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लगातार तीसरे दिन 150 से ज्यादा की जान गई; महाराष्ट्र में 85 और गुजरात में 22 संक्रमितों ने दम तोड़ा


  • गुरुवार को उत्तरप्रदेश में 15, दिल्ली में 13 और तमिलनाडु 12 ने दम तोड़ा
  • सबसे ज्यादा 1982 मौतें महाराष्ट्र में, बुधवार को देश में रिकॉर्ड 188 मरीजों की जान गई

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 01:00 AM IST

नई दिल्ली. देश में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लगातार तीसरे दिन 150 से ज्यादा मरीजों ने दम तोड़ा। गुरुवार को 176 संक्रमितों की मौत हुई। महाराष्ट्र में अब तक कोरोना से 1982 और गुजरात में 960 संक्रमित जान गंवा चुके हैं। बुधवार को रिकॉर्ड 188 लोगों ने दम तोड़ा था। यह एक दिन में मृतकों का सबसे बड़ा आकंड़ा था।

गुरुवार को महाराष्ट्र में 85, गुजरात में 22 और दिल्ली में 13 मरीजों की जान गई। इसके अलावा गुरुवार को उत्तरप्रदेश में 15, दिल्ली में 13, तमिलनाडु में 12, मध्यप्रदेश में 8, राजस्थान में 7, पश्चिम बंगाल में 6, तेलंगाना में 4, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर और आंध्रप्रदेश में 1-1 मरीज की मौत हुई। 

संक्रमण से कहां कितनी मौतें?

राज्य

मौतें                            
महाराष्ट्र                               1982
गुजरात 960
मध्यप्रदेश 321
पश्चिम बंगाल 295
राजस्थान 180
दिल्ली 316
उत्तरप्रदेश 197
आंध्र प्रदेश 59
तमिलनाडु 148
तेलंगाना 67
कर्नाटक 47
पंजाब 40
जम्मू-कश्मीर 27
हरियाणा 19
बिहार 15
ओडिशा 07
झारखंड 04
हिमाचल प्रदेश 06
चंडीगढ़ 04
केरल 08
असम 04
उत्तराखंड 04
मेघालय 01
कुल 4711

टॉप-10 शहर जहां सबसे ज्यादा मौतें हुईं 

शहर

मौतें
मुंबई                           1135
अहमदाबाद 780
पुणे 301
कोलकाता 194
इंदौर 122
जयपुर 85
उज्जैन 54
सूरत 65
ठाणे 155
भोपाल 51

27 मई को सबसे ज्यादा 188 मौतें

तारीख

मौतें
16 मई 106
17 मई 165
18 मई 131
19 मई 147
20 मई  132
21 मई 148               
22 मई 147
23 मई 142
24 मई 156
25 मई 150
26 मई 173
27 मई 188
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संसद ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने की मंजूरी दी, हॉन्गकॉन्ग का स्वतंत्र क्षेत्र का दर्जा छिन सकता है


  • चीन सरकार ने बीते गुरुवार को नया सुरक्षा कानून बनाने की घोषणा की थी, इसके बाद से ही हॉन्कॉन्ग के लोग इसका विरोध कर रहे थे
  • रविवार को हॉन्गकाॅन्ग में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था, 360 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था

दैनिक भास्कर

May 29, 2020, 12:34 AM IST

बीजिंग. चीन की संसद ने हॉन्गकॉन्ग में विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करने की मंजूरी दे दी। अब हॉन्गकॉन्ग से सेमी-ऑटोनोमस( अर्ध-स्वायत्त) क्षेत्र होने का दर्जा छिन सकता है। पिछले गुरुवार को भी चीन की संसद में इस कानून का मसौदा पारित हुआ था। हालांकि, लोगों के विरोध की वजह से इसे पारित नहीं कराया जा सका था।

इस नए कानून को लाने में हॉन्गकॉन्ग की संसद को चीन सरकार ने नजरअंदाज कर दिया। दरअसल, चीन सरकार ने जब से नया सुरक्षा कानून लाने की घोषणा की थी, तब से ही इसका विरोध हो रहा था। बीते रविवार को कोरोना से जुड़ी पाबंदियों के बावजूद हॉन्गकाॅन्ग में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। इसके बाद 360 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

क्या है चीन का नया सुरक्षा कानून?
चीन के नए सुरक्षा कानून में हॉन्गकॉन्ग में देशद्रोह, आतंकवाद, विदेशी दखल और विरोध करने जैसी गतिविधियां रोकने के प्रावधान होंगे। इसके तहत चीनी सुरक्षा एजेंसियां, हॉन्कॉन्ग में काम कर सकेंगी। फिलहाल, चीनी एजेंसियां हॉन्कॉन्ग में काम नहीं कर सकती हैं। कई मानवाधिकार संगठनों और अंतराष्ट्रीय सरकारों ने भी इस कानून का विरोध किया है।

अमेरिका, हॉन्गकॉन्ग से विशेष व्यापार का दर्जा वापस लेगा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा है कि हॉन्गकॉन्ग को अब पहले की तरह व्यापार का विशेष दर्जा नही मिलेगा। अब यह मुख्य वित्तीय केंद्र नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद थी कि हॉन्गकॉन्ग आजादी से काम करके चीन के लिए उदाहरण पेश करेगा। हालांकि, अब यह स्पष्ट हो चुका है कि चीन, हॉन्कॉन्ग को अपने मॉडल पर ढाल रहा है।

चीन के पास हमेशा से कानून बनाने का अधिकार था
हॉन्गकॉन्ग के लोगों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा देश के स्थायित्व का आधार है। इसमें छेड़छाड़ से उनके मौलिक अधिकारों का हनन होगा। चीन के पास हमेशा से हॉन्गकॉन्ग के मूल कानून में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करने का अधिकार था, लेकिन वह अब तक ऐसा करने से परहेज करता रहा।

हॉन्गकॉन्ग में सितंबर में चुनाव होने वाले हैं। पिछले साल जैसे लोकतंत्र समर्थकों को कामयाबी मिली, अगर वैसे ही जिला चुनाव में भी कामयाबी मिली तो फिर सरकार को बिल लाने में परेशानी हो सकती है।

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3736 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 50 लाख प्रवासियों ने सफर किया; अब ऐसी स्पेशल ट्रेनों में एडवांस रिजर्वेशन पीरियड 30 दिन से बढ़ाकर 120 किया गया


  • आने वाले दिनों में स्पेशल ट्रेनों से लगेज और पार्सल बुकिंग की सुविधा भी शुरू की जाएगी
  • एक मई से अब तक 3736 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलीं और इनमें से 3157 मंजिल तक भी पहुंचीं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 10:22 PM IST

नई दिल्ली. रेलवे ने सभी स्पेशल ट्रेनों में एडवांस रिजर्वेशन पीरियड को 30 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दिया है। इन ट्रेनों में अब पार्सल और लगेज बुकिंग की सुविधा भी दी जाएगी। रेलवे ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। रेलवे ने बताया कि 1 मई से अब तक 3736 स्पेशल ट्रेनों से 50 लाख प्रवासी मजदूरों ने सफर किया है। 

सबसे ज्यादा 1520 ट्रेनें उत्तर प्रदेश पहुंचीं
रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 5 राज्यों से सबसे ज्यादा श्रमिक ट्रेनों ने सफर की शुरुआत की यानी इन ट्रेनों का ओरिजिनेटिंग डेस्टिनेशन इन्हीं राज्यों में था। गुजरात से 979, महाराष्ट्र से 695, पंजाब से 397, उत्तर प्रदेश से 236 और बिहार से 263 ट्रेनें शुरू हुईं। 5 राज्यों में सबसे ज्यादा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें पहुंचीं। इनमें 1520 ट्रेनें उत्तर प्रदेश, 1296 ट्रेनें बिहार, 167 ट्रेनें झारखंड, 121 ट्रेनें मध्य प्रदेश और 139 ट्रेनें ओडिशा पहुंचीं। 

84 लाख फूड पैकेट और 1.24 करोड़ पानी की बोतलें मुफ्त दीं
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया- मुझे इस बात की खुशी है कि कोरोनावायरस के वक्त में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 50 लाख से ज्यादा मुसाफिरों ने सफर किया। सभी सुरक्षित तरीके से अपने घरों तक पहुंचे। इस दौरान रेलवे ने 84 लाख फूड पैकेट और 1.24 करोड़ पानी की बोतलें मुफ्त दीं। श्रमिक ट्रेनों से सफर करने वाले हर मुसाफिर को खाना और पानी रेलवे की ओर से दिया जा रहा है। 

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कफन को मां का आंचल समझ खेलते मासूम के वीडियो पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, केंद्र और राज्य सरकार से पूछा- ऐसा क्यों हुआ?


  • कोर्ट ने राज्य सरकार को इस घटना का पूरा ब्यौरा हलफनामा दाखिल कर अगली सुनवाई में देने के निर्देश दिए हैं
  • इस मामले में एडवोकेट आशीष गिरी कोर्ट मित्र नियुक्त, अगली सुनवाई 3 जून को होगी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 09:36 PM IST

पटना. पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर कफन को मां का आंचल समझ खेल रहे बच्चे का वीडियो वायरल होने पर नोटिस लिया है। कोर्ट ने केंद्र और बिहार सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर ऐसी घटना क्यों हुई?। 

चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस एस. कुमार की खंडपीठ गुरुवार सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर एक अन्य मामले की सुनवाई कर रही थी। उसी समय न्यायमूर्ति एस. कुमार ने चीफ जस्टिस का ध्यान इस खबर की ओर कराया।

खंडपीठ ने उस वीडियो को “दुर्भाग्यपूर्ण और सदमा देने वाला” बताया और इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रेल, बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव व अन्य को पक्षकार बनाया। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को गुरुवार दोपहर सवा दो बजे कुछ सवालों के जवाब देने का आदेश दिया। 

ये वीडियो हुआ था वायरल

कोर्ट के सवाल 
1. उस महिला की मौत वाकई भूख के कारण हुई या किसी अन्य वजह से? 
2. मृत महिला का पोस्टमार्टम कराया गया था, या नहीं?  
3. मृतक महिला अपने बच्चे के साथ अकेले सूरत से आ रही थी या उसके साथ उसके कोई परिवार वाला था? 
4. उसके मौत की जानकारी के बाद पुलिस व अन्य महकमे ने फौरन क्या कदम उठाए? उसका अंतिम संस्कार रीति रिवाजों के साथ हुआ या नहीं? 
5. मृतका के बच्चे किसके संरक्षण में हैं और उसकी देखभाल कौन कर रहा है?  

साथ ही इस जनहित मामले में युवा एडवोकेट आशीष गिरी को बतौर “कोर्ट मित्र” नियुक्त करते हुए कोर्ट ने उन्हें जनहित याचिकाकर्ता के वकील के तौर पर सुनवाई में कोर्ट को सहायता देने का भी अनुरोध किया।

राज्य सरकार का जवाब- नहीं हुआ पोस्टमार्टम
दोपहर सवा दो बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर इस मामले की दोबारा सुनवाई हुई। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सूर्यदेव यादव ने कोर्ट को बताया कि खबर कुछ हद तक सही है। मृतका कटिहार की रहने वाली थी और मानसिक रूप से बीमार थी। वह सूरत से अपनी बहन के साथ ट्रेन से बिहार लौट रही थी। यात्रा के दौरान ही उसकी मौत हो गई थी। इसकी खबर उसकी बहन और उसके पति ने मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद रेलवे अधिकारियों को दी। अफसरों ने प्राथमिक जांच के बाद शव को परिजन को सौंप दिया।  

इस संबंध में न कोई एफआईआर दर्ज हुआ और न ही कोई पोस्टमार्टम। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने महिला के शव को कटिहार भेजने का पूरा इंतजाम किया। अनाथ बच्चे की सुरक्षित कस्टडी उसकी मौसी (मृतका के साथ आई उसकी बहन) को दी गई है।

तीन जून को अगली सुनवाई

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस घटना का पूरा ब्यौरा व परिस्थितियों की जानकारी हलफनामा दायर कर अगली सुनवाई में देने का निर्देश दिया है साथ ही अनाथ बच्चे की भी अपडेट जानकारी मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जून को होगी।

कंटेन्ट: अरविंद उज्जवल

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ट्रम्प की मध्यस्थता की पेशकश पर भारतीय विदेश मंत्रालय का जवाब- पड़ोसी के साथ बातचीत से मसला सुलझाने की कोशिशें जारी


  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि चीन और भारत के सीमा विवाद पर अमेरिका मध्यस्थता के लिए तैयार है
  • इससे पहले, ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकराया था

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 09:50 PM IST

नई दिल्ली.. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को लद्दाख और सिक्किम में भारत-चीन के बीच जारी विवाद में मध्यस्थता की पेशकश की थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस पेशकश पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि पड़ोसी के साथ मसले का शांतिपूर्ण हल निकालने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भी भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था। भारत ने कहा था कि यह उसका आंतरिक मसला है।

भारत तीसरे पक्ष के दखल से इनकार कर चुका है
एक दिन पहले चीन ने कहा था कि भारत से साथ सीमा पर स्थित स्थिर और नियंत्रण में है। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था- दोनों पक्ष तनाव को कम करने में जुटे हैं, लेकिन भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। भारत और चीन के पास कई कूटनीतिक तंत्र मौजदू हैं। किसी भी हालात का निपटारा शांतिपूर्ण ढंग से किया जा सकता है।

श्रीवास्तव ने फिर दोहराया कि भारतीय सेना ने एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) का उल्लंघन नहीं किया था। भारत, चीन के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सेना हमारे लीडर्स की सहमति और मार्गदर्शन का ईमानदारी से पालन करती है। हम भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए दृढ़ हैं।

चीन के बाद भारत ने भी बढ़ाई सैनिकों की संख्या

लद्दाख में हाल ही में गालवन नाला एरिया के पास चीन और भारत के बीत तनाव बढ़ गया है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन करीब 5 हजार जवान तैनात कर चुका है। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

इसी महीने दोनों सेनाओं के बीच तीन बार अलग-अलग जगहों पर टकराव हो चुका है। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

डोकलाम के बाद सबसे बड़ा टकराव

  • अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

  • भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। साल के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी।

भारत और चीन के बीच हाल में हुए विवाद

1) तारीख- 5 मई, जगह- पूर्वी लद्दाख की पेंगोंग झील
उस दिन शाम के वक्त  झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-5 इलाके में भारत-चीन के करीब 200 सैनिक आमने-सामने हो गए। भारत ने चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। पूरी रात टकराव के हालात बने रहे। अगले दिन तड़के दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प हो गई। बाद में दोनों तरफ के आला अफसरों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।

2) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- उत्तरी सिक्किम में 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद नाकू ला सेक्टर
यहां भारत-चीन के 150 सैनिक आमने-सामने हो गए थे। आधिकारिक तौर पर इसकी तारीख सामने नहीं आई। हालांकि, द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां झड़प 9 मई को ही हुई। गश्त के दौरान आमने-सामने हुए सैनिकों ने एक-दूसरे पर मुक्कों से वार किए। इस झड़प में 10 सैनिक घायल हुए। यहां भी बाद में अफसरों ने दखल दिया, फिर झड़प रुकी।

3) तारीख- संभवत: 9 मई, जगह- लद्दाख
जिस दिन उत्तरी सिक्किम में भारत-चीन के सैनिकों में झड़प हो रही थी, उसी दिन चीन ने लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे थे। चीन के हेलिकॉप्टरों ने सीमा तो पार नहीं की, लेकिन जवाब में भारत ने लेह एयरबेस से अपने सुखोई 30 एमकेआई फाइटर प्लेन का बेड़ा और बाकी लड़ाकू विमान रवाना कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल के बरसों में ऐसा पहली बार हुआ जब चीन की ऐसी हरकत के जवाब में भारत ने अपने लड़ाकू विमान सीमा के पास भेजे।

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लॉकडाउन खत्म होते ही गुड़गांव से दरभंगा तक पदयात्रा करेगी कांग्रेस: जाखड़


  • कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम `स्पीक अप इंडिया` के तहत गुरुवार को सोशल मीडिया पर लोगों से रू-ब-रू हुए पार्टी के पंजाब प्रधान
  • केंद्र सरकार से प्रवासी मजदूरों को मुफ्त रेल या फिर बस यात्रा की सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग की सुनील जाखड़ ने

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 08:58 PM IST

चंडीगढ़ (रोहित वाट्स). लॉकडाउन खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी हरियाणा के गुड़गांव से बिहार के दरभंगा तक पदयात्रा करेगी। यह ऐलान गुरुवार को पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ ने किया है। सोशल मीडिया पर लाइव हो जाखड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनका राजधर्म याद दिलाने की कोशिश की है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत प्रभाव से समस्त प्रवासी मजदूरों को मुफ्त रेल या फिर बस यात्रा की सुविधा उपलब्ध करवाकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाए।

गुरुवार को कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम `स्पीक अप इंडिया` के तहत लोगों के समक्ष सोशल मीडिया पर लाइव होते हुए जाखड़ ने कहा कि देश के सबसे सम्मानीय पद पर बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब लोगों को भूल चुके हैं। 
हरियाणा के गुड़गांव से बिहार के दरभंगा तक साइकल पर अपने पिता को लेकर जाने वाली नन्ही बच्ची का उदाहरण देकर प्रवासी मजदूरों का दर्द बयां करते हुए जाखड़ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी उक्त बच्ची जैसे लाखों पीड़ित प्रवासियों की मदद करने के लिए सरकार की नालायकी को दिखाने के लिए आने वाले सामान्य दिनों में इसी ट्रैक पर पदयात्रा करेगी। 
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में कांग्रेस परिवार प्रवासी मजदूरों की मदद को हर हाल में जारी रखेगी। जाखड़ ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को जिस तरह से केंद्र सरकार ने परेशान किया है, ऐसा जुर्म कभी माफ नहीं किया जा सकता, क्योंकि जिस बच्ची ने अपने पिता को गुरुग्राम से दरभंगा तक पहुंचाया था। उस घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है।



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गोवा में होने वाले 36वें नेशनल गेम्स टाले गए, पिछले साल अप्रैल में चुनाव की वजह से रद्द करना पड़ा था


  • कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए ही नेशनल गेम्स को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है
  • गोवा के खेल मंत्री ने कहा- नई तारीख तय करने के लिए ऑर्गेनाइजेशन कमेटी सितंबर में बैठक करेगी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 08:31 PM IST

कोरोनावायरस की वजह से गोवा में होने वाले 36वें नेशनल गेम्स को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया। इस साल 20 अक्टूबर से 4 नवंबर तक ये खेल होने थे। पहले नवंबर 2018 में  इन खेलों का आयोजन होना था। लेकिन तब इसे अप्रैल 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।

गोवा सरकार ने अप्रैल 2019 में भी आम चुनाव की वजह से इन खेलों को रद्द कर दिया था। पिछले नेशनल गेम्स 2015 में केरल में हुए थे। 

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने हाल ही में गोवा सरकार से नेशनल गेम्स का आयोजन तय शेड्यूल के मुताबिक करने के लिए कहा था। लेकिन जिस तेजी से देश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उसे देखते हुए गेम्स को स्थगित करने का फैसला लिया गया। 

सितंबर की बैठक में नई तारीख तय होगी

गोवा के खेल मंत्री मनोहर अजगांवकर ने कहा- नेशनल गेम्स की ऑर्गेनाइजेशन कमेटी ने कोरोना महामारी के कारण खेलों को स्थगित करने का फैसला लिया है। कमेटी सितंबर के आखिरी में बैठक करेगी और नेशनल गेम्स की नई तारीख तय की जाएगी।

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भोपाल में फंसी बेटी और परिजन को दिल्ली भेजने के लिए शराब कारोबारी ने किराए पर लिया 180 सीटों वाला प्लेन


  • विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, एयरबस-320 को किराए पर लेने की लागत करीब 20 लाख रुपए है
  • देश में 25 मई से घरेलू उड़ानों को शुरू किया गया है, 25 मार्च को देशभर में घरेलू उड़ानों पर रोक लगी थी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 08:44 PM IST

भोपाल. कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है। इस बीच मध्य प्रदेश में हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया। भोपाल में एक शराब कारोबारी जगदीश अरोड़ा ने परिवार के 4 लोगों को भोपाल से दिल्ली भेजने के लिए 180 सीटों वाला पूरा प्लेन ही किराए पर ले लिया। जबकि दूसरी तरफ देशभर में प्रवासी मजदूर अपने-अपने घरों को लौटने के लिए परेशान हो रहे हैं।

सोमवार यानि 25 मई से घरेलू उडा़नें देश में शुरू की गई हैं। इसी दिन शराब कारोबारी अरोड़ा ने पत्नी, बेटी और दो नातिन को दिल्ली भेजने के लिए एयरबस ए-320 को किराए पर लिया। यह बात इसलिए हैरान करने वाली है क्योंकि प्रवासी मजूदर अपने घरों को लौटने के लिए हजारों किमी पैदल चलने को मजबूर है वहीं केवल 4 लोगों के लिए 180 सीटों का विमान किराए पर लिया गया।

लॉकडाउन के कारण 2 महीने से भोपाल में फंसे थे सदस्य

सोम डिस्टियलरी के मालिक जगदीश अरोड़ा के परिजन बीते दो महीने से लॉकडाउन के कारण भोपाल में फंसे थे। सूत्रों ने बताया कि विमान दल के साथ यह प्लेन सोमवार (25 मई) को दिल्ली से भोपाल पहुंचा। 4 यात्रियों के साथ रवाना हुआ। 

एयरपोर्ट डायरेक्टर ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की

एयरलाइन के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि एक परिवार के चार सदस्यों को ले जाने के लिए एयरबस-320, 180 सीटर विमान 25 मई को यहां पहुंचा। ऐसा शायद कोरोना महामारी के कारण ही हुआ होगा। भोपाल राजाभोज एयरपोर्ट के डायरेक्टर अनिल विक्रम ने इस पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार किया है।

एयरबस-320 का किराया 20 लाख रुपएः विशेषज्ञ 

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, एक एयरबस-320 को किराए पर लेने की लागत करीब 20 लाख रुपए है। देश में घरेलू वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू किया गया है। लगभग दो महीने के बाद लॉकडाउन के बीच सोमवार (25 मई) को इन सेवाओं को खोला गया था। 

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70 साल में अमेरिका ने 4 जंग लड़कर 1 लाख 1 हजार सैनिक खोए, लेकिन कोरोना के 4 महीने में 1 लाख से ज्यादा लोगों की जान गईं


  • दुनियाभर में संक्रमण के कुल मामलों का 30 फीसदी से ज्यादा केवल अमेरिका में
  • अमेरिका में संक्रमण का पहला मामला 21 जनवरी को वॉशिंगटन में आया था

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 07:17 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में इस समय संक्रमण के 17 लाख से ज्यादा मामले हैं। यहां पर मरने वालों की संख्या एक लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। वर्ल्ड वॉर-2 के बाद अमेरिका ने चार बड़े युद्धों का सामना किया है। इस दौरान जितने सैनिक मारे गए, कोरोनावायरस के चलते चार महीने में उससे ज्यादा लोगों की जान गई है। देश में संक्रमण का पहला मामला 21 जनवरी को मिला था। दुनियाभर के कुल संक्रमितों के 30% से ज्यादा मामले यहां हैं।

अमेरिका में बीबीसी के पत्रकार जॉन सोपेल का कहना है कि कोरिया, वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान में जितने अमेरिकी महिला-पुरुष सैनिकों की जान गई, उससे ज्यादा लोगों की मौत महामारी से हुई है। सोपेल ने बताया कि अगर कोई कोरोना से हुई मौतों की तुलना अमेरिका में कैंसर व सड़क हादसे में हुई मौतों से करें तो भी चौंकाने वाले परिणाम ही सामने आएंगे।

युद्ध   मरने वालों की संख्या
कोरियाई युद्ध (1950-1953) 36,500
वियतनाम युद्ध (1961-1975) 58,000
इराक युद्ध      (2003-2011) 4500
अफगानिस्तान (2001 से अबतक) 2000

अमेरिका में सबसे ज्यादा मौतें, लेकिन मृत्यु दर के हिसाब से पीछे
अमेरिका में संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले आए हैं। मौतें भी सबसे ज्यादा हुई हैं। लेकिन, अगर मृत्युदर के हिसाब से देखें तो अमेरिका का नौवां स्थान आता है। आबादी के लिहाज से मौतों की तुलना के आधार पर बेल्जियम, ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे देश अमेरिका से आगे हैं। न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 20 राज्यों में कोरोना के नए मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। यहां नॉर्थ कैरोलिना और विसकॉन्सिन में संक्रमण के मामले तेजी से सामने आए हैं। 

न्यूयॉर्क में कम हुई मरने वालों की संख्या
अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क है। यहां मरने वालों की संख्या 21 हजार के करीब है। कुछ दिनों पहले यहां रोज सैकड़ों लोगों की मौत हो रही थी। हालांकि, अब यहां संक्रमण से मौतों के मामलों में कमी आई है।

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दमोह, कटनी, जबलपुर समेत 10 जिलों में फसलें तबाह, अब बालाघाट और बैतूल में टिड्डी दल का हमला


  • दमोह और कटनी में कई गांवों में गर्मी की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाकर दूसरे जिलों में पहुंचा टिड्डी दल
  • बालाघाट में 40 हजार हेक्टेयर में गर्मी की फसल लगाई गई है, जिसे टिड्डी दल नुकसान पहुंचा सकता है

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 06:53 PM IST

जबलपुर/कटनी/सीहोर/दमोह/बैतूल/बालाघाट. मध्य प्रदेश के सीहोर, मंदसौर, नीमच, रतलाम, खंडवा, सागर में तबाही मचाने के बाद टिड्डी दल ने गुरुवार को जबलपुर, दमोह, कटनी और बैतूल में फसलें बर्बाद कीं। इससे पहले मंगलवार शाम सागर जिले के देवरी से भगाया गया टिड्डी दल दमोह जिले में पहुंचा। बुधवार को दिनभर यहां उत्पात मचाने के बाद शाम को पटेरा के गांव से पन्ना के रैपुरा की ओर मुड़ गया। रात में कटनी जिले के रीठी के जंगलों में पहुंचा। इस बीच, बालाघाट के करीब 35 गांवों में टिड्डियों ने हमला कर दिया।

दमोह: 50 गांवों में टिड्डी दल ने नुकसान किया  
जिले के अभाना में टिड्डी दल ने 50 गांवों में फसलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाया। यहां अभाना समेत जबेरा और नोहटा में किसान और प्रशासन अलर्ट माेड पर थे। इसलिए टिड्डी दल कहीं भी ज्यादा नहीं टिक पाया। डीजे और लाउड स्पीकर की तेज आवाज और फायर ब्रिगेड द्वारा पानी की बौछारों किए जाने के बीच टिड्डी दल को वहां से भगाया गया।

इसके बाद टिड्डी दल रात करीब 8 बजे पन्ना जिले से कटनी जिले की सीमा में प्रवेश कर गया। इसने रीठी के उदाना नयाखेड़ा में डेरा जमाया। किसानों की उड़द-मूंग की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। किसानों ने भगाने के लिए कई तरह के प्रयास किए। फायर ब्रिगेड की मदद से शीघ्र ही नियंत्रण पा लिया गया। 

बैतूल में टिड्डी दल ने लाखाें की तादाद में हमला किया। 

बालाघाट: महाराष्ट्र से बालाघाट पहुंचे टिड्डी दल का 35 गांवों में हमला 
कृषि विभाग ने किसानों को टिड्डी दल के आने पर दवाइयों के साथ अन्य जरूरी सावधानी को लेकर सचेत कर दिया है। बालाघाट उपसंचालक कृषि सीआर गौर ने बताया कि टिड्डी दल जिले की खैरलांजी तहसील के चिचोली गांव में प्रवेश कर गया है। गौर ने किसानों से खेत में लगी फसल की सुरक्षा के लिए ढोल, ड्रम या अन्य साधन से तेज ध्वनि और कीटनाशक का छिड़काव भी करने की अपील की।

टिड्‌डी दल महाराष्ट्र के भंडारा जिला के तुमसर तहसील से आया है। यहां से बालाघाट जिले की दूरी करीब 90 किमी है। जिले के करीब 40 हजार हेक्टेयर में गर्मी की फसल लगाई गई है। टिड्डी दल पड़ोसी जिले के रास्ते यहां पहुंचने से किसानों की फसल को नुकसान होगा। 

बैतूल में टिड्डी दल ने लाखाें की संख्या में हमला कर दिया है। 

बैतूल: टिड्डियों को मारने के लिए 4 फायर ब्रिगेड से छिड़का कीटनाशक
जिले में टिड्डियों के दो दलों ने हमला किया। पहला दल भैंसदेही के गोरेगांव पहुंचा। यहां पर प्रशासन और किसान टिड्डियों को भगाने में लगे थे कि इसी बीच खबर आई कि आठनेर ब्लॉक के भैंसाघाट में टिड्डियों के दूसरे दल ने अटैक किया है। यह दूसरा मौका है जब जिले में टिड्डी दल ने हमला किया हो।

इससे पहले भीमपुर ब्लॉक के 6 गांव में टिड्डी दल ने हमला करके फसल को नुकसान पहुंचाया था। रातभर गोरेगांव में टिड्डी दल को मारने और भगाने की कवायद की गई। टिड्डियों की संख्या अधिक होने के कारण रात में आठनेर और बैतूल समेत कुल चार फायर ब्रिगेड बुलवाकर कीटनाशक का छिड़काव किया गया।

इससे कुछ टिड्डियां मर गईं तो कुछ आमला, सिवनपाट, बोथिया होते हुए पूर्व दिशा की ओर भाग गईं। वहीं, किसानों ने खेत में धुआं, ढोल और थालियां बजाकर टिड्डियों को भगाने का प्रयास किया। इस बीच, रात में आठनेर ब्लॉक में भी दूसरे टिड्डी दल ने अटैक कर दिया। इस दल ने भैंसाघाट होते हुए आठनेर ब्लॉक में प्रवेश किया। वर्तमान में टिड्डी दल आठनेर ब्लॉक के मांडवी में है। 

बालाघाट में टिड्डियों को भगाने के लिए खेत में थाली बजाता किसान का बेटा।  

कटनी : रीठी में टिड्‌डियों को भगाने के लिए लोग जुटे 
रीठी तहसील क्षेत्र के बड़गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में टिड्डियों का दल पहुंच गया। यहां ग्रामीण ढोल और तालियां बजाकर टिड्डियों को भगा रहे हैं। लाखों की संख्या में टिड्डियों का दल वहां से निकला। ग्रामीण खेतों में डटे हैं। टिड्डियों का दल जब गांव में घुसा तो कुछ ही देर में ग्रामीण थाली बजाकर शोर करने में जुट गए। इसके बाद टिड्डी दल रीठी और कटनी की ओर बढ़ गया है। 

सीहोर : रेहटी के गांवों में पहुंचा टिड्डी दल 
टिड्डी दल सीहोर की रेहटी तहसील के गांवों में पहुंचा। रेहटी के पटत्तलाई, झोलियापुर, बारदा, नरेला, कोठरा, चक्लदी समेत अन्य गांवों में पहुंचने पर किसानों को बड़ी चिंता सता रही है। किसानों द्वारा ढोल, थाली, पटाखे और स्प्रे किया जा रहा है। मूंग की फसल के फल-फूल पर नुकसान है।

यह टिड्डी दल जहां रात रूक जाता है। जिस फसल या पौधे पर बैठ जाता है, सारी जगह चट कर जाता है। किसानों ने घर छोड़कर अपना डेरा खेतों में जमा लिया है। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि टिड्डी दल हमारे खेतों में बैठ गए तो फसलें चौपट ना कर दें।

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55 नए केस आए, गुड़गांव में कोरोना से तीसरी मौत; राज्य में अब तक 19 की जान गई


  • गुरुवार को गुड़गांव में 30, फरीदाबाद में 13, करनाल में 5, कैथल में 4, फतेहाबाद में 2, कुरुक्षेत्र में एक मरीज मिला
  • 14 मरीज अस्पतालों से किए गए डिस्चार्ज, अब तक कुल 838 मरीजों को मिल चुकी छुट्टी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 06:25 PM IST

पानीपत. हरियाणा में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 1400 पार करते हुए 1440 पहुंच गया है। गुरुवार को 55 नए मरीज आए। वहीं गुड़गांव में कोरोना से तीसरी मौत हो गई। अब प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 19 हो गई है। गुरुवार को गुड़गांव में 30, फरीदाबाद में 13, करनाल में 5, कैथल में 4, फतेहाबाद में 2, कुरुक्षेत्र में 1 मरीज मिला। अभी तक 838 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है। गुरुवार को 14 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। 

तीन दिन से मरीजों की संख्या बढ़ी तो रिकवरी रेट गिरी
हरियाणा में इस समय 578 एक्टिव मरीज प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। सबसे ज्यादा 171 एक्टिव मरीज गुड़गांव में मौजूद हैं। अभी तक 1 लाख 6389 के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। इनमें से 1 लाख 900 निगेटिव पाए गए हैं जबकि 1440 पॉजिटिव मिले हैं। अभी 4 हजार 58 सैंपल का इंतजार है। पिछले तीन दिन में लगातार बड़ी संख्या में मरीजों के आने से हरियाणा में रिकवरी रेट गिर गया है। अब रिकवरी रेट 59.17 फीसदी पर आ गया है। वहीं मरीजों के डबल होने का रेट 19 दिन से 17 दिन आ गया है। 

करनाल में 5 मरीज मिले एक 10 साल की बच्ची भी कोरोना पॉजिटिव
करनाल में गुरुवार को 5 मरीज पॉजिटिव मिले। इनमें से एक ओल्ड चार चमन, एक मीरा घाटी, एक मरीज शांति नगर, एक कुंजपुरा गांव व एक पखाना गांव में मिला है। अधिकतर की ट्रैवल हिस्ट्री दिल्ली है। इनमें एक 10 साल की बच्ची भी कोरोना पॉजिटिव पाई गई है।

हरियाणा में अब तक 19 मरीजों की मौत

हरियाणा में अब तक सबसे ज्यादा 7 मरीजों की मौत फरीदाबाद में, 3 मरीजों की मौत गुड़गांव में, 3 की मौत पानीपत में,  2 की अम्बाला में, 1 की सोनीपत में, 1 की जींद में, 1 की करनाल में और 1 मौत रोहतक में हो चुकी है। 

हरियाणा में मरीजों का आंकड़ा 1440 पहुंचा

  • अमेरिका से लौटे 21 कोरोना पॉजिटिव के साथ-साथ गुड़गांव में 367, फरीदाबाद में 275, सोनीपत में 174, झज्जर में 97, नूंह में 66, अंबाला में 47, पलवल में 51, पानीपत में 59, पंचकूला में 25, जींद में 27, करनाल में 42, रोहतक में 19, महेंद्रगढ़ में 36 रेवाड़ी में 18, सिरसा में 11, फतेहाबाद में 11, यमुनानगर में 8, हिसार में 22, कुरुक्षेत्र में 22, भिवानी में 11, कैथल में 10, चरखी-दादरी में 7 संक्रमित मरीज हैं। इसके अलावा, मेदांता अस्पताल गुड़गांव में 14 इटली के नागरिकों को भी भर्ती करवाया गया था, जिन्हें हरियाणा ने अपनी सूची में जोड़ा है।
  • हरियाणा में अब कुल 838 मरीज ठीक हो गए हैं। इनमें गुरुग्राम में 193, फरीदाबाद में 120, सोनीपत में 124, नूंह में 65, झज्जर में 90, अंबाला में 40, पलवल 39, पानीपत में 33, पंचकूला में 25, जींद में 18, करनाल में 16, यमुनानगर में 8, सिरसा में 9, रोहतक में 11, महेंद्रगढ़ में 6, भिवानी में 6,  हिसार में 3, कैथल में 4, फतेहाबाद में 6, कुरुक्षेत्र में 2, चरखी दादरी में 1, रेवाड़ी में 4 मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं। 14 मरीज इटली के भी ठीक हुए हैं।
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मौसम विभाग ने कहा- 1 जून को केरल पहुंचेगा मानसून, इसके पहले 5 जून को पहुंचने का अनुमान था


  • भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए मानसून बेहद जरूरी
  • यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि आधारित है

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 06:15 PM IST

नई दिल्ली. मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून के आगमन को लेकर बेहद अनुकूल बन पड़ी हैं। इसके मुताबिक, इस बार मानसून 1 जून को दक्षिण के केरल में पहुंच जाएगा। हालांकि, इसके पहले मौसम विभाग ने मानसून के केरल पहुंचने को लेकर 5 जून का अनुमान जताया था।

नए घटनाक्रम के चलते अब यह 4 दिन पहले ही केरल पहुंच जाएगा। बता दें कि आधे से ज्यादा भारत में कृषि भूमि सिंचाई के लिए जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश पर ही निर्भर होती है। चावल, मक्का, गन्ना, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए बारिश बेहद जरूरी होती है। 

पिछले महीने विभाग ने कहा था कि मानसून औसत रहेगा

मौसम विभाग ने पिछले महीने कहा था कि इस बार मानसून औसत ही रहने वाला है। बता दें भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए मानसून बेहद जरूरी है। अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि आधारित है। कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन लागू है। इस वजह से एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शुमार भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों मुश्किलों का सामना कर रही है।

सामान्य मानसून से आशय 100% होता है

विभाग के मुताबिक, 96 से 100% बारिश को सामान्य मानसून माना जाता है। पिछले साल यह आठ दिन की देरी से 8 जून को केरल के समुद्रतट से टकराया था। भारत में जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून से बारिश होती है।

दो चरणों में जारी होता है अनुमान
हर साल मौसम विभाग दीर्घावधि अनुमान दो चरणों में जारी करता है। पहला अनुमान अप्रैल तो दूसरा अनुमान जून में जारी किया जाता है। इसके लिए स्टेटिसटिकल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम और ओशन एटमॉस्फिरिक मॉडलों की मदद ली जाती है। 1961 से 2010 के दौरान देशभर में हर साल औसतन 88 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

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पति 6 माह से जहाज में फंसे हैं, अभी सऊदी अरब में अटके, प्रेग्नेंट पत्नी खुद हॉस्पिटल जाकर डिलीवरी के लिए एडमिट हुईं


  • कहानी दूर देशों में फंसे दो नाविकों के परिवारों की, इनमें से कुछ नाविक 4 महीनों से तो कुछ 17 महीनों से जहाज पर फंसे हैं
  • शिप पर भेजने वाली कंपनियां खुद फ्लाइट भेजने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें सरकार से परमीशन ही नहीं मिल पा रही है

अक्षय बाजपेयी

May 28, 2020, 06:37 PM IST

नईदिल्ली. शाइनी बैंगलुरू में रहती हैं। आज डिलेवरी के लिए अस्पताल में एडमिट हुई हैं। खुद अकेली अस्पताल तक आई हैं। कारण, पति 3500 किमी दूर सउदी में जहाज में फंसे हैं। घर पर सिर्फ बुजुर्ग माता-पिता हैं।

यूं तो शाइनी  के पति पत्नी की डिलेवरी से पहले भारत आने वाले थे। लेकिन लॉकडाउन के चलते वो नहीं आ पा रहे हैं। इस दौरान डॉक्टर के पास रूटीन चैकअप से लेकर बाकी सभी काम शाइनी ने खुद किए हैं। पति दिसंबर में शिप पर गए थे और उनका चार महीने का कॉन्ट्रैक्ट था।

सैकड़ों नाविक अलग-अलग जहाजों में महीनों से फंसे हुए हैं। 

120 दिनों से ज्यादा हो गए हैं शाइनी  के पति समेत सैकड़ों भारतीय नाविकों को पानी और लहरों के बीच जहाज पर फंसे।

वह कहती हैं, ‘अप्रैल के फर्स्ट वीक में वापस आने वाले थे। लेकिन अभी तक नहीं आ पाए। मेरे पापा की उम्र 67 साल है। मां 63 साल की हैं।

घर में और कोई नहीं है।  कैब से डॉक्टर के पास जाती हूं तो संक्रमण का खतरा होता है। लेकिन सरकार को हमारी दिक्कत से क्या फर्क पड़ता है?’

ऐसी ही कहानी पुणे में रहने वाली रितु पंडित की भी है। उनके पति 19 जनवरी को मोरक्को से जहाज में गए थे। अप्रैल में वापस लौटना था।

लेकिन अचानक इंटरनेशनल फ्लाइट्स बंद हो गई। रितु अपनी एक साल की बेटी के साथ पुणे में फंसी हैं और पति कब लौटेंगे कोई नहीं जानता।

अपने बच्चे के साथ रितु। उनकी बेटी अभी एक साल की हुई है। 

रितु कहती हैं, ‘अभी वो यूरोप में हैं और उनका जहाज अब स्पेन जा रहा है। किसी देश में उतरते भी हैं तो वहां से भारत नहीं आ पाएंगे क्योंकि फ्लाइट बंद हैं। इसलिए शिप में ही हैं। उनके लिए तो लॉकडाउन दिसंबर से ही चल रहा है क्योंकि वे तब से शिप पर ही हैं।’

ये कहानी सिर्फ रितु और शाइना की नहीं है। भारत के कई सारे नाविक हैं जो अलग-अलग देशों में जहाज पर फंसे हुए हैं। लॉकडाउन है और फ्लाइट्स बंद हैं इसलिए वतन वापस नहीं आ सकते।

जहाज पर सेलिंग के दौरान फोन नहीं लगता, इंटरनेट भी सिर्फ आधे घंटे के लिए मिलता है। स्पीड इतनी कम होती है कि बमुश्किल चैट कर पाते हैं।

कोई 4 महीने से तो कोई 17 महीने से जहाज पर फंसा है। कंपनी कॉन्ट्रैक्ट आगे बढ़ाते जा रही है क्योंकि वापस आने का कोई रास्ता नहीं है।

यह फोटो हमें शिप से मिला है। लेकिन सेलर की रिक्वेस्ट पर हमने चेहरा ब्लर किया है।

हालांकि कंपनियां 25 परसेंट तक एक्स्ट्रा पे भी कर रही हैं। लेकिन परिवार की परेशानी और घर लौटने की बैचेनी के बीच ये पैसा किसी को नहीं चाहिए।

रितु कहती हैं, ‘इस बारे में केन्‍द्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री मनसुख एल. मांडविया से भी बात हो चुकी है। उन्होंने वादा किया था कि वंदे भारत मिशन के तहत सभी  स्पेशल फ्लाइट्स भेजकर वापस लाया जाएगा लेकिन अभी तक कोई फ्लाइट शेड्यूल ही नहीं हुई।’

शिप पर भेजने वाली कंपनियां खुद फ्लाइट भेजने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें सरकार से परमीशन ही नहीं मिल पा रही है।

एक शिप पर करीब 25 लोगों का क्रू होता है। इसमें एक कैप्टन, एक चीफ ऑफिसर, फिर फर्स्ट ऑफिसर और सेकंड ऑफिसर होते हैं।

नाविकों को कॉन्ट्रैक्ट पर भेजा जाता है। इनका काम माल को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाना होता है।

रैंक के हिसाब से कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट करती हैं और शिप पर भेजती हैं। शिप पर चौबीस घंटे की जॉब होती है।

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कार बम से जंग-ए-बदर के दिन हमला करने की तैयारी थी, आतंकी कल रात कार लेकर निकला, पुलिस ने फायरिंग की तो गाड़ी छोड़कर भागा


  • कार में 40-50 किलो विस्फोटक नीले रंग के ड्रम में रखा था, बम स्क्वॉड ने विस्फोट किया तो 50 मीटर ऊपर तक मलबा उड़ा
  • इत्तेफाक ये है कि पुलवामा में पिछले साल हमला करने वाला भी आदिल था और इस गाड़ी को चलाने वाले का नाम भी आदिल है

जफर इकबाल

May 28, 2020, 05:53 PM IST

श्रीनगर. सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर पुलवामा जैसे एक हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है। आतंकी एक कार में आईईडी लगाकर हमला करने की फिराक में थे। इसे सुरक्षा बलों ने इंटरसेप्ट किया और बाद में बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने कार को खाली जगह पर ले जाकर डिफ्यूज कर दिया। इस केस की जांच अब एनआईए करेगा।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, ईद से लगभग 10 दिन पहले जंग-ए-बदर के दिन आतंकवादी हमले की साजिश रच रहे थे। सुरक्षा बलों के पास उस दिन किसी बड़े आतंकी हमले का इनपुट था। सुरक्षा बल अलर्ट थे, इसलिए आतंकी उस दिन हमला नहीं कर सके। सर्च ऑपरेशन भी जारी था।

आईजी कश्मीर विजय कुमार के मुताबिक, पुलिस ने सूचना मिलने पर एक नाका लगाया। कल बुधवार रात को आतंकी जब ये गाड़ी लेकर निकला तो उसे पुलिस ने नाके पर रोका। आतंकी ने गाड़ी नहीं रोकी तो पुलिस ने फायरिंग की, लेकिन आतंकी गाड़ी लेकर भाग गया। फिर एक दूसरे नाके पर इस गाड़ी को रोका गया। आतंकी दोबारा नहीं रुका तो पुलिस ने फायरिंग की। इस बार आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर गाड़ी को छोड़कर भाग गया।

पुलिस ने दूर से ही कार को देखा और संदिग्ध नजर आने पर इलाके की घेराबंदी कर बम स्क्वॉड को बुला लिया। सुबह जब बम स्क्वॉड पहुंचा तो उन्हें कार के अंदर विस्फोटक मिले। नीले रंग के एक ड्रम में विस्फोटक रखे थे।

बम स्क्वॉड ने विस्फोटक को कार समेत एक खाली जगह पर ले जाकर कंट्रोल्ड ब्लास्ट कर उड़ा दिया।

हिजबुल का आंतकी गाड़ी चला रहा था
सफेद रंग की इस सैंट्रो कार का रजिस्ट्रेशन टू व्हीलर का था और मालिक जम्मू के कठुआ का रहने वाला है। जो आतंकी इस गाड़ी को चला रहा था, उसका नाम आदिल है। वह हिजबुल मुजाहिद्दीन के साथ है। इत्तेफाक की बात ये है कि जिस आतंकी ने पुलवामा में गाड़ी में विस्फोटक भरकर सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, उसका नाम भी आदिल था।  

बुधवार की इस घटना में भी 2019 में पुलवामा में हुए हमले की तर्ज पर विस्फोट को अंजाम देने की साजिश थी। उस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। हमले में विस्फोटक से भरी गाड़ी को जैश का आतंकी आदिल डार चला रहा था।

साजिश में जैश के कमांडर का हाथ
डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक आईईडी बनाने और उसे सैंट्रो कार में प्लांट करने के पीछे पाकिस्तानी आतंकवादी और जैश के कमांडर वलीद का हाथ हो सकता है। खबर है कि आतंकी वलीद कुलगाम में छिपा हुआ है।

इस बार भी सुरक्षा बलों का काफिला निशाने पर था
डीजीपी के मुताबिक कार पर टू व्हीलर का नंबर इसलिए इस्तेमाल किया गया ताकि सुरक्षा बलों को चकमा दिया जा सके। कार हाईवे की ओर जा रही थी और इस कार के जरिए आतंकी सुरक्षा बलों के कॉन्वॉय या फिर डिफेंस इंस्टॉलेशन पर हमला करने वाला था।

कार में करीब 50 किलो विस्फोटक था
जांच के मुताबिक नाईट्रिक सॉल्ट, अमोनियम नाइट्रैट और नाइट्रो ग्लीसरीन का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने के लिए किया गया था। पहले अनुमान लगाया गया था कि कार में 20 से 25 किलो विस्फोटक था, लेकिन जब कार में विस्फोट हुआ तो उसका मलबा उड़कर 50 मीटर ऊपर तक गया। बम डिफ्यूज करने वाले एक्सपर्ट के मुताबिक कार में कम से कम 40 से 50 किलो विस्फोटक रखा था।

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नारकोटिक सैल को दूसरे दिन मिली बड़ी सफलता, 8 किलो हेरोइन और 30 ग्राम अफीम बरामद


  • मंगलवार को 2 किलो 20 ग्राम हेरोइन और 280 ग्राम अफीम बरामद की गई थी
  • नशे की खेप मंगवाने वाले तस्कर को भी पुलिस ने किया गिरफ्तार, पहले भी हैं बॉर्डर क्रॉसिंग और लूटपाट के मामले दर्ज

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:43 PM IST

तरनतारन. तरनतारन नार्कोटिक सैल को गुरुवार को दूसरे दिन बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को जहां 2 किलो हेरोइन और 280 ग्राम अफीम बरामद हुई थी, वहीं आज 8 किलो हेरोइन तो 30 ग्राम अफीम बरामद की गई है। पुलिस ने पाकिस्तान से नशे की खेप मंगवाने वाले नशा तस्कर को भी गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी के खिलाफ पहले भी बॉर्डर क्रॉस करने और लूटपाट के मामले दर्ज हैं।
एसएसपी ध्रुव दहिया ने बताया कि नार्कोटिक सैल ने मंगलवार को 2 किलो 20 ग्राम हेरोइन बरामद की थी। गुरुवार को गुप्त सूचना के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्र खेमकरण के पिलर नंबर 116 के पास पाकिस्तानी तस्करों द्वारा भारत की ओर खेतों में दबवाई हुई प्लास्टिक की 5 बोतलों में 8 किलो 30 ग्राम हेरोइन और 30 ग्राम अफीम बरामद हुई है। इस केस की इन्वेस्टिगेशन कर पाकिस्तान में नशा तस्करों से संपर्क कर हेरोइन की खेप मंगवाने वाले नशा तस्कर गुरलाल सिंह निवासी गांव रत्तागुढ़ा को भी गिरफ्तार किया है। दोनों दिन में बरामद 10 किलो हेरोइन की खेप उसी ने मंगवाई थी। एसएसपी ग्रुप दहिया ने बताया कि पकड़े गे नशा तस्कर गुरलाल सिंह के खिलाफ थाना खेमकरण में 18 जून 2015 में  बॉर्डर क्रॉस करने की कोशिश के दौरान बीएसएफ पर फायरिंग करने के आरोप में केस दर्ज है। दूसरा केस 10 अक्टूबर 2019 को गैस सिलेंडर कटर की मदद से एटीएम लूटने के आरोप में थाना झब्बाल में दर्ज हुआ था। दोनों केसों में पकड़ा गया आरोपी जमानत पर था। अब फिर अदालत में पेश करके रिमांड पर लिया जाएगा।

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सागर में पीपीई किट पहने एंबुलेंस का स्टाफ गश खाकर सड़क पर गिरा, 25 मिनट तक डॉक्टरों ने हाथ नहीं लगाया


  • दोपहर दो बजे 44 डिग्री टेम्परेचर में मरीजों को शिफ्ट कर रहा था एंबुलेंस का स्टाफ
  • पीपीई किट पहने होने की वजह से स्टाफ को हीट स्ट्रोक लगा, झटके आने लगे थे

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:15 PM IST

सागर. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में अपनी जान पर खेलकर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की शिफ्टिंग करने वाले 108 एंबुलेंस के पैरामेडिकल स्टाफ के साथ अमानवीय व्यवहार करने का मामला सामने आया है। यहां भीषण गर्मी में पीपीई किट पहने एंबुलेंस में तैनात पैरामेडिकल कर्मचारी गश खाकर गिर गया। करीब 25 मिनट तक वह जमीन में पड़ा रहा। लेकिन, वहां मौजूद डॉक्टर व स्टाफ उसकी मदद के लिए आगे नहीं आए। 

मामला बुधवार का है। 108 एंबुलेंस में दो कोरोना पॉजिटिव मरीजों को दोपहर 2 बजे टीबी अस्पताल से बीएमसी शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान 44 डिग्री तापमान में बॉडी सूट (पीपीई किट) पहने होने के कारण बीएमसी के गेट पर एंबुलेंस में तैनात स्टाफ हीरालाल प्रजापति गश खाकर जमीन पर गिर गए। भीषण गर्मी के कारण उन्हें झटके आने लगे।
ड्राइवर ने मदद मांगी पर नहीं मिली

इसके बाद एंबुलेंस के ड्राइवर ने वहां मौजूद स्टाफ से उन्हें उठाने और भर्ती करने के लिए मदद मांगी। संक्रमण के डर से वहां मौजूद स्टाफ और डॉक्टर मदद करने की जगह जिला अस्पताल ले जाने की बात कहने लग गए। इस दौरान करीब 25 मिनट तक हीरालाल जमीन पर पड़े रहे। वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें भर्ती करने की कोशिश नहीं की। बाद में एंबुलेंस से ही उन्हें जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया।

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प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा- कोरोना की वैक्सीन बनाने में देश के 30 ग्रुप काम कर रहे, यह बहुत ही जोखिम भरा काम


  • नीति आयोग ने के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने कहा- कोरोनावायरस से जंग वैक्सीन और दवाओं से ही जीती जा सकेगी
  • उन्होंने कहा कि हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही सक्षम है और हमें इन पर भरोसा है

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस पर गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्, इंडियन मेडिकल काउंसिल फॉर रिसर्च (आईसीएमआर) और भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार ने भी हिस्सा लिया। नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने बताया कि कोरोना के खिलाफ हम जंग वैक्सीन और दवाओं से जीतेंगे। हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही मजबूत हैं।

उधर, प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार और प्रोफेसर के. विजय राघवन ने बताया कि हमारे यहां चार तरह से वैक्सीन तैयार हो रही हैं। इनमें एमआरए वैक्सीन: वायरस का जेनेटिक मैटेरियल लेकर इसे तैयार किया जाता है। स्टैंडर्ड वैक्सीन: वायरस का एक कमजोर वर्जन लिया जाता है, यह फैलता है, लेकिन इससे बीमारी नहीं होती। तीसरा: किसी और वैक्सीन में इस वायरस का प्रोटीन डालकर भी वैक्सीन तैयार किया जाता है। इसके साथ ही एक वायरस के स्ट्रीक से भी वैक्सीन तैयार करने की कोशिश हो रही है।

विजय राघवन ने बताया, हमारी वैक्सीन कंपनियां इसके लिए शोध और विकास कार्य में भी लगी हैं। कई स्टार्टअप कंपनियां भी यह काम कर रही हैं। देश में 30 ग्रुप ऐसे हैं, जो वैक्सीन बनाने के लिए आगे आए हैं। यह एक जोखिम भरी प्रक्रिया है। हम इसके लिए वैश्विक स्तर पर हो रहे प्रयास का हिस्सा हैं।

‘पूरी तरह देख रही है कि हम कैसे काम कर रहे हैं’ 
नीति आयोग के स्वास्थ्य सदस्य वीके पॉल ने बताया कि कोरोना के खिलाफ हम जंग वैक्सीन और दवाओं से जीतेंगे। हमारे देश के विज्ञान और तकनीकी संस्थान और फार्मा इंडस्ट्री बहुत ही मजबूत हैं। भारत की फार्मा इंडस्ट्री को फार्मा ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। हमारे देश में बनी दवाएं और वैक्सीन पूरी दुनिया में जाती हैं। पूरी दुनिया यह देख रही है कि किस तरह हम पुरानी दवाओं का इस्तेमाल कर महामारी से बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही हम दवाओं के लिए शोध में भी जुटे हैं। प्रधानमंत्री ने पिछले संबोधन में वैज्ञानिकों और युवाओं से कहा था कि वे दवा और वैक्सीन खोजें। यह देश के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए होगा।

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टि्वटर के सीईओ जैक डोर्सी ने ट्रम्प के आरोपों से इनकार किया, बोले- फैक्ट चेक का काम हमारे कर्मचारियों पर छोड़ दें


  • जैक डोर्सी ने बुधवार को कहा- हम दुनिया भर के चुनावों के बारे में गलत और विवादित जानकारी के बारे में बताते रहेंगे
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा था कि टि्वटर फ्री स्पीच को रोकना चाहता है, मैं ऐसा नहीं होने दूंगा

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 05:11 PM IST

वॉशिंगटन. ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से लगाए गए राष्ट्रपति चुनाव में दखल देने के आरोपों को नकारा है। डोर्सी ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘‘फैक्ट चेक के लिए एक कंपनी के तौर पर आखिर कोई न कोई जिम्मेदार होगा, वो मैं हूं। कृपया हमारे कर्मचारियों पर यह काम छोड़ दीजिए। हम दुनिया भर के चुनावों के बारे में गलत और विवादित जानकारी के बारे में बताते रहेंगे। अगर हमसे कोई गलती होती है तो इसे भी स्वीकार करेंगे।’’

मंगलवार को ट्रम्प ने मेल-इन बैलेट्स पर दिए गए अपने बयान को गलत बताने पर ट्विटर पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि टि्वटर फ्री स्पीच को पूरी तरह से रोकना चाहता है। राष्ट्रपति होने के नाते मैं ऐसा होने नहीं दूंगा।
हमारे लिए यह अहम है कि हम ज्यादा निष्पक्ष रहे: डोर्सी
डोर्सी ने गुरुवार को एक अन्य ट्वीट में कहा कि फैक्ट चेक करने पर हम सच्चाई से किसी प्रकार का समझौता नहीं कर रहे। हमारा इरादा गलत और विवादास्पद बयानों को सामने लाना है। हमारे लिए यह अहम है कि हम ज्यादा निष्पक्ष रहे। लोग खुद यह समझ जाएंगे कि हमने फैक्ट चेकिंग क्यों की है।

 क्यों ट्रम्प के दो ट्वीट्स पर लगे फैक्ट चेक के लेबल?

उन्होंने ट्वीटर की सिविक इंटिग्रिटी पॉलिसी के बारे में बताया। इसी पॉलिसी के मुताबिक,  26 मई को किए गए ट्रम्प के दो ट्वीट्स पर फैक्ट चेक का लेबल लगाया गया था। कंपनी के नियमों के मुताबिक, टि्वटर पर चुनाव के समय और तारीख के बारे में भ्रामक जानकारी नहीं दी जा सकती। 



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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा में दिखे कोरोना के लक्षण, गुड़गांव में करवाया गया भर्ती


  • अभी तक कोरोना की रिपोर्ट नहीं आई, गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में हैं भर्ती
  • खुद भी सर्जन रह चुके हैं संबित पात्रा, बतौर डॉक्टर अस्पताल में सेवाएं भी दे चुके हैं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 04:20 PM IST

गुड़गांव. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा में कोरोना के लक्षण पाए गए हैं। उन्हें गुड़गांव के मेदांता मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हालांकि अभी तक उनकी रिपोर्ट पॉजटिव नहीं आई है। बता दें कि आम से लेकर खास आदमी तक कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। 

संबित पात्रा बीजेपी  के राष्ट्रीय प्रवक्ता होने के साथ ही साथ मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। वे एमबीबीएस के साथ-साथ मास्टर अॉफ सर्जरी (एमएस) भी हैं। 2003 में उन्होंने यूपीएससी की कंबाइंड मेडिकल सर्विस परीक्षा उतीर्ण की थी और हिंदू राव अस्पताल, दिल्ली में बतौर मेडिकल अॉफिसर ज्वाइन किया था। इसके बाद वे भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। संबित पात्रा  मूलतः ओडिशा के रहने वाले है। उन्होंने 2019 में पुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन बीजू जनता दल के उम्मीदवार पिनाकी मिश्र से हार गए थे।

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पंजाब में कोरोना से 47वीं मौत, अमृतसर में भर्ती महिला ने तोड़ा दम


  • अमृतसर में आज हुई कोरोना पॉजिटिव महिला की जिले में 7वीं तो राज्य में 47वीं मौत है, जिले में अब तक संक्रमित मिले कुल मरीजों की संख्या 355 हुई

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 04:11 PM IST

अमृतसर. पंजाब में कोरोना का खौफ कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। पिछले कई दिन से कम केसों के आने की राहत के बाद बुधवार को एक बार फिर संक्रमण विस्फोटक स्थिति पर पहुंच गया, वहीं गुरुवार को राज्य में एक और मौत हो गई। अमृतसर में आज हुई कोरोना पॉजिटिव महिला की जिले में 7वीं तो राज्य में 47वीं मौत है। इसी के साथ अमृतसर में अब तक संक्रमित मिले कुल मरीजों की संख्या 355 हो गई है।

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कोरोना के खौफ के बीच कई वर्ग सरकार से नाराज, लुधियाना में स्कूल बस ड्राइवर्स ने अर्द्धनग्न हो विरोधी नारे लगाए


  • बुधवार के 36 नए मामलों को मिलाकर राज्य में अब तक 2261 लोगों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी, 1997 ठीक हुए
  • तरनतारन में राशन वितरण में पक्षपात का आरोप, पटियाला में पीडब्ल्यूडी फील्ड एंड वर्कशॉप वर्कर यूनियन अब संघर्ष के रास्ते पर

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 04:03 PM IST

पंजाब. पंजाब में कोरोना वायरस का संक्रमण एक बार फिर विस्फोटक रूप लेने लग गया। बीते कई दिन से जहां 10-11 लोगों को संक्रमण की पुष्टि हो रही थी, वहीं बुधवार को फिर से 36 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें सबसे ज्यादा 17 अमृतसर के ही थे। अब राज्य में 2261 लोगों को कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। 1997 ठीक भी हो गए हैं, वहीं राज्यभर में 46 की जान भी चली गई।
दूसरी ओर इन हालात से निपटने के लिए राज्य में देशव्यापी लॉकडाउन का चौथा फेज भी खत्म होने को है। आज 11वां दिन है, जिसकी पाबंदियों के बीच विभिन्न वर्गों में सरकार के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है। चाहे वह राशन वितरण की हो या दूसरी किसी वर्ग की संस्थागत समस्या।

लुधियाना में डीसी ऑफिस के सामने प्रदर्शन करते ट्रांसपोर्टर्स, स्कूल बस ड्राइवर्स और कंडक्टर्स।

लुधियाना में गुरुवार को बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टर्स, स्कूल बस ड्राइवर्स और कंडक्टर्स ने डीसी ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया। अर्द्धनग्न हो सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे इन लोगों ने कहा कि उनके घर का गुजारा नहीं चलता। मांगकर रोटी खाना अच्छा नहीं लगता और ऐसे में आत्महत्या ही एक रास्ता बचा है।
स्कूल बसों के चालकों और कंडक्टरों की मानें तो दो महीने से भी ज्यादा वक्त हो चला, उनका काम बंद है। न तो स्कूलों के मालिकों ने और न ही स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों ने उनकी सुध ली। बसें खड़ी हैं, लेकिन फिर भी उन्हें रोड टैक्स भरना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि सरकार रोड टैक्स माफ करे।

अमृतसर में रिहायशी इलाके में विदेश से लाए गए लोगों को क्वारैंटाइन किए जाने के विरोध में नारे लगाते क्षेत्रवासी।

अमृतसर के वार्ड-40 में एक होटल में विदेश से आए 9 लोगों को क्वारैंटाइन किया गया है। क्षेत्रवासियों ने शिरोमणि अकाली दल दक्षिणी हलके के प्रवासी विंग के प्रधान मोहन कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया है। इनका कहना है कि होटल घनी आबादी में है, जबकि शहर के बाहर विभिन्न होटल, रेस्टोरेंट्स, और पैलेस बने हैं। जिला प्रशासन को बाहर से आए हुए लोगों को वहां पर क्वारैंटाइन करना चाहिए।

गुरदासपुर में विद्यार्थियों के हितों, खासकर लॉकडाउन में फीस के मुद्दे पर रोष प्रदर्शन करती पीएसयू की इकाई।

गुरदासपुर में विद्यार्थियों की मांगों को लेकर पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन का एक शिष्टमंडल डीसी गुरदासपुर से मिला और मुख्यमंत्री पंजाब के नाम पर मांग पत्र सौंपा। यूनियन के नेता मनी भट्टी ने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर एक जुलाई से परीक्षा लेने की तैयारी कर रही हैं। परीक्षाओं की तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का समय कक्षाएं लगाने के लिए दिया जाए। मौजूदा सिलेबस का हिस्सा छोटा किया जाना चाहिए। प्राइवेट कॉलेजों द्वारा ली जा चुकी पूरे साल की फीस में से अगले स्मेस्टर की फीस एडजस्ट की जाए। प्राइवेट स्कूलों द्वारा मांगी जा रही पूरी फीस पंजाब सरकार सरकारी खजाने में से दे।

तरनतारन में राशन वितरण के मसले को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और अन्य।

तरनतारन में घर से निकलने की पाबंदी के बीच लोगों को राशन वितरण प्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। आम आदमी पार्टी बुद्धिजीवी विंग के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कश्मीर सिंह सोहल और कुछ अन्य लोगों ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा गरीब वर्ग के लिए भेजे गए राशन को सही तरीके से बांटने में कैप्टन सरकार नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की करीब 50 फीसदी आबादी लिए 15 किलो गेहूं और तीन किलो दाल भेजी गई थी, लेकिन यह राशन ईमानदारी से नहीं बांटा जा रहा। हर सदस्य को पांच किलो गेहूं व एक किलो दाल दी जा रही है। दो किलो दाल व दस किलो गेहूं चहेतों के घर पहुंचाया जा रहा है।

पठानकोट में सरकार के खिलाफ रोष जाहिर करते पीडब्ल्यूडी फील्ड एंड वर्कशॉप वर्कर यूनियन के सदस्य। इन लोगों ने गुरुवार पटियाला में धरने का ऐलान कर रखा है।

पीडब्ल्यूडी फील्ड एंड वर्कशॉप वर्कर यूनियन अब संघर्ष के रास्ते पर उतर आई है। नोटिस के मुताबिक डिप्टी डायरेक्टर जल सप्लाई सैनिटेशन विभाग मुख्य दफ्तर पटियाला के खिलाफ रोष धरना 28 मई को दिए जाने का आह्वान किया गया था। पंजाब प्रधान दर्शन सिंह, महासचिव मक्खन सिंह, चेयरमैन मनजीत सैनी, जसवीर खोखर, गुरविंदर सिंह, बलवीर सिंह, गुरदीप सिंह बराड़, रजिंदर धीमान, मेघराज आदि ने बताया कि विभाग में लंबे समय से मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी नहीं दी जा रही। कर्मचारियों के मेडिकल बिल, वर्दियां, जीपीएफ और नई पेंशन स्कीम तो पुरानी पेंशन स्कीम में आए कर्मचारियों को सीपीएफ का एरियर अभी तक नहीं दिया जा रहा।

कारोबार को पटरी पर लाने के लिए बैंकों ने कसी कमर, 3.13 प्रतिशत बढ़ाया लोन का टारगेट
बठिंडा जिले में कारोबार को पटरी पर लाने के लिए भरपूर मात्रा में पैसे की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में बैंकों की रणनीति खासी कारगर साबित हो चुकी है। लीड बैंक के सूत्रों के मुताबिक जिले के बैंकों ने लोन टारगेट को पिछले साल की बजाय 3.13 प्रतिशत बढ़ाया है। इसके तहत बीते वर्ष के 11,065 करोड़ रुपए के लोन के मुकाबले इस बार 12,171 करोड़ रुपए कर लिया जाएगा, ऐसी उम्मीद है। हालांकि पिछले दो महीन के लॉकडाउन के कारण बैंकों का लोन देने का काम थोड़ा प्रभावित हुआ है, मगर इसे जल्द पूरा कर लेने की तैयारी की जा रही है।

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एयरपोर्ट पर कॉन्टेक्ट से बचने के लिए मोबाइल एप से करें बोर्डिंग, दुकानों पर नगद देने के बजाए डिजिटल पेमेंट का लें सहारा


  • अगर कैब से जा रहे हैं तो उतरने के बाद सीट और हैंडल को वाइप्स से साफ करने की कोशिश करें
  • स्टडी के मुताबिक, विंडो सीट पर बैठने से मरीजों के संपर्क में आने की संभावनाएं कम हो जाती हैं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:59 PM IST

तरीरो एमजिजेवा. कोरोनावायरस के कहर के बीच देश में हवाई सेवाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बार हवाई यात्रा करने जा रहे यात्रियों के लिए यह अनुभव एकदम अलग होगा। कोरोनावायरस के पहले और अभी के हालातों में काफी फर्क आया है। घर से निकलकल से एयरपोर्ट पहुंचने तक के नियम भी बदल गए हैं। करीब दो महीने बाद प्लेन की सीट पर बैठने जा रहे लोग  यात्रा के हर लेवल पर बदलाव महसूस करेंगे।

एयरपोर्ट पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका?

  • अगर आप किसी के साथ आइसोलेशन में हैं तो कोशिश करें कि वही व्यक्ति आपको अपनी कार से एयरपोर्ट पहुंचाए। याद रखें कि, फिलहाल कैब सर्विसेज शेयरिंग की सुविधा नहीं दे रही हैं इसलिए आपको पहले से ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है। यह काफी विनम्र होगा कि आप कैब की यात्रा के बाद गाड़ी की सीट और हैंडल को वाइप्स से साफ कर दें। हालांकि कंपनियां भी ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स को क्लीनिंग सप्लाई मुहैया कराने की कोशिश कर रही हैं। 

एयरपोर्ट जाने से पहले की तैयारियां?

  • हवाई यात्रा की प्रक्रिया में आप कई सतहों को छूते हैं। सार्वजनिक जगह पर किसी भी चीज को टच करने से बचें। अपने साथ मास्क, वाइप्स और सैनिटाइजर रखें। कुछ एक्सपर्ट्स ग्लव्ज रखने की भी सलाह देते हैं। हालांकि सीडीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक दस्ताने जरूरी नहीं हैं। अधिकांश एयरलाइन सेवाएं बोर्डिंग के दौरान कॉन्टेक्ट से बचने के लिए मोबाइल एप की सुविधाएं देती हैं। 

एयरपोर्ट पर क्या उम्मीद करना चाहिए?

  • एयरपोर्ट पर फ्लोर से लेकर हवा तक की गहन तरीके से सफाई की जा रही है। कई एयरपोर्ट्स अपने यहां हैंड सैनिटाइजर स्टेशन की संख्या में इजाफा कर रहे हैं। कई एयरपोर्ट्स पर दुकानें बंद हो सकती हैं और सभी एयरलाइंस प्लेन में खाना सर्व नहीं कर रही हैं। बेहतर होगा कि आप घर से ही अपना खाना लेकर जाएं। कई जगहों पर कैश का उपयोग नहीं किया जा रहा है इसलिए कॉन्टेक्टलेस पेमेंट की तैयारी रखें।

सिक्युरिटी जांच और चेक इन के वक्त सुरक्षित कैसे रहें?

  • यहां आपकी घर से की गईं तैयारियां काम आएंगी। कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा काम मोबाइल एप की मदद से हो जाए। हैंड सैनिटाइजर साथ रखें और सामान लेन देन के वक्त इस्तेमाल करें। जमीन पर बनाए हुए सेफ्टी मार्कर का ध्यान रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। भीड़ वाली जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग संभव नहीं हो पाती है इसलिए हमेशा मास्क पहनें। अगर आपके पास खाना है तो इसे साफ प्लास्टिक बैग में रखें। इसके अलावा बेल्ट, वॉलेट, चाबियां और फोन को अपने कैरी बैग में रखें। 

बोर्डिंग की भीड़ से कैसे बचें?

  • अपनी एयरलाइन से बोर्डिंग की वर्तमान प्रक्रिया के बारे में जानें। कई एयरलाइन्स लोगों को 10 के समूह में बोर्ड करती हैं। वहीं, कुछ सेवाएं यह प्रक्रिया रो के रूप में करती हैं। अधिकांश एयरलाइन्स गेट पर भीड़ से बचने के लिए कम लोगों को बोर्ड करती हैं और लोगों से अपने बोर्डिंग पास खुद स्कैन करने के लिए कहती हैं। यह नीतियां एयरलाइन्स के हिसाब से बदलती रहती हैं, लेकिन ज्यादातर सेवाएं यात्रियों से बोर्डिंग के वक्त और फ्लाइट में मास्क पहनने के लिए कहती हैं। 

क्या कोई मेरे पास वाली सीट पर बैठेगा?

  • हो सकता है। सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीरों में सीटें भरी हुई नजर आ रही हैं। हालांकि यह सही नहीं है। एयरलाइन्स फॉर अमेरिका कंपनी का कहना है कि, अधिकांश फ्लाइट्स 50 प्रतिशत से कम भरी हुई हैं। कंपनी ने अपने स्टेटमेंट में कहा था कि, एयरलाइन्स डिस्टेंसिंग के लिए कुछ सीटें छोड़ने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन कई मौकों पर बन रहे हालात इसकी अनुमति नहीं दे रहे हैं। जब आपको यह पता हो कि यात्रा के दौरान आपको नहीं उठना है तो विंडो सीट चुनें। क्योंकि विंडो सीट पर बैठने वाले लोग बीमार लोगों के संपर्क में कम आते हैं। 

क्या मुझे सीट को साफ करना जरूरी है?

  • सीट को साफ करना बुरा आइडिया नहीं है, लेकिन एयरलाइन्स का कहना है कि वे प्लेन की गहन सफाई कर रहे हैं। अधिकांश एयरलाइन्स ने कोविड 19 पेज तैयार किया है, जिसमें यह जानकारी होती है कि, वे आपको सुरक्षित रखने के लिए क्या कर रहे हैं। 

क्या मुझे हर वक्त मास्क पहने रहने की जरूरत है?

  • हां, ज्यादातर एयरलाइंस यात्रियों को सफर के दौरान मास्क पहनने के लिए कहती हैं। आपको पता होना चाहिए कि प्लेन में हवा साफ होती है। कमर्शियल प्लेन रिसाइकिल बिन हाई एफिशिएंसी पर्टिकुलेट एयर फिल्टर्स(HEPA) का इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्टेशन के मुताबिक यह फिल्टर्स हवा में तैर रहे 99 प्रतिशत माइक्रोब्स को पकड़ लेते हैं। मास्क को खाते-पीते वक्त ही हटाएं। 
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कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल काम में आने वाले इलास्टोमेरिक्स रेस्पिरेटर्स पहन रहे डॉक्टर्स, कहा- यह एन95 से ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक


  • दुनियाभर में मास्क की कमी के बाद स्वास्थ्य कर्मियों को एक ही मास्क को साफ कर बार-बार पहनना पड़ रहा है
  • आमतौर पर अस्पतालों में एन95 मास्क का उपयोग किया जाता है, इसका उपयोग केवल एक बार कर सकते हैं

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:54 PM IST

क्रिस हैंबी. कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स भी अपनी सेफ्टी को लेकर काफी चिंतित हैं। महामारी फैलने के बाद दुनियाभर में मास्क की सप्लाई में भारी कमी आ गई थी। ऐसे में डॉक्टर्स अब इस दुविधा से उबरने के लिए इंडस्ट्रियल मॉडल्स का सहारा ले रहे हैं। अस्पतालों में उपयोग में आने वाले एन95 की भारी कमी के बाद अब इलास्टोमेरिक्समास्क दिखाई देने लगे हैं। आमतौर पर इनका उपयोग कंस्ट्रक्शन साइट्स और इंडस्ट्रिज में होता है। 

कनेटिकट स्थित येल न्यू हेवन हॉस्पिटल में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर ऐलेन फजार्डो बताती हैं कि, “मुझे लगता है कि इसने हमें संकट से बचाया है।” इससे पहले डॉक्टर फजार्डो भी एन95 मास्क के भरोसे रहने वाले डॉक्टर्स में से एक थीं, लेकिन जैसे ही चीन में वायरस फैलने लगा येल हॉस्पिटल ने करीब 1200 इलास्टोमेरिक्स रेस्पिरेटर्स खरीद कर डॉक्टर्स को दे दिए। 

रिसर्च ने लगाया था मास्क की कमी का अनुमान
करीब एक दशक पहले सरकार की मदद से चल रही रिसर्च ने मास्क की कमी का अनुमान लगाया था। कई फेडरल एजेंसियों ने भी अस्पतालों और नितीनिर्धारकों से इलास्टोमेरिक्समास्क का भंडार करने की अपील की थी। इस मास्क को सालों तक साफ कर के दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। बीते साल शोधकर्ताओं ने पाया था कि, हेल्थ केयर वर्कर्स को तेजी से मास्क को फिट करने और उपयोग करने के लिए तैयार किया जा सकता है। 

अमेरिका में सरकार ने नहीं दिखाई प्रोडक्शन में रुची
अमेरिका में कुछ ही अस्पताल मास्क का उपयोग कर रहे हैं और सरकार ने मास्क के निर्माण और वितरण को बढ़ाने में कोई प्रयास नहीं किए। उसी समय एन95 की कमी के हालात यह हैं कि, उन्हें साफ कर दोबारा उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। 

जैसे-जैसे यह वायरस बढ़ रहा है और मेडिकल सेंटर्स संक्रमण के दूसरी लहर का अनुमान लगा रहे हैं। इलास्टोमेरिक्स का उपयोग करने वाले स्वास्थ्य कर्मी इसकी क्षमता पर घबराहट जता रहे हैं। येल न्यू हेवन्स में इंफेक्शन प्रिवेंशन के मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर रिचर्ड मार्टिनेलो कहते हैं कि, मुझे नहीं लगता हम कुछ ऐसा अनोखा काम कर रहे हैं जो कहीं और लागू करना मुश्किल होगा। 

एक कंपनी ने शुरू किया मास्क का निर्माण
व्यवसायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अधिकारियों के मुताबिक, बंद पड़ीं इंडस्ट्रियल सुविधाओं में उपयोग में नहीं लाए गए इलास्टोमेरिक्स होने की संभावना है। इसके अलावा निर्माण लाइन शुरू कर इन्हें और तेजी से तैयार भी किया जा सकता है। एक मेन्युफेक्टरर एमएसए सेफ्टी ने अतिरिक्त कर्मियों को नियु्क्त कर निर्माण चालू किया है। 

अमेरिकन मेडिकल डिपो के अध्यक्ष अखिल अग्रवाल के अनुसार हम आज जहां सिंगल यूज रेस्पिरेटर्स के दोबारा उपयोग करने वाले हेल्थ वर्कर्स के साथ हैं, यह पागलपन है कि हम अस्पतालों में मल्टिपल यूज इलास्टोमेरिक्स को तैनात नहीं कर पा रहे हैं। इलास्टोमेरिक्स के उपयोग के साथ कई चुनौतियां हैं, जिसमें फिटिंग और क्लीनिंग शामिल है। लेकिन इससे पहले इसे इस्तेमाल करने में जो मुख्य परेशानी सांस्कृतिक और आर्थिक है। 

2003 से 2018 तक वर्कर्स के प्रोटेक्टिव गियर पर फोकस करने वाली सीडीसी लैब की रिसर्च शाखा चलाने वाले डॉक्टर रॉन शैफर बताते हैं कि, हां कुछ सवाल इसकी सफाई को लेकर हैं, लेकिन बुनियादी तौर पर यह प्रोडक्ट इन्हीं चीजों के लिए तैयार किए गए हैं। 

येल न्यू हेवन हॉस्पिटल में कोरोनावायरस मरीज बॉब श्वार्ट्ज से बात करती हुईं डॉक्टर ऐलेन फजार्डो

उपयोग करने वाले कर्मी हैं खुश
अमेरिका के करीब चार प्रमुख हेल्थ सिस्टम में इलास्टोमेरिक्स का प्रयोग किया जा रहा है। इंटरव्यू में कर्मियों ने इस मास्क की पीपीई की कमी को दूर करने के लिए तारीफ की और आभार जताया। बाल्टिमोर स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड मेडिकल सेंटर में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर एंड्रीय लेवीन बताते हैं कि, इससे मुझे सुरक्षा मिलती है और मैं अपना ध्यान जरूरी चीजों पर लगा पाता हूं, जो इस वक्त मरीज की देखभाल करना है। 

एडमिनिस्ट्रेटर्स इस बात पर संदेह जताते हैं कि, कई मेडिकल सेंटर्स को इलास्टोमेरिक्स के बारे में पता नहीं होगा। एन95 की मांग और कमी में इजाफे को देखते हुए एडमिनिस्ट्रेटर्स ने कहा कि इलास्टोमेरिक्स ने एक बचाव दिया है। एलिगेनी हेल्थ नेटवर्क में चीफ मेडिकल ऑपरेशन्स ऑफिसर डॉक्टर श्री चलीकोंडा कहते हैं कि, हमें नहीं पता कि यह महामारी कब तक रहेगी, न ही यह पता कि चक्रिय होगी या नहीं। लेकिन इन मास्क को स्टॉक में रखना और जरूरत पड़ने पर प्राप्त करना हमें सुकून देता है, जैसे हम अपनी किस्मत को खुद कंट्रोल कर रहे हैं। 

तैयारी की ओर एक अच्छा कदम
2009 में आई एच1एन1 महामारी ने अमेरिका में करीब 12 हजार जानें ली थीं। यह डॉक्टर चार्ली लिटिल के लिए बड़ा झटका था। कोलोराडो यूनिवर्सिटी में आपातकालीन तैयारी के बतौर निदेशक उन्होंने एक योजना बनाई। लेकिन जैसे ही फ्लू आया डॉक्टर लिटिल ने देखा कि, अस्पताल में एन95 की सप्लाई की खत्म हो रही है। जब खरीदने की कोशिश की तो यह बहुत थोड़े ही बचे थे। 

एक साल बाद उन्होंने अगली महामारी की तैयारी की। इससे वहीं सप्लाई चेन की परेशानियां होंगी। लेकिन एन95 का स्टॉक करने में अस्पताल के बजट और स्टोरेज एक बड़ा हिस्सा खर्च होगा। इसके अलावा दूसरा ऑप्शन था बैट्री से चलने वाले रेस्पिरेटर्स, जिसका मेंटेनेंस काफी महंगा होता है। इसके बाद तीसरी संभावना इलास्टोमेरिक्स थे। इसके कई मॉडल्स एन95 की तरह ही प्रोटेक्शन देने के लिए सर्टिफाइड थे। इनका उपयोग कई सालों तक किया जा सकता है, इसमें केवल फिल्टर बदलने की जरूरत होती है। एक इलास्टोमेरिक्स सैकड़ों एन95 का काम कर सकता है। 

एक महामारी में 170 करोड़ एन95 मास्क की जरूरत होगी
सीडीसी की स्टडी बताती है कि, एक महमारी के दौरान अमेरिकी मेडिकल और एमरजेंसी रिस्पॉन्स वर्कर को 170 करोड़ एन95 मास्क की जरूरत होगी। शोधकर्ताओं ने पाया है कि, घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए बहुत कम जगह थी और संकट के समय दूसरे देश उन्हें एक्सपोर्ट करना बंद कर सकते हैं। वेटरन्स अफेयर्स विभाग की स्टडी में पता चला है कि, एन95 के स्टॉक करना संभव नहीं है। एजेंसियों ने इलास्टोमेरिक्स समेत अन्य विकल्पों की सलाह दी थी। 

वीए और ओएसएचए के एनालिसिस बताते हैं कि, इलास्टोमेरिक्स का स्टॉक करना कम खर्च का काम है। जबकि सीडीसी के शोधकर्ताओं के अनुसार इनका उपयोग करना सप्लाई डिमांड गेप को कम कर सकता है। 2015 में वीए की स्टडी बताती है कि हेल्थ केयर संगठनों की तैयारी का सबसे अच्छा तरीका है एन95 और इलास्टोमेरिक्स को मिलाकर खरीदना।

संकट के वक्त कारगर है इलास्टोमेरिक्स
नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंस, इंजीनियरिंग और मेडिसिन की एक पैनल ने पाया कि, इलास्टोमेरिक्स रोजमर्रा और संकट के समय प्रभावकारी है। लेकिन इसमें भी सफाई और पहनने को लेकर मार्गदर्शन जैसी कई परेशानियां हैं। 

‘सुरक्षित महसूस होता है’ 
डॉक्टर चकलीकोंडा और उनके साथी दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहे थे। उन्हें एमएसए सेफ्टी के जरिए अपना जवाब मिला। यह कंपनी कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए इलास्टोमेरिक्स समेत दूसरे सेफ्टी गियर तैयार करती है। उन्होंने कहा कि, हमें ऐसी कोई भी स्टडी नहीं मिली जो हमे ऐसा न करने में समर्थन करे। 

अस्पताल पहले से ही कर्मचारियों को एन95 ठीक से पहनने और उपयोग करने की ट्रेनिंग दे रहे थे। सीडीसी फंडेड शोधकर्ताओं ने पाया कि, यही ट्रेनिंग इलास्टोमेरिक्स के साथ भी दी जा सकती है। एलिजेनी जैफर्सन हॉस्पिटल के आईसीयू में नर्स मेडिसन शिल्डर्स के मुताबिक, मैं इसके लिए फिट थी और इसका उपयोग उस दिन मरीजों पर किया। 

इलास्टोमेरिक्स में काम करना आसान होता है
रबर के मास्क कर्मियों की आवाज को धीमा कर सकते हैं, लेकिन नर्सेज और डॉक्टर्स ने कहा कि, इलास्टोमेरिक्स एन95 से ज्यादा आरामदायक थे और उन्हें इसमें ज्यादा सुरक्षित महसूस हुआ। एलिजेनी जनरल हॉस्पिटल में पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर फिजीशियन डॉक्टर टिफनी डुमोंट ने कहा कि, मुझे अब बात करते वक्त मास्क के नाक से फिसलने की चिंता नहीं होती। मुझे इसमें इतना सुरक्षित महसूस होता है कि मैं अपने मरीजों की देखभाल बगैर चिंता किए कर सकती हूं।

स्टडीज ने बताए सफाई के प्रभावी तरीके
सरकार के समर्थन से चल रही स्टडीज ने प्रभावी तरीकों से सफाई करने के तरीके बताए थे। इसके अलावा सीडीसी ने भी अप्रैल में गाइडलाइंस दी थीं। इलास्टोमेरिक्स का इस्तेमाल कर रहे कुछ फ्रंटलाइन वर्कर्स ने कहा कि, वे महामारी के बाद एन95 की तरफ लौटेंगे, लेकिन कुछ ने बताया कि वे लगाततार इनका उपयोग जारी रखेंगे। 

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प्रियंका गांधी का भाजपा पर तंज, कहा- महाराष्ट्र महामारी से जूझ रहा है और एक पार्टी वहां की सरकार गिराने में जुटी


  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गरीबों के खाते में दस हजार रुपए डालने की मांग की
  • उन्होंने कहा- यूपी में मजदूरों और प्रवासियों के लिए 12 हजार बसें कागजों पर चल रहीं, सड़कों पर उतारा नहीं गया

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:29 PM IST

लखनऊ. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने गुरुवार को वीडियो  जारी किया। इसमें भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया है। प्रियंका ने कहा- ‘ये वो दौर है जब सभी राजनीतिक पार्टियों और राजनेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर आगे आना चाहिए और मिलकर काम करना चाहिए। यूपी में आपने (भाजपा) हमारी एक हजार बसों को नकार दिया। कोई बात नहीं। मैंने कहा था कि आप बसों पर अपने बैनर पोस्टर लगा लीजिए। हमें उससे कोई परहेज नहीं था। 12 हजार बसों को चलाने का दावा किया, लेकिन वे सिर्फ कागज पर चल रही हैं। सड़कों पर उतारा ही नहीं। महाराष्ट्र की सरकार को देखिए। वहां महामारी का भयंकर रूप है। लेकिन, आप महाराष्ट्र की सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं। अस्थिर करने में जुटे हैं।”

प्रियंका ने केंद्र सरकार से चार मांग की है। उन्होंने कहा, ‘आज देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता उन लोगों के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं, जो कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दस हजार रुपए हर जरूरतमंद के एकाउंट में डाले जाएं। दूसरी मांग यह है कि अगले छह माह के लिए प्रतिमाह साढ़े सात हजार रुपए हर जरूरतमंद के खाते में भेजा जाए। उन प्रवासियों के लिए जो घरों में पहुंचे हैं, उन्हें मनरेगा के तहत 100 से 200 दिन की मजदूरी बढ़ाई जाए। दो माह से छोटे व्यापारियों के पास कोई उद्योग नहीं है। उनकी मदद के लिए वित्तीय पैकेज दें, जिससे वे कर्जदार न हो सकें। उनके हाथों में पैसे आए, जिससे वे इस मुश्किल दौर में अपना गुजारा कर सकें।

‘देश की जनता दुखी, आप मौन हैं’ 

  • प्रियंका ने कहा, “मैं खास एक आग्रह करना चाहती हूं सभी राजनीतिक पार्टियों से, खासकर भाजपा के नेताओं से। राजनीति बंद करिए, ये राजनीति का समय नहीं है। ये वो दौर है जब सभी राजनेताओं को एकजुट होना चाहिए। अपने राजनीतिक विचाराधारा, मतभेदों को भुलाकर हमें सभी की मदद करनी है। ये सहयोग का समय है।” 
  • उन्होंने कहा, “एक बेटा खुद बैल बनकर बैलगाड़ी में परिवार को बैठाकर चल रहा है। एक बेटी अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर 600 किमी साइकिल चल रही है। श्रमिक ट्रेनों में मजदूरों की लाशें पड़ी हैं। एक बच्चे का दम अपने पिता की गोद में टूट रहा है। एक मां की लाश रेलवे के प्लेटफार्म पर पड़ी है, उसका बच्चा उसे जगाने की कोशिश कर रहा है। एक देश की एक एक मां उस दृश्य को देख रही है। एक एक मां रो रही है, उस दृश्य के साथ उसकी भावनाएं जुड़ी हैं। हमारी भारत माता रो रही है, लेकिन आप मौन हैं।’ 
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4 टेस्ट की सीरीज का शेड्यूल तय, टीम इंडिया विदेश में अपना पहला डे-नाइट टेस्ट मैच एडिलेड में खेलेगी


  • भारतीय टीम दिसंबर-जनवरी में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 4 टेस्ट और 3 वनडे की सीरीज खेलेगी
  • 26 दिसंबर को मेलबर्न में बॉक्सिंग डे और फिर 3 जनवरी को सिडनी में न्यू ईयर टेस्ट खेला जाएगा

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 04:03 PM IST

मेलबर्न. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने भारत के साथ साल के आखिर में होने वाली टेस्ट सीरीज का शेड्यूल तय कर दिया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा शुक्रवार को हो सकती है। क्रिकेट.कॉम.एयू की रिपोर्ट के मुताबिक, पहला मैच 3 दिसंबर को ब्रिस्बेन में खेला जाएगा। इसके बाद भारतीय टीम विदेश में अपना पहला डे-नाइट टेस्ट खेलेगी, जो 11 दिसंबर को एडिलेड में होगा।

भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 4 टेस्ट और 3 वनडे की सीरीज खेलना है। कोरोना के कारण टीम इंडिया के खिलाड़ियों को दौरे पर 14 दिन खुद को आइसोलेशन में रखना होगा, जिसकी बीसीसीआई ने अनुमति दे दी है। हालांकि, वनडे सीरीज के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।

26 दिसंबर को होगा बॉक्सिंग डे टेस्ट

दोनों देशों के बीच 26 दिसंबर को मेलबर्न में बॉक्सिंग डे टेस्ट भी खेला जाएगा। इसके बाद 3 जनवरी को सिडनी में न्यू ईयर टेस्ट खेला जाएगा। दरअसल, क्रिसमस के अगले दिन 26 दिसंबर को होने वाले मैच को बॉक्सिंग डे टेस्ट कहा जाता है। जबकि साल का पहला मैच न्यू ईयर टेस्ट कहलाता है।

4 टेस्ट की सीरीज का शेड्यूल

तारीख स्थान
3-7 दिसंबर ब्रिस्बेन
11-15 दिसंबर एडिलेड
26-30 दिसंबर मेलबर्न
3-7 जनवरी सिडनी

टीम इंडिया अपना दूसरा डे-नाइट टेस्ट खेलेगी
भारतीय टीम एडिलेड में अपना दूसरा और विदेश में पहला डे-नाइट टेस्ट खेलेगी। टीम इंडिया ने अपना पहला डे-नाइट टेस्ट बांग्लादेश के खिलाफ 22 नवंबर 2019 को कोलकाता में खेला था। इस मैच में भारत ने पारी और 46 रन से जीता था।

परिस्थिति पर निर्भर करेगी टेस्ट सीरीज
रिपोर्ट के मुताबिक, सीए ने कहा कि टेस्ट सीरीज के लिए शेड्यूल तय करना जरूरी था। हालांकि, यह सीरीज होगी या नहीं, तब अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में कोरोना की परिस्थिति पर निर्भर करेगा। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि यह सभी टेस्ट एक ही मैदान पर हो सकते हैं, लेकिन अभी ऐसा नहीं है। यह फैसला उसी समय लिया जाएगा, जब परिस्थित नियंत्रण से बाहर होगी।

नवंबर में अफगानिस्तान से एक टेस्ट खेलेगा ऑस्ट्रेलिया
भारत के खिलाफ सीरीज से पहले ऑस्ट्रेलिया अपने क्रिकेट सीजन की शुरुआत अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट मैच से करेगा। यह डे-नाइट टेस्ट 21 नवंबर से पर्थ में खेला जाएगा। दोनों देशों के बीच यह पहला टेस्ट होगा।

पिछली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 हराया था
पिछली बार 2018 के आखिर में भी दोनों देशों के बीच 4 टेस्ट की सीरीज खेली गई थी। तब ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत ने सीरीज में 2-1 से जीत दर्ज की थी। टीम इंडिया की ऑस्ट्रेलिया में यह पहली टेस्ट सीरीज जीत थी। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में अब तक 12 में से 8 सीरीज हारीं और 3 ड्रॉ खेली हैं।

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आज 131 नए पॉजिटिव मिले, 6 की मौत; कोरोना संक्रमण राज्य के सभी 33 जिलों तक पहुंचा


  • कोरोना से अब तक अछूते रहे बूंदी में 23 मई काे मुंबई से लाैटी 22 साल की महिला संक्रमित मिली
  • राजस्थान में कोरोना से अब तक 179 लोगों की मौत हो चुकी है, जयपुर में सबसे ज्यादा 88 की जान गई

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 03:12 PM IST

जयपुर. कोरोना अब राजस्थान के सभी 33 जिलों तक पहुंच गया। आखिरी बचे बूंदी जिले में भी बुधवार रात को पहली संक्रमित मरीज मिली। युवती 23 मई काे मुंबई से लाैटी है। वहीं, गुरुवार को राज्य में 131 नए पॉजिटिव केस मिले। इनमें झालावाड़ में 69, पाली में 13, भरतपुर में 12, कोटा में 8, झुंझुनू और कोटा में 7-7, चूरू और नागौर में 5-5, दौसा में 4 और अजमेर में 1 संक्रमित मिला। इसके बाद कुल संक्रमितों का आंकड़ा 7947 पहुंच गया है।

उधर, संक्रमण से राज्य में 6 लोगों की मौत भी हो गई। इनमें अजमेर, बांसवाड़ा, दौसा, करौली, नागौर में एक-एक मरीज की जान गई। वहीं, दूसरे राज्य से आए एक व्यक्ति की जान भी इलाज के दौरान गई। इसके बाद राज्य में संक्रमण से मौतों का कुल आंकड़ा 179 पर पहुंच गया।

कोरोना अपडेट्स 

  • कोटा: सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग के कोविड वार्ड में भर्ती एक कोरोना संक्रमित महिला की स्थिति से डॉक्टर भी हैरान हैं। यह महिला लगातार 4 रिपोर्ट में पॉजिटिव आ चुकी है, जबकि उसे कोरोना से जुड़ा कोई लक्षण नहीं है। अब उसे यूरीन से जुड़ी एक नई समस्या सामने आ रही हैं, जिसका कोविड से जुड़ी किसी भी गाइडलाइन या रिसर्च में उल्लेख नहीं है। मेडिसिन विभाग की सीनियर प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी शारदा ने बताया कि 35 साल की महिला की पहली रिपोर्ट 10 मई को पॉजिटिव मिली थी। उसने रैंडम सैंपलिंग के लिए टीम को सैंपल दिया था। हालांकि, उसे तब भी कोई लक्षण नहीं था, सिर्फ एक दिन पहले हल्का सिरदर्द जरूर हुआ था। इसके बाद 14, 18 और 22 मई को तीन बार उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव रही।
  • जोधपुर: जोधपुर रेलवे स्टेशन से लगातार प्रवासी अपने-अपने राज्य में पहुंच रहे हैं। इस बीच, बुधवार को रेलवे स्टेशन पर भोजन पैकेट को लेकर लूटमार मच गई। 

यह तस्वीर बुधवार की है। जोधपुर रेलवे स्टेशन पर खाने के पैकेट को लेकर लूटमार मच गई।
  • जयपुर: शहर में 28 अप्रैल से सुपर स्प्रेडर्स (जरूरी सामग्री घर तक पहुंचाने वाले लोग) की सैंपलिंग जारी है। अलग-अलग 240 क्षेत्रों से 10 हजार 106 सैंपल लिए गए। इनमें 91 कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इन सबके संपर्क में आए 1220 लोगों को क्वारैंटाइन किया गया था। इनमें भी 348 लोग पॉजिटिव पाए गए। गनीमत यह रही कि यह सभी लोग पहले ही क्वारैंटाइन कर दिए गए थे।
  • सीकर: सीकर जिले में कोरोना मरीज बढ़ने के साथ ही सैंपल की रफ्तार भी बढ़ गई है। अब तक 10 हजार 135 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें 9 हजार 221 सैंपल सीकर जिले और अन्य सैंपल उन जिलों में लिए गए हैं, जहां सीकर के पॉजिटिव मिले। सैंपल लेने के मामले में सीकर 22 दिन में ही 19वें स्थान से 8वें स्थान पर आ गया है। 22 दिन में सीकर में 8512 सैंपल लिए गए हैं। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने ढाई माह महज 1623 सैंपल लिए थे। 
  • झुंझुनू: झुंझुनू के बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. शुभकरण कालेर ने बताया कि 23 मई को मुंबई से लौटे 47 वर्षीय पॉजिटिव की बुधवार को मौत हो गई। इस संक्रमित को बचपन से ही मिर्गी के दौरे पड़ते थे। बुधवार को अस्पताल में उसे अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा। इलाज के दौरान ही 12.30 बजे उसकी मौत हो गई।

जयपुर के पार्कों में अब रौनक लौटने लगी है। गुरुवार सुबह लोग टहलते और वॉक करते दिखे।

प्रदेश के सभी 33 जिलों तक पहुंचा संक्रमण

  • प्रदेश में संक्रमण के सबसे ज्यादा केस जयपुर में हैं। यहां 1911 (2 इटली के नागरिक) संक्रमित हैं। इसके अलावा जोधपुर में 1358 (इनमें 47 ईरान से आए), उदयपुर में 523, कोटा में 422, डूंगरपुर में 332, नागौर में 421, पाली में 394, अजमेर में 311, झालावाड़ में 204, चित्तौड़गढ़ में 175, भरतपुर में 165, सीकर में 164, टोंक में 163, जालौर में 154, सिरोही में 141, राजसमंद में 135, भीलवाड़ा में 134, झुंझुनूं में 109, बीकानेर में 94, बाड़मेर में 92, चूरू में 90, बांसवाड़ा में 85, जैसलमेर में 82 (इनमें 14 ईरान से आए) मरीज मिले हैं।

  • उधर, दौसा में 50, अलवर में 51, धौलपुर में 45, सवाई माधोपुर में 19, हनुमानगढ़ में 21, प्रतापगढ़ में 13, करौली में 12 कोरोना मरीज मिल चुके हैं। बारां में 8 संक्रमित मिले हैं। श्रीगंगानगर में 5, बूंदी में 1 पॉजिटिव मिला। जोधपुर में बीएसएफ के 50 जवान भी पॉजिटिव मिल चुके हैं। वहीं दूसरे राज्यों से आए 13 लोग पॉजिटिव मिले।
  • राजस्थान में कोरोना से अब तक 179 लोगों की मौत हुई है। इनमें जयपुर में सबसे ज्यादा 88 (जिसमें चार यूपी से) की मौत हुई। इसके अलावा, जोधपुर में 17, कोटा में 16, नागौर और अजमेर में 7-7, पाली में 6, भरतपुर में 5, चित्तौड़गढ़ और सीकर में 4-4, करौली और बीकानेर में 3-3, बांसवाड़ा, जालौर, अलवर और भीलवाड़ा 2-2, दौसा, राजसमंद, उदयपुर, चूरू, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक में 1-1 की मौत हो चुकी है। वहीं दूसरे राज्य से आए चार व्यक्ति की भी मौत हुई है।
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न पैसे थे, न पैदल चलने की हिम्मत; लोगों की मदद से हवाई सफर किया, घर पहुंचकर धरती को प्रणाम किया


  • 180 प्रवासी मजदूरों ने पहली बार हवाई यात्रा की, गुरुवार को मुंबई से रांची पहुंचे
  • मजदूरों ने कहा- लॉकडाउन की मुसीबत के बीच हवाई जहाज से घर जाना एक सपने जैसा

गुप्तेश्वर कुमार

May 28, 2020, 02:58 PM IST

रांची. लॉकडाउन के कारण मुंबई में फंसे झारखंड के 180 मजदूरों के आज 2 सपने पूरे हो गए। एक तो वे इस मुश्किल समय में अपने घर पहुंच गए, दूसरा जीवन में पहली बार हवाई यात्रा करने का मौका मिला। इनके पास घर आने के लिए ट्रेन का टिकट लेने तक के पैसे नहीं थे। पैदल आने की भी हिम्मत नहीं थी, ऐसे में नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु के पूर्व छात्रों ने इन्हें हवाई जहाज में बैठाकर रांची पहुंचाया। एयरपोर्ट पर उतरते ही सबने धरती मां को प्रणाम किया और कहा- अब कमाने बाहर नहीं जाएंगे।

रांची एयरपोर्ट के बाहर फ्लाइट से उतरने के बाद बस में बैठी बच्ची अपने हाथों पर लगी होम क्वारैंटाइन की मुहर दिखाती हुई।

अब अपनी धरती पर आ गया हूं, खुश हूं

चतरा के रहने वाले मो. मुर्शिद अंसारी बताते हैं कि वे लेडीज सूट की कटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन में सब बंद हो गया तो समस्याएं शुरू हो गईं। उन्होंने कहा कि फ्लाइट में तो मैंने जीवन में पहली बार सफर किया। अब अपनी धरती पर आ गया हूं, खुश हूं। वापस नहीं जाऊंगा। यहीं पर कुछ काम करूंगा।

गांव में ही रहेंगे और यहीं पर कुछ करेंगे

चक्रधरपुर निवासी सरगल और देवेंद्र हेंब्रम मुंबई में मजदूरी किया करते थे। लॉकडाउन में समस्या हुई, लेकिन घर वापसी का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। ट्रेन या किसी अन्य वाहन का किराया देने के पैसे भी नहीं थे। वे हैरान है कि उन्हें इसे मश्किल समय में हवाई यात्रा का मौका मिला। सरगल का कहना है कि अब वापस नहीं जाएंगे, गांव में ही रहेंगे और यहीं पर कुछ करेंगे।

सिमडेगा निवासी अफताब अंसारी ने फ्लाइट में पहली बार सेल्फी ली। उन्होंने बताया कि सिलाई का काम करता था, लॉकडाउन में खाने की भी समस्या हो गई।

पहली बार फ्लाइट से सफर किया

हजारीबाग निवासी विनोद दांगी कपड़ा मिल में काम करते थे। लॉकडाउन में काम बंद हो गया और घर से निकलना भी। विनोद ने बताया कि तनख्वाह तक नहीं मिली। सेठ ने पैसे नहीं दिए। बहुत दिक्कत से रह रहा था मुंबई में। खाने को भी नहीं मिल रहा था। पहली बार फ्लाइट से सफर किया, बहुत अच्छा लगा। अब मैं वापस मुंबई नहीं जाऊंगा।  

बस डर था कि कहीं संक्रमण न हो जाए

हजारीबाग के ही रहने वाले जावेद ने बताया कि मुझे वहां रहने और खाने में ज्यादा परेशानी तो नहीं हुई। बस यह डर हमेशा सताता रहता था कि कहीं मुझे संक्रमण न हो जाए। अभी मैं होम क्वारैंटाइन हूं। रेस्ट करूंगा। इसके बाद ही सोचूंगा कि वापस जाना है या नहीं।

एक टाइम खाता था और दाे वक्त भूखा रहता था

गोड्‌डा निवासी रिजवान ने बताया कि मैं वेल्डिंग का काम करते थे। लॉकडाउन में बहुत दिक्कत हुई। उन्होंने बताया कि पैसे खत्म होने के बाद वे मांग कर खाना खा रहे थे। कई बार एक वक्त का खाना मिलता था। अब उनका भी गांव से जाने का विचार नहीं है।

रांची एयरपोर्ट से बाहर निकलने पर हाथों में भारी-भरकम बैग लिए बस की ओर जाती महिला।

किसी तरह गुजारा कर लिया, अब वापस नहीं जाऊंगा

गिरिडीह निवासी प्रदीप यादव मुंबई में ड्राइवर का काम करते थे। उनके साथ उनकी पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे पहली बार फ्लाइट से सफर कर रांची पहुंचे। प्रदीप ने बताया कि लॉकडाउन में बहुत समस्या हुई। किसी तरह गुजारा कर लिया। वहां भी कुछ लाेग सुविधा दे रहे थे, खाना खिलाते थे। अब मैं वापस नहीं जाऊंगा। इधर ही कुछ ना कुछ काम कर गुजारा करूंगा।

घर आने का प्रयास किया तो पुलिस जाने नहीं देती थी

हजारीबाग की रहने वाली रीता देवी भी अपने पूरे परिवार के साथ रांची पहुंचीं। उनके पति मुंबई में टाइल्स का काम करते थे। रीता देवी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान राशन मिल जाता था पर सब्जी नहीं मिलती थी। पुलिस ने बहुत सख्ती कर रखी थी। किसी तरह गुजारा किया। घर आने का प्रयास किया तो पुलिस जाने नहीं देती थी। एक दोस्त ने जानकारी दी फ्लाइट की। इसके बाद हम सभी रांची पहुंच सके। अब वापस नहीं जाना है। यहीं पर काम की तलाश करेंगे।

रांची एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद  मजदूर परिवार के 180 लोग बसों से अपने गृह जिले के लिए रवाना हुए।
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दो दिन पहले तक उत्तराखंड के 71 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में थे, पिछले साल इस वक्त तक यह आंकड़ा डेढ़ हजार हेक्टेयर था


  • आग के चलते दो महिलाओं की मौत भी हो चुकी है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले आग का आंकड़ा अब तक काफी कम है
  • क्यों लगती है जंगल में आग और इससे बचने के लिए कोट मल्ला नाम के गांव के जगत सिंह ‘जंगली’ ने तैयार किया खास मॉडल

राहुल कोटियाल

May 28, 2020, 02:26 PM IST

नई दिल्ली. उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग की कई तस्वीरें और वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इनमें से कुछ तस्वीरें तो हाल के दिनों की ही हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे वीडियो और तस्वीरें शेयर की जा रही हैं जो या तो पुरानी हैं या जिनका उत्तराखंड से कोई संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई अधिकारियों ने लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी है।
उत्तराखंड के जंगलों में लगी की खबरें पूरी तरह झूठी भी नहीं हैं। 25 मई तक राज्य के 71 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं और इसमें दो महिलाओं की मौत भी हो चुकी है। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं, ‘बीते सालों की तुलना में जंगलों में लगी आग का आंकड़ा अब तक काफी कम है। पिछले साल इस वक्त तक लगभग डेढ़ हजार हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके थे। इस साल यह आंकड़ा सिर्फ 71 हेक्टेयर है।’

जंगल में आग को लेकर फेक न्यूज भी फैलती है

उत्तराखंड में हर साल जंगलों में लगने वाली आग में इस साल आई कमी के बारे में पूछने पर वन विभाग के विशेषज्ञ तीन मुख्य कारण बताते हैं। पहला, इस साल हुई भारी वर्षा के चलते जंगलों में नमी ज़्यादा है। अब तक भी पहाड़ के कई इलाकों में बरसात जारी है जो जंगल की आग को नियंत्रित करने का सबसे बड़ा कारण है।

लॉकडाउन के कारण भी आग लगने की घटनाएं कम
दूसरा कारण जो विशेषज्ञ बताते हैं वो है देशभर में हुए लॉकडाउन के चलते मानव गतिविधियों का बेहद सीमित होना। चूंकि, जंगलों में लगने वाली आग के पीछे अधिकतर मानव गतिविधियों का प्रत्यक्ष या परोक्ष हाथ होता है, लिहाजा इस साल लॉकडाउन के चलते जब मानव गतिविधियां सीमित रहीं तो इसका प्रभाव वनाग्नि में आई कमी के रूप में भी देखा गया।

तीसरा कारण बताते हुए वन विभाग के अधिकारी कहते हैं, ‘सतर्कता के चलते भी वनाग्नि की घटनाओं में कमी आई है। गर्मियों की शुरुआत से पहले ही विभाग आग से बचने की तैयारी शुरू कर देता है। साथ ही आग लगने पर विभाग की प्रतिक्रिया भी अब पहले की तुलना में काफी तेज हुई है।

आईएफएस एसोसिएशन का ट्वीटः

जंगलों में हर साल आग क्यों लगती है?

उत्तराखंड में क़रीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। वन अधिकारियों के अनुसार इसमें से 15 से 20 प्रतिशत चीड़ के जंगलों वाला इलाका है। इन्हीं जंगलों में आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। चीड़ की पत्तियां इस आग में घी का काम करती हैं। यह पत्तियां जिन्हें पाईन नीडल भी कहा जाता है, मार्च से गिरना शुरू होती हैं और करीब 15 लाख मीट्रिक टन बायोमास बनकर पूरे जंगल में बिछ जाती है।

इसके दो नुकसान हैं। एक तो यह पत्तियां जहां भी गिरती हैं वहां कोई अन्य पेड़-पौधा नहीं उग पाता। दूसरा, इन पत्तियों में रेजिन होता है जिसके चलते ये बेहद ज्वलनशील होती हैं और हल्की चिंगारी मिलने पर भी भभक कर जलने लगती हैं। हवा के साथ यह आग अनियंत्रित फैलती और देखते ही देखते पूरे जंगल को चपेट में ले लेती है।

पौड़ी गढ़वाल जिले में बुधवार को भी आग लगी थी

आग लगने का यह सिलसिला कैसे शुरू होता है?

विशेषज्ञ मानते हैं जंगल में आग लगने की शुरुआत के पीछे दस में से सात बार किसी इंसान का ही हाथ होता है। जंगल में बारूद की तरह बिछी चीड़ की पत्तियों को पहली चिंगारी इंसान ही किसी न किसी कारण देते हैं। कई बार स्थानीय लोग जान-बूझ कर ऐसा करते हैं ताकि बरसात के बाद उन्हें अपने जानवरों के लिए नई घास मिल सके। कई बार जंगल में फेंकी गई बीड़ी-सिगरेट या खेतों में जलाई जाने वाली अतिरिक्त घास भी उस चिंगारी का काम कर जाती है जिससे पूरा जंगल जलने लगता है।

वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि कई बार यह आग बिजली की तारों से भी पैदा होती है। आंधी आने पर जब जंगलों से गुजरती बिजली की तार आपस में टकराती हैं तो उसने पैदा हुआ स्पार्क भी इस आग का कारण बन जाता है। 

पहले की तुलना में वनाग्नि की घटनाएं क्यों बढ़ी हैं?
उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने का सिलसिला नया नहीं है। यहां सालों से ऐसा होता रहा है। लेकिन पहले की तुलना में आग ज्यादा विकराल होती इसलिए दिख रही हैं क्योंकि लोगों का जंगल से रिश्ता लगातार घट रहा है। वन अधिनियम लागू होने से पहले गांव के लोग जंगल पर सीधे निर्भर होते थे तो इसकी देखभाल भी वे अपनी जिम्मेदारी समझते थे। लेकिन नए कानून के बाद लोगों की हक-हकूक सीमित कर दिए गए, उनकी निर्भरता कम हुई तो यह जिम्मेदारी का सामूहिक एहसास भी घट गया।

उत्तराखंड में बढ़े पलायन को भी वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं के पीछे एक कारण माना जाता है। पहले जब गांव आबाद थे तो गर्मियां शुरू होने से पहले लोग खुद ही सामूहिक रूप से जंगलों की सफाई किया करते थे ताकि उन्हें आग से बचाया जा सके। अब चूंकि पलायन के चलते गांव ही खाली हो गए हैं तो यह जंगल की सफाई करने वाला कोई नहीं है।

हर साल लगने वाली वनाग्नि को रोकने के लिए वन विभाग क्या कर रहा है?
उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश स्तर पर इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल फरवरी महीने में ‘वन अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ मनाया जाता है। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी गांव-गांव में जाकर पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से लोगों को वनाग्नि से बचने के बारे में बताते हैं।

हर साल प्री फायर प्लानिंग होती है
इसके अलावा हर साल गर्मी शुरू होने से पहले प्री-फायर प्लानिंग भी विभाग करता है जिसके तहत फायर लाइन सही की जाती हैं। फायर लाइन यानी जंगलों में ऐसे बफर इलाके बनाना जो आग के फैलते क्रम को तोड़ सकें। ऐसे में आग यदि लगती भी है तो फायर लाइन से आगे नहीं बढ़ पाती। अधिकारी बताते हैं कि वन विभाग हर साल महिला मंगल दल और वन पंचायतों के साथ मिलकर ये काम कर रहा है।

इससे बचने का स्थायी समाधान क्या है?
प्रदेश के रुद्रप्रयाग ज़िले में इस समस्या के समाधान का एक मॉडल तैयार हुआ है। यहां कोट मल्ला नाम का एक गांव है, जहां के रहने वाले जगत सिंह ‘जंगली’ ने वनाग्नि से छुटकारा पाने का कारगर समाधान निकाला है। जगत सिंह ने अपने गांव के पास मिश्रित वन तैयार किया है। इसमें हर तरह के पेड़ होने के चलते मिट्टी में नमी कहीं ज्यादा होती है और चीड़ का मोनोकल्चर को नुकसान करता है, उससे निजात मिल जाती है।

वन विभाग के अधिकारी कहते हैं, ‘मिट्टी में नमी की मात्रा को बढ़ाना एक स्थायी समाधान हो सकता है। ऐसा होने पर मिश्रित वन तैयार हो सकते हैं जहां कभी आग लगने की घटनाएं नहीं होती। इसके अलावा लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी भी बेहद जरूरी है। वन क्षेत्र इतना बड़ा है और विभाग के संसाधन इतने सीमित कि लोगों के सहयोग के बिना वनाग्नि पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है।’



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प्रवासियों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, सरकार ने कहा- अब तक 91 लाख प्रवासियों को उनके घर पहुंचाया


  • इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिया था
  • कोर्ट ने कहा- प्रवासियों के लिए सरकार के इंतजाम नाकाफी

दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 02:14 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन के चलते प्रवासियों को हो रही दिक्कतों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अब तक 91 लाख प्रवासियों को शिफ्ट किया जा चुका है। 80 फीसदी प्रवासी उत्तर प्रदेश और बिहार के हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 28 मई तक जवाब मांगा था
अदालत ने इस मामले में मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मजदूरों की हालत खराब है। उनके लिए सरकार ने जो इंतजाम किए हैं वे नाकाफी हैं। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

अदालत ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकारों को तुरंत प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। प्रवासी मजदूरों की यात्रा, ठहरने की जगह और खाने की व्यवस्था मुफ्त होनी चाहिए। इस काम में एजेंसियों के बीच तालमेल होना चाहिए।

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कार में जब विस्फोट किया तो मलबा उड़कर 50 मीटर ऊपर तक गया, मकानों की खिड़कियां टूट गईं


दैनिक भास्कर

May 28, 2020, 01:32 PM IST

श्रीनगर. सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर पुलवामा जैसे एक हमले की साजिश को नाकाम कर दिया है। यहां के राजपुरा रोड पर शादीपुरा के पास एक सफेद रंग की सेंट्रो कार मिली, जिसमें आईईडी बरामद किया। कार के अंदर ड्रम में एक्सप्लोसिव रखा था। कार का पता चलने के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास का इलाका खाली करा लिया। इसके बाद बम डिस्पोजल स्क्वाड ने कार को उड़ा दिया।

जांच के मुताबिक नाईट्रिक सॉल्ट, अमोनियम नाइट्रैट और नाइट्रो ग्लीसरीन का इस्तेमाल विस्फोटक बनाने के लिए किया गया था। पहले अनुमान लगाया गया था कि कार में 20 से 25 किलो विस्फोटक था, लेकिन जब कार में विस्फोट हुआ तो उसका मलबा उड़कर 50 मीटर ऊपर तक गया। बम डिफ्यूज करने वाले एक्सपर्ट के मुताबिक कार में कम से कम 40 से 50 किलो विस्फोटक रखा था। 

 यह तस्वीर सफेद रंग की उस सेंट्रो कार की है, जिसमें एक्सप्लोसिव ले जाया जा रहा था। इसकी नंबर प्लेट पर स्कूटर का नंबर लिखा था, जो कठुआ जिले में रजिस्टर्ड है।
सेंट्रो कार की पीछे की सीट वाली जगह पर नीले रंग के ड्रम रखे थे, जिसमें विस्फोटक था।

सुरक्षाबलों ने कार में विस्फोट किया तो आसपास के मकानों की खिड़कियां टूट गईं। 
यह उसी कार का मलबा है, जिसे सुरक्षाबलों ने विस्फोट कर उड़ा दिया।