रकों के अंदर लोग जरूर बैठकर जा रहे हैं।  

  • तपती दोपहरी और 42 डिग्री तापमान में लोग ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे 

झांसी, दिन के 11 बज रहे हैं, तेज धूप के बीच प्रवासी मजदूर ट्रकों और विकप के अंदर बैठकर जा रहे हैं। तापमान 42 डिग्री से ज्यादा है। कुछ मजदूर ट्रकों में लदी गिट्‌टी के ऊपर बैठकर जा रहे। वहीं, कुछ प्रवासी मजदूर सड़क किनारे पेड़ों के छांव में आराम कर रहे हैं। 

यूपी सीमा में ज्यादातर मजदूर ट्रकों और विकप में बैठकर जाते दिखाई दिए।

जालौन, छोटे बाजारों में प्रवासी मजूदरों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की गई। स्थानीय युवक पूरी-सब्जी, केला, पानी दे रहे हैं। इन्हीं में से एक रफीक जो लोगों को पानी पिला रहे हैं। कहते हैं कि यह समय लोगों की मदद करने का है। इसलिए हम कर रहे हैं। भूखे-प्यासे लोग हमें दुआ देंगे। सद्दाम कहते हैं कि हमें जबसे पता चला कि लोग इस तरह अपने घरों को आ रहे हैं, तब से हम रोज इस तपती दोपहरी में भी लोगों को नाश्ता करा रहे हैं, यह हमारा फर्ज है।  

  • विकप में 23 मजदूर ऊपर-नीचे बैठे हैं, कहते हैं- दो रोटी कम खाएंगे, पर खुली हवा में सांस तो लेंगे

कानपुर देहात, यूपी के सिद्धार्थनगर के रहने वाले करीब 23 मजदूर एक विकप में ऊपर नीचे-बैठे हुए हैं। ये सभी मुंबई की प्लास्टिक फैक्टरी में काम करते थे। अब फैक्टरी में कामकाज बंद है। इन्हीं में से एक रामपाल कहते हैं कि अब वहां कुछ बचा ही नहीं था, जो रुकते। न काम है, न रोटी है। इसलिए अपने-अपने गांव जा रहे हैं। दो रोटी कम मिलेगी, मगर खुली हवा में सांस तो ले पाएंगे न। हम सभी 23 लोग आसपास के गांवों के ही हैं, अब जरूरत पड़ी तो अपने लोग ही काम आते हैं।

  • लखनऊ-कानपुर हाइवे पर आम दिनों जैसा ही ट्रैफिक, भाजपा नेता स्टाल लगाकर मजदूरों को खिला रहे

कानपुर, दिन के तकरीबन 3 बज रहे हैं, कानपुर में जगह-जगह स्थानीय भाजपा नेताओं ने खाने-पीने का स्टाल लगा रखा है। कुछ स्टालों पर विधायक की फोटो भी लगाई गई है। कुछ जगहों पर पुलिस वाल कुर्सी लगाकर बैठे हुए हैं,सामने फूल माला रखा है, पीछे विधायक की फोटो लगी है। यहां लोग आने वाली हर गाड़ी को रोककर खाने-पीने का सामान दे रहे हैं, जो नहीं भी लेना चाह रहे, उनकी गाड़ी में भी लोग जबरदस्ती केला, पूड़ी सब्जी, खिचड़ी, पानी आदि रख दे रहे हैं।

यहां से आगे बढ़ते हैं, तो कानपुर-लखनऊ हाईवे पर काफी ट्रैफिक है, दुकानें भी बड़ी संख्या में खुली नजर आ रही हैं। हालांकि पुलिस ने कुछ जगहों पर बैरिकेडिंग वगैरह कर रखा, बावजूद लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकल रहे हैं।चार बाग बस अड्‌डे पर बड़ी संख्या में बसें खड़ी हैं। गेट पर पुलिस मुस्तैद है। रेलवे स्टेशन के बाहर भी भीड़भाड़ है। कुछ निजी वाहन लोगों को बैठा रहे हैं। सफाई कर्मी झाड़ू मार रहे हैं। हजरतगंज में आम दिनों के मुकाबले भीड़ थोड़ी कम है।

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अब तक 49.82 लाख संक्रमित और 3.24 लाख मौतें: ब्राजील में 24 घंटे में 17,408 मामले सामने आए और 1179 लोगों की जान गई


  • ब्राजील में अब तक 17 हजार 983 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 .71 लाख से ज्यादा संक्रमित हैं
  • अमेरिका में अब तक 15.70 लाख लोग संक्रमित हैं, जबकि 93 हजार 533 लोगों की मौत हो चुकी है

दैनिक भास्कर

May 20, 2020, 08:34 AM IST

वॉशिंगटन. दुनिया में अब तक 49 लाख 82 हजार 875 लोग संक्रमित हैं। 19 लाख 56 हजार 361 ठीक हुए हैं। मौतों का आंकड़ा 3 लाख 24 हजार 535 हो गया है। उधर, ब्राजील में मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। यहां 24 घंटे में संक्रमण के 17,408 मामले सामने आए, जबकि 1179 लोगों की जान गई है। यहां अब तक 17 हजार 983 मौतें हो चुकी है।
कोरोनावायरस : 10 सबसे ज्यादा प्रभावित देश

देश

कितने संक्रमित कितनी मौतें कितने ठीक हुए
अमेरिका 15,70,583 93,533 3,61,180
रूस 2,99,941 2,837 76,130
स्पेन 2,78,803 27,778 1,96,958
ब्राजील 2,71,885 17,983  1,06,794
ब्रिटेन 2,48,818 35,341 उपलब्ध नहीं
इटली 2,26,699 32,169 1,29,401
फ्रांस 1,80,809 28,022 62,563
जर्मनी 1,77,827 8,193 1,55,700
तुर्की 1,51,615 4,199 1,12,895
ईरान 1,24,603 7,119 97,173

ये आंकड़े https://www.worldometers.info/coronavirus/ से लिए गए हैं।
अमेरिका ब्राजील की यात्रा पर बैन लगा सकता है
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि ब्राजील से अमेरिका की यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। ब्राजील दुनिया में चौथा सबसे संक्रमित देश है। राष्ट्रपति ने कहा- मैं नहीं चाहता कि लोग वहां से आएं और हमारे लोगों को संक्रमित करें या फिर वहां के लोग बीमार हों। हम ब्राजील में वेंटिलेटर्स भेजकर मदद कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर के पास पेट्रोलिंग करती पुलिस। राज्य में 3.62 लाख संक्रमित हैं।

अमेरिका: हिरासत में रखे गए 1145 प्रवासी संक्रमित
अमेरिका में हिरासत में रखे गए 1145 प्रवासी कोरोना से संक्रमित हैं। देश के इमिग्रेशन एंड कस्टम्स डिपार्टमेंट ने मंगलवार को ये जानकारी दी। अब तक हिरासत में रखे गए 2194 लोगों की जांच हो चुकी है। नौ मई तक देश के प्रवासी केंद्रों में 27,908 लोग हिरासत में थे। वहीं छह मई को एक प्रवासी की मौत हुई थी।

इजराइल: आज से धार्मिक स्थल खुलेंगे
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि देश में बुधवार सुबह से धार्मिक स्थिल फिर से खोल दिए जाएंगे। इस तरह से इजराइल में एक हॉल में 50 लोगों की मौजूदगी में यहूदी उपासना गृह, मस्जिद और चर्च बुधवार सुबह से खुल जाएंगे। धार्मिक स्थलों में एक-दूसरे के बीच दो मीटर की दूरी, मास्क पहनने और साफ-सफाई रखनी होगी। यहां 25 मार्च को धार्मिक स्थल बंद कर दिए गए थे। देश में रेस्तरों, बार और नाइट क्लबों पर लगी पाबंदी को 27 मई से हटा लिया जाएगा। स्वीमिंग पुल और होटल भी 27 मई से खुल जाएंगे।

पेरू: चीन से ज्यादा हुए मामले
पेरू में संक्रमण का आंकड़ा चीन से ज्यादा हो चुका है। यहां अब तक 99,483 लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि 2914 लोगों की मौत हो चुकी है। पेरू के राष्ट्रपति मार्टिन विजकारा ने मंगलवार को कहा कि हम अस्पतालों में बिस्तरों को बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और लगातार हाथ धोते रहने जैसे कदम उठाने की अपील की।

चीन: एक नया मामला
चीन में कोरोना का एक नया मामला दर्ज किया गया है। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने बुधवार को बताया कि संक्रमण का यह नया मामला मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के आंतरिक हिस्से में दर्ज किया गया है। देश के कई अस्पतालों से अब तक 1662 विदेशी नागरिकों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। जबकि 46 विदेशी नागरिक अभी भी अस्पातलों में भर्ती हैं। अब तक देश में किसी भी विदेशी नागरिक की मौत नहीं हुई है।

बीजिंग में मास्क बनातीं कर्मचारी। चीन में अब तक 4634 लोगों की मौत हो चुकी है।

जर्मनी : 20 हजार हेल्थ वर्कर संक्रमित
जर्मनी की हेल्थ मिनिस्ट्री ने मंगलवार को कहा कि तीन महीने के दौरान देश के 20 हजार 400 हेल्थ वर्कर संक्रमित हुए। इनमें से 61 की मौत हो चुकी है। 19 हजार से ज्यादा स्वस्थ हुए। देश के कुल संक्रमितों में 11 फीसदी यही हेल्थ वर्कर हैं। देश में अब तक आठ हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।